गांव और शहर में अंतर क्या हैं

Gaon aur Shahar mein antar भारत में लगभग आधी आबादी गांव में ही बसती है. गांव में लोगों को एक शुद्ध हवा शुद्ध ऊर्जा मिलती है. अक्सर लोग काम के सिलसिले में या अपने बच्चों को अच्छा एजुकेशन देने के लिए गांव को छोड़कर शहर में जाकर बस जाते हैं. लेकिन जो आजादी जो शुद्धता गांव में प्राप्त होती है वह शहरों में नहीं है.

अक्सर लोग सोचते हैं कि गांव और शहर में क्या अंतर है क्योंकि पहले की अपेक्षा आज के समय में गांव में भी लगभग हर तरह की सुविधाएं लोगों को प्राप्त होने लगी हैं. गांव में भी हर गली गली में सड़क बिजली आदि की व्यवस्था पूर्ण रूप से मिलने लगी है.

फिर भी लोग अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए रोजगार के लिए या एक पढ़े लिखे समाज के अनुसार मॉडर्न बनने के लिए शहर में जाना चाहते हैं. लेकिन आज भी गांव में हर तरह की सुविधाएं लोगों को मिलने लगी है. कंप्यूटर मोबाइल इंटरनेट जिस तरह शहरों में फास्ट स्पीड में चलता है उसी तरह गांव में भी कभी भी कहीं भी इंटरनेट के द्वारा कोई भी काम कर सकते हैं.फैमिली/परिवार पर निबंध

गांव और शहर में अंतर क्या है Gaon aur Shahar mein antar

गांव को भारत का दिल कहा जाता है. भारत में सबसे बड़ा गांव गाजीपुर जिले में है. जिसका नाम गहमर है. पहले गांव में हर तरह की सुविधा नहीं मिल पाती थी जिससे कि बहुत ही परेशानी होती थी.

इसलिए लोग शहर में जाना ज्यादा पसंद करते थे. ताकि अगर किसी भी तरह की परेशानी कभी भी हो तो हर तरह की सुविधा मिल जाएगी.

Gaon aur Shahar mein antar

गांव को लोग पिछड़ा हुआ गवार आदि मानते हैं. वहीं शहर को विकसित और जगमगाती दुनिया समझते हैं. गांव में लोग अपना जीवन यापन शुद्ध हवा में व्यतीत करते हैं. किसी भी तरह का प्रदूषण उन्हें नहीं मिलता है.

हर गांव में बिजली हो जाने की वजह से हर घर में टीवी, फ्रिज, कूलर, एसी आदि की सुविधा उपलब्ध होने लगी है. लेकिन फिर भी कई ऐसी बातें हैं जिससे गांव और शहर में अभी भी अंतर स्पष्ट होता है. जिसके बारे में इस लेख में जानकारी दी गई है.

1. गांव और शहर का जीवन

शहर में सबसे ज्यादा प्रदूषण पाया जाता है क्योंकि रोड पर कई गाड़ियां चलती है. कई कंपनियां होने की वजह से दिन-रात तरह-तरह के उसमें से केमिकल का धुआं निकलता है. जिससे लोगों को प्रदूषण का सामना करना पड़ता है. प्रदूषण से कई तरह की खतरनाक बीमारी भी होने लगती है. 

गांव में ज्यादा लोगों के पास गाड़ी नहीं रहती है जिससे कि प्रदूषण का भी संभावना कम है. लोग गांव में ज्यादातर खेती-बाड़ी पर ही निर्भर रहते हैं. वहां बड़ी-बड़ी कंपनियों का तो कोई नाम ही नहीं है.

इसलिए वहां की हवा बहुत ही शुद्ध और प्रकृति बहुत ही सुंदर दिखाई देती है. जिससे शहरों की अपेक्षा गांव में लोग ज्यादा स्वस्थ रहते हैं. दिन भर मेहनत करने की वजह से उन्हें जल्दी कोई बीमारी भी नहीं होती है.

2. स्कूल की सुविधा

भले ही गांव में पहले की अपेक्षा ज्यादा विकास होने लगा है. हर तरह की सुविधाएं मिलने लगी है. लेकिन अगर कोई माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहे तो उसके लिए प्राइवेट स्कूल नजदीक में उपलब्ध नहीं हो पाती है.

हर गांव में गवर्नमेंट स्कूल की सुविधा है जिसमें बच्चों को सरकार के तरफ से तो कई तरह के सुविधाएं मिलती है, लेकिन पढ़ाई उतनी बेहतर नहीं हो पाती है. जिससे हर पेरेंट्स अपने बच्चों को शहर में अच्छे एजुकेशन देने के लिए पढ़ाना चाहते हैं.

शहर में एक से बढ़कर एक प्राइवेट स्कूल, इंस्टीट्यूट, कोचिंग आदि मिल जाएंगे. जहां पर बच्चे अपने भविष्य के बारे में अच्छे से प्रेरणा ले पाते हैं. एक से बढ़कर एक डिग्री प्राप्त करके अपना फ्यूचर बेहतर बना सकते हैं.

3. रोजगार

आज के समय में भी गांव में लो ज्यादातर खेती-बाड़ी करके ही अपना जीवन यापन करते हैं. कुछ ऐसे भी लोग हैं जो कि खेती-बाड़ी छोड़कर अपना खुद का छोटा मोटा बिजनेस करके जीवन यापन करते हैं.

लेकिन अगर कोई ज्यादा पैसा कमाना चाहता है अपने परिवार को ज्यादा सुख सुविधा देना चाहता है तो उन्‍हें गांव छोड़कर शहर में ही जाना पड़ता है. गांव में रोजगार करने के लिए ज्यादा सुविधाएं नहीं मिल पाती है.

शहरों में रोजगार के कई तरीके मिल जाते हैं. कई सुविधाएं मिल जाती है और शहरों में बड़े-बड़े स्कूल बड़ी-बड़ी कंपनियां आदि मौजूद है.

जिससे कि लोगों को रोजगार मिलने में ज्यादा परेशानी नहीं होती है. अगर कोई अपना खुद का बिजनेस भी करना चाहे तो अच्छे से बिजनेस करके ज्यादा कमाई कर लेते हैं.

4. रहने का तरीका

शाहरों की अपेक्षा गांव के लोगों के रहने का तरीका बिल्कुल अलग है. गांव में आज के समय में भी लोगों को अपनी सभ्यता और संस्कृति के अनुरूप रहना ही ज्यादा पसंद है. बड़े छोटों का लिहाज करते हैं.

गांव में आज के समय में भी जो औरतें हैं वह अपने जेठ और ससुर के सामने सिर पर पल्‍लु रख कर के ही चलती है. गांव में बच्चे अपने माता-पिता अपने परिवार को एक साथ मिलाकर चलना चाहते हैं. 

अभी भी गांव में कई ऐसे परिवार है जो कि एक साथ संयुक्त परिवार की तरह रहते हैं.लेकिन जो शहर में लोगों का जीवन यापन है वह गांव के अपेक्षा बिल्कुल ही अलग हो गया है.

शहरों में ज्यादातर एकल परिवार ही दिखाई देता है. जिसमें पति पत्नी और उनके बच्चे होते हैं. कई बड़े बड़े लोग तो ऐसे हैं जो कि अपने माता-पिता को बुढ़ापे में वृद्धा आश्रम में भी छोड़ देते हैं. 

क्योंकि उनसे अपने माता पिता की सेवा नहीं हो पाती है. बड़े छोटों का किसी तरह का लिहाज नहीं रहता है. बच्चे अपने माता-पिता के सामने कुछ भी बोलते रहते हैं. शहर में लोग एक दूसरे को देख कर या फिल्में देखकर अपना पहनावा भी बदल देते हैं. फैमिली का फुल फॉर्म क्या हैं

5. खानपान

गांव में जो भी खानपान है वह एकदम शुद्ध और स्वच्छ है. गांव के लोग खुद अपने खेतों में अनाज उपजाते हैं खुद अपने खेतों में सब्जी उपजाते हैं. जिससे उन्हें ताजा ताजा सब्जी और स्‍वक्ष अनाज मिल जाता है. जिसकी वजह से उन्हें बीमारी भी कम होती है.

शहर में लोगों का खान-पान बिल्कुल ही अलग होता है. अधिकतर लोग बाहर का खाना पसंद करते हैं. ज्यादातर लोग फास्ट फूड जैसे कि मोमो, बर्गर, पिज़्ज़ा, चाऊमीन मैगी आदि खाना ही पसंद करते हैं जिससे उन्हें कई तरह की खतरनाक बीमारी हो जाती है. 

सब्जी भी अगर खरीदने जाए तो बाजार में कई दिनों की सूखी सब्जी पानी डालकर बेचते हैं. अनाजों में कई तरह केमिकल मिलाकर पोलिस करके देते हैं जोकि बीमारियों का घर हो गया है.

गांव में लगभग हर घर में गाय या भैंस रहती हैं जिससे शुद्ध दुध मिल  जाता हैं. लेकिन शहर में पैकेट का दुध खरीदते हैं या गााय का भी दुध लेते हैं तो उसमें मिलावट का डर रहता हैं.

6. हॉस्पिटल की सुविधा

शहर में कई बड़े-बड़े हॉस्पिटल जगह जगह पर मिल जाएंगे. अगर किसी को आधी रात में भी कोई बीमारी हो गई किसी तरह की परेशानी हो गई तो हॉस्पिटल में आसानी से जाकर उसका इलाज करा सकते हैं. शहर के हॉस्पिटल में हर तरह की सुविधा भी मिल जाती है.

गांव में अगर किसी को छोटी मोटी बीमारी हुई तो गांव में भी छोटे-छोटे डॉक्टर मिल जाएंगे जिससे कि इलाज हो जाता है.

लेकिन अगर किसी को रात के समय में कोई बड़ी बीमारी हो जाती है ज्यादा परेशानी हो जाती है तो व्यक्ति जल्दी हॉस्पिटल नहीं पहुंच पाता है. उसके लिए उसे शहर में जाना पड़ता है. क्योंकि आस-पास कोई बड़ा हॉस्पिटल का सुविधा नहीं मिल पाता है. sabse sasta kapda kahan milta hai

7. यातायात साधन

वर्तमान समय में तो हर गांव में लगभग सड़क की सुविधा हो गई है. हर गांव में गली गली में सरकार के द्वारा सड़क बनाई गई है.

लेकिन आज भी अगर कहीं ट्रेन पकड़ना हो एक जगह से दूसरी जगह जाना हो तो किसी का अगर अपना खुद का गाड़ी नहीं है, तो उस व्यक्ति को परेशानी हो जाती है. क्योंकि घर से निकलना हैं तो बस टैक्सी आदि नहीं मिल पाती है.

शहर में रोड पर कई गाड़ियां दिन भर चलती रहती है. अगर कहीं जाना है तो एक नहीं कई गाड़ी मिनट मिनट पर ही मिल जाती है. इसलिए अगर किसी को कहीं जाना है तो असुविधा नहीं हो पाती है. बहुत ही जल्दी कोई न कोई साधन मिल जाता है.

8. रहन सहन

शहरों में गांव की अपेक्षा लोगों का रहन सहन ही अलग है. शहर में किसी को भी अपने अलावा दूसरे से मतलब नहीं होता है. हर कोई अपने ही कार्य में व्यस्त रहता है. अपने परिवार अपने बच्चे में उसका पूरा दिन निकल जाता है. 

अगर कोई नौकरी करता है तो सुबह से लेकर शाम तक उसी में उसका समय व्यतीत हो जाता है. किसी को अपने परिवार के साथ कुछ समय बैठकर बात करने का साथ में बैठकर खाना खाने का कहीं घूमने का भी समय नहीं है.

एक दूसरे से आगे निकलने के लिए लोग भागदौड़ करते रहते हैं. किस तरह से ज्यादा पैसे कमाया जाए हजार तरीके ढूंढते रहते हैं. 

लेकिन अपने लिए कभी भी वह समय नहीं निकाल पाते हैं. गांव में आज भी लोग एक दूसरे से मिलजुल कर रहते हैं. अपने परिवार के साथ बैठकर बातचीत करते हैं. रिश्तेदारों के बारे में सलाह मशवरा लेते हैं.

गांव में अगर किसी के घर में किसी तरह की परेशानी हो जाती है तो दूसरे घर के लोग सहायता करते हैं. अगर किसी के घर में शादी विवाह है तो आसपास के लोग मिलकर हर कार्य बहुत ही आसानी से करवाते हैं. लेकिन शहर में जब तक किसी को इनविटेशन नहीं मिलता है कोई किसी के घर नहीं जाता है.

9. पानी की सुविधा

गांव में पानी की किसी तरह की परेशानी नहीं है. पानी के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं देना पड़ता है. हर घर में हैंडपंप या टंकी के द्वारा पानी प्राप्त होता है. लेकिन शहर में पानी के लिए भी पैसा देना पड़ता है.

अगर कोई रेंट पर है तो उसे बिजली पानी को सोच समझकर ही खर्च करना पड़ता है. बाहर अगर किसी को प्यास भी लग गया तो उसे कहीं भी पानी नहीं मिल सकता बस दुकान पर अगर पैसा रहे तभी पानी प्राप्त कर सकते है.

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निष्कर्ष

Village गांव और शहर के जीवन में बहुत ही ज्यादा अंतर है. भले ही आज के समय में गांव में भी हर तरह की सुविधाएं प्राप्त हो रही है, Gaon aur Shahar mein antar लेकिन अभी भी गांव और शहर में जमीन आसमान का अंतर है. जितनी खुली हवा में आजादी से गांव के लोग रह सकते हैं उतने शहर के लोग नहीं रह सकते हैं. 

शहर के लोग एक या दो कमरे में रह कर अपनी दुनिया समझते हैं. वही गांव के लोगों का 8 या 10 रूम का भी घर होता है तो छोटा ही लगता है. अपने ही खेत में खेती करके अनाज उपजा कर घर में रखते हैं.

लेकिन शहर में 10 किलो 20 किलो अनाज खरीद कर लाते हैं, उसी में खुश रहते हैं. गांव और शहर में क्या क्या अंतर है के बारे में इस लेख में जानकारी दी गई है जो कि आपको भी जरूर पसंद आएगी.

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