दुर्गा पूजा का महत्‍व एवंं इतिहास Durga Puja in hindi 2022

दुर्गा पूजा का क्या इतिहास हैं दुर्गा पूजा क्यों मनाई जाती हैं Durga Puja in hindi इसकी क्या कहानी हैं दुर्गा पूजा कहां-कहां मनाई जाती हैं.

दशहरा क्यों मनाया जाता हैं इसका क्या इतिहास हैं यह सारी जानकारी हम लोग इस लेख में जानेंगे.हिंदुओं का एक बहुत ही बड़ा त्यौहार हैं जो कि कई राज्यों में बहुत ही जोर शोर से मनाया जाता हैं.

9 दिनों तक चलने वाला यह नवरात्रि लोग बहुत ही उत्साह और हर्षोल्लास से मनाते हैं तो आइए हम लोग जानते हैं कि दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता हैं इसका क्या इतिहास हैं और दशहरा क्यों मनाया जाता हैं. दीपावली का महत्व

Durga Puja in hindi

भारत में हिंदुओं का एक बहुत ही प्रसिद्ध पर्व हैं. दुर्गा पूजा में 9 दिन मां दुर्गा के नौ रूप का पूजा होता हैं. दुर्गा पूजा को बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता हैं हर साल आश्विन महीने में मनाई जाती हैं.

दुर्गा पूजा आज से नहीं बल्कि बहुत दिनों से मनाई जाती हैं इसके कई महत्व हैं जैसे कि Durga puja का पौराणिक महत्व हैं जिसके चलते हर साल इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता हैं. इसी नवरात्र में मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस को मारा था.

Durga-puja-in-hindi

जब महिषासुर राक्षस ने भगवान ब्रह्मा जी से तपस्या करके अमर होने का वरदान मांगा तब ब्रह्मा जी ने महिषासुर को यह वरदान दिया कि उसकी मृत्यु सिर्फ एक स्त्री के हाथ से होगी. उसके बाद महिषासुर को ऐसा लगने लगा कि कोई भी स्त्री में इतना बल नहीं हैं कि उसे मार सकती हैं इसीलिए महिषासुर ने पूरे पृथ्वी पर अत्याचार करना शुरू कर दिया.

एक बार उसने अपनी राक्षसी सेना के साथ देवताओं से युद्ध छेड़ दिया और इसमें देवताओं की हार हुई उसके बाद सभी देवता ब्रह्मा विष्णु और महेश जी के पास पहुंचे तब त्रिदेव कहे जाने वाले ब्रह्मा विष्णु और शंकर भगवान ने मिलकर अपनी शक्ति से मां दुर्गा को प्रकट किया.

और उन्हें महिषासुर से लड़ने के लिए भेज दिया मां दुर्गा से जब महिषासुर का युद्ध हुआ तो वह महिषासुर युद्ध में मारा गया इसीलिए 9 दिन दुर्गा पूजा के रूप में मनाई जाती हैं. इसे बुराई पर अच्छाई की जीत कहीं जाती हैं. गंगा नदी के बारे में पूरी जानकारी

दुर्गा पूजा क्यों मनाई जाती हैं

Durga Puja को शरदोत्सव के रूप में भी मनाया जाता हैं इसे बंगाल में दुर्गोत्सव भी कहा जाता हैं दुर्गा पूजा के जो 9 दिन हैं उसमें दुर्गा जी के नौ रूपों का पूजा किया जाता हैं. ऐसा माना जाता हैं कि जब महिषासुर का दुर्गा मां ने वध किया था तो उस समय यह लड़ाई 9 दिन चली थी.

तब 9 दिन दुर्गा जी के नौ रूप से महिषासुर की लड़ाई हुई थी और अंत में उसका मां दुर्गा ने वध किया. दुर्गा पूजा मनाने के संदर्भ में एक कहानी और हैं कहा जाता हैं कि रामायण में जब राम जी का रावण से युद्ध हुआ उस समय रामजी ने मां दुर्गा का आवाहन किया था.

दशहरा क्यों मनाया जाता हैं

दशहरा नवरात्र की दसवें दिन मनाया जाता हैं इस दिन को बुराई पर अच्छाई का जीत या विजयदशमी कहा जाता हैं विजयदशमी के दिन ही भगवान राम ने रावण का वध किया था.

इसीलिए इस दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता हैं और दशहरा के दिन हर जगह भारत में रावण उसके भाई कुंभकरण और रावण का बेटा मेघनाथ यानी कि इंद्रजीत का पुतला बनाकर जलाया जाता हैं. वेद क्या हैं

दुर्गा पूजा कहां-कहां मनाई जाती हैं 

दुर्गा पूजा भारत के कई शहरों में मनाई जाती हैं जैसे कि बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल मणिपुर त्रिपुरा उड़ीसा असम छत्तीसगढ़ आदि शहरों में बहुत ही हर्षो उल्लास और उत्साह के साथ लोग मनाते हैं.दुर्गा पूजा तो लगभग हर राज्‍य में मनाया जाता हैं लेकिन सबसे ज्यादा और प्रसिद्ध यह त्यौहार पश्चिम बंगाल का हैं.

पश्चिम बंगाल में यह पूजा दुर्गा पूजा दुर्गोत्सव के रूप में मनाया जाता हैं. दुर्गा पूजा में हर राज्‍य के हर शहर लगभग हर गांवों में बड़े-बड़े पंडाल बनते हैं और उसमें मां दुर्गा के साथ-साथ मां सरस्वती मां लक्ष्मी भगवान कार्तिकेय और भगवान गणेश जी का मूर्ति स्थापित किया जाता हैं.

सप्तमी के दिन पट खुलता हैं उसके बाद ही मां दुर्गा की भक्त दर्शन कर पाते हैं. दुर्गा पूजा के त्यौहार में बहुत ही ज्यादा रौनक होती हैं क्‍योंकि यह हिंदुओं का बहुत ही बड़ा पर्व हैं. दसवें दिन मां दुर्गा की विदाई होती हैं यानी कि इनका विसर्जन हो जाता हैं और इसके साथ ही इस त्यौहार का रौनक भी खत्म हो जाता हैं और लोग नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई देते हैं.

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की शुरुआत कब हुई

वेस्‍ट बंगाल का यह एक बहुत ही प्रसिद्ध त्यौहार हैं वहां इस 9 दिन के पूजा के लिए महीनों पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं जिसमें मां भगवती की पूजा की जाती हैं वहां पर दुर्गा पूजा को शरदियो पूजा शरदोत्सव महापूजो आदि के नाम से जाना जाता हैं. दुर्गा पूजा का शुरुआत 1610 में कोलकाता के एक जमींदार लक्ष्मीकांत मजूमदार ने शुरू की थी.

उन्होंने ही मां दुर्गा का प्रतिमा स्थापित करके पूजा शुरू की थी उसके बाद से आज तक पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा बहुत ही हर्षोल्लास और खुशी से मनाई जाती हैं. दुर्गा पूजा के 9 दिन पश्चिम बंगाल ही नहीं पूरे भारत में बहुत ही चाहल पहल और रौनक दिखाई देता हैं इस 9 दिन का इंतजार लोग 1 साल तक करते हैं.

पश्चिम बंगाल में तो बहुत ही भव्य भव्य पंडाल बनते हैं और वहां का नजारा भी बहुत ही आकर्षक और खूबसूरत होता हैं बहुत ही दूर दूर से लोग पश्चिम बंगाल का दुर्गा पूजा देखने के लिए आते हैं. पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से बड़ा कोई उत्सव नहीं मनाया जाता हैं यहां पर 9 दिन के अलग-अलग विधि होती हैं मां देवी दुर्गा की पूजा करने के लिए. सरस्वती पूजा

दुर्गा पूजा का महत्व 

Durga Puja का बहुत ही महत्व हैं क्योंकि इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाता हैं और दशहरा के दिन विजयदशमी के रूप में मनाया जाता हैं इसलिए माना जाता हैं कि जितने भी बुरी शक्तियां रहती हैं वह दुर्गा पूजा में खत्म हो जाती हैं और इस त्यौहार में चारों तरफ मां दुर्गा के भक्ति में रंग जाती हैं.

क्योंकि पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करके महिषासुर वध दिखाया जाता हैं इसमें मां दुर्गा के साथ मां सरस्वती मां लक्ष्मी भगवान कार्तिकेय और भगवान गणेश जी का भी मूर्ति स्थापित किया जाता हैं.

दुर्गा पूजा में जहां भी दुर्गा मां का मूर्ति स्थापित होता हैं वहां बहुत ही ज्यादा मेला लगता हैं. सभी लोग मां दुर्गा का दर्शन करने जाते हैं सभी लोग अपने घरों में नवमी और दशमी के दिन अच्छे-अच्छे पकवान बनाकर खाते हैं इसमें लोग नए नए कपड़े खरीदते हैं.

कई शहरों में तो नवरात्रि के पहले दिन से ही मां दुर्गा का पट खुल जाता हैं और लोग दर्शन कर पाते हैं लेकिन कई जगह सप्तमी के दिन मां दुर्गा का दर्शन करने को मिलता हैं. बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो 9 दिन का उपवास रखते हैं अपने अपने घरों में 9 दिन मां दुर्गा का दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं.

पूजा करते हैं नौवें दिन इस पूजा का समापन हवन और पूजा से किया जाता हैं और कुंवारी कन्याओं का भी पूजन किया जाता हैं‌ तो यह पर्व हिंदुओं के लिए बहुत ही बड़ा पर्व हैं.बक्‍सर के दर्शनीय स्थल

 

सारांश 

दुर्गा पूजा और दशहरा का शुरुआत बहुत ही पहले हमारे पुराणों में मिलता हैं तो आज भी लोग 1 साल तक इस 9 दिन के नवरात्र का इंतजार करते हैं और इसका तैयारी कई महीनों पहले ही शुरू हो जाता हैं क्योंकि बड़े-बड़े पंडालों में मां दुर्गा का प्रतिमा स्थापित किया जाता हैं.

और उसमें आरती और पूजा होता हैं हवन धुनी होता हैं इसीलिए इस त्योहार को बहुत ही पवित्र और सच्चे दिल से साथ मनाया जाता हैं.

इस लेख में दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता हैं Durga Puja का क्या इतिहास हैं दशहरा क्यों मनाया जाता हैं कि बारे में पूरी जानकारी दी गई हैं फिर भी अगर इस लेख से जुड़े कोई सवाल आपके मन में हैं तो हमें कमेंट करके जरूर पूछें यह लेख आप लोगों को कैसा लगा कृपया हमें कमेंट करके जरूर बताएं और अन्य सोशल साइट पर अपनी दोस्त मित्रों को शेयर जरूर करें.

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

Average rating 0 / 5. Vote count: 0

No votes so far! Be the first to rate this post.

Leave a Comment