एग्जाम की खोज किसने और कब की थी पूरी जानकारी

किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए, नौकरी प्राप्‍त करने के लिए या बचपन से पढ़ाई में एक क्लास से दूसरे क्लास में जाने के लिए एग्जाम देना पड़ता है. लेकिन यह बात हमारे दिमाग में जरूर आती है कि Exam Ki Khoj Kisne Ki एग्जाम की खोज किसने और कब की, Exam का शुरुआत सबसे पहले किस देश ने किया इसके बारे में इस लेख में जानकारी प्राप्त करेंगे.

भारत में या अन्य दूसरे देशों में स्कूल में कॉलेज में गवर्नमेंट जॉब में हर जगह पर बोर्ड की परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा किसी कोर्स को करने के लिए प्रवेश परीक्षा देना पड़ता है. Exam हमारे जीवन में आगे बढ़ने के लिए या हमारे अंदर जो भी जानकारी या कमियां है, उसको प्रूफ करने के लिए दिया जाता है.

Exam के आधार पर ही किसी भी व्यक्ति बच्चे का प्रतिभा का आकलन किया जाता है. एग्जाम का अर्थ होता है कि किसी भी व्यक्ति विशेष के बुद्धि का, जानकारी का, शिक्षा का निरीक्षण करना उसका अवलोकन करना. तो परीक्षा जो कि हमारे जीवन का आज के समय में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है.

बिना परीक्षा के हम किसी भी क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ सकते हैं. तो परीक्षा क्‍यों जरूरी हैं, भारत में एग्जाम का शुरुआत कब और किसने किया Exam देने से क्या फायदा है इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं.

एग्जाम की खोज किसने की थी  

एग्जाम का शुरुआत 19वीं सदी में एक फ्रांसीसी दार्शनिक ने किया था, जिनका नाम सर हेनरी फिशेल था. वह अमेरिका के इंडियाना विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर थे. वह अमेरिका के एक व्यवसाई थे. उन्होंने ही सबसे पहले किसी भी व्यक्ति के प्रतिभा को जांचने के लिए एग्‍जाम को उचित समझा।

छात्रों के बुद्धि का आकलन करने के लिए एग्जाम शुरू करने का अपना विचार भी प्रकट किया. उनका मानना था कि किसी भी व्यक्ति के जानकारी, शिक्षा,प्रतिभा, श्रेष्‍ठता आदि के बारे में निष्कर्ष निकालने से पहले उसका जांच करना जरूरी है. क्योंकि जब पहले कोई भी बच्चा स्कूल में कॉलेज में पढ़ता था, तो एक क्लास से दूसरे क्लास में बिना Exam के ही पास होकर चला जाता था.

Exam Ki Khoj Kisne Ki 

लेकिन उसने 1 साल में कितना पढ़ाई किया, उसने अपने कोर्स के बारे में कितना जानकारी हासिल किया इसका पता नहीं लग पाता था. हेनरी फिशेल ने सबसे पहला टेस्ट का शुरुआत छात्रों के सामान्य ज्ञान की जानकारी के बारे में जानने के लिए किया था.

एग्जाम का शुरुआत किस देश से हुई

सर हेनरी फिशेल ने लगभग 19वीं शताब्दी में परीक्षा के द्वारा लोगों के बुद्धि को आंकलन करने के लिए अपना विचार प्रकट किया. सबसे पहले Examका शुरुआत करने वाला देश चीन था. वैसे चीन में लगभग 605 ईसवी में ही सुई राजवंश के द्वारा एग्जाम का शुरुआत किया गया था.

वहां पर किसी भी सरकारी पद को हासिल करने के लिए शाही परीक्षा देना पड़ता था. उसके बाद ही उम्मीदवार का चयन किया जाता था. लेकिन यह प्रक्रिया 1905 में बंद हो गया था. लगभग 19वीं शताब्दी के अंत होने तक अमेरिका के ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज विश्वविद्यालय में भी हर छात्र के शिक्षा और जानकारी का सही परीक्षण करने के लिए एग्जाम शुरू किया जाने लगा.

14 दिसंबर 1958 में कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पहला छात्रों का एसेसमेंट टेस्ट शुरू किया गया. इंग्लैंड में 1806 में सिविल सेवा के लिए उम्मीदवार को चयन करने के लिए Exam शुरू किया गया. इस एग्जाम को इंपिरियल एग्जामिनेशन कहा जाता था. जिसके बाद इसे स्कूल कॉलेज या अन्य क्षेत्रों में भी जारी किया गया. 

भारत में एग्जाम कब शुरू किया गया

भारत में परीक्षा का शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा किया गया. ईस्ट इंडिया कंपनी में सिविल सर्विसेज के लिए उम्मीदवार का चयन एग्जाम के द्वारा ही किया जाता था. जिसका शुरुआत 1853 से किया गया.

ब्रिटिश सम्राज्‍य में किसी भी सरकारी पद पर नियुक्ति करने के लिए लंदन और भारत दोनों जगह एग्जाम आयोजित किया जाता था. पहले ब्रिटिश सम्राज्‍य  में किसी भी सरकारी पदों पर  नामांकन प्रक्रिया के द्वारा नियूक्ति किया जाता था.

लेकिन बाद में सिविल सेवा परीक्षा शुरू किया गया. पहले ईस्ट इंडिया कंपनी में किसी भी व्यक्ति को सिविल सर्विस करने के लिए जो Exam कराया जाता था वह लंदन में आयोजित होता था. उस एग्जाम में घुड़सवारी का टेस्ट पास करना अनिवार्य होता था.

लेकिन इस एग्जाम में सुधार करके ब्रिटिश सम्राज्‍य के द्वारा भारत में भी Exam शुरू किया गया और एक आयोग का गठन किया गया. जिसका नाम लोक सेवा आयोग रखा गया. लोक सेवा आयोग के द्वारा भारत में उम्मीदवारों का चयन किया जाता था और लंदन में हाउस ऑफ कमीशन के द्वारा उम्मीदवारों का चयन होता था. 

एग्‍जाम का अर्थ

एग्जाम को हिंदी में परीक्षा कहा जाता है, तो परीक्षा शब्द से ही इसका मतलब निकलता है. परीक्षा मतलब किसी के बारे में परीक्षण करना. वैसे Exam का मतलब किसी व्यक्ति विशेष के बारे में किसी उचित निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उसके वास्तविक स्थिति का जांच करना पड़ताल करना होता है. किसी भी छात्र ने कितना पढ़ाई किया है, उसमें आगे बढ़ने की प्रतिभा है कि नहीं इसका साक्ष्य Exam के आधार पर इकट्ठा करने की प्रक्रिया को ही परीक्षा कहा जाता है।

एग्जाम के फायदा

भारत में या अन्य देशों में किसी भी संस्था, संगठन, स्कूल, कॉलेज, गवर्नमेंट जॉब या प्राइवेट जॉब में भी पहले एग्जाम लिया जाता है. Exam के आधार पर ही किसी भी व्यक्ति विशेष के शिक्षा की जानकारी आदि का आकलन किया जाता है. इसके अलावा भी परीक्षा देने के कई फायदे होते हैं.

  • जब बच्चा एक क्लास में पढ़ कर दूसरी क्लास में जाता है, तो एक एग्जाम के आधार पर ही उसके पढ़ाई का आकलन किया जाता है, कि उसने 1 साल के अंदर में कितना पढ़ाई किया है.
  • बच्चों के शिक्षा के वृद्धि के बारे में पता चलता है.
  • जब एक क्लास से दूसरे क्लास में जाते हैं, तो एग्जाम के आधार पर यह जानकारी मिलता है कि वह दूसरे क्लास में जाने के योग्य है कि नहीं.
  • एक परीक्षा के माध्यम से किसी भी व्यक्ति विशेष के मेहनत का पता चलता है.
  • किसी व्यक्ति की योग्यता समझदारी का जांच किया जाता है.
  • कई बच्चों की पढ़ाई में वृद्धि भी परीक्षा के कारण ही होता है. क्योंकि वह अपने Exam में टॉप करने के लिए या अपने दूसरे सहपाठी से आगे निकलने के लिए पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाई करते हैं.
  • छात्रों के अनुभव और ज्ञान का जांच होता हैं.
  • योग्‍ता का विकास होता हैं.
  • छात्रों या किसी भी व्‍यक्ति के कमजोरियों और ताकत की जानकारी होती हैं.

परीक्षा क्यों जरूरी है

किसी भी संस्था या संगठन में किसी पद के लिए उम्मीदवार का चयन परीक्षा के आधार पर ही किया जाता है. परीक्षा के द्वारा ही किसी के प्रतिभा को परखने और जांचने का मौका मिलता है. अगर किसी के प्रतिभा का जांच नहीं होगा तो यह पता नहीं चल पाएगा कि किस पद के लिए कौन उम्मीदवार सही है.

स्कूल या कॉलेज में भी छात्र Exam में टॉप करने के लिए ही कड़ी मेहनत से पढ़ाई करते हैं. हर एक छात्र अपने सभी पाठ्यक्रम पढ़ाई के तौर तरीके आदि एग्जाम के लिए ही सुव्यवस्थित करते हैं.

कहीं किसी कंपनी में या किसी भी क्षेत्र में नौकरी करने के लिए भी एग्जाम के आधार पर ही एंप्लोई का प्रतिभा और उसके जानकारी का आकलन किया जा सकता है. वैसे कई क्षेत्रों में कई प्रकार के Exam होते हैं. जिसके आधार पर चयन प्रक्रिया पूरा किया जाता है. जैसे कि मौखिक परीक्षा, लिखित परीक्षा, साक्षात्कार परीक्षा, प्रायोगिक परीक्षा आदि.

FAQ

परीक्षा का अविष्कार किसने किया?

अमेरिका के एक बिजनेसमैन जो कि एक फ्रांसीसी दार्शनिक भी थे जिनका नाम सर हेनरी फिशेल था. वह इंडियाना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भी थे. उन्होंने ही सबसे पहले अमेरिका और अन्य देशों में परीक्षा शुरू करने  के बारे में अपने विचार प्रकट किया.

परीक्षा का मतलब क्या होता है?

एग्जाम का मतलब किसी भी व्यक्ति विशेष के प्रतिभा बुद्धि जानकारी का आंकलन करना होता है.

भारत में सबसे पहला कौन सा एग्जाम शुरू किया गया?

ब्रिटिस सम्राज्‍य के द्वारा 1853 ईस्वी में सबसे पहला एग्जाम लोक सेवा आयोग शुरू किया.

परीक्षा का अर्थ क्या होता है?

किसी भी छात्र या व्यक्ति विशेष के प्रतिभा या उनकी उपलब्धि से संबंधित जानकारी को पूर्ण रूप से साक्ष्यों के आधार पर इकट्ठा करने की प्रक्रिया को एग्जाम कहते हैं.

परीक्षा का उद्देश्‍य क्‍या हैं?

किसी व्‍यक्ति के श्रेष्‍ठता का पहचान करना या कमियों और ताकत का आंकलन करना परीक्षा का उद्देश्‍य हैं. परीक्षा ही हमें हमारे प्रतिभा के सच्‍चाई का आईना दिखाता हैं.

सारांश

एग्जामिनेशन लेने के कई प्रक्रिया है जिसमें परीक्षा लेने के परीक्षण की रचना की जाती है. जिसमें उत्तर पुस्तिका, परीक्षा का सही संचालन, प्रशासन के आधार पर छात्रों की उपलब्धि या व्यक्ति विशेष के जानकारियों का मूल्यांकन परीक्षा के आधार पर ही होता है.

अगर Exam जैसा प्रक्रिया न हो तो बच्चे ज्यादा पढ़ाई करना भी नहीं चाहेंगे. एग्जाम के डर से ही अपने सहपाठी से आगे निकलने के लिए ही बच्‍चे ज्यादा से ज्यादा मेहनत करके पढ़ाई करते हैं. ताकि एग्जाम में उन्हें सही अंक प्राप्त हो और वह सबसे आगे निकल जाए.

एग्जाम का शुरुआत करने का श्रेय किस व्यक्ति को जाता है, भारत में या अन्य देशों में इस प्रक्रिया को कब शुरू किया गया इसी के बारे में इस लेख में ऊपर बेहतर जानकारी दी गई है

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