बक्‍सर के दर्शनीय स्थल और धार्मिक इतिहास | History of Buxar hindi

History of Buxar in hindi बक्‍सर का इतिहास बहुत ही ज्यादा पुराना हैं इसे रामायण जैसे महाकाव्य में भी Buxar का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा गया हैं.

उसमें Buxar शहर के बारे में बहुत वर्णन मिलता हैं. लेकिन शायद कम ही लोगों को यह जानकारी होगा कि Buxar और भी कई घटनाओं से पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं.

कई लड़ाइयां यहां पर हुई हैं जिससे कि सभी लोग Buxar शहर के बारे में इतिहास में भी पढ़ते हैं तो आइए हम लोग इस लेख में बिहार के इस ऐतिहासिक शहर Buxar में कौन-कौन से धार्मिक स्थल हैं यहां कौन से ऐतिहासिक स्थल हैं.बिहार राज्य के दार्शनिक स्थल

History of Buxar in Hindi 

Buxar शहर भारत के बिहार राज्य में गंगा नदी के तट पर स्थित हैं. यह शहर बिहार के राजधानी पटना से 124 किलोमीटर दूर हैं. यह धार्मिक ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता हैं.

History of Buxar in hindi

Buxar शहर ईस्ट इंडिया कंपनी और मुगल नवाबों के बीच जो लड़ाई हुआ था उससे भी जाना जाता हैं. लेकिन सबसे जो पुराना और ऐतिहासिक इतिहास Buxar का हैं. वह त्रेता युग में जब भगवान श्री विष्णु ने रामा अवतार लिया था तो उस समय भी Buxar शहर का वर्णन हमारे जो सबसे बड़ा महाकाव्य रामायण हैं उसमें मिलता हैं.

बक्‍सर का धार्मिक इतिहास

Buxar को विश्वामित्र की नगरी भी कहा जाता हैं कि की विश्वामित्र ऋषि अपनी कुटिया बनाकर रहते थे. वहां पर बहुत ही ज्यादा साधु संत रहते थे और यज्ञ किया करते थे. लेकिन उसी युग की जो राक्षसी थी जिसका नाम ताड़का था.

उसको मारने के लिए विश्वामित्र जी ने भगवान श्रीराम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण जी को अपने साथ लेकर गए थे. यहां पर भगवान राम और उनके भाई लक्ष्मण जी को विश्वामित्र जी ने शिक्षा भी दिया. भगवान राम ने ताड़का राक्षसी को मारकर के ऋषि मुनियों की सहायता की थी.

Buxar से लगभग 6 किलोमीटर दूर अहिरौली हैं जहां पर कि भगवान राम ने गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का उद्धार किया था. अहिल्या माता जो कि अपने पति के श्राप से पत्थर की बन गई थी.

भगवान श्री राम के एक चरण के स्पर्श से वह पत्थर से मानव शरीर बन गई और अपने श्राप से उधार हुई. Buxar में और उसके आसपास कई धार्मिक धरोहर हैं जिसे की सुरक्षित रखना भी बहुत ही जरूरी हैं.

बक्‍सर शहर में जो हमारी सबसे बड़ी और पवित्र नदी गंगा जी बहती हैं जहां पर कि लोग हर पर्व त्यौहार में गंगा स्नान करने के लिए जाते हैं. एक और पुराणों में Buxar का वर्णन मिलता हैं कि भगवान विष्णु ने जो वामन अवतार लिया था वह बामन भगवान का जन्म स्थली भी Buxar में ही माना जाता हैं.दीपावली का महत्व

बक्‍सर का लड़ाई कब हुआ 

23 अक्टूबर 1764 में Buxar का युद्ध ईस्ट इंडिया कंपनी के जो हीटर मुनरो थे और मुगल के नवाब शाह आलम द्वितीय बंगाल के नवाब मीर कासिम और अवध के नवाब शुजाउदौला के बीच लड़ा गया था. इस युद्ध में अंग्रेजो की जीत हुई थी और उसके बाद बंगालबिहार झारखंड उड़ीसा और बांग्लादेश जो कि उस समय एक ही राज्य था.

इसका दीवानी और राजस्व अंग्रेजी कंपनी कि शासन में चला गया. 1964 का Buxar युद्ध का प्रतीक आज भी हैं जहां युद्ध हुआ था. वह जगह कटकौली हैं वहां पर एक पत्थर के ऊपर स्मारक के रूप में निर्मित हैं और आज भी लोग देखने जाते हैं.

मुगल शासक जब मुगल काल के हुमायूं भारत पर राज्य करते थे. उस समय हुमायूं और शेर शाह के बीच लड़ाई Buxar के निकट चौसा में हुआ था. यह लड़ाई 1539 ईस्वी में लड़ी गई थी.

बक्‍सर की लड़ाई कब लड़ी गई थी 

गंगा नदी के तट पर बसे Buxar शहर 1539 ईसवी में मुगल बादशाह हुमायूं और शेरशाह के बीच में लड़ी गई थी. इस युद्ध को चौसा युद्ध कहा जाता हैं.

1764 ईस्वी में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी और अवध के नवाब शुजाउदौला बंगाल के नवाब मीर कासिम और मुगल बादशाह शाहआलम द्वितीय के बीच लड़ी गई हैं जो कि Buxar युद्ध के नाम से यह लड़ाई प्रसिद्ध हैं और हमारी जो इतिहास के किताब हैं उसमें भी पढ़ने को मिलता हैं.दुर्गा पूजा का महत्‍व

बक्‍सर के दर्शनीय स्थल 

बक्‍सर में दर्शनीय स्थल कदम कदम पर स्थित हैं. लेकिन यह धार्मिक धरोहर अब बहुत ही क्षतिग्रस्त होने लगे हैं.

1. बक्‍सर का किला

जिसमें कि Buxar का किला बहुत ही प्रसिद्ध हैं. बक्‍सर का किला भोजपुर के राजा राजा भोज देव ने बनवाया था. लेकिन वर्तमान समय में टूट कर एक खंडहर जैसा बनता जा रहा हैं Buxar के किला में जो भी बक्‍सर में बड़े-बड़े कार्यक्रम होते हैं वह इसी में होता हैं.

2. कतकौली मैंदान

बक्‍सर शहर में 1964 में जो अंग्रेजों आवाज बंगाल और मुगल शासक के बीच में लड़ा गया था वह मैदान जो कि कतकौली का मैदान कहा जाता हैं. उसमें आज भी उसी युद्ध के प्रतीक मौजूद हैं और जो भी लोग Buxar में जाते हैं वह यहां पर जरूर जाते हैं. यहां पर अंग्रेजों ने अपने जीत का स्मारक बनवाया था.सोनपुर का मेला कब लगता हैं

बक्‍सर में धार्मिक स्थल कौन-कौन हैं 

बक्‍सर में कई धार्मिक स्थल ऐसे हैं जहां पर के विदेश से भी जो सैलानी आते हैं वह घूमने जरूर जाते हैं. बक्‍सर में भगवान श्री राम और उनके भाई लक्ष्मण से जुड़े कई कहानियों में हम पढ़ते हैं.

1. बक्‍सर का नौलखा मंदिर

बक्‍सर में नौलखा मंदिर स्थित हैं जिसमें की भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी ने जब तड़का को मार गिराया था तो वह मूर्ति के रूप में आज भी स्थित हैं. यह मंदिर बहुत ही खूबसूरत और आकर्षक हैं. इस मंदिर में बहुत सारे शीशा हैं.

जिसमें कि कई तरह से खड़े होने पर आकृति दिखाई देती हैं. इसलिए इस मंदिर को शीश मंदिर भी कहा जाता हैं. जो भी श्रद्धालु बक्‍सर जाता हैं वह इस मंदिर में जरूर जाते हैं और दूर-दूर से पर्यटक भी यहां पर घूमने जरूर आते हैं.

2. सीताराम उपाध्याय म्यूजियम

सीताराम उपाध्याय म्यूजियम बक्‍सर में स्थित हैं. जहां पर के भगवान श्री राम सीता जी से जुड़े कई समान इसमें सुरक्षित रखा गया हैं. कई पुरातात्विक अवशेष सिक्का पांडुलिपि आदि मौर्य काल के जो प्रतीक हैं वह भी इस म्यूजियम में सुरक्षित रखा गया हैं. इस म्यूजियम का निर्माण 1979 में किया गया था.

3. बक्‍सर के नाथ जी का मंदिर

बक्‍सर में नाथ जी का मंदिर भी बहुत ही प्रसिद्ध हैं. जोकि भगवान शिव का मंदिर हैं. Buxar में गंगा नदी के किनारे कई ऐसे घाट हैं जहां पर कि लोग पर्व त्यौहार को स्नान और दान करने भी जाते हैं जैसे कि रामरेखा घाट.

बिहार का सबसे प्रसिद्ध पंचकोशी मेला Buxar में ही लगता हैं जो कि 5 दिन 5 गावों में घूम घूम के लोग जो भगवान श्रीराम ने खाना बनाकर खाया था वही बनाकर खाते हैं और पांचवे दिन चरित्रवन में लिट्टी और चोखा बना कर खाते हैं.गंगा नदी के बारे में पूरी जानकारी

सारांश

बक्‍सर शहर जोकि गंगा नदी के तट पर स्थित हैं यह सिर्फ बिहार या भारत में नहीं हैं पूरे विश्व में भी प्रसिद्ध हैं. क्योंकि यह शहर रामायण महाकाव्य में वर्णित हैं.

History of Buxar in hindi इस लेख में ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल Buxar के बारे में पूरी जानकारी दी गई हैं. आप लोगों को यह जानकारी कैसा लगा कृपया हमें कमेंट करके जरूर बताएं और शेयर जरूर करें.

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