पटना का गोलघर किसने बनवाया

पटना की पहचान पटना गाेलघर Golghar patna in hindi पटना के गोलघर से किया जाता हैं दूर-दूर से पर्यटक आते हैं और पटना के गोलघर को देखते हैं वैसे तो पटना में बहुत सारे दर्शनीय स्थल हैं लेकिन पटना का गोलघर का इतिहास बहुत ही पुराना हैं.

इसकी ऊंचाई गोलघर की चौड़ाई लोगो के लिए एक आकर्षण का चीज होता हैं लेकिन गोलघर का निर्माण किसने करवाया पटना का गोलघर किस वर्ष में बनाया गया के बारे में जानकारी हम लोग इस लेख में प्राप्त करेंगे.

तो आइए हम लोग इस लेख में पटना को गौरवान्वित करने वाला और पटना को मुख्य आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए मशहूर गोलघर कब बनाया गया

पटना के गोलघर बनाने के पीछे क्या उद्देश्य था गोलघर में कितनी सीढ़ियां हैं इसका नाम गोलघर क्यों पड़ा इसके वास्तुकार और संरचना कैसे हुआ और किस लिए किया गयाके बारे में पूरा जानते हैं.फादर्स डे कब मनाया जाता हैं

पटना का गाेलघर कियने बनवाया

पटना का गोलघर का इतिहास बहुत ही पुराना हैं जब भारत अंग्रेजों के अधीन था उसी समय यहां के जो तत्कालीन गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग थे उन्होंने ही गोलघर बनाने का काम किया अंग्रेजों द्वारा बनाया गया.

यह एक ऐतिहासिक स्थल गोलघर हैं गोलघर अपने ऊंचाई के लिए चौड़ाई के लिए लोगों में एक आकर्षण का केंद्र पहले भी था और आज भी हैं. बिहार की राजधानी पटना में स्थित लगभग 300 साल पुराना भवन गोलघर का निर्माण अनाज भंडारण के लिए किया गया था.

Golghar patna in hindi

जो कि आज भी पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र हैं लोग दूर-दूर से आकर इसको देखते हैं इस गोलघर में अनाज का भंडारण करने के लिए वारेन हेस्टिंग्स ने बनवाया था कहा जाता हैं कि गोलघर में 140000 टन अनाज रखा जा सकता हैं.

वैसे इस गोलघर का उपयोग 1999 तक अनाज भंडारण के लिए होता था लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया हैं

उस समय गोलघर को गोदाम के रूप में अनाज भंडारण करने के रूप में निर्माण किया गया था लेकिन वर्तमान समय में गोलघर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं.तिरंगे झंडे को किसने बनाया था

गोलघर किसने बनवाया 

पटना का गाेलघर बनाने के लिए गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग ने योजना बनाई थी लेकिन गोलघर का ढांचे का निर्माण ब्रिटिश इंजीनियर कैप्टन जॉन गार्स्टिन ने किया था.

पटना का गोलघर आज भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं बहुत ही दूर दूर से लोग पटना का गोलघर देखने के लिए आते हैं.

वैसे गोलघर का देखरेख करना जरूरी हैं क्योंकि इसकी सीढ़ियां धीरे-धीरे टूटने लगी हैं क्योंकि लगभग 300 वर्ष पुराना यह इमारत हैं कुछ दिन पहले इसके दरवाजे और ऊपरी दीवारों पर कुछ दरारे आई थी जो कि सुर्खी चूना गुड और गोंद से भरा गया था.

अगर पटना का गोलघर पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह ऐतिहासिक स्मारक टूटने लगेगा जो कि हमारे बिहार का और पटना का एक पहचान हैं वैसे इसके संरक्षण में सरकार ने कई पहल की हैं इसमें कई लेजर लाइट की व्यवस्था की गई हैं इसमें साफ सफाई का कार्य भी हो रहा हैं.

गोलघर का निर्माण कब हुआ था

पटना बिहार की राजधानी हैं गंगा नदी के तट पर बसे पटना शहर का इतिहास भी बहुत पुराना हैं यहां पर कई वंश का उद्भव हुआ स्वतंत्रता संग्राम में भी पटना शहर का मुख्य भूमिका रहा हैं

पहले इसका नाम पाटलीपुत्र था बाद में बदल कर इसका नाम पटना कर दिया गया और पटना का पहचान यहां के गोलघर से ज्यादा होती हैं गोलघर का निर्माण 1786 में हुआ था.

20 जनवरी 1784 को ब्रिटिश इंजीनियर कैप्टन जॉन गार्स्टिन ने गोलघर का ढांचा तैयार किया था और इस गोलघर का निर्माण कार्य 20 जुलाई 1786 में पूरा तरह से पूर्ण हुआ था.

पटना का गोलघर का ऊंचाई बहुत ही ज्यादा हैं गोलघर पर चढ़ने के बाद पूरा पटना दिखाई देता हैं इसके इसी ऊंचाई के वजह से यह पटना के सबसे पुराना और सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल के रूप में जाना जाता हैं.सोनपुर का मेला कब लगता हैं

गोलघर का निर्माण का उद्देश्य क्या था

गोलघर तो सभी लोग देखते हैं लेकिन यह भी जानना आवश्यक हैं कि इसका निर्माण क्यों किया गया था

इसको बनाने के पीछे अंग्रेज गवर्नर वारेन हेस्टिंग्स का मुख्य उद्देश्य क्या था किस कारण उन्‍होंने इतना भव्य घर बनाया था गोलघर बनाने का सबसे जो मुख्य उद्देश्य 1770 में बहुत ही भयंकर अकाल पडा था वहीं हैं.

जिस वजह से बिहार में और बंगाल में लगभग करोड़ों लोगों की मौत हो गई थी यह एक त्रासदी के रूप में आया था जिसमें कि कई लोगों ने अकाल की वजह से खाना नहीं मिलने से भूखे अपनी जान गवा दी थी

इसी को देखते हुए वारेन हेस्टिंग ने एक ऐसा घर बनाने के बारे में सोचा जिसमें की बहुत सारा अनाज स्टोर करके रखा जा सके जिससे कि सैनिकों को कोई परेशानी ना हो.

गोलघर नाम क्यों पड़ा

पटना का गोलघर का नाम गोलघर क्यों पड़ा इसके बारे में भी बात कहा जाता हैं कि यह ऐतिहासिक बिल्डिंग चारों तरफ से गोल हैं यह गोल घेरा में निर्मित किया गया हैं इसलिए इसे गोलघर नाम दिया गया.

इसकी संरचना और आकर्षण देखते बनती हैं गोलघर का ऊंचाई इतना ज्यादा हैं इसके ऊपर से पूरे पटना को देखा जा सकता हैं वैसे तो वर्तमान समय में कई ऊंची ऊंची बिल्डिंग बन गए हैं लेकिन आज भी गोलघर बहुत ही प्रसिद्ध हैं और पटना का पहचान हैं.क्रिसमस डे क्यों मनाया जाता हैं

गोलघर का वास्तुकार कौन थे

गोलघर का डिजाइन ब्रिटिश सरकार का एक इंजीनियर कैप्टन जॉन गार्स्टिन ने बनाया था इस भव्य गोलघर का डिजाइन बनाने में कैप्टन जॉन गार्स्टिन को 3 महीने का समय लगा था क्योंकि इसका डिजाइन एक अलग ही हैं.

गोलघर के ऊपर एक छिद्र बनाया गया हैं जिस पर की अगर कभी अनाज डालना रहता था तो मजदूर गोलघर के ऊपर जाकर उस छिद्र से अनाज नीचे गिराते थे और दूसरी तरफ से नीचे उतर जाते थे.

गोलघर का बनावट संरचना किस तरह का हैं

वैसे आजकल जितने भी बिल्डिंग और मकान बनते हैं उसमें पिलर का इस्तेमाल जरूर किया जाता हैं लेकिन गोलघर एक ऐसा अद्भुत विशाल इमारत हैं जिसमें कि पिलर का इस्तेमाल नहीं किया गया हैं. गोलघर का जो ऊपरी हिस्सा हैं उसको पत्थरों के प्रयोग से बनाया गया हैं.

इसमें ईटों का प्रयोग नहीं किया गया हैं और इसके चारों तरफ सीढी की सहायता से ऊपर चढ़ा जाता हैं यह एक गुंबद के आकृति जैसा दिखता हैं कहा जाता हैं कि गोलघर के अंदर जब एक बार बोला जाता हैं तो वह ध्वनि 27 बार प्रतिध्वनित होती हैं.

गोलघर पर कितनी सीढ़ियां हैं

पटना का गोलघर के ऊपर चढ़ने के लिए सिढियां बनाया गया हैं गोलघर पर 145 सीढ़ी बना हैं जिसकी सहायता से ऊपर चढ़ा जाता हैं और यह सीढ़ी गोलघर के चारों ओर घुमावदार आकार में बना हैं गोलघर का मोटाई 3.6 हैं और इसकी ऊंचाई 95 फीट लगभग माना जाता हैं.

गोलघर के ऊपर एक छिद्र बनाया गया था जिसमें से कि अनाज ऊपर से अंदर रखने के लिए डाला जाता था लेकिन बाद में इस छिद्र को बंद कर दिया गया हैं वैसे वर्तमान समय में गोलघर में कोई भी समान नहीं रखा जाता हैं इसे एक पर्यटन स्थल के रूप में अब देखा जाता हैं.सोनपुर का मेला कब लगता हैं

Golghar kahan hai

गोलघर बिहार की राजधानी पटना में गांधी मैदान के पश्चिम में स्थित हैं इसकी भव्य उचाई के वजह से ही पटना में एक आकर्षण के केंद्र के रूप में देखा जाता हैं गोलघर के ऊपर चढ़ने के बाद गंगा नदी का बहुत ही मनमोहक दृश्य दिखाई देता हैं.

उसके साथ ही पूरे पटना को भी देखा जा सकता हैं वैसे अब तो उसके आसपास कई ऊंचे ऊंचे बिल्डिंग बन गए हैं लेकिन फिर भी गोलघर पटना में प्रसिद्ध हैं पटना का यह पहचान बना हुआ हैं.गंगा नदी के बारे में पूरी जानकारी

 

सारांश 

इस लेख में पटना का गोलघर किसने बनवाया गोलघर कब बनाया गया गोलघर को किस उद्देश्य से बनाया गया था.

इसका डिजाइन किसने बनाया इसका ऊंचाई कितना हैं इसमें सीढ़ियां कितनी हैं Golghar Patna पटना गाेलघर गोलघर के बारे में पूरी जानकारी दी गई हैं Golghar Patna पटना गाेलघर से संबंधित कोई सवाल हैं तो कृपया कमेंट करके जरूर पूछें और इस जानकारी को अपने दोस्त मित्रों रिश्तेदारों को शेयर जरूर करें.

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