Jankavi Nagarjun – जनकवि नागार्जुन के जीवन परिचय

Jankavi Nagarjun Biography in hindi भारतीय हिंदी साहित्य में बहुत सारे लेखक ,लेखिका ,कवि , कवियित्री आदि हुए हैं इस लेख में जनकवि नागार्जुन के बारे में बात करने वाले हैं नागार्जुन एक कवि होने के साथ प्रगतिवादी विचारधारा के लेखक भी माने जाते थे

Nagarjun हिंदी और मैथिली के प्रसिद्ध लेखक कवि थे उन्हें जनकवि नागार्जुन भी कहा जाता था कुछ लोग उन्‍हें बाबा नागार्जुन भी बोलते थे ज्यादातर वह इसी नाम से मशहूर थे

उनकी रचनाओ में भारतीय जनजीवन के बारे में विशेष रूप से लिखा रहता था हिंदी के महान लेखक जनकवि बाबा नागार्जुन  के नाम से मशहूर होने वाले कवि के जीवनी के बारे में आइए जानते है कि जनकवि नागार्जुन का जन्‍म कहां हुआ उनका विवाह किससे हुआ उन्‍होनें शिक्षा कहां से प्राप्‍त की थी उनकी कौन कौन सी रचनाएं हैं

Jankavi Nagarjun Biography in hindi

नागार्जुन हिंदी में जनकवि नागार्जुन नाम से तथा मैथिली में यात्री नाम से अपनी रचनाओं को लिखते थे। उनका नाम मुख्यता शून्यवाद के रूप में विशेष रुप से जाना जाता है वह मैथिली के सबसे प्रसिद्ध  कवि माने जाते हैं

उन्होंने प्रकृति और भारतीय किसानों के जीवन को भी अपनी रचनाओं में दर्शाया हैंं। उन्‍होंने अपनी रचनाओं में राजनीति, आम लोगों की समस्याएं ,किसानों के बारे में ज्यादा उल्लेख किया हैं। उनकी रचनाओं के लिए बहुत सारे उन्हें सम्मान भी मिले हैं

Jankavi Nagarjun Biography in hindi

नागार्जुन एक कवि होने के साथ ही एक प्रसिद्ध उपन्यासकार भी थे यह वामपंथी विचारधारा के कवि माने जाते थे नागार्जुन मैथिली के सबसे श्रेष्ठ कवियों में एक माने जाते हैं।

नागार्जुन का जन्म 

जनकवि नागार्जुन का जन्म 30जुन 1911 में हुआ था यह बिहार राज्य के मधुबनी जिला के सतलाखा गांव के रहने वाले थे नागार्जुन के पिताजी का नाम गोकुल मिश्र और उनकी माता का नाम उमा देवी था

इनके बचपन का नाम ठक्कन मिश्रा था लेकिन कुछ दिनों बाद इनका नाम वैद्यनाथ मिश्र रखा गया जनकवि नागार्जुन का यही असली नाम था लेकिन उन्होंने नागार्जुन और यात्री नाम से अपनी रचनाएं लिखी है।

कवि नागार्जुन के माता का बचपन में ही मृत्यु हो गया था जिसके बाद उनके पिता ने ही उनका पालन पोषण किया था अपने पिता के साथ वह जहां जहां उनके पिता जाते थे वहां वहां घूमते रहते थे

गांव गांव अन्य सगे संबंधियों के यहां अपने पिता के साथ जाने की वजह से उनका जीवन एक घुमक्कड़ स्वभाव का हो गया था वह कहीं भी एक जगह नहीं रह पाते थे।

नाम जनकवि नागार्जुन
असली नाम वैद्यनाथ मिश्र
जन्‍म 30जुन 1911
पिता का नाम गोकुल मिश्र
माता का नाम उमा देवी
बचपन का नाम ठक्‍कन मिश्रा
पत्नि का नाम अपराजिता देवी
कविता संग्रह युग धारा,सतरंगी पंखों वाली,प्यासी पथराई आंखें

तालाब की मछलियां,हजार हजार बाहों वाली,पुरानी ज्योतिषियों का कोरस,भस्मासुर,भूमिजा,आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने,रत्न गर्भ,तुमने कहा था आदि

उपन्‍यास रतिनाथ की चाची,बलचनमा,नई पौध,बाबा बटेश्वर नाथ,वरुण के बेटे,दुख मोचन,कुंभीपाक,जमानिया का बाबा,गरीबदास,हीरक जयंती,उग्रतारा
संस्‍मरण एक व्यक्ति एक युग,कहानी संग्रह,आसमान में चंदा तेरे,बाल साहित्य,कथा मंजरी भाग 1,कथा मंजरी भाग 2,मर्यादा पुरुषोत्तम राम,विद्यापति की कहानियां
मैथिली कविता संग्रह चित्रा,पत्रहीन नग्न गाछ,पक्का है यह कटहल
मैथिली उपन्‍यास पारो,नवतुरिया
सम्‍मान अकादमी पुरस्कार,मैथिलीशरण गुप्त सम्मान,

शिखर सम्मान,साहित्य अकादमी इत्यादि

मृत्‍यु  5 नवंबर 1998

नागार्जुन के बचपन का नाम

नागार्जुन के बचपन का नाम ठक्कन भी था उनके इस नाम के पीछे भी एक कहानी है कहा जाता है कि नागार्जुन के पिता गोकुल मिश्र की चार संताने हुई थी लेकिन वह कोई भी संतान जीवित नहीं रही जिस वजह से उनके माता-पिता बहुत चिंतित रहते थे

और वह झारखंड में बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर में जाकर के भगवान शंकर के पूजा आराधना किया जिसके बाद उन्हें पांचवा पुत्र प्राप्त हुआ

लेकिन उनके माता-पिता को डर लग रहा था कि कहीं यह भी पुत्र हमें छोड़कर न चला जाए हमें ठग कर न चल बसे इसीलिए उन्होंने ठक्कन मिश्रा उनका नाम रखा बाद में जब उनका नामकरण हुआ तो भगवान बैद्यनाथ के पूजा-पाठ उपासना के वजह से हुए थे इसीलिए उनके माता-पिता ने उनका नाम वैद्यनाथ मिश्र रखा था।

जनकवि नागार्जुन के शिक्षा 

नागार्जुन का असली नाम वैद्यनाथ मिश्र था वैद्यनाथ मिश्र के शुरुआती पढ़ाई घूम घूम कर हुई थी उस समय के धनी आदमी अपने यहां के निर्धन बच्चों को जागरूक किया करते थे इन्हीं सिलसिले में Jankavi Nagarjun भी कई गांव में घूमे थे

लेकिन कुछ दिन बाद उन्होंने अपनी विधिवत पढ़ाई बनारस से जाकर संस्कृत  भाषा से किया था नागार्जुन हिंदी मैथिली संस्कृत तथा बांग्ला के बहुत बड़े ज्ञानी थे बांग्ला में भी अपनी कविताएं लिखी हैं उन्होंने इन सभी भाषाओं में अपनी कविताएं लिखी हैं ।

उनको बौद्ध धर्म के प्रति झुकाव था नागार्जुन एक ऐसे व्यक्ति थे। जो एक जगह टिक कर नहीं रहते थे तो वो बनारस से निकलकर कोलकाता चले गए उसके बाद घूमते घूमते लंका के प्रसिद्ध  विद्या अलंकार  परिवेण से बौद्ध धर्म के दीक्षा ली थी

उसी समय बौद्ध धर्म का अध्ययन दर्शन करते हुए उनकी रूचि राजनीति की ओर जगी । उस समय भारत में स्वतंत्रता आंदोलन  चल रही थी जिस ओर उनकी नजर पहुंची उसके बाद उन्होंने 1938 के लगभग लंका से वापस भारत लौट आए और अपने साहित्य रचनाओं के साथ-साथ राजनीतिक आंदोलन में भी अपनी भूमिका प्रत्यक्ष  निभाई ।

जनकवि नागार्जुन का विवाह

नागार्जुन का राजनीति स्वतंत्रता आंदोलन लेखन आदि में विशेष रूचि था वह स्वामी सहजानंद से प्रभावित होकर किसान आंदोलन में शामिल हुए थे कई बार जेल भी गए थे जयप्रकाश नारायण के साथ कई आंदोलनों में उन्होंने साथ दिया था और गिरफ्तार कर लिए गए थे

नागार्जुन कई जगहों पर हमेशा घूमा करते थे कहीं एक जगह टिक कर कभी नहीं रहते थे इसलिए उन्‍हें कई भाषाओं का भी ज्ञान था संस्कृत प्राकृत पाली आदि। जनकवि नागार्जुन का विवाह अपराजिता देवी से हुआ था अपराजिता देवी से नागार्जुन को 5 बच्चे भी थे।

नागार्जुन का राजनीतिक जीवन

जनकवि नागार्जुन लंका में बौद्ध धर्म की शिक्षा लेने के बाद जब भारत वापस आए उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उस समय बिहार में किसान आंदोलन चल रहा था जिसमें उन्होंने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

उसी समय बाबा नागार्जुन सहजानंद सरस्वती से काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने किसान आंदोलन में भाग लिया।वो मार भी खाए और उसके बाद जेल भी गए। जेल में भी उन्होंने बहुत समय बिताए।

उन्होंने 1974 में जेपी आंदोलन में भी भाग लिया था । अनशन पर भी बैठे थे उसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्‍हें जेल भेज दिया गया। काफी दिनों तक जेल में उन्होंने अपना समय बिताया।

नागार्जुन का सहित्यिक जीवन

बाबा नागार्जुन का असली नाम वैद्यनाथ मिश्र था लेकिन उन्होंने हिंदी में नागार्जुन उपनाम से कविताएं लिखी हैं और मैथिली में यात्री उपनाम से अपनी रचनाएं लिखी है उन्होंने  वाराणसी में रहते हुए अपनी कविताएं वैद्य उपनाम से लिखा है

फिर 1936 में जब वह लंका के विद्यालंकार परिवेण में शिक्षा ले रहे थे उस समय उन्होंने नागार्जुन नाम ग्रहण किया शुरू शुरू में उनका कुछ कविताएं यात्री नाम से ही छपी थी लेकिन बाद में उन्होंने अपनी रचनाएं नागार्जुन नाम से ही लिखना शुरू किया था।

नागार्जुन की पहली कविता मैथिली में ही छपी थी जोकि मैथिली नामक पत्रिका में छपी थी उन्हें उन्होंने बहुत सारी रचनाएं लिखी है जिनमें कविता उपन्यास कहानी संस्मरण यात्रा वृतांत निबंध बाल साहित्य आदि लिखे हैं।

वह हिंद, मैथिली,संस्कृत के अलावा बांग्ला भाषा के भी अच्छे जानकार थे।  बांग्ला भाषा और साहित्य से उनका लगाााव  था। उन्होंने बनारस से अपनी पढ़ाई के समय बांग्ला भाषा का भी पढ़ाई किया था। उन्होंने बांग्ला भाषा में अपनी कुछ रचनाएं भी की है। बांग्ला भाषा में 50 कविताएं लिखी थी।

कालिदास नागार्जुन के सबसे प्रिय कवि थे। उन्होंने कालिदास के मेघदूतम का अनुवाद किया हैंं। उन्होंने बहुत सारे रचनाओं का अनुवाद किया हैंं।विद्यापति के गीतों का और उनकी 13 कहानियों का भी अनुवाद किया हैंं। जो कि विद्यापति की कहानियां केे नाम से प्रकाशित हुई थीं।

जनकवि नागार्जुन का लेखन कार्य

कवि नागार्जुन हिंदी में नागार्जुन के नाम से अपनी कविताएं लिखा करते थे लेकिन वह मैथिली में भी प्रसिद्ध कवि थे मैथिली में जो भी उन्होंने कविताएं लिखी वह यात्री उपनाम से लिखते थे नागार्जुन नाम उन्हें 1936 में सिंघल में विद्यालंकार परिवेण हुआ था

जिसमें कि उन्हें नागार्जुन नाम मिला था शुरू में जब उन्होंने कविताएं लिखना शुरू किया तो उस समय यात्री उपनाम से ही लिखते थे

लेकिन जब उन्हें नागार्जुन नाम मिल गया तो इसी नाम से हिंदी में लिखना शुरू किये मैथिली में उनका सबसे पहला रचना 1929 में मैथिली पत्रिका में छपी थी और हिंदी में राम के प्रति नाम का कविता 1934 में विश्व बंधु सप्ताहिक पत्रिका में सबसे पहली बार छपी थी।

इसके बाद तो उनके रचनाएं एक से एक होने लगी कई कविता कहानी, उपन्यास, संस्मरण, यात्रा वृतांत, बाल साहित्य, निबंध आदि उन्होंने लिखे हैं

हिंदी मैथिली संस्कृत आदि भाषाओं में तो जनकवि नागार्जुन ने कई रचनाएं की है लेकिन साथ ही उन्होंने बांग्ला भाषा में भी कई रचनाएं की है उन्हें बांग्ला भाषा से भी बहुत लगाव था बांग्ला में सबसे पहले 1978 में उन्होंने लिखना शुरू किया था नागार्जुन की कई उपन्यास का दूसरी भाषाओं में भी अनुवाद हुआ है

नागार्जुन का व्यक्तित्व

जन के कवि यानी लोगों के बारे में लिखने वाले आम बोलचाल भाषा फक्कड़ साधुक्‍कड़ी प्रवृत्ति के नागार्जुन एक कवि और लेखक थे उन्हें बाबा या जनकवि नागार्जुन कहा जाता था नागार्जुन के रचनाओं की विशेषता यह थी

चाहे वह लिख कविता हो चाहे किसी व्यक्ति से बातचीत हो वह व्यंग जरूर करते थे जनकवि नागार्जुन ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी

वह एक प्रगतिवादी विचारधारा के कवि थे इसीलिए हिंदी साहित्य में उनका स्थान एक महत्वपूर्ण माना जाता है उनकी रचनाएं ऐसी होती थी कि लोग उसे जब पढ़ते थे तो उनके अंदर एक नई ऊर्जा उत्पन्न हो जाती थी

उन्होंने अपने कविताओं के फलस्वरुप लोगों में चेतना फैलाई जनकवि नागार्जुन सरकार, समाज, राजनीति, आम जनता किसी के भी प्रति अगर जरूरत पड़ता था तो व्यंग के बाण जरूर छोड़ते थे

उन्होंने किसानों और मजदूरों की समस्याओं को बहुत ही अच्छे से समाझ कर के अपनी रचनाओं के द्वारा अपने अंदर का संवेदना उन्होंने लोगों को बताया है नागार्जुन आर्य समाज के विचारों से बहुत प्रभावित थे और साथ ही बौद्ध धर्म के प्रति भी उनका झुकाव था बौद्ध धर्म के दर्शन के लिए वह लंका तक पहुंच गए थे।

जनकवि नागार्जुन के कुछ प्रसिद्ध रचनाएं 

  • कविता संग्रह
  • युग धारा
  • सतरंगी पंखों वाली
  • प्यासी पथराई आंखें
  • तालाब की मछलियां
  • हजार हजार बाहों वाली
  • पुरानी ज्योतिषियों का कोरस
  • भस्मासुर
  • भूमिजा
  • आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने
  • रत्न गर्भ
  • तुमने कहा था आदि

नागार्जुन का उपन्यास 

  • रतिनाथ की चाची
  • बलचनमा
  • नई पौध
  • बाबा बटेश्वर नाथ
  • वरुण के बेटे
  • दुख मोचन
  • कुंभीपाक
  • जमानिया का बाबा
  • गरीबदास
  • हीरक जयंती
  • उग्रतारा

Jankavi Nagarjun के संस्मरण

  • एक व्यक्ति एक युग
  • कहानी संग्रह
  • आसमान में चंदा तेरे
  • बाल साहित्य
  • कथा मंजरी भाग 1
  • कथा मंजरी भाग 2
  • मर्यादा पुरुषोत्तम राम
  • विद्यापति की कहानियां

नागार्जुन की मैथिली की कुछ प्रमुख रचनाएं 

कविता संग्रह

  • चित्रा
  • पत्रहीन नग्न गाछ
  • पक्का है यह कटहल

उपन्यास

  • पारो
  • नवतुरिया

नागार्जुन को मिले सम्मान और पुरस्कार

जनकवि नागार्जुन एक अप्रतिम प्रसिद्ध महान लेखक और कवि थे उन्हें कई भाषाओं का ज्ञान था उन्होंने कई भाषाओं में रचनाएं की है इसीलिए उन्हें प्रगतिशील विचारधारा के साहित्यकार के रूप में भी जाना जाता है

नागार्जुन को उनकी प्रसिद्ध और महान रचनाओं के लिए कई सम्मान और पुरस्कार भी मिले हैं।नागार्जुन को बहुत सारे पुरस्कार भी मिले हैं जैसे कि

  • अकादमी पुरस्कार,
  • मैथिलीशरण गुप्त सम्मान
  • शिखर सम्मान,
  • साहित्य अकादमी इत्यादि।

नागार्जुन की मृत्यु 

जनकवि नागार्जुन मार्क्सवादी  थे वह मार्क्सवाद से काफी प्रभावित थे उन्होंने जयप्रकाश नारायण से प्रभावित होकर उनकी बहुत सारे आंदोलनों में भाग लिया था क्रांतिकारीता में नागार्जुन का बहुत विश्वास था

इसलिए उन्होंने जयप्रकाश नारायण के अहिंसक क्रांति से लेकर नक्सलियों की क्रांति को भी समर्थन किया था नागार्जुन के ऊपर बहुत सारे लेखकों ने बहुत सारी रचनाएं की है। 5 नवंबर 1998 को जनकवि बाबा नागार्जुन का मृत्यु हो गया इस तरह एक हिंदी साहित्य के जनकवि का अंत हो गया।

सारांश

नागार्जुन एक महान प्रसिद्ध  कवि एक लेखक के साथ-साथ एक क्रांतिकारी और समाज सेवक भी थे अपने कविताओं या लेखकों के माध्यम से उन्होंने समाज में फैले माननीय कृतियों कुरीतियों प्रथाओं पर भी व्यंग बाण छोड़े हैं

उन्होंने अपने रचनाओं के माध्यम से समाज में किसानों और गरीबों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाया था उनकी रचनाएं ऐसी होती थी जो कि कोई पढ़ना शुरू करता था तो बिना अंत तक पढ़े नहीं छोड़ता था इस लेख में जनकवि नागार्जुन के बारे में पूरी जानकारी दी गई है

जिसमें कि नागार्जुन का जन्म कहां हुआ नागार्जुन के माता पिता कौन थे उनका विवाह किससे हुआ है उन्होंने शिक्षा कहां से प्राप्त की थी नागार्जुन स्वतंत्रता आंदोलन में अपना कैसे सहयोग दिया था उन्होंने कौन-कौन से रचनाएं की है

उनकी मृत्यु कब हुई उन्हें कौन कौन सा सम्मान मिला। जनकवि बाबा नागार्जुन के बारे में दी गई जानकारी आप लोगों को अच्छा लगा हो तो हमें कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं और शेयर भी जरूर करे

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