Bankim Chandra Chatterjee – बंकिम चंद्र चटर्जी कौन थें

भारतीय स्वाधीनता संग्राम में वंदे मातरम एक नारा और गीत की तरह लिया गया लेकिन यही वंदे मातरम अब सिर्फ नारा या गीत नहीं रहकर बल्कि हमारे देश का एक राष्ट्रीय गीत हो गया 1874 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय Bankim Chandra Chatterjee in hindi language ने वंदे मातरम गीत की रचना की।

जोकि उस समय से लेकर अभी तक और आगे भी हमारे देश का एक राष्ट्रीय गीत बन गया  बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय एक महान लेखक का कवि और उपन्यासकार थे जिन्होंने भारत देश का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम लिखा था

बंकिम चंद्र चटर्जी के बारे में हम लोग इस लेख में जानेंगे कि बंकिम चंद्र चटर्जी कौन थे बंकिम चंद्र चटर्जी का कहां जन्म हुआ था उन्होंने कौन-कौन सी रचना की ।भारतीय स्वतंत्रता संग्राम कई वर्षों तक चला था भारत को आजाद कराने में कई स्वतंत्रता सेनानी ने अपनी जान गवा दी।

कई क्रांतिकारी जेल में जीवन बिताएं इसके साथ ही स्वतंत्रता संग्राम में कई कवि लेखक साहित्यकार आदि भी सक्रिय रूप से अपना योगदान दिए हैं तो आइए हम लोग इस लेख में वंदे मातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय उर्फ बंकिम चंद्र चटर्जी के बारे में जानते हैं।

Bankim Chandra Chatterjee in hindi 

बंकिम चंद्र चटर्जी 19वीं शताब्दी के बंगाल के एक महान कवि और उपन्यासकार थे वह प्रकांड विद्वान भी थे भारत देश का सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का रचना भी बंकिम चंद्र चटर्जी ने ही किया था उन्होंने वंदे मातरम की रचना 1874 में अपने प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में किया था आनंदमठ बंकिम चंद्र चटर्जी सबसे प्रसिद्ध उपन्यास हैं।

Bankim Chandra चटर्जी उपन्यास लिखने में बहुत ही माहिर थे उन्होंने बहुत सारे उपन्यास कहानी कविता आदि की रचना की है वह संस्कृत साहित्य में बहुत रुचि रखते थे उनकी कविताएं उस समय के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत के रूप में था

Bankim Chandra Chatterjee in hindi language

वह सबसे ज्यादा प्रचलित वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत  से हुए थे। उन्होंने यह राष्ट्रीय गीत आनंदमठ उपन्यास में लिखा था जिसे बाद में भारत का राष्ट्रीय गीत के रूप में गाय जाने लगा।

बंकिम चंद्र चटर्जी का जन्म 

Bankim Chandra चटर्जी बंगाल के महान कवि और उपन्यासकार थे उनका जन्म 27 जुन 1838 को हुआ था वह बंगाल के 24 परगना जिले के कंठनपारा नाम गांव के रहने वाले थे इनका जन्म एक बंगाली परिवार में हुआ था बंकिम चंद्र चटर्जी के एक उच्च ब्राम्हण परिवार में जन्म लिए थे उनके पिताजी का नाम यादव चंद्र चट्टोपाध्याय था और उनकी माता के नाम दुर्गादेवी था।इनके पिता सरकारी नौकरी में थे।

नाम बंकिम चंद्र चटर्जी
बचपन का नाम बंकिम चंद्र चट्टोपध्‍याय
जन्‍म 27 जुन 1838
जन्‍म स्‍थान बंगाल के 24 परगना जिले के कंठनपारा
पिता का नाम यादव चंद्र चट्टोपाध्याय
माता का नाम दुर्गादेवी
पत्नि का नाम राजलक्ष्मी
बच्‍चे तीन बेटियां
पेशा डिप्‍टी मजिस्‍ट्रेट
कार्य कवि और उपन्यासकार
रचयिता राष्‍ट्रीय गीत वंदे मातरम्
प्रसिद्ध उपन्‍यास  कपाल कुंडला,मृणालिनी,कृष्णकांत का वसीयतनामा, रजनी,चंद्रशेखर,आनंदमठ,दुर्गेशनंदिनी,

इंदिरा,युग लांगुरिया,राधा रानी,कृष्णकान्तेर उइल

राज सिंह,देवी चौधुरानी,सीताराम

मृत्‍यु 8 अप्रैल 1894

बंकिम चंद्र चटर्जी के शिक्षा  

चटर्जी का प्रारंभिक शिक्षा मीदनापुर कॉलेजिएट से हुआ था फिर उन्होंने हुगली मोहसिन कॉलेज  से आगे की पढ़ाई की और बाद में प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता से कला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की बाद में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से लॅा की डिग्री प्राप्त की। बंकिम चंद्र चटर्जी संस्कृत में बहुत ही रुचि रखते थे।बंकिम चंद्र चटर्जी को इंग्लिश भाषा पसंद नहीं था

क्योंकि एक बार जब वह स्कूल में पढ़ रहे थे तो उनके टीचर इंग्लिश पढ़ने के लिए बोले लेकिन जब उन्‍हें इंग्लिश पढ़ना नहीं आया तो उनके टीचर ने उनका पिटाई किया इसीलिए बंकिम चंद्र चटर्जी को इंग्लिश भाषा से घृणा हो गया था बंकिम चंद्र चटर्जी को संस्कृत भाषा ज्यादा पसंद था

और उसमें उन्हें रुचि भी था पढ़ाई के साथ साथ खेलकूद में भी बंकिम चंद्र चटर्जी आगे रहते थे और अपने स्कूल में हर छात्र में एक मेहनती और तेज तर्रार छात्र के रूप में पहचाने जाते थे बंकिम चंद्र चटर्जी के भाई भी एक प्रसिद्ध उपन्यासकार और लेखक थे उनके भाई ने पलामू नाम की एक प्रसिद्ध रचना लिखी थी।

बंकिम चंद्र चटर्जी का विवाह

Bankim Chandra चटर्जी का विवाह 11 साल की उम्र में ही हो गई थी उस समय उनकी पत्नी का उम्र 5 साल था 11 साल बाद उनकी पत्नी का मृत्यु हो गया फिर उन्होंने पुनर्विवाह किया दूसरा विवाह उन्होंने राजलक्ष्मी नामक लड़की से किया उनसे उन्हें तीन बेटियां हुई थीं।

बंकिम चंद्र चटर्जी का व्यक्तित्व

ब्रिटिश शासन में नौकरी करते हुए विदेशी सरकार की सेवा करते हुए बंकिम चंद्र चटर्जी ने अपने देश के प्रति स्वतंत्रता सेनानियों के दिलों में राष्ट्र की भावना बनाए रखा  बंकिम चंद्र चटर्जी ने भले ही विदेशी सरकार में नौकरी की थी

लेकिन उनका हृदय हमेशा भारत के लिए धड़कता था हमेशा भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए वह स्वतंत्रता स्वाधीनता संग्राम में हिस्सा लेना चाहते थे इसीलिए उन्होंने कलम का रास्ता चुना

अपनी रचनाओं से आंदोलनकारियों क्रांतिकारियों को बढ़ावा देते थे बंकिम चंद्र चटर्जी को बांग्ला साहित्य के राष्ट्रीयता के जनक के रूप में भी जाना जाता है यहां तक कि रविंद्रनाथ टैगोर भी बंकिम चंद्र चटर्जी को अपना गुरु मानते थे

बंकिम चंद्र चटर्जी एक सच्चे देशभक्त भारतीय साहित्य सेवी लेखक कवि उपन्यासकार थे जिन्होंने भारत देश को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की रचना की।

बंकिम चंद्र चटर्जी का कैरियर

1858 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने अपने पिता के कहने पर डिप्‍टी मजिस्ट्रेट के पद पर कार्य करने लगे लेकिन 1857 में जो भारतीय स्वतंत्रता के लिए आंदोलन हुआ था

उसमें ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन भारत पर होने की वजह से बंकिम चंद्र चटर्जी सरकारी नौकरी में रहते हुए सार्वजनिक जो स्वाधीनता आंदोलन चला था उस में भाग नहीं ले सकते थे इसीलिए उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए साहित्य को माध्यम बनाया

उन्होंने आनंदमठ जैसी महान रचना लिखकर के स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों का प्रोत्साहन बढ़ाया ताकत बढ़ाए जिसके बाद बंकिम चंद्र चटर्जी आधुनिक बंगाली साहित्य के प्रवर्तक के रूप में पहचाने जाने लगे उन्होंने उपन्यास के साथ कई कविताएं लिखी 1865 में सबसे पहली रचना दुर्गेशनंदिनी बांग्ला में उनकी प्रकाशित हुई थी

जिसके बाद उन्होंने कई महान रचनाएं कि जैसे कि कपालकुंडला, मृणालिनी, विषवृक्ष, चंद्रशेखर, रजनी,राजसिंह, देवी चौधुरानी आदि 1870 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने वंगदर्शन नाम का मासिक पत्रिका का प्रकाशन किया।

1882 में आनंदमठ जैसे प्रसिद्ध उपन्यास उन्होंने रचना किया इस उपन्यास में बंकिम चंद्र चटर्जी ने भारतीय मुसलमानों और सन्यासी ब्राम्हण सेना का वर्णन किया है जो कि ईस्ट इंडिया कंपनी में वेतन के लिए लड़ाई लड़ते हैं उन्होंने इस उपन्यास के माध्यम से हिंदू और मुसलमान के एकता को दर्शाया है।

बंकिम चंद्र चटर्जी का साहित्यिक जीवन 

चटर्जी के प्रसिद्ध उपन्यासकार कवि और प्रकांड विद्वान थे उन्होंने आनंदमठ उपन्यास लिख कर अपना नाम अमर कर लिया और उससे भी ज्यादा प्रसिद्धि उनको भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम से मिला है वंदे मातरम 1974 में उन्होंने लिखा और तब से आज तक किसी भी राष्ट्रीय फंक्शन में वंदे मातरम गीत जरूर गाया जाता है ।

वंदे मातरम को सबसे पहले 1896 में कोलकाता के कांग्रेस के एक अधिवेशन में गाया गया था आनंद मठ में उत्तर बंगाल के सन्यासी विद्रोह का विस्तार से वर्णन है यह एक देश भक्ति उपन्यास है उन्होंने बहुत सारे उपन्यास लिखें उनका सबसे पहला उपन्यास दुर्गेश नंदिनी था

बंकिम चंद्र चटर्जी ने पढ़ाई पूरी करने के बाद सबसे पहले एक पत्रिका में संपादन शुरू किया वह एक सप्ताहिक समाचार पत्र था जिसका नाम संगवा प्रभाकर था उन्होंने अपने आदर्श ईश्वर चंद्र गुप्ता जी के साथ यह काम शुरू किया था उसके बाद उन्होंने कविता लिखना शुरू कर दिया उस के बाद बंकिम चंद्र चटर्जी ने कविता कहानी उपन्यास कथा लिखना शुरू कर दिया था ।

जब 1857 की लड़ाई में बंकिम चंद्र चटर्जी खुलकर अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन का हिस्सा नहीं बन सके तो उनके अंदर एक अलग तरह का आक्रोश रोष और ज्वाला भड़क रही थी

इसलिए उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा बनने के लिए अपनी कलम का रास्ता निकाला वंदे मातरम बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था लेकिन इसको संगीत रविंद्र नाथ टैगोर ने दिया था 1906 बंकिम चंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम नाम के एक देश भक्ति पत्रिका भी शुरू किया था।

Bankim Chandra Chatterjee life in hindi 

1857 की लड़ाई के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के हार हुई और भारत देश का शासन विक्टोरिया रानी के हाथ में आ गया उसके बाद ही बंकिम चंद्र चटर्जी के अंदर क्रांति की भावना जागृत हो गए उस समय वह सरकारी नौकरी करते थे

इसलिए उन्होंने अंदर ही अंदर आंदोलन को दबाये रखा। लेकिन उनका यह आक्रोश उनकी कविताओं में दिखने लगा उनके उपन्यास और तथा कहानियों में दिखने लगा था।

उन्होंने चंद्रशेखर नाम का उपन्यास लिखा यह उपन्यास एकदम अलग था वह अपने कहानियों से अपने उपन्यासों से लोगों में क्रांति फैलाने लगे आनंदमठ उपन्यास भी एक राजनीतिक उपन्यास है इसमें में हिंदू और ब्रिटिश राज्य के बारे में कहानी हैं। 1898  में नौकरी से सेवानिवृत्त हो गए उन्‍होंने नौकरी छोड़ दी।

बंकिम चंद्र चटर्जी की रचनाएं

बंकिम चंद्र चटर्जी बांग्ला के एक बहुत ही बड़े कवि उपन्यासकार लेखक और पत्रकार थे पहले बंगाल के जितने भी साहित्यकार थे वह अपनी रचनाएं बांग्ला में नहीं करते थे बल्कि संस्कृति अंग्रेजी में ज्यादा लिखना पसंद करते थे

लेकिन बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने पहले साहित्यकार थे जिन्होंने बांग्ला साहित्य में बांग्ला भाषा में लिख कर के अपनी एक अलग पहचान बनाई। बंकिम चंद्र चटर्जी ने सबसे पहली रचना बंगला में दुर्गेशनंदिनी लिखी थी

इसके बाद उन्होंने कई कविताएं लिखा कई गद्य उपन्यास कहानी की रचनाएं की बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1872 में बंगदर्शन पत्रिका शुरू किया जिसके माध्यम से उन्होंने भारतीय जनता में स्वतंत्रता की भावना जगाया।

स्वतंत्रता सेनानियों में देशभक्ति की उर्जा उत्पन्न की कमलाकांत या रोजनामचा जैसा उन्होंने निबंध संग्रह लिखा।चटर्जी बहुत ही उच्च कोटि के उपन्यासकार लेखक कवि और देशभक्त इंसान भी थे उन्होंने बहुत रचनाएं की है जैसे

Bankim Chandra चटर्जी का उपन्यास

  •  कपाल कुंडला
  • मृणालिनी
  • कृष्णकांत का  वसीयतनामा
  •  रजनी
  • चंद्रशेखर
  • आनंद मठ
  • दुर्गेश नंदिनी
  • इंदिरा
  • युग लांगुरिया
  • राधा रानी
  • कृष्णकान्तेर उइल
  • राज सिंह
  • देवी चौधुरानी
  • सीताराम

बंकिम चंद्र चटर्जी के प्रबंध काव्य 

  • कमलाकांत एक दफ्तर
  • लोक रहस्य
  • कृष्ण चरित्र
  • विज्ञान रहस्य
  •  विविध समालोचना
  • प्रबंध पुस्तक
  • शाम्य
  • कृष्ण चरित्र
  • विविध प्रबंधन

Bankim Chandra चटर्जी को उनके महान रचनाओं के लिए कई पुरस्कार भी मिले हैं 1996 विपिन चंद्र पाल ने वंदे मातरम के नाम से देशभक्ति पत्रिका शुरू की थी या उन्होंने बंकिम चंद्र चटर्जी से प्रभावित होकर सम्मान में शुरू किया था फिर लाला लाजपत राय जी ने इस नाम का जनरल प्रकाशित किया।

वंदे मातरम किस उपन्यास से लिया गया

भारत का राष्ट्रीय गीत जोकि बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा है स्वतंत्रता संग्राम में हर भारतीय क्रांतिकारियों के लिए एक उद्घोष और प्रेरणा स्रोत बन गया था वंदे मातरम एक ऐसा राष्ट्रीय गीत है जो कि हर भारतीयों के दिलों में देशभक्ति का भाव जगाता है इस वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत में भारत माता भारत भूमि को एक दुर्गा देवी या माता ककर संबोधित किया गया है

इस गीत को 1882 में आनंदमठ उपन्यास में शामिल किया गया भारत में देशभक्ति जगाने राष्ट्रीयता की भावना जगाने के लिए क्रांतिकारियों में एक अलग ऊर्जा जगाने में आनंदमठ उपन्यास का बहुत योगदान है

सबसे पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का कोलकाता में एक अधिवेशन के समय वंदे मातरम गीत गाया गया था और कुछ ही दिनों बाद यह गीत भारत के हर क्रांतिकारियों हर स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक पसंदीदा गीत और मुख्य उद्घोष हो गया था उस समय देशभर में जितने क्रांतिकारी थे

चाहे वह बच्चे युवा बूढ़े महिला पुरुष हर किसी के लिए वंदे मातरम एक नारा की तरह हो गया था आजादी की लड़ाई में हर किसी के जुबां से वंदे मातरम का गीत निकलता था।

बंकिम चंद्र चटर्जी की मृत्यु  

 उनका का मृत्यु 8 अप्रैल 1894 को हुआ था उन्होंने वंदे मातरम लिखकर लोगों के दिलों में हमेशा के लिए अपना नाम अमर कर लिया राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम हम लोग हर राष्ट्रीय फेस्टिवल पर गाते हैं और बंकिम चंद्र चटर्जी को भी याद करते हैं और हमेशा करते रहेंगे ।

अपने रचनाओं से भारत के हर युवा बच्चे महिला पुरुष में देशभक्ति की ज्वाला भड़काने वाले बंकिम चंद्र चटर्जी के मृत्यु से हर भारतीय के दिलों में शोक पैदा हो गया था उन्होंने वंदे मातरम जैसे राष्ट्रीय गीत से स्वतंत्रता संग्राम में एक नई ऊर्जा नई चेतना ला दी थी।

सारांश 

आनंदमठ जैसे महान ग्रंथ और वंदे मातरम जैसे राष्ट्रीय गीत लिखकर भारतीय हिंदी साहित्य में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय हमेशा के लिए अमर हो गए उनके द्वारा लिखे गए राष्ट्रीय गीत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक गुरु मंत्र था

इस लेख में बंगला के प्रसिद्ध साहित्यकार उपन्यासकार कवि लेखक निबंधकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के बारे में पूरी जानकारी दी गई है फिर भी अगर इस लेख से संबंधित कोई सवाल आपके मन में है तो कृपया कमेंट करके जरूर पूछें।

इस लेख में हमने महान लेखक उपन्यासकार कवि बंकिम चंद्र चटर्जी या बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की है आप लोगों की जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं जितना शेयर जरूर करें।

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