About Ganga river in hindi गंगा नदी के बारे में पूरी जानकारी

गंगा की खोज किसने की थी About Ganga river in hindi गंगा नदी को धरती पर लाने का श्रेय किसको जाता हैं गंगा नदी सबसे पहले धरती पर किस जगह पर अवतरित हुई थी गंगा नदी पर निबंध इसके बारे में इस लेख में पूरी जानकारी मिलेगी.

हिंदू धर्म में मां गंगा का बहुत ही महत्व हैं क्योंकि ऐसा माना जाता हैं किसी भी व्यक्ति का कोई भी पाप हो वह गंगा नदी में स्नान करने के बाद सारे पाप नष्ट हो जाते हैं.

गंगा नदी का पानी कभी भी अशुद्ध नहीं होता हैं इसका प्रमाण कई वैज्ञानिकों ने भी दिया हैं. Ganga नदी के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन उनको धरती पर लाने के लिए किस राजा ने प्रयास किया और गंगा माता धरती पर कब आई गंगा  के बारे में आइए हम लोग नीचे विस्तार से जानते हैं.

गंगा का खोज किसने किया 

वैसे तो गंगा नदी को धरती पर लाने के लिए कई राजाओं ने प्रयास किया लेकिन इस प्रयास में सफल अयोध्या के इक्ष्वाकु वंश के राजा भागीरथ  हुए. जब अपने प्रजा के प्राणों की रक्षा के लिए पानी की कमी को दूर करने के लिए महाराज सागर ने अश्वमेध यज्ञ किया था.

उस अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को स्वर्ग के राजा इंद्र ने चुरा कर ले जाकर की कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया. अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को खोजते हुए राजा सगर के 60 हजार पुत्र जब गए तो उन्होंने घोड़े को कपिल मुनि के आश्रम में बंधा देखकर उन से लड़ाई करने लगे.

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उसके बाद ऋषि कपिल मुनि को बहुत क्रोध आया और उन्होंने सगर के साठ हजार पुत्रों को श्राप देकर उन्हें भस्म कर दिया. यह देखकर महाराज सागर के पुत्र अंशुमन ने उनसे बहुत याचना की कि अपना श्राप वापस ले लीजिए लेकिन कपिल मुनि ने उन्हें इसका उपाय यह बताया कि इनकी राख पर मां Ganga का पानी छिड़क दिया जाएगा तो यह सब ठीक हो जाएंगे.

अंशुमन ने अपने भाइयों के आत्मा की उधार के लिए मां Ganga को धरती पर लाने का बहुत प्रयास किया लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाए उन्हीं के कामों का बीड़ा उनके पुत्र भागीरथ ने उठाया और उन्होंने कड़ी तपस्या करके मां Ganga को धरती पर अवतरित किया.

गंगा धरती पर कैसे आई 

मां गंगा को धरती पर लाने के लिए इक्ष्‍वाकु वंश के राजा भागीरथ ने बहुत ही कठोर तपस्या की थी उन्होंने तपस्या करके ब्रह्मा जी को प्रसन्‍न किया और ब्रह्मा जी से मां Ganga को धरती पर अवतरित करने के लिए प्रार्थना किया.

तब ब्रह्माजी ने भागीरथ से कहा कि Ganga जी का वेग इतना तेज हैं कि धरती उनका सहन नहीं कर सकती हैं इसलिए पहले जाकर मां भारती से पूछो कि वह गंगा जी का वेग सहन कर सकती हैं कि नहीं.

तब भागीरथ ने भगवान शिव का तपस्या करके उन्हें प्रसन्न करके मां Ganga को अपनी जटाओं में स्थान देने के लिए प्रार्थना किया इस तरह जब ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से मां गंगा को धरती पर छोड़ा तो भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समेट लिया.

बाद में जब भागीरथ ने भगवान शिव से प्रार्थना किया तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं से मुक्त करके धरती पर छोड़ दिया.

 गंगा के अवतरण की कहानी 

 जब मां गंगा को ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से धरती के तरफ छोड़ा तो उनका वेग इतना तेज था कि धरती सहन नहीं कर सकती थी इसीलिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में बांध लिया और अपनी जटाओं से जब उन्होंने धरती पर गंगा को जाने का आदेश दिया तो उस समय उनकी जटाओं से 7 धारा में गंगा विभाजित हो गई.

सबसे पहले पति पावनी गंगा गंगोत्री नामक जगह पर आई और वहीं से वह पूरे धरती पर अवतरित हुई. तपस्या करके जब भागीरथ मां गंगा को धरती पर लाया तो गंगोत्री से भागीरथ आगे आगे चलने लगे और मां गंगा उनके पीछे पीछे जाने लगी.

चलते चलते भागीरथ गंगासागर तक गए जहां कि कपिल मुनि का आश्रम था और वहीं पर उनके पूर्वजों राजा सगर के साठ हजार पुत्रों का श्राप से जो राख हो गए थे उनको मुक्त कराने के लिए गंगा मां को लेकर गए.

जब भागीरथ गंगा मां को कपिल मुनि के आश्रम तक ले गए और कपिल मुनि से प्रार्थना किया कि वह गंगा मां का अमृतधारा उनके पूर्वजों पर छिड़क कर उन्हें अपने श्राप से मुक्त कर दें तब कपिल मुनि बहुत ही प्रसन्न हुए और उन्होंने पतित पावनी गंगा के जल को राजा सगर के साठ हजार पुत्रों के राख पर छिड़क दिया और इस तरह वह सभी श्राप से मुक्त हो गए.

भागीरथ कौन थे 

भागीरथ इक्ष्वाकु वंश के राजा राजा सगर के पुत्र अंशुमन के पौत्र थे और राजा दिलीप के पुत्र थे. भागीरथ भगवान राम के 14 पीढ़ी पहले के पूर्वज थे उन्होंने अपने पूर्वजों को कपिल मुनि के श्राप से मुक्त करने के लिए मां गंगा को धरती पर लाने के लिए ब्रह्मा जी का तपस्या किया था उन्हीं के प्रयासों के फलस्वरूप मां गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थी.

वैसे उनसे पहले उनके कई पूर्वजों ने गंगा को धरती पर लाने के लिए बहुत प्रयास किया लेकिन किसी ने भी सफलता नहीं पाई थी महाराज सागर ने भी भारत में कई नदी और जल राशियों का अवतरण किया था इन्हीं के द्वारा उठाए गए वीड़ा को भागीरथ ने पूरा किया.

About Ganga river in hindi

गंगा एक नदी हैं जो कि अन्य सभी नदियों में बहुत ही पवित्र नदी मानी जाती हैं ऐसा कहा जाता हैं कि जो भी पाप होते हैं वह गंगा नदी में जाने से नष्ट हो जाते हैं कई शास्त्रों में बताया गया हैं कि मां गंगा भगवान विष्णु के अंगूठे से उत्पन्न हुई थी इसलिए उन्हें विष्णुपदी कहा जाता हैं.

कुछ शास्त्रों के अनुसार मां गंगा को माता पार्वती की बहन बताया गया हैं. कहा जाता हैं कि उनके पिता पर्वतों के राजा हिमवान और उनकी माता मीना थी. जब गंगा धरती पर ब्रह्मा जी के कमंडल से आने के लिए निकली तो उनको भगवान शिव ने अपनी जटाओं में बांध लिया.

इसलिए उन्हें भगवान शिव की अर्धांगिनी भी कहा जाता हैं आज भी कहा जाता हैं कि भगवान शिव के जटा में मां गंगा वास करती हैं. वैसे ही किसी पुराण में यह भी कहा गया हैं कि मां गंगा का जन्म ब्रह्मा जी के कमंडल में हुआ था

क्‍योंकि ब्रह्मा जी ने विष्णु जी के चरणों को धो कर अपने कमंडल में एकत्र कर लिया था और वही बाद में गंगा नदी हुई.इस तरह शास्त्रों और पुराणों में कई तरह के कथाएं हम लोग मां गंगा के अवतरण और मां गंगा के जन्म के बारे में सुनते हैं.

गंगा कहां से निकली हैं 

धरती पर सबसे पहले मां गंगा का उत्पत्ति दक्षिणी हिमालय के हिस्सों में हुआ था जिसे की गंगोत्री नाम से हम लोग जानते हैं गंगोत्री से ही मां गंगा का उद्गम हुआ था गंगोत्री स्थान उत्तराखंड में स्थित हैं मां गंगा के उत्पत्ति होने की वजह से इस जगह को गंगोत्री नाम से जाना जाता हैं और यहां से भगीरथ के पीछे-पीछे चलते हुए गंगासागर तक गई.

मां गंगा का उद्गम श्रीमुख नामक पर्वत से माना जाता हैं जहां कि गोमुख के आकार का कुंड हैं जब हिमालय से मां गंगा निकली तो उनकी 12 धाराएं धरती पर विभक्त हो गई जिसमें की सबसे ज्यादा प्रसिद्ध मंदाकिनी भागीरथी धौलीगंगा और अलकनंदा मानी जाती हैं.

गंगा का जन्म कब हुआ था 

हर साल गंगा दशहरा के दिन कई लोगों को हम लोग देखते हैं कि गंगा में स्नान करते हैं दान पुण्य करते हैं ऐसा माना जाता हैं कि गंगा दशहरा के दिन मां गंगा का आराधना करने से स्नान करने से व्यक्ति को मुक्ति और मोक्ष मिलता हैं.

मां गंगा का जन्म यानी कि धरती पर अवतरण गंगा दशहरा के दिन ही हुआ था गंगा दशहरा ज्‍येष्‍ठ महीने में शुक्ल दशमी तिथि को हर साल मनाया जाता हैं. ऐसा माना जाता हैं कि गंगा दशहरा के दिन गंगाजल का प्रयोग करने से भी बहुत लाभ मिलता हैं.

गंगा नदी का महत्व

मां गंगा को स्वर्ग में मंदाकिनी के रूप में जाना जाता हैं पृथ्वी पर गंगा के रूप में जानी जाती हैं और पाताल में भगवती नाम से प्रवाहित होती हैं ऐसा पुराणों में बताया गया हैं.

धार्मिक महत्व :-  मां गंगा को ग्रंथों में देवनदी माना गया हैं गंगा नदी को सभी नदियों में पवित्र नदी माना जाता हैं किसी भी धार्मिक कार्य या धार्मिक स्थल पर गंगाजल का उपयोग जरूर किया जाता हैं किसी भी पूजा में पंचामृत बनाने के लिए गंगा जल का उपयोग सबसे जरूरी माना जाता हैं.

यह तो सभी जानते हैं कि गंगाजल में नहाने से कोई भी व्यक्ति पवित्र हो जाता हैं शरीर का जितना भी पवित्रता होता हैं वह नष्ट हो जाता हैं.

गंगा जल में स्नान करने से कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता हैं.गंगा का सबसे महत्व इससे भी बढ़ जाता हैं कि कई ऐसे तीर्थस्थल हैं जो कि गंगा नदी के किनारे हैं बसे हैं जैसे कि बक्सर हरिद्वार वाराणसी आदि.

हिंदू धर्म में माना गया हैं कि मनुष्य के मृत्यु के बाद उसको जला कर के राख को गंगा नदी में प्रवाहित करने से उस व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होता हैं इसीलिए हिन्‍दु धर्म में किसा भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार गंगा नदी के किनारे ही किया जाता हैं.

गंगा नदी का वैज्ञानिक महत्व:- ऐसा कहा जाता हैं कि गंगाजल में बैक्टीरिया को मारने की क्षमता होती हैं गंगा नदी में कई औषधीय गुण भी पाया जाता हैं यह कई वैज्ञानिकों ने भी माना हैं क्योंकि उनका मानना हैं कि जब गंगा नदी हिमालय से धरती पर आती हैं तो कई तरह के खनिज और जड़ी-बूटी उसने मिलकर के गंगाजल में औषधीय गुण उत्पन्न हो जाता हैं.

कई वैज्ञानिकों का मानना हैं कि गंगाजल में वातावरण से ऑक्सीजन सोखने का भी एक अनोखा क्षमता हैं.गंगाजल कितने ही दिनों तक हम लोग अपने घर में रखते हैं लेकिन कभी भी उस में किसी भी तरह का कीड़ा नहीं लग सकता हैं वह जल खराब नहीं हो सकता हैं ऐसा इसलिए कहा जाता हैं क्योंकि यह माना गया हैं कि गंगा जल में बहुत ही मात्रा में गंधक होता हैं

इसीलिए यह जल बहुत दिनों तक रहता हैं लेकिन कई वैज्ञानिकों ने परीक्षण करके यह भी बताया हैं कि गंगाजल में कीटाणुओं को नष्ट करने का भी एक अद्भुत क्षमता हैं गंगाजल से नहाने से या पीने से मलेरिया हैंजा प्लेग जैसे बीमारी से मुक्ति मिल सकता हैं.

सिंचाई के क्षेत्र में :- गंगा नदी का महत्व सिंचाई के क्षेत्र में भी बहुत हैं क्योंकि Ganga river की कई सहायक नदियां हैं जिससे कि लोग सिंचाई करके उपज करते हैं धान गेहूं दाल तिलहन आदि का उपज बढ़ाते हैं.

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सारांश

मां गंगा को धरती पर पापनाशिनी मोक्षदायिनी के रूप में हम लोग जानते हैं माना जाता हैं कि किसी भी तरह का पाप हो वह गंगाजल में जाने से ही नष्ट हो जाता हैं व्यक्ति को मोक्ष मिल जाता हैं किसी भी अपवित्र चीज को अगर गंगाजल से धो दिया जाए तो वह पवित्र हो जाता हैं

इसीलिए मां Ganga के जल को शुद्ध माना जाता हैं किसी भी पूजा पाठ में मां गंगा का जल सबसे जरूरी माना जाता हैं.

इस लेख में गंगा की खोज किसने की गंगा धरती पर कब अवतरित हुई मां गंगा धरती पर कैसे अवतरित हुई about ganga river in hindi इससे जुड़ी सभी जानकारी दी गई हैं आप लोगों को यह जानकारी कैसा लगा कृपया हमें कमेंट करके जरूर बताएं और अपने दोस्त मित्रों को शेयर जरूर करें.

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