Chandra Shekhar Azad – चंद्रशेखर आजाद कौन थे

आजाद कौन थे और उन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने में  अपना योगदान कब और किस तरह दिया हैं Chandra Shekhar Azad biography in hindi सारी जानकारी हम इस लेख में जानेंगे।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले एक महान क्रांतिकारी Chandra Shekhar Azad की जीवनी के बारे में विस्तृत से हम लोग इस लेख में जानेंगे। चंद्रशेखर आजाद  का जन्म कहां हुआ। उनके शिक्षा के बारे में जानेंगे

उन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए अपना योगदान कब कहां और कैसे दिया हैं। उन्होंने कैसे अपने प्राणों का बलिदान भारत माता को आजाद कराने के लिए दे दिया। चंद्रशेखर आजाद के बारे में पूरी जानकारी पाने के लिए आप लोग इस लेख को जरूर पढ़ें।

Chandra Shekhar Azad biography in hindi

चंद्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक बहुत ही महत्वपूर्ण और महान स्वतंत्रता सेनानी थे। एक प्रखर क्रांतिकारी थे उन्होंने भारत को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों का बलिदान हंसते हंसते दे दिया।

Chandra Shekhar Azad की क्रांतिकारी जीवन की कहानियां हम लोग अक्सर अपने किताब या दूसरे लोगों से भी सुनते  हैं। Chandra Shekhar Azad की कहानियां हम लोगों के जीवन में प्रेरणादायक भी हैं

Chandra Shekhar Azad biography in hindi

Chandra Shekhar Azad का परिचय एक छोटे से बात का मोहताज नहीं हैं। चंद्रशेखर आजाद एक ऐसे महान थे।वह युवा क्रांतिकारियों के हीरो थे जिन्होंने भारत को आजाद कराने के लिए कई प्रयास किए और अंग्रेजों से लोहा ले लिया था। अंग्रेज भी उनसे डरने लगे थे। Chandra Shekhar Azad 1 महान देशभक्त भी थे

चंद्रशेखर आजाद ने कहा था कि दुश्मनों की गोलियों का हम सामना करेंगे आजाद ही रहे हैं आजाद ही रहेंगे उनका यह प्रण था। चंद्रशेखर आजाद के और भी कई स्वतंत्रता सेनानी थे

जिन्होंने भारत को आजाद कराने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी  जिनमें राम प्रसाद बिस्मिल भगत सिंह प्रमुख थे राम प्रसाद बिस्मिल और भगत सिंह को बाद में फांसी पर लटका दिया गया।

1922 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के द्वारा असहयोग आंदोलन को बीच में ही बंद कर देने के कारण भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद रामप्रसाद बिस्मिल और इनके साथ और भी कई स्वतंत्रता सेनानी में आक्रोश भर गया

और उन्होंने अहिंसा का रास्ता छोड़कर अपने विचार में बदलाव करके क्रांतिकारी गतिविधि के साथ उन्होंने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य बनकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने लगे।

चंद्रशेखर आजाद  का जन्म 

Chandra Shekhar Azad मध्यप्रदेश के झाबुआ जिला के भाबरा गांव के रहने वाले थे उनका जन्म 30 जुलाई 1906 को हुआ था उनके पिताजी का नाम पंडित सीताराम तिवारी था और उनकी माता का नाम जगरानी देवी था

उनके पिताजी बहुत ही स्वाभिमानी और ईमानदार व्यक्ति थे वह अपने बचन के पक्के थे Chandra Shekhar Azad में भी यही गुण था कि जो वह कहते थे वह जरूर करते थे।

चंद्रशेखर आजाद आजाद के पूर्वज बदरका जो कि अब उन्नाव जिला है के बैसवारा गांव के रहने वाले थे वह लोग अपने गांव से अकाल की वजह से छोड़ कर के भावरा गांव में बस चुके थे चंद्रशेखर आजाद का निशाना बचपन से ही बहुत पक्का था एक बार वह छोटे-छोटे बच्चों के साथ धनुष बाण चलाना सीख रहे थे जिसमें कि उनका निशाना बहुत ही अच्छा था।

नाम चंद्रशेखर आजाद
जन्‍म 30 जुलाई 1906
जन्‍म स्‍थान मध्यप्रदेश के झाबुआ जिला के भाबरा गांव
पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी
माता का नाम जगरानी देवी
कार्यक्षेत्र स्‍वतंत्रता सेनानी
मृत्‍यु 27 फरवरी 1931

चंद्रशेखर आजाद का शिक्षा 

चंद्रशेखर आजाद का शिक्षा कुछ ज्यादा नहीं हो पायी थीी। उनके पिताजी बहुत बड़े पंडित थे इसलिए वह चाहते थे कि Chandra Shekhar Azad भी संस्कृत पढ़ कर पंडित बन जाए। इसलिए उन्होंने अपने एक मित्र को  उन्हें पढ़ाने के लिए रख दिया । Chandra Shekhar Azad को पढाने के लिए उनके पिताजी के मित्र घर पर ही आते थे उसके बाद 14 वर्ष की आयु में Chandra Shekhar Azad बनारस संस्कृत की पढ़ाई करने के लिए चले गए।

लेकिन उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था वह बचपन से ही छोटे-छोटे बच्चों के साथ निशानेबाजी करते थे जिस वजह से उनका निशाना बहुत अच्छा था और उनके मन में बचपन से ही भारत को आजाद कराने का बात रहता था इसी वजह से उन्होंने अपने पढ़ाई छोड़ कर कानून भंग आंदोलन से जुड़ गए फिर उन्होंने गांधीजी के असहयोग आंदोलन में भाग लिया।

जब चंद्रशेखर आजाद पढ़ाई कर रहे थे उसी समय 1919 में अमृतसर का जालियांवाला बाग नरसंहार हत्याकांड हुआ और गांधी जी ने असहयोग आंदोलन बिना किसी सूचना के बिना किसी फरमान जारी किए बंद कर दिए जिससे कि सभी स्वतंत्रता सेनानियों की मन में एक ज्वाला भड़क उठे।

उसी समय सभी छात्रों के साथ चंद्रशेखर आजाद भी भारत को आजाद कराने के लिए स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े इस आंदोलन में स्कूल के सभी छात्रों के साथ चंद्रशेखर आजाद भी गिरफ्तार कर लिए गए और 15 बेंत मारने की सजा उन्हें सुनाई गई।

जब चंद्रशेखर आजाद को नंगा करके बेंत मारना शुरू किया गया और उनसे जब भी कोई नाम पूछता था तो अपना नाम सिर्फ आजाद बताते थे और भारत माता की जय के नारे लगाते रहे तब तक उन्हें अंग्रेज मारते रहे जब तक कि वह बेहोश न हो गए।

यही चंद्रशेखर आजाद आगे चलकर एक बहुत बड़े स्वतंत्रता सेनानी और बहुत बड़े क्रांतिकारी दल के नेता बने जिनसे की अंग्रेज भी बहुत डरने लगे थे।

चंद्रशेखर आजाद का व्यक्तित्व 

Chandra Shekhar Azad सच्चे स्वतंत्रता सेनानी प्राणों का आहुति देने वाला एक महानायक थे।उस समय वह बहुत ही लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी थे वह बहुत ही गर्म दिमाग के आदमी थे उन्हें बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता था और शुरू से वह गांधी जी के विचारों से प्रभावित थे इसीलिए उन्होंने गांधीजी के असहयोग आंदोलन में भी योगदान दिया।

उसी समय अंग्रेज उन्‍हें  पकड़ कर लेकर चले गए थे और जब उनसे उन्होंने पूछा कि तुम्हारा नाम क्या हैं तो उन्होंने अपना नाम आजाद बताया और पिता का नाम स्वतंत्रता बताया और इस बात से गुस्सा होकर वहां का मजिस्ट्रेट ने 15 कोड़े मारने का सजा सुनाया।

जितने कोड़े उन्हें मारे जा रहे थे उतनी बार वह बस एक ही बात बोलते थे गांधी जी की जय और वंदे मातरम का नारा लगाते रहे थे इसी घटना के बाद लोग उन्हें आजाद नाम से जानने लगे और  प्रचलित हो गए।

चंद्रशेखर आजाद ने स्वतंत्रता संग्राम मैं अपने प्रमुख भूमिका निभाते हुए कई कार्यों में आगे रहे जैसे कि काकोरी कांड ट्रेन डकैती कांड सांडर्स हत्याकांड असेंबली में बम विस्फोट और इसके साथ अन्य कई ऐसे उन्होंने कार्य किए जिससे कि अंग्रेजों को परेशान किया जाए और भारत से उन्हें निकालने में मदद मिले।

चंद्रशेखर आजाद का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान 

Chandra Shekhar Azad 14 वर्ष की आयु में ही स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए थे और उन्होंने गांधीजी के असहयोग आंदोलन में पूरा योगदान दिया उनके मन में शुरू से ही भारत को स्वतंत्र कराने का विचार रहता था

बचपन में जब उनके पिताजी उनको पढ़ने के लिए अपने मित्र को घर पर बुलाते थे तब वह किसी तरह बहाना करके वहां से भागना चाहते थे उसके बाद उनकी नौकरी सरकारी तहसीलदार की लगाई गई लेकिन उसमें भी उनका मन नहीं लगा और वह नौकरी छोड़कर वहां से भाग गए।

जब महात्मा गांधी के द्वारा असहयोग आंदोलन को अचानक बंद कर दिया गया तब सभी स्वतंत्रता सेनानियों के मन में अहिंसात्मक तरीके से आजादी पाना मुमकिन नहीं लग रहा था इसलिए उन्होंने सहस्त्र क्रांति की तरफ अपना कदम बढ़ाया बनारस में उस समय क्रांतिकारियों का गढ़ माना जाता था

वहीं पर चंद्रशेखर आजाद मन्मथ नाथ गुप्त और प्रणवेश  चटर्जी से मुलाकात हुई उसके बाद क्रांतिकारी दल के सदस्य के रूप में उन्होंने सदस्यता ले ली उस दल को हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ कहा जाता था।

चंद्रशेखर आजाद स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के बाद झांसी से कुछ दूरी पर ओरछा के जंगल में अपने साथियों के साथ रहने लगे वही पर निशानेबाजी का प्रशिक्षण अपने साथियों को देने लगे थे

और साथ ही पंडित हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से चंद्रशेखर आजाद स्कूल में बच्चों को पढ़ाते थे लोगों को स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ने के लिए देश भक्ति के तरफ जाने के लिए प्रोत्साहित भी करते थे।

1919 के जलियांवाला बाग हत्‍या कांड

1919 के जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद उनके मन पर गहरा प्रभाव पड़ा और उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में पूरी तरह से कूद पड़े थे 1922 में हुई चौरा चौरी कांड के बाद गांधी जी ने अपना आंदोलन बंद कर दिया उसके बाद सभी क्रांतिकारियों के मन पर गहरा प्रभाव पड़ा।

उसके बाद ही Chandra Shekhar Azad ने कांग्रेस से अपना नाता तोड़ दिया और उन्होंने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल सचिंद्र नाथ सान्याल योगेश चंद्र चटर्जी और बहुत सारे क्रांतिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने हिंदुस्तानी प्रजातांत्रिक संघ का गठन किया।

काकोरी कांड

9 अगस्त 1925 में चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह रामप्रसाद बिस्मिल अशफाक उल्ला खान और उनके साथ और भी कई क्रांतिकारी मिलकर ट्रेन में लूट कांड किया इसी को काकोरी कांड के नाम से जाना जाता है यह घटना एक ट्रेन में लूट कांड से संबंधित थी

जो कि काकोरी से ट्रेन चली थी सभी आंदोलनकारी ट्रेन में जो सरकारी खजाना था उसे लूटने का पहले से ही प्लान बनाया हुआ था इसी काकोरी कांड में सरकारी खजाने लूटने के आरोप में राम प्रसाद बिस्मिल अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह पकड़े गए जिन्हें बाद में फांसी की सजा दी गई।

 जब काकोरी कांड हुआ उस समय भी चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह और उनके साथ बहुत सारे युवा क्रांतिकारी थे मिलकर इस घटना को अंजाम दिया इस घटना के बाद बहुत सारे क्रांतिकारी पकड़े गए।

जिसमें कुछ लोगों को फांसी की सजा और कुछ लोगों को जेल हुआ इस घटना के बाद Chandra Shekhar Azad के का खून खौल उठा और उनके अंदर एक ज्वालामुखी भड़क उठा और यह ज्वालामुखी बढ़ते बढ़ते बहुत बड़े आग का गोला के रूप ले लिया।

सैैंडर्स हत्याकांड 

जब लाला लाजपत राय को अंग्रेजों ने लाठीचार्ज से मार दिया इस बात से चंद्रशेखर आजाद बहुत गुस्सा हुए और उन्होंने भगत सिंह और बहुत सारे क्रांतिकारियों के साथ मिलकर एक नए दल का गठन हुआ जिसका नाम हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन बनाया।

और उसके कुछ दिन बाद भगत सिंह राजगुरु Chandra Shekhar Azad और कुछ युवा क्रांतिकारियों ने मिलकर जेपी सैैंडर्स को गोलियों से छलनी करके उसको मार गिराया और उन्होंने लाला लाजपत राय के मौत का बदला ले लिया।

असेंबली में बम विस्फोट

चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह बटुकेश्वर दत्त और राजगुरु ने मिलकर दिल्ली के केंद्रीय असेंबली में जो समय कोई सभा चल रहा था बम विस्फोट किया उन्होंने यह बम विस्फोट सिर्फ अंग्रेजों के पास अपनी आवाज पहुंचाने के लिए किया था।

उनका यह योजना था कि किसी को चोट नहीं लगे या किसी को नुकसान ना पहुंचे लेकिन अंग्रेजों के पास उनका पैगाम पहुंच जाए  और वहीं पर खड़े होकर भारत माता की जय और वंदे मातरम इंकलाब का नारा लगाते रहे और वहां से भागे भी नहीं उसमें भगत सिंह बटुकेश्वर दत्त राजगुरु और सुखदेव को अंग्रेजों ने पकड़ लिया।

चंद्रशेखर आजाद का नाम आजाद कैसे पड़ा

आजाद नाम चंद्रशेखर का पडने के पीछे भी एक कहानी है जब चंद्रशेखर आजाद 15 साल के थे तो किसी स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने की वजह से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और जब उन्हें कोर्ट में जज के सामने पेश किया गया तो जज ने उनका नाम पूछा उस समय उन्होंने अपना नाम आजाद बताया फिर जब जज ने पूछा कि तुम्हारे पिता का नाम क्या है

तो चंद्रशेखर आजाद ने अपने पिता का नाम स्वतंत्रता बताया और अपने घर का नाम उन्होंने जेल बताया यह सब सुनने के बाद जज को बहुत गुस्सा आया है और उन्होंने 15 कोड़े मारने की सजा चंद्रशेखर आजाद को सुनाई इसी के बाद चंद्रशेखर अपने नाम के साथ आजाद हमेशा जोड़ने लगे।

चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु 

Chandra Shekhar Azad ने यह प्रण लिया था कि जीते जी उन्हें कोई पकड़ नहीं सकेगा अगर कोई पकड़ेगा भी तो उनके मरने के बाद 27 फरवरी 1931 को अंग्रेजों ने उन पर और उनके साथियों पर हमला बोल दिया इस घटना में चंद्रशेखर आजाद और अंग्रेजों के बीच बहुत गोलियां चली फायरिंग हुई दोनों तरफ से ताबड़तोड़ गोलियां चलती रहे ।

जब Chandra Shekhar Azad को लगा कि अब वह बच नहीं सकते तब उन्होंने 5 गोलियां चलाई और एक गोली बच गया तब उन्होंने वह आखिरी गोली निकाल कर अपने आप को मार लिया ताकि जीते जी उन्हें कोई पकड़ नहीं सके जिस समय Chandra Shekhar Azad ने अपने आप को गोली मारा।

उस समय वह किसी एक पेड़ के पीछे छुपे थे जब अंग्रेज वहां गए तो उनको लगा कि चंद्रशेखर आजाद वहां छुपे हैं लेकिन जब उन्होंने देखा तो वहां पर उनकी लाश पड़ी थी और इस तरह चंद्रशेखर आजाद अपने भारत माता के लिए हमेशा के लिए आजाद हो गए।

लेकिन अंग्रेजी इस बात का श्रेय खुद पर लेते थे कि उन्होंने आजाद को मारा हैं बल्कि Chandra Shekhar Azad ने अपने आप को नहीं मारा हैं लेकिन बहुत लोगों का कहना यही हैं

Chandra Shekhar Azad ने अपने आप को अपने गोली से मार लिया था चंद्रशेखर आजाद के मौत के बाद जब अंग्रेज देखने गए कि वह जिंदा हैं कि मर गए तब भी अंग्रेज डर रहे थे उनमें हिम्मत नहीं था कि वह Chandra Shekhar Azad को जाकर छू सके और देख सके।

चंद्रशेखर आजाद के बारे में रोचक तथ्य

  • 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद ने कई क्रांतिकारियों के साथ मिलकर गुप्त सभा का आयोजन किया जिसमें उन्होंने अपना एक लक्ष्य निर्धारित किया उनका यही नारा था की फैसला है जीत है या मौत है चंद्रशेखर आजाद का यही उद्देश्य था कि जब तक हम जीते रहेंगे हमारी लड़ाई आखिरी फैसला होने तक जारी रहेगा अब चाहे इसमें जीत हो या मौत हो।

 

  • चंद्रशेखर आजाद से अंग्रेज भी बहुत डरने लगे थे कहा जाता है कि उन्हें पकड़ने के लिए ब्रिटिश सरकार 700 लोगों को नौकरी पर रखे हुए थे ताकि चंद्रशेखर आजाद को पकड़ा जा सके दिल्ली असेंबली में बम कांड के बाद अंग्रेजों के लिए चंद्रशेखर आजाद को पकड़ना एक चुनौती की तरह बन गया था लेकिन चंद्रशेखर आजाद का भी एक कसम था कि वह जीते जी अंग्रेजों के हाथ से कभी नहीं पकड़े जाएंगे इसीलिए अंतिम समय में जब वह चारों तरफ से अंग्रेजों से घिर गए थे तो उन्होंने अपने आप को गोली मार ली।

 

  • चंद्रशेखर आजाद महिलाओं की बहुत इज्जत करते थे जब क्रांतिकारियों को धन की आवश्यकता थी इसलिए सभी क्रांतिकारी घर में घुसकर लूटपाट करते थे उसी समय एक बार किसी जमींदार के घर में चंद्रशेखर आजाद और उनके और भी साथी लूटपाट कर रहे थे तो वहां पर एक लड़की के साथ उनके साथी ही अभद्रता करने लगे जिसके लिए चंद्रशेखर आजाद ने उसे पहले बहुत समझाया लेकिन जब वह नहीं समझा तो उस पर गोली मारने के लिए रिवाल्वर उठा लिए तब उनके साथी ने उस महिला से माफी मांगी और वहां से चंद्रशेखर आजाद और अन्य क्रांतिकारी बिना कुछ लिए लौट गए।(

 

  • चंद्रशेखर आजाद और उनके साथ में अन्य कई क्रांतिकारी एक बार एक मुखिया के घर में लूटपाट करने के लिए गए और वहां उन्होंने कड़े शब्दों में बताया कि हमारा मकसद सिर्फ लूटपाट करना है हम किसी का हत्या नहीं करेंगे और महिलाओं से किसी भी तरह का अभद्रता कोई नहीं करेगा।
  • इसका फायदा उठाकर एक महिला ने चंद्रशेखर आजाद के हाथों से पिस्टल छीन लिया लेकिन चंद्रशेखर आजाद ने महिला का लिहाज करते हुए उसके साथ किसी भी तरह का छीना झपटी नहीं किया उस पर हाथ नहीं उठाया उसी के बाद चंद्रशेखर आजाद ने यह निर्णय लिया कि अब किसी के घर में घुसकर लूटपाट नहीं करेंगे तभी से सरकारी खजाने की लूट कांड का निर्णय करके उन्होंने काकोरी लूट कांड किया।

सारांश 

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में चंद्रशेखर आजाद का एक महत्वपूर्ण भूमिका था वह एक महान क्रांतिकारी सच्चे देशभक्त थे स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले युवक चंद्रशेखर आजाद से प्रेरित होते थे वह उनके प्रेरणास्रोत बन गए थे इस लेख में महान क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद के जीवनी के बारे में पूरी जानकारी दी गई है।

इस लेख में हमने चंद्रशेखर आजाद के जीवनी के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की हैं आप लोग यह लेख पूरा पढ़ें और पढ़ने के बाद अगर कोई बात आपके मन में हैं

तो हमें कमेंट करके जरूर पूछें। आप लोगों को चंद्रशेखर आजाद Chandra Shekhar Azad  के जीवनी के बारे में यह लेख कैसा लगा हमें कमेंट जरूर करें और ज्यादा से ज्यादा  शेयर भी जरूर करें

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