खुदीराम बोस कौन थे

खुदीराम बोस कौन थे khudiram bose in hindi और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान कैसे दिया था उनका जन्म कहां हुआ था कहां के रहने वाले थे उन्होंने अंग्रेजों से कैसे लोहा लिया भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में खुदीराम बोस के क्रांतिकारी थे

जिनको 18 साल के छोटे से उम्र में फांसी पर लटका दिया गया था जिस उम्र में बच्चे अपने कैरियर के बारे में अपने फ्यूचर के बारे में सपने देखते हैं पढ़ाई के बारे में सोचते हैं उस उम्र में खुदीराम बोस देश की आजादी के लिए अपनी मातृभूमि के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर लटक गए थे

खुदीराम बोस कहते थे कि गुलामी से बड़ा और भद्दी कोई भी दूसरी बीमारी नहीं है स्वाधीनता संग्राम में सबसे युवा क्रांतिकारी युवा देशभक्त खुदीराम बोस को माना जाता है तो आइए इस लेख में स्वाधीनता संग्राम के युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस की जीवनी के बारे में विस्तार से जानते हैं.

Khudiram Bose in hindi 

Khudiram Bose बंगाल के एक स्वतंत्रता सेनानी महान क्रांतिकारी और सबसे कम उम्र के फांसी पर चढ़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी थे. उन्‍होंने अंग्रेजों की नाक में दम कर के रख दिया था उन्हें बचपन से ही अंग्रेजों से नफरत थी क्योंकि वह बचपन से ही अंग्रेजों का अत्याचार देख रहे थे.

उन्होंने शुरू से ही देखा था कि अंग्रेज अधिकारी भारत के आम लोगों पर कितना अत्याचार करते थे. और छोटी सी बात पर भी उन्हें जेल में बंद कर देते थे और उन पर कई तरह के मुकदमा भी चलाते थे वह बचपन से ही संकल्प ले चुके थे कि ब्रिटिश साम्राज्य को जड़ से खत्म करके हीं मानेंगे.

khudiram bose in hindi

Khudiram Bose छोटी सी उम्र में ही भारत देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर युगो युगो तक इतिहास में अमर हो गए.गोपाल कृष्ण गोखले का जीवन परिचय

खुदीराम बोस का जन्म

Khudiram Bose बंगाल के रहने वाले थे उनका जन्म 3 दिसंबर 1889 में हुआ था Khudiram Bose के पिता का नाम बाबू त्रैलोक्य नाथ बोस था और उनकी माता लक्ष्मी प्रिया देवी थी वह बंगाल के मिदनापुर जिले के बहूवैनी गांव के रहने वाले थे

खुदीराम बोस के मन में बचपन से ही देश को आजाद कराने के लिए लगन था. खुदीराम बोस एक ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने अपनी भारत माता को आजाद कराने के लिए हंसते हंसते फांसी पर चढ़ गये.

नाम खुदीराम बोस
जन्‍म 3 दिसंबर 1889
जन्‍म स्‍थान बंगाल के मिदनापुर जिले के बहूवैनी गांव
पिता का नाम बाबू त्रैलोक्य नाथ बोस
माता का नाम लक्ष्मी प्रिया देवी
कार्यक्षेत्र स्‍वाधीनता आंदोलन के क्रांतिकारी
मृत्‍यु 11 अगस्त 1908

खुदीराम बोस की शिक्षा

Khudiram Bose की पढ़ाई ज्यादा नहीं हो पाई क्योंकि उनके अंदर ब्रिटिश शासन के अत्याचारों के खिलाफ एक आक्रोश था जिस वजह से उनका मन पढ़ाई में नहीं लग रहा था और उन्होंने नौवीं क्लास तक पढ़ाई करके अपने आगे के पढ़ाई छोड़ दी

 भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े जब वह 15 साल के थे.उस समय बंगाल का गवर्नर लार्ड कर्जन ने अपनी फूट डालो और राज करो की नीति अपनाकर बंगाल विभाजन किया था जिस वजह से बंगाल में बंग भंग आंदोलन हो गया था

1905 में लार्ड कर्जन ने फूट डालो और राज करो की नीति के तहत एक राज्य मुस्लिमों के लिए बनाना चाहता था. इसी उद्देश्य से उसने बंगाल का विभाजन किया था.उस समय के क्रांतिकारियों को यह बात पसंद नहीं आई और उन्होंने आंदोलन कर दिया

उसी समय Khudiram Bose ने भी अपनी पढ़ाई छोड़ कर बंग भंग आंदोलन में के तहत स्वदेशी आंदोलन में कूद पड़े और अंग्रेजो के खिलाफ सत्येंद्र नाथ बोस के साथ मिलकर आंदोलन करने लगे इस वजह से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की.रानी लक्ष्मी बाई का जीवन परिचय

 खुदीराम बोस के व्यक्तित्व

11 अगस्त 1960 में भारत की सबसे कम उम्र के क्रांतिकारी खुदीराम बोस को अंग्रेजों ने सूली पर चढ़ा दिया था खुदीराम बोस जब स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे तभी से स्वाधीनता संग्राम के जंगे आजादी में कूद गए थे और सबसे पहले उन्होंने रिवॉल्यूशनरी पार्टी के सदस्य बने और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ वंदे मातरम लिखा हुआ टेंपलेट बांटते थे

खुदीराम बोस ने और भी कई स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर अंग्रेजों के नाक में दम कर दिया था उन्होंने 6 दिसंबर 1907 में नारायणगढ़ बंगाल के रेलवे स्टेशन पर बम विस्फोट किया अंग्रेज किंग्‍सफ़ोर्ड की हत्या की मुजफ्फरपुर पहुंचकर अंग्रेजों के खिलाफ कई आंदोलन किए

वह कभी भी मौत से नहीं डरते थे खुदीराम बोस को भारत की आजादी की लड़ाई में बलिदानों के एक क्रांतिकारी के रूप में जाना जाता है कहा जाता है कि जब खुदीराम बोस को मुजफ्फरपुर जेल में फांसी की सजा मजिस्ट्रेट ने सुनाई

उस समय उनके चेहरे पर थोड़ा भी सिकन नहीं था किसी भी तरह का घबराहट नहीं था एक शेर के बच्चे की तरह वह फांसी के फंदे की तरफ एकदम निर्भीक होकर जाने लगे जब खुदीराम बोस को फांसी हो गई उसके बाद वह भारत के स्वतंत्रता सेनानियों में क्रांतिकारियों में भारत देश की हर एक देशवासियों में और भी लोकप्रिय हो गए

जिस तरह का खुदीराम बोस धोती पहनते थे उसी तरह का हर स्वतंत्रता सेनानी पहनने लगे उनके शहादत के लिए कई स्कूल और कॉलेज बंद किए गए विद्यार्थी और क्रांतिकारी शोक मनाने लगे थे

खुदीराम बोस का क्रांतिकारी जीवन 

Khudiram Bose 15 साल के उम्र में ही स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए थे उन्होंने ब्रिटिश शासन को भारत के लोगों पर अत्याचार करते हुए देखकर उन्हें बहुत दुख और नफ़रत होता था.

इसी समय मिदनापुर में एक कृषि प्रदर्शनी लगा था जिसमें बहुत सारे लोगों ने भाग लिया था उसी समय Khudiram Bose ने सोनार बांग्ला नाम का एक पत्रिका था उसको लोगों के बीच बांटने लगे जब वह पत्रिका बांट रहे थे.

तभी एक पुलिस वाले का नजर Khudiram Bose पर पड़ा और वह उन्हें पकड़ना चाहा लेकिन खुदीराम बोस उससे झगड़ा करके भाग गए इसके बाद खुदीराम बोस पर राजद्रोह का आरोप सरकार ने लगा दिया लेकिन Khudiram Bose उस समय छोटे थे और कोई गवाही नहीं मिला

इस वजह से उन्हें निर्दोष साबित किया गया कुछ दिनों बाद उन्हें पुलिस ने फिर से पकड़ लिया लेकिन फिर से उन्हें रिहा कर दिया गया था.

खुदीराम बोस का स्वतंत्रता आंदोलन में सहयोग 

1905 के बंगाल विभाजन के बाद वहां का मजिस्ट्रेट किंग्‍सफोर्ड जो था उसने भारतीय क्रांतिकारियों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया था और भारतीय क्रांतिकारियों को बहुत ही निर्ममता से दंड देता था इससे क्रांतिकारी उससे बहुत आक्रोशित थे इस वजह से वह किंग्‍सफोर्ड को मारना चाहते थे

लेकिन किंग्सफोर्ड को बंगाल से हटाकरके मुजफ्फरपुर के न्यायालय में न्यायाधीश के पद पर भेज दिया गया.बंगाल में युगांतर नाम का एक क्रांतिकारी समिति था उसी में Khudiram Bose ने किंग्‍सफोर्ड को मारना स्वीकार किया Khudiram Bose के साथ प्रफुल्ल कुमार चाकी नाम के क्रांतिकारी ने भी साथ देने का बात कहा

उसी समय Khudiram Bose और प्रफुल्ल चाकी को पिस्तौल दिया गया और मुजफ्फरपुर भेज दिया गया दोनों मुज़फ्फरपुर आए तब उन्होंने किंग्‍सफोर्ड के बंगले को अच्छी तरह से देख लिया और वहीं पर बैठकर निगरानी करने लगे कि कब वह बाहर निकले तो उसको मारा जाए.सुभाष चंद्र का बोस जीवन परिचय

खुदीराम बोस ने किंग्‍सफोर्ड को मारा

किंग्‍सफोर्ड के बंगले के पास ही एक क्लब था जिसमें सारे अंग्रेज अधिकारी शाम को घूमने जाते थे इस बात का पता लगने के बाद Khudiram Bose और प्रफुल्ल कुमार चाकी भी उस समय वहां पहुंच गए जब सामने किंग्‍सफोर्ड के जैसा ही एक बग्‍घी दिखाई दिया

तो उन दोनों ने यह सोचा कि यकीनन यह किंग्‍सफोर्ड ही हैं लेकिन उसमें दो अंग्रेज महिला थी प्रफुल्ल चाकी और Khudiram Bose ने उस बग्‍घी को किंग्‍सफोर्ड का बग्‍घी समझकर बम फेंक दिया..

बम फेक कर दोनों वहां से भाग निकले भागते भागते वह दोनों मुजफ्फरपुर से 25 मील दूर वनी नाम के एक स्टेशन पर रुके लेकिन उनका पीछा करते करते अंग्रेज सैनिक भी वहां पहुंच गए और दोनों को गिरफ्तार करना चाहा.

लेकिन प्रफुल्ल चाकी ने वहीं पर अपना पिस्टॉल निकाल कर अपने आप को मार दिया और खुदीराम बोस को अंग्रेज अधिकारियों ने पकड़ लिया.

खुदीराम बोस का मृत्यु 

Khudiram Bose जब अंग्रेज न्यायाधीश किंग्‍सफोर्ड समझ कर किसी और के बग्‍घी पर बम फेंक कर भाग रहे थे तब उन्हें अंग्रेज सैनिक पकड़ लिए पकड़ कर उन्हें जेल ले गए वहां पर जब वह गिरफ्तार हुए तब उन्होंने यह स्वीकार किया कि हां मैंने किंग्‍सफोर्ड को मारना चाहता था

लेकिन अफसोस हैं कि 2 निर्दोष महिला मारी गई 8 जून 1908 को Khudiram Bose को अदालत में लाया गया और 5 दिन इस पर सुनवाई चला उसके बाद उन्हें फांसी पर लटकाने का फैसला सुनाया गया.

जिस समय उन्हें फांसी हुई उस समय Khudiram Bose की उम्र मात्र 18 साल की थी. 11 अगस्त 1908 को महान क्रांतिकारी वीर Khudiram Bose को फांसी पर लटका दिया गया. खुदीराम बोस ऐसे वीर क्रांतिकारी थे जिन्होंने हाथ में भागवत गीता लेकर हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ गए

बाद में अंग्रेज अधिकारी ने बताया कि Khudiram Bose बोस एक शेर के बच्चा की तरह बिना किसी भय के हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ गए उनके इस बलिदान को हम लोग आजीवन नहीं भूलेंगे. मदर टेरेसा का जीवन परिचय

खुदीराम बोस के मृत्यु के बाद बंगाल में उनके धोती के जैसा ही धोती प्रचलित हो गया जिस पर खुदीराम बोस लिखा रहता था उस समय के क्रांतिकारी वैसा धोती पहन कर आंदोलन किया करते थे.

सारांश 

खुदीराम बोस एक ऐसे साहसिक और निर्भीक थे जिन्होंने 15 साल की उम्र में ही समिति का हिस्सा बन गए थे और बम बनाना बहुत ही अच्छे से सीख लिया था और वह बम लेकर वह कई पुलिस थानों में प्लांट करते थे कहा जाता है कि जब जज ने उनके फांसी की सजा सुनाई

उस समय भी वह थोड़ा भी डरे और सहमे हुए नहीं थे जज ने उन्हें उनसे पूछा कि क्या तुम इस फैसले का मतलब समझते हो तब खुदीराम बोस ने कहा कि हां मैं बहुत अच्छे से समझता हूं मेरे खिलाफ वकील यही बोलते हैं कि मैं बम बनाने के लिए छोटा हूं लेकिन अगर आप भी मौका दें तो मैं आपको भी बम बनाना सिखा सकता हूं

इस तरह से खुदीराम बोस के बोलने पर जज भी सकते में आ गए थे इस लेख भारत की आजादी के लिए भारत माता के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले बहुत ही कम उम्र के क्रांतिकारी खुदीराम बोस के बारे में पूरी जानकारी दी गई है

जिसमें उन्होंने अंग्रेजों को किस तरह से परेशान किया उन्होंने अपना क्रांतिकारी जीवन कब से शुरू किया उनका मृत्यु कब हुआ फांसी की सजा कब हुई इस लेख से संबंधित कोई सवाल मन में तो कृपया कमेंट करके जरूर पूछें.

इस लेख में हमने एक सबसे कम उम्र के वीर क्रांतिकारी भारत माता पर अपने प्राणों के बलिदान देने वाले खुदीराम बोस के khudiram bose in hindi बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की हैं आप लोगों की जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं और शेयर भी जरूर.

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