Keshav Das – केशव दास कौन थेंं

आचार्य केशवदास कौन थे और वह कहां के रहने वाले थे यह सारी जानकारी हम लोग इस लेख में जानेंगे Keshav Das in hindi हम लोग इस लेख में केशवदास के जीवनी के बारे में पूरी जानकारी जानने वाले हैं

केशव दास एक रसिक कवि थे राजा इंद्रजीत सिंह के दरबारी कवि थे उन्हें राजा इंद्रजीत सिंह के तरफ से 21 गांव दान में मिले थे उसी गांव में रहकर के वह अपना जीवन बहुत ही विलासिता पूर्वक और आत्मसम्मान से जीते थे

रीतिकाल में कई प्रसिद्ध कवि हुए जिन्होंने अपनी कविताओं से अपना नाम इतिहास में प्रसिद्ध कर लिया उसी तरह केशवदास भी एक प्रसिद्ध कवि थे तो आइए नीचे किशोर दास के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Keshav Das biography in hindi

आचार्य केशव दास एक सुप्रसिद्ध कवि थे उन्हें रीतिकाल के प्रवर्तक के रूप में भी जाना जाता है केशवदास शृंगारिक कवि थे और वह राम भक्ति शाखा के कवि माने जाते हैं कि उन्होंने राम भक्ति में कई सारे कविता लिखे हैं। आचार्य केशव दास एक प्रसिद्ध राम भक्ति शाखा के कवि माने जाते थे

वह ओरछा राज्य के राजा इंद्रजीत सिंह के दरबारी कवि थे और उनके मंत्री और गुरु भी थे वह संस्कृत के प्रकांड पंडित है वह संस्कृत में हीं ज्यादा किसी से भी बात करना चाहते थे क्योंकि उनका मानना था कि हिंदी में बात करना अपमानजनक है उनका कहना था कि संस्कृत हमारा असली भाषा है।

Keshav Das in hindi

केशवदास की रचनाओं में श्रृंगार रस की प्रधानता होती थी और उन्हें रीतिकाल के प्रवर्तक कवि के रूप में हम लोग जानते हैं आचार्य केशव दास को हिंदी साहित्य के पहले आचार्य के रूप में भी ज्यादा लोग पहचानते हैं केशवदास को शास्त्रों का बहुत ज्ञान था और हिंदी साहित्य में उनका एक अलग ही स्थान माना जाता है।

केशवदास का जन्म 

रीतिकाल के प्रवर्तक कवि आचार्य केशवदास का जन्म 1555 ईस्वी में हुआ था वह मध्य भारत के ओरछा राज्य के रहने वाले थे केशव दास के पिता का नाम पंडित काशीनाथ मिश्र था उनके पिता एक बहुत ही धनी ब्राम्हण थे

और उनके पिता भी बहुत विद्वान थे उन्हें संस्कृत और ज्योतिष का बहुत ज्यादा ज्ञान था केशव दास को इस बात का बहुत अभिमान रहता था कि वह एक धनी और प्रकांड पंडित विद्वान के घर में पैदा हुए हैं।

नाम आचार्य केशवदास
जन्‍म 1555 ईस्वी
जन्‍म स्‍थान मध्य भारत के ओरछा
पिता का नाम पंडित काशीनाथ मिश्र
माता का नाम ज्ञात नहीं
रचनाएं रसिकप्रिया,कवि प्रिया,नख शिख,छंदमाला,रामचंद्रिका,वीर सिंह देव रचित,रतन बावनी,

विज्ञान गीता,जहांगीर जस चंद्रिका

कार्यक्षेत्र कवि
भाषा शैली बुंदेलखंडी भाषा और अवधी भाषा
मृत्‍यु 1617 ईस्वी

आचार्य केशवदास का व्यक्तित्व 

आचार्य केशव दास बहुत ही अच्छे व्यक्तित्व के आदमी थे वह ओरछा के राजा इंद्रजीत सिंह के दरबारी कवि मंत्री और गुरु थे वह एक बहुत ही भावुक किस्म के व्यक्ति थे आचार्य केशवदास संस्कृत के प्रकांड पंडित है

उन्होंने राधा कृष्ण के प्रेम का वर्णन अपनी रचनाओं में किया है और उन्होंने राम भक्ति में भी कुछ रचनाएं किए इसलिए उन्हें राम भक्ति शाखा के कवि भी लोग मानते हैं। किशव दास संस्कृत के बहुत ही बड़े विद्वान थे उनके घर में या उनके कुल में संस्कृत भाषा में ही बात किया जाता था

संस्कृत भाषा का ही उनके यहां प्रचार किया जाता था कहा जाता है कि केशवदास के घर में जो नौकर चाकर रहते थे वह भी संस्कृत में ही बोलते थे केशवदास जब हिंदी भाषा में कविता करने लगे तो उन्हें अपमानजनक महसूस होता था

क्योंकि उनकी घर में या उनके पूर्वज में कोई भी हिंदी भाषा में बात नहीं करता था मधुकर शाह के पुत्र इंद्रजीत सिंह के दरबारी कवि केशवदास थे महाराजा इंद्रजीत सिंह केशवदास को अपना गुरु मानते थे केशवदास महाराजा इंद्रजीत सिंह के दरबारी कवि गुरु होने के साथ-साथ उनके मंत्री भी थे

इसीलिए उन्हें महाराजा इंद्रजीत सिंह कर के तरफ से कई गांव दान में मिले थे जिस राजा के दरबारी कवि थे उनका उन्होंने गुणगान किया केशवदास राज दरबार में रहते थे हमेशा ऐसो आराम से साज सज्‍जा के साथ रहते थे केशवदास के काव्य का संवाद बहुत ही आकर्षण है।

केशव दास का साहित्यिक जीवन

आचार्य केशव दास ओरछा राज्य के राजा इंद्रजीत सिंह के दरबारी कवि थे और वह वहां के मंत्री भी थे राजा की ओर से केशव दास को 21 गांव दान में मिले थे

और वह केशवदास उन्हीं गांव से मिले जुले पैसों सामानों से अपना गुजर बसर बहुत अच्छे से कर लेते थे वह एक शृंगारिक कवि थे। उन्होंने अपनी कविताओं में राधा कृष्ण के प्रेम श्रृंगार का भी बहुत अच्छे से वर्णन किया है

उनकी रचनाओं में नायक नायिका के प्रेम का सोलह शृंगार का वर्णन किया है केशवदास संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान थे और यह गुण उन्हें अपने पूर्वज से ही मिला था क्योंकि उनके पूर्वज भी संस्कृत और ज्योतिष के बहुत बड़े विद्वान थे

और इस बात का उन्हें अभिमान भी रहता था केशव दास संस्कृत भाषा में किसी से बात करना चाहते थे ताकि संस्कृत  भाषा का प्रचार हो वह अपने नौकर चाकर से भी संस्कृत में हीं बात करना चाहते थे उनका मानना था कि हिंदी में बात करना अपमान जैसा लगता है।

केशवदास रामचंद्रिका में भगवान राम और माता सीता के बारे में वर्णन किया है और उन्होंने राम और सीता को अपने इष्ट देव मानकर उनके महिमा का गुणगान किया है केशवदास की लगभग 16 ग्रंथ लिखे हैं लेकिन 8 ग्रंथ का प्रमाण मिलता है

आचार्य केशवदास की रचनाएं

केशव दास बुंदेलखंडी भाषा का प्रयोग अपनी कविताओं में ज्यादा किया है उनकी कविताओं में अवधी भाषा का भी शब्द ज्यादा मिलता है उनकी रचनाएं श्रृंगार रस पर आधारित रहते थे उन्होंने बहुत सारी रचनाएं की है

उन रचनाओं में कविता सवैया दोहा छंद आदि मिलता है उन्हें भारतीय हिंदी साहित्य का आचार्य भी कहा जाता है और उन्हें रीतिकाल का प्रवर्तक कवि के रूप में जाना जाता है वह राजा इंद्रजीत सिंह के दरबारी कवि थे लेकिन जहांगीर ने वह राज बाद में राजा वीर सिंह को दे दिया

तो केशव दास वीर सिंह के दरबार में भी कुछ दिन रहे और उन्होंने वीर सिंह के ऊपर कविताएं भी लिखी है केशवदास की रचनाएं ज्यादा तो नहीं मिलती है लेकिन कुछ रचनाओं की प्रमाणिकता है जैसे कि

केशवदास के रचनाएं 

  • रसिकप्रिया
  • कवि प्रिया
  • नख शिख
  • छंदमाला
  • रामचंद्रिका
  • वीर सिंह देव रचित
  • रतन बावनी
  • विज्ञान गीता
  • जहांगीर जस चंद्रिका

केशवदास की भाषा शैली

अपनी काव्य में किशव दास ने बुंदेली भाषा का प्रयोग किया है ज्यादातर रीतिकाल के कवि अपने काव्य में ब्रज भाषा का प्रयोग किया है लेकिन केशव दास ने अपनी कविताओं ब्रजभाषा का इस्तेमाल नहीं किया है

वह एक संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान थे इसलिए उनके काव्‍यों में संस्कृत भाषा से प्रभावित शब्द हैं उनके काव्य में जो छंद है ऐसा लगता है कि संस्कृत का ही भाषा है

अचार्य केशवदास की कविता में बुंदेलखंडी भाषा है अवधी भाषा का भी प्रयोग कहीं-कहीं मिलता है केशवदास के कविता की भाषा शैली बहुत ही गंभीर और उनके श्रृंगार रस का वर्णन मिलता है छंद अलंकार उनके काव्‍य में भरपूर मात्रा में रहता है

केशवदास को हिंदी साहित्य का सबसे पहला आचार्य माना जाता है। कहा जाता है कि केशवदास बहुत ही भावुक और रसिक ककि थे उनके बारे में कहानी है कि वह जब बूढ़े हो गए थे एक बार एक कुएं के पास बैठे थे वहां पर कई स्त्रियां पानी भरने के लिए आई थी तो वह केशव दास को बाबा कह कर संबोधन किया तब उन्होंने एक दोहा बोला

  • भाषा बोल ना जानहीं जिनके कुल के दास।
  • तिन भाषा कविता करी जइमती केशवदास।।

कवि केशवदास एक विद्वान थे संस्कृत के प्रकांड पंडित थे इसलिए वह अपनी कविताओं के माध्यम से अपनी प्रचार करना चाहते थे इसीलिए उनके जो भी कविताएं हैं उसमें उन्होंने भाव प्रदर्शन का ध्यान नहीं दिया है।

आचार्य केशवदास का मृत्यु

केशव दास राजा इंद्रजीत सिंह के दरबारी कवि थे। कुछ दिन बाद जहांगीर जब वहां का शासक हुआ तब उसने वह राज्य वीर सिंह को दे दिया उसके बाद केशव दास राजा वीर सिंह के दरबार में भी कुछ दिन वहां रहे लेकिन कुछ दिन बाद वह गंगा तट के किनारे चले गए और वहीं पर उनका मृत्यु 1617 ईस्वी में हुआ।

साराशं 

जब आचार्य केशवदास कवि थे उस समय रीतिकाल और भक्ति काल का संधि युग माना जाता है महाकवि आचार्य केशवदास को उस काल का प्रतिनिधि कवि और युग परिवर्तन कवि माना जाता है

उन्हें अपनी कविताओं में संस्कृत के छंद भाषा को डालने से बहुत सफलता मिली इस लेख में आचार्य केशवदास के बारे में उनकी कृतियों के बारे में उनके भाषा शैली के बारे में उनकी रचनाओं के बारे में

उनका जन्म कब हुआ उनका मृत्यु कब हुआ केशवदास किस राजा के दरबारी कवि थे के बारे में पूरी जानकारी दी गई है फिर भी अगर इस लेख से संबंधित कोई सवाल के मन में है कृपया कमेंट करके जरूर पूछें।

रीतिकाल के प्रवर्तक कवि आचार्य केशवदास  की जीवनी के बारे में हमने इस लेख में पूरी जानकारी दी है आप लोगों को यह जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट जरूर करें और शेयर भी जरूर करें।

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