Hazari Prasad Dwivedi – हजारी प्रसाद द्विवेदी कौन थे

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी Acharya Hazari Prasad Dwivedi ka jeevan parichay एक निबंधकार उपन्यासकार एवं आलोचक थे आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी  को उनकी रचनाओं के लिए पदम भूषण से भी सम्मानित किया गया था उन्होंने अपने सकारात्मक लेखों से एक अलग पहचान बना ली थी

उनके निबंध कहानी ललित निबंध यह सब  पाठ्य पुस्तकों में भी पढ़ने को मिलती है प्रसाद द्विवेदी जी शिक्षण कार्य से  ही जुड़े रह गए थे द्विवेदी जी को कविता लिखने का कला बाल्यकाल से ही था इसीलिए उन्होंने श्री ब्योमकेश शास्त्री से कला की पढ़ाई की थी

भक्ति काल के कवियों के बारे में उनकी रचनाओं के बारे में उनकी जीवन के बारे में हजारी प्रसाद द्विवेदी को बहुत ही अच्छे से ज्ञान था तो आइए नीचे हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के जीवनी के बारे में उनका जन्‍म कब और कहां हुआ उन्‍होंने शिक्षा कहां  से प्राप्‍त की थी उनकी प्रसिद्ध रचनाएं कौन कौन हैं विस्‍तार से जानते हैं

Acharya Hazari Prasad Dwivedi ka jeevan parichay

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी एक बहुत ही प्रसिद्ध निबंधकार उपन्यासकार समीक्षक और आलोचक थे ।उनके उत्कृष्ट लेखनी के लिए ही पदम विभूषण से सम्मानित किया गया था Acharya हजारी प्रसाद द्विवेदी जी हिंदी , अंग्रेजी, संस्कृत और बांग्ला भाषा के ज्ञानी थे उनकी रचनाएं उच्च कोटि के होते थे

उनकी रचनाओं में  सरसता, गंभीरता, विद्वता आदि होते थे हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का स्वभाव बहुत ही सरल और उनका व्यक्तित्व प्रभावशाली था उन्होंने हिंदी साहित्य के महान कवियों सूरदास कबीरदास तुलसीदास आदि पर आलोचनाएं लिखी हैं।आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने संस्कृत से इंटर की पढ़ाई पूरी की थी

Acharya Hazari Prasad Dwivedi ka jeevan parichay

ज्योतिष और साहित्य से शिक्षा हिंदू विश्वविद्यालय से उन्होंने प्राप्त किया था इसीलिए आचार्य की उपाधि उन्हें प्राप्त हुआ था उनका परिवार ज्योतिष विद्या के लिए हर जगह लोकप्रिय था उनके पिता भी एक बहुत बड़े प्रकांड पंडित थे

इसीलिए द्विवेदी जी ने भी ज्योतिष और साहित्य का पढ़ाई किया था वैसे तो आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी को बांग्ला हिंदी अंग्रेजी आदि भाषाओं का ज्ञान था लेकिन उन्होंने अपनी साहित्यिक रचनाएं ज्यादातर हिंदी भाषा में ही की थी उन्हें आलोक पर्व नाम की रचना के लिए  साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का जन्म 

हजारी प्रसाद द्विवेदी का  जन्म 19 अगस्त 1907 को हुआ था द्विवेदी जी बलिया जिला के आरत दुबे का छपरा  गांव के रहने वाले थे वह एक सरयूपारीण ब्राम्हण कुल के थे। हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के पिता का नाम पंडित अनमोल द्विवेदी था उनकी माता का नाम ज्‍योतिष्‍मती देवी था

उनके पिताजी संस्कृत के बहुत बड़े पंडित थे द्विवेदी जी के माता भी एक प्रसिद्ध पंडित कुुल की थी।आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के बचपन का नाम वैद्यनाथ द्विवेदी रखा गया था लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम बदलकर हजारी प्रसाद द्विवेदी रख लिया था।

नाम आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
बचपन का नाम वैद्यनाथ द्विवेदी
जन्‍म 19 अगस्त 1907
पिता का नाम पंडित अनमोल द्विवेदी था
माता का नाम ज्‍योतिष्‍मती देवी
पत्नि का नाम भगवति देवी
रचनाएं निबंध,आलोचना,उपन्‍यास,निबंध संग्रह
निबंध गतिशील चिंतन ,नाखून क्यों बढ़ते हैं,देवदारू,मेरी जन्मभूमि,वसंत आ गया,घर जोड़ने की माया

वर्षा घनपति से घनश्याम तक

आलोचना सुर साहित्य,कबीर,मध्यकालीन बोध का स्वरूप,नाथ संप्रदाय,कालिदास की ललित योजना, हिंदी साहित्य का आदिकाल, Hindi साहित्य की भूमिका,हिंदी साहित्य उद्भव और विकास,साहित्य का मर्म ,मेघदूत एक पुरानी कहानी

प्राचीन भारत के कलात्मक विनोद

उपन्‍यास बाणभट्ट की आत्मकथा,चारुचंद्र लेख,पुनर्नवा,अनामदास का पोथा
निबंध संग्रह मध्यकालीन धर्म साधना,विचार प्रवाह,कुटज,आलोक पर्व
कहानी आम फिर बौरा गए,शिरीष के फूल,भगवान महाकाल का कुंथानृत्य, महात्मा के महापरायण के बाद, ठाकुर जी की बिठूर,केतु दर्शन,संस्कृतियों का संगम,समालोचक की डाक
पुरस्‍कार सोवियत लैंड पुरस्कार,पदम भूषण पुरस्कार, लखनऊ विश्वविद्यालय से उन्हें डी लिट की उपाधि मिली थी, साहित्य अकादमी पुरस्कार
भाषा शैली गवेषणात्मक शैली,व्यंगात्मक शैली,वर्ण्य विषय,

वर्णनात्मक शैली

मृत्‍यु

अचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की शिक्षा 

हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का शिक्षा शुरुआत में गांव से ही हुआ था 1920 में हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने गांव के नजदीकी ही बसरिकापूर से मिडिल स्कूल की पढ़ाई में फर्स्ट डिवीजन से पास हुए

उसके बाद उनके नजदीक में ही एक गांव था जहां पर संस्कृत का पढ़ाई होता था एक पाराशर ब्रह्मचर्य आश्रम में उन्होंने संस्कृत का पढ़ाई शुरू किया वहां पर कुछ दिनों पढ़ने के बाद 1923 में आगे की पढ़ाई के लिए बनारस चले गए

बनारस जाने के बाद रणवीर संस्कृत पाठशाला कामाख्या से उन्होंने एंट्रेंस एग्जाम देकर फर्स्ट डिवीजन में पास करके काशी हिंदू विश्वविद्यालय में उनका एडमिशन हुआ 1927 में मैट्रिक उन्होंने अच्छे नंबरों से पास किया

उन्हें 1929 में ज्योतिष शास्त्र से पढ़ाई पूरी करके आचार्य की उपाधि उन्हें मिल गया शास्त्रीय और आचार्य में दोनों की पढ़ाई उन्होंने पूरी की और दोनों में फर्स्ट डिवीजन से पास करके आचार्य कहलाने लगे।

उसके बाद उन्होंने वाराणसी से काशी हिंदू विश्वविद्यालय से शास्त्रीय की पढ़ाई पूरी की और उन्होंने आचार्य की उपाधि प्राप्त की । द्विवेदी जी हिंदी भाषा के अलावा अंग्रेजी संस्कृत, पाली,  बंगाली,  पंजाबी, गुजराती आदि भाषाओं के बहुत बड़े विद्वान थे

शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने शांतिनिकेतन में हिंदी के अध्यापक के पद पर नौकरी किया उसके बाद उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्य किया उसके बाद उन्होंने कई विश्वविद्यालयों में प्रोफ़ेसर पद पर काम किया।

हजारी प्रसाद द्विवेदी का विवाह

जब काशी हिंदू विश्वविद्यालय से वह हाई स्कूल की पढ़ाई कर रहे थे उसी दौरान हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का विवाह 20 वर्ष की उम्र में भगवती देवी से हो गया।

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्यिक जीवन 

हजारी प्रसाद द्विवेदी जी ने बहुत ही उच्च कोटि की रचनाएं की है उनकी रचनाओं में निबंध, उपन्यास, आलोचना, कहानी इत्यादि है  कई पत्रिकाओं में भी उन्होंने संपादन किया था उनकी रचनाओं में सरसता गंभीरता विद्वता प्रत्यक्ष दिखाई देता था

उनकी ललित निबंध भी है जिनमें भारतीय संस्कृति के बारे में दर्शाया गया है द्विवेदी जी अपनी पढ़ाई पूरा करके जो शांतिनिकेतन में शिक्षक के पद पर थे तभी उन्होंने रविंद्र नाथ ठाकुर तथा आचार्य क्षितिज मोहन सेन के बारे में अध्ययन किया और उसी के बाद उन्होंने अपनी रचनाएं लिखनी शुरू कर दी।

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान थे उन्हें संस्कृत अपने परिवार से ही प्राप्त हुआ था उनके पिताजी संस्कृत के प्रकांड पंडित थे इसीलिए उन्हें भी संस्कृत का बहुत अच्छे से ज्ञान था

उन्होंने भारतीय हिंदी साहित्य में निबंध और आलोचना के क्षेत्र में अपना स्थान बहुत ऊंचे पद पर कर लिया था उन्हें एक उच्च कोटि के निबंधकार और सफल आलोचक माना जाता है।

हजारी प्रसाद द्विवेदी का व्यक्तित्व

भारतीय हिंदी साहित्य में एक श्रेष्ठ निबंधकार उपन्यासकार आलोचक एक संस्कृत के प्रकांड पंडित आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी थे जिन्हें हिंदी संस्कृत भाषाओं का बहुत ज्ञान था उनका व्यक्तित्व बहुत ही प्रभावशाली था

जो भी व्यक्ति एक बार द्विवेदी जी से मिलता था तो उनसे बहुत प्रभावित हो जाता था हजारी प्रसाद द्विवेदी का स्वभाव बहुत ही सरल और उदार था किसी भी व्यक्ति से बड़े ही आदर सम्मान से मिलते थे किसी से भी मिलने के बाद उस व्यक्ति पर अपना छाप छोड़ जाते थे

वह एक संस्कृत के प्रकांड पंडित थे संस्कृत से इंटर किए थे इसीलिए उन्हें आचार्य की उपाधि मिली थी उनके अनमोल रचनाओं के लिए कई पुरस्कार भी मिले साहित्य अकादमी पुरस्कार पद्म भूषण उत्तर प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी का अध्यक्ष भी उन्हें चुना गया था

1972 में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान उपाध्यक्ष पद के भी रहे। लेखन शास्त्रीय और ज्योतिष यह सारी ज्ञान तो उन्हें विरासत में अपने परिवार से ही मिला था यह तो उनके खून में ही था क्योंकि उनके पिताजी भी संस्कृत के बहुत बड़े प्रकांड पंडित थे

हजारी प्रसाद द्विवेदी कि जो भी रचनाएं हैं वह अधिकतर हिंदी साहित्य पर ही लिखा गया है उन्होंने कई उपन्यास और निबंध लिखे हैं जो की बहुत ही प्रचलित हुए हैं बचपन से ही कविता लिखने की कला उन्हें आती थी

इसीलिए श्री ब्योमकेश शास्त्री से उन्हें लिखने की काला का भी पढ़ाई करवाया गया था हजारी प्रसाद द्विवेदी जी 8 नवंबर 1930 में जो शांति निकेतन गए थे वहां पर उनका मुलाकात रविंद्र नाथ टैगोर से हुआ

रवींद्रनाथ टैगोर के बातों से उनके स्वभाव से द्विवेदी जी बहुत प्रभावित हुए बहुत खुश हुए और वहीं पर रविंद्र नाथ टैगोर ने उन्हें एक टीचर के रूप में शांतिनिकेतन में अपने सहयोगी के रुप में रख लिया

और द्विवेदी जी शांतिनिकेतन में सेवा भाव करने लगे द्विवेदी जी का हाव-भाव बोलचाल उनका आचरण बहुत ही मनमोहक था वह बहुत ही सरल और सुलझे हुए व्यक्ति थे उनकी बातों से उनके विचार से कोई भी प्रभावित हो जाता था

1973 में उन्हें अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया यह सम्मान उन्हें महान निबंध संग्रह लिखने के लिए दिया गया था द्विवेदी जी भक्ति काल के कवियों के बारे में या भक्ति काल के साहित्य के बारे में बहुत अच्छे से अध्ययन किए थे

इसीलिए उन्हें हिंदी साहित्य की ज्यादा ज्ञान था हिंदी संस्कृत के तो प्रकांड पंडित थे लेकिन जब वह शांतिनिकेतन में रविंद्र नाथ टैगोर के साथ शिक्षक के रूप में रहने लगे तो वहां पर उन्हें उन्होंने बांग्ला भाषा का भी ज्ञान प्राप्त कर लिया और बांग्ला में भी कई लेख लिखे थे।

हजारी प्रसाद द्विवेदी की भाषा शैली

हर लेखक कवि साहित्यकार निबंधकार की लिखने की एक अपनी भाषा शैली होती है वह जो भी रचना करते हैं जो भी लेख कविता निबंध नाटक उपन्यास लिखते हैं उसमें उनका एक भाषा शैली प्रधान होता है

उसी के अनुरूप वह अपना रचना करते हैं तो हजारी प्रसाद द्विवेदी जी जो भी रचनाएं करते थे उनमें भाषा शैली एक बहुत ही सरल और मनमोहक रहता था इनकी जो भी रचनाएं होती थी उसे लोग बहुत पसंद करते हैं उसको और ज्यादा पढ़ने का मन करता है

लोग पढ़ने लगते हैं तो छोड़ने का इच्छा नहीं करता हैं उन्होंने कई भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया था हिंदी संस्कृत बांग्ला और अंग्रेजी भाषा का भी उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया और अंग्रेजी में भी कई लेख लिखे हैं

हजारी प्रसाद द्विवेदी जी की रचनाओं में कई कवियों के बारे में आलोचना पढ़ने को मिलता है उन्होंने जो रोज बोली जाने वाली भाषा है जो हमेशा भाषा इस्तेमाल किया जाता है

शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली उसी का उन्होंने अपनी रचनाओं में प्रयोग किया है।आलोक पर्व नाम का निबंध जो कि बहुत ही प्रसिद्ध हुआ उसके लिए हजारी प्रसाद द्विवेदी जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था

हजारी प्रसाद द्विवेदी जी की रचनाओं की भाषा बहुत ही प्रभाव पूर्ण उसमें वाक्य लंबे लंबे होते थे और छोटी-छोटी रचनाएं भी जब पढ़ा जाता था तो ऐसा लगता था कि कोई काव्‍य पढ़ा जा रहा है।

द्विवेदी जी ने अपनी रचनाओं में हास्य व्यंग मुहावरे कहावतें आदि का प्रयोग करके अपनी रचनाओं का मोल और बढ़ा देते थे उनकी रचनाओं में गद्य शैली का भी झलक मिलता है विवेचनात्मक शैली भी उनकी रचनाओं में होती थी उनकी रचनाओं में उनकी काव्य में जो सबसे ज्यादा भाषा और शैली प्रयोग होता था वह है

  • गवेषणात्मक शैली
  • व्यंगात्मक शैली
  • वर्ण्य विषय
  • वर्णनात्मक शैली

Hazari Prasad Dwivedi ki rachna

हजारी प्रसाद द्विवेदी एक सफल उपन्यासकार, निबंधकार, आलोचना कार, थे उनका व्‍यक्तित्‍व बहुत ही प्रभावशाली था और  द्विवेदी जी का स्वभाव उदार और सरल था

उन्होंने बहुत सारी रचनाएं की जिनमें निबंध आलोचना ललित निबंध उपन्यास कहानियां ग्रंथ संपादन आदि है आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी को हिंदी संस्कृत गुजराती पंजाबी पाली  आदि भाषाओं का ज्ञान था उनकी पहचान एक निबंधकार के रूप में होता है उनकी प्रमुख रचनाएं है

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी  का उपन्यास

  • बाणभट्ट की आत्मकथा
  • चारुचंद्र लेख
  • पुनर्नवा
  • अनामदास का पोथा

निबंध संग्रह

  • मध्यकालीन धर्म साधना
  • विचार प्रवाह
  • कुटज
  • आलोक पर्व

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का निबंध 

  • अशोक के फूल
  • कल्प लता
  • विचार और वितर्क
  • कुटज
  • आलोक पर्व
  • गतिशील चिंतन
  • नाखून क्यों बढ़ते हैं
  • देवदारू
  • मेरी जन्मभूमि
  • वसंत आ गया
  • घर जोड़ने की माया
  • वर्षा घनपति से घनश्याम तक

हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का आलोचना

  • सुर साहित्य
  • कबीर
  • मध्यकालीन बोध का स्वरूप
  • नाथ संप्रदाय
  • कालिदास की ललित योजना
  •  हिंदी साहित्य का आदिकाल
  •  Hindi साहित्य की भूमिका
  • हिंदी साहित्य उद्भव और विकास
  • साहित्य का मर्म
  • मेघदूत एक पुरानी कहानी
  • प्राचीन भारत के कलात्मक विनोद
  • मध्यकालीन बोध का स्वरूप
  • मृत्युंजय रविंद्र
  • सहज साधना
  • साहित्य सहचर
  • ललित्य तत्व

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का ग्रंथों का संपादन

  • संदेश रासक
  • पृथ्वीराज रासो
  • नाथ सिद्धो के बनिया

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का कहानियां 

  • आम फिर बौरा गए
  • शिरीष के फूल
  • भगवान महाकाल का कुंथानृत्य
  •  महात्मा के महापरायण के बाद
  •  ठाकुर जी की बिठूर
  • केतु दर्शन
  • संस्कृतियों का संगम
  • समालोचक की डाक आदि

Hazari Prasad

हजारी प्रसाद द्विवेदी को उनके महान रचनाओं के लिए कई सारे सम्मान और पुरस्कार भी मिले थे उनकी रचनाएं  उच्च कोटि की थी इन्‍हीं सब रचनाओं के लिए उन्हें कुछ पुरस्कार और सम्मान मिले थे जैसे कि

  • सोवियत लैंड पुरस्कार,
  • पदम भूषण पुरस्कार,
  • लखनऊ विश्वविद्यालय से उन्हें डी लिट की उपाधि मिली थी

हजारी प्रसाद द्विवेदी जी ने भारतीय हिंदी साहित्य में अपनी एक अलग छवि बना ली थी उन्होंने अपनी रचनाओं में खड़ी बोली का उपयोग बहुत अच्छे से किया था इसीलिए उन्हें खड़ी बोली का सबसे श्रेष्ठ लेखक माना जाता है

उन्होंने अपनी रचनाओं में  बहुत सारी शैलीयो का प्रयोग किया था जैसे कि गवेषणाआत्मक शैली, आलोचनात्मक शैली,भावनात्मक शैली,हास्य व्यंग आत्मक शैली, उद्धरण शैली, इत्यादि उन्होंने अपनी रचनाओं में उर्दू फारसी अंग्रेजी इत्यादि भाषाओं का भी प्रयोग किया है।

आचार्य हजारी  प्रसाद द्विवेदी की मृत्यु

हजारी प्रसाद द्विवेदी जी एक प्रसिद्ध उपन्यासकार निबंधकार कहानीकार इत्यादि थे उनकी रचनाएं खड़ी बोली में अधिकतर होती थी और उनकी भाषा  शुद्ध होता था उन्होंने अपनी रचनाओं में बहुत सारी शैलियों का भी प्रयोग किया था

उन्होंने बहुत सारी रचनाएं की और उन रचनाओं के लिए उन्हें बहुत सारे सम्मान और पुरस्कार भी दिए गए पढ़ाई के बाद  से उन्होंने शिक्षण कार्य से  जुड़े रह गये। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की मृत्यु 19 मई 1979 में हुआ था उनकी मृत्यु के बाद  हिंदी साहित्य में उनकी कमी हमेशा रहेगी।

सारांश 

इस लेख में आधुनिक काल के कवि साहित्यकार उपन्यासकार निबंधकार आलोचनाकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के जीवन परिचय के बारे में उनके व्यक्तित्व के बारे में उनकी रचनाओं के बारे में उनका मृत्यु कब हुआ

उनके माता पिता कौन थे के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। इस लेख में हमने अचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की है आप लोगों की जानकारी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं और शेयर भी जरूर करेंं।

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