Lal Bahadur Shastri – लाल बहादुर शास्त्री का जीवनी

Lal Bahadur Shastri biography in hindi दोस्तों हम लोग इस लेख में Lal Bahadur Shastri जी के जीवनी के बारे में जानने वाले हैं जय जवान जय किसान का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री जी के राजनीतिक जीवन के बारे में उनके व्यक्तित्व के बारे में लाल बहादुर शास्त्री जी का हमारे स्वतंत्रता आंदोलन कितना योगदान था और उनकी क्या भूमिका थी जानेंगे

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी जवाहरलाल नेहरू सुभाष चंद्र बोस डॉ राजेंद्र प्रसाद सरदार वल्लभभाई पटेल के साथ और भी कई नेताओं ने योगदान दिया था जिनमें लाल बहादुर शास्त्री का भी मत्‍वपूर्ण भूमिका था

भारत आजाद हुआ तो आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को बनाया गया तो आइए इस लेख में लाल बहादुर शास्त्री के जीवनी के बारे में स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने अपना योगदान कैसे दिया उनका राजनीतिक जीवन कैसा था लाल बहादुर शास्त्री का जन्म कहां हुआ उनकी मृत्यु कब हुई के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं।

Lal Bahadur Shastri biography in hindi

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में लाल बहादुर शास्त्री का भूमिका प्रमुख रहा 1965 का युद्ध जब पाकिस्तान के साथ हुआ था उसमें लाल बहादुर शास्त्री ने बहुत ही सफलता पूर्वक अपने देश का नेतृत्व किया।

लाल बहादुर शास्त्री ईमानदारी और सादगी के साथ राजनीतिक जीवन जीते थे लोग उन्हें बहुत ही सम्मान और आदर करते थे लाल बहादुर शास्त्री भारत के देशवासियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत के रूप में जाने जाते हैं

Lal Bahadur Shastri biography in hindi

आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में लाल बहादुर शास्त्री को चुना गया महात्मा गांधी के साथ कई स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के लिए लाल बहादुर शास्त्री ने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी उनके परिवार वाले उन्हें रोकने की बहुत कोशिश करते रहे

लेकिन भारत माता को आजाद कराने के लिए ब्रिटिश शासन को भारत से हटाने के लिए महात्मा गांधी के साथ कई आंदोलनों में साथ दिया।

1930 में जब नमक कानून तोड़ने के लिए महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा शुरू किया उस समय लाल बहादुर शास्त्री ने उस विद्रोही अभियान का नेतृत्व किया था जिसके बाद 7 वर्ष तक वह जेल में रहे लाल बहादुर शास्त्री का कहना था कि वह अपने लिए नहीं बल्कि अपने देश के लिए विश्व की शांति के लिए शांतिपूर्ण विकास में विश्वास रखता हूं।

भारत देश आजाद हुआ उसके बाद लाल बहादुर शास्त्री उत्तर प्रदेश संसद के सचिव के रूप में नियुक्त किए गए उसके बाद गोविंद बल्लभ पंत के मंत्रिमंडल में लाल बहादुर शास्त्री को परिवहन और पुलिस मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया।

जब पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का मृत्‍यु 27 मई 1964 में हुआ उसके बाद लाल बहादुर शास्त्री का छवि लोगों के बीच बहुत ही साफ-सुथरी थी इसलिए उन्हें 1964 में प्रधानमंत्री बनाया गया।

लाल बहादुर शास्त्री को उनकी ईमानदारी देश भक्ति उनकी सादगी प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए भारत के विकास के लिए किए गए कार्य के लिए मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित हुए।

नाम लाल बहादुर शास्‍त्री
घर का नाम नन्‍हे
जन्‍म 2 अक्टूबर 1904
जन्‍म स्‍थान उत्तर प्रदेश के मुगलसराय
पिता का नाम शारदा प्रसाद श्रीवास्तव
माता का नाम राम दुलारी देवी
पत्नि का नाम ललिता देवी
पुत्र हरिकृष्ण शास्त्री, अनिल शास्त्री, सुनील शास्त्री और अशोक शास्त्री
पुत्री कुसुम और सुमन
कार्यक्षेत्र स्‍वतंत्रता सेनानी,परिवहन और पुलिस मंत्री,गृहमंत्री,प्रधानमंत्री
सम्‍मान और पुरस्‍कार मरणोपरांत भारत रत्‍न
मृत्‍यु 11 जनवरी 1966

लाल बहादुर शास्त्री का जन्‍म

लाल बहादुर शास्त्री जी हमारे आजाद देश के दूसरे प्रधानमंत्री हुए थे Lal Bahadur Shastri जी ने बहुत सारे स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भूमिका बहुत अच्छे से निभाई थी

लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था लाल बहादुर शास्त्री जी के पिता का नाम शारदा प्रसाद श्रीवास्तव था और माता का नाम राम दुलारी देवी था

शास्त्री जी के पिता एक स्कूल में शिक्षक थे और बाद में वह आयकर विभाग में क्लर्क बन गए।लाल बहादुर शास्त्री जी के पिताजी गरीब जरूरत थे लेकिन वह अपने इमानदारी और शराफत से जाने जाते थे

लाल बहादुर शास्त्री जी के बचपन गरीबी में ही बीता था लाल बहादुर शास्त्री अपने भाई-बहनों में सबसे छोटे थे तो सभी उन्हें घर में नन्हे नाम से बुलाते थे

उनके पिता जी का मृत्यु शास्‍त्री जी जब 18 महीने के थे तभी हो गया था तो उनकी माता उनके नाना जी के यहां मिर्जापुर लेकर चली गई थी लाल बहादुर शास्त्री के नाना का नाम हजारीलाल था

लेकिन कुछ दिनों बाद उनके नाना जी का भी मृत्यु हो गया जिससे लाल बहादुर शास्त्री का परवरिश करने में उनकी माता को बहुत ही परेशानियां होने लगी थी।

लाल बहादुर शास्त्री के प्रारंभिक शिक्षा 

शास्त्री जी प्रारंभिक पढ़ाई मिर्जापुर से प्राथमिक स्कूल से हुई थी उसके बाद हरिश्चंद्र हाई स्कूल काशी विद्यापीठ में हुआ था लाल बहादुर शास्त्री जी कई मील की दूरी पढ़ने के लिए नंगे पांव है चले जाते थे

गर्मी के दिन में भी सड़क बहुत गर्म हुआ करती थी तभी वह ऐसे ही चले जाते थे लाल बहादुर जी ने संस्कृत भाषा में स्नातक किया था काशी विद्यापीठ से उन्होंने स्नातकोत्तर किया था

जिसके बाद उन्हें शास्त्री की उपाधि मिली थी उसके बाद उन्होंने शास्त्री को अपने नाम के आगे जोड़ लिया 1928 ईस्वी में शास्त्री जी का विवाह ललिता नाम केक कन्या से हुआ Lal Bahadur Shastri जी के संताने थी उनके पुत्र अनिल शास्त्री बाद में कांग्रेस पार्टी के सदस्य भी रहे।

Lalbadur shastri शास्त्री संघर्ष में अधिक रूचि रखते थे Lal Bahadur Shastri जी 11 वर्ष के थे तभी से वह कुछ भारत के लिए करना चाहते थे गांधीजी ने जब असहयोग आंदोलन चलाया था उसमें लाल बहादुर शास्त्री जी भी शामिल हो गए थे उस समय उनकी उम्र 16 वर्ष था

लाल बहादुर शास्त्री का विवाह

काशी विद्यापीठ से शास्त्रीय के पढ़ाई करने के बाद लाल बहादुर के नाम के आगे शास्त्री लग गया तब से लाल बहादुर शास्त्री के नाम से मशहूर हो गए लाल बहादुर शास्त्री का विवाह 1928 में ललिता देवी से हुआ मिर्जापुर के गणेश प्रसाद की पुत्री ललिता देवी थी।

लाल बहादुर शास्त्री की ललिता देवी से छ: संतान हुए जिनमें दो पुत्री और 4 पुत्र हुए कुसुम और सुमन नाम की दो पुत्री थी और हरिकृष्ण शास्त्री, अनिल शास्त्री, सुनील शास्त्री और अशोक शास्त्री नाम के 4 पुत्र हुए। लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र अनिल शास्त्री कांग्रेस पार्टी के सम्मानित नेता है और भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता सुनील शास्त्री है।

लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व 

Lal Bahadur जी शांति और मित्रता के मूर्ति थे वह बहुत ही सरल और शांत जीवन जीना पसंद करते थे शास्त्री जी महात्मा गांधी के विचारों पर चलने वाले थे और उन्हें वह अपना आदर्श मानते थे जिस तरह महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे

उसी तरह Lal Bahadur Shastri जी भी सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलना पसंद करते थे गरीबों से बहुत लगाव था उनसे बहुत ही उसने करते थे भले ही प्रधानमंत्री के पद पर थे लेकिन वह हमेशा सामान्य जीवन जीना पसंद करते थे क्युंकि उन्होंने गरीबी का जीवन झेला था।

लाल बहादुर शास्त्री स्वतंत्रता आंदोलन ने तो सहयोग किया ही था एक अच्छी राजनीतिज्ञ एक साफ-सुथरी छवि वाले प्रधानमंत्री थे साथ ही उन्होंने समाज सुधारक कार्य भी किए जैसे कि दहेज प्रथा और जाति प्रथा के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई थी शास्त्री जी एक ऐसे ईमानदार प्रधानमंत्री थे जिन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद भी अपने लिए कहीं आने जाने के लिए कार नहीं रखते थे

वह अपने आत्मसम्मान अनैतिकता के साथ बहुत ही अनुशासन के साथ जीवन जीते थे लाल बहादुर शास्त्री एक बहुत ही सरल और सुलभ नेता और व्यक्ति थे भले ही उनका कद छोटा था लेकिन वह कार्य बहुत ही बड़े बड़े करते थे।

उनका व्यक्तित्व सादगीपूर्ण और साहसिक था किसी भी कार्य को करने के लिए उनमें साहस था और वह कार्य बहुत ही चालाकी से सोच समझकर करते थे उनके अभूतपूर्व कार्य के लिए 1966 में सम्मानित किया गया जय जवान जय किसान का नारा देकर 1965 में पूरे भारत देश को एकजुट करके पाकिस्तान को हराने में उनका मुख्य भूमिका था

पाकिस्तान को थोड़ा भी विश्वास नहीं था कि भारत उसे हरा सकता है लेकिन लाल बहादुर शास्त्री के सूझ बूझ के चलते भारतीय सेना आगे बढ़कर पाकिस्तान के अस्तित्व को ही खत्म कर दिया।

अपने देश के लिए हिंदी के लिए मर मिटने वाले व्यक्ति थे कहा जाता है कि जब लाल बहादुर शास्त्री के बच्चों को पढ़ाने के लिए एक अंग्रेजी शिक्षक आते थे तो उन्होंने उसे हटा दिया शिक्षक ने जब कहा कि आपके बच्चे अंग्रेजी में फेल हो जाएगा

तब उन्होंने कहा कि जब अंग्रेज हिंदी में फेल हो जाते हैं तो कोई बात नहीं तो हमारे बच्चे अंग्रेजी में फेल हो जाएंगे तो क्या हो जाएगा हमारे देश में कई हजार बच्चे अंग्रेजी में फेल हो जाते हैं हमारी भाषा हिंदी है उसे ही प्रधानता मिलनी चाहिए

एक बार जब लाल बहादुर शास्त्री की धोती फट गई थी उनकी पत्नी ने उन्हें नया खरीदने के लिए बोला तब लाल बहादुर शास्त्री ने कहा कि खरीदने से अच्छा है कि तुम इसे धागा से सील दो। क्योंकि उस समय लाल बहादुर शास्त्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था इसीलिए उनका कहना था कि मेरे पास पैसे नहीं है जितना कम पैसे में घर का खर्च चलाया जाए उतना ही अच्छा है।

लाल बहादुर शास्त्री का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान 

उस समय द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था भारत की लड़ाई भी जोरों पर थी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन किया था और दिल्ली चलो का नारा दिया था गांधीजी ने भारत छोड़ो आंदोलन चलाया था

उसके बाद Lal Bahadur Shastri आजादी की लड़ाई में सहयोग देने के लिए करो या मरो का नारा लगाया था कुछ दिन बाद नारा में थोड़ा परिवर्तन करके मरो नहीं मारो का नारा लगाया उसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया थाऔ शास्त्री जी ने स्वतंत्रता की लड़ाई में गांधी जी का संपूर्ण सहयोग दिया था।

कई आंदोलनों में उन्होंने अपनी भूमिका बहुत अच्छे से निभाई थी असहयोग आंदोलन दांडी यात्रा 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन इन सारे आंदोलनों में शास्त्री जी ने अपनी भागीदारी महत्वपूर्णता से निभाई थी आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरू जी प्रधानमंत्री बने

तब लाल बहादुर शास्त्री को उत्तर प्रदेश के सांसद के सचिव नियुक्त किया गया उसके बाद लाल बहादुर शास्त्री जी ने और सारे काम के कुछ दिनों बाद अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का महासचिव बनाया गया शास्त्री जी अपने पार्टी के प्रति हमेशा सजग रहते थे।

और मन लगाकर अपना काम करते थे कुछ दिनों में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान लाल बहादुर शास्त्री जी ने बहुत सराहनीय ढंग से अपना नेतृत्व किया था और जय जवान जय किसान का नारा दिया था

जिससे कि हमारे देश में एकता बनी रहे और भारत पाकिस्तान को हरा सके इसके बारे में पाकिस्तान को थोड़ा भी कल्पना नहीं था जवाहरलाल नेहरू जी के मृत्यु के बाद Lal Bahadur Shastri जी को प्रधानमंत्री बनाया गया

लाल बहादुर शास्त्री का राजनीतिक जीवन

1951 में अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव लाल बहादुर शास्त्री को बनाया गया लाल बहादुर शास्त्री अपने देश के प्रति अपने पार्टी के प्रति हमेशा समर्पित रहते थे और चुनाव के समय अपनी पार्टी के लिए प्रचार प्रसार करना और कांग्रेस को विजई बनाना उनका मुख्य उद्देश रहता था

भारत को स्वतंत्र कराने के लिए कई आंदोलन जैसे कि 1921 में असहयोग आंदोलन नमक भंग करने के लिए दांडी यात्रा 1942 से भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन किया दिल्‍ली चलो का नारा दिया 1942 में महात्मा गांधी के द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन चलाया गया उसके बाद करो या मरो का नारा भी लगाया गया

लेकिन लाल बहादुर शास्त्री ने बहुत ही चतुराई पूर्वक बहुत ही आसानी से करो या मरो का नारा मरो नहीं मारो में बदल दिया इस तरह लाल बहादुर शास्त्री ने स्वतंत्रता आंदोलन में कई महत्वपूर्ण कार्य किए

जब भारत आजाद हुआ जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया लाल बहादुर शास्त्री पंडित जवाहरलाल नेहरु के मंत्रिमंडल में गृह मंत्री के पद पर कार्य किए जब पंडित जवाहरलाल नेहरू का मृत्‍यु हो गया उसके बाद लाल बहादुर शास्त्री को आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बनाया गया

अपने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लाल बहादुर शास्त्री ने देश की जनता की आवश्यकताओं के अनुसार देश के विकास के लिए कार्य करते रहे उसी समय 1965 में भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ।

1965 भारत पाकिस्तान युद्ध जब पाकिस्तान ने 1965 में भारत पर हवाई हमले शुरू कर दिए तो सभी से बातचीत करके राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने आपातकाल बैठक बुलाया और तीनों सेना के प्रमुख और मंत्रिमंडल के सदस्य से बातचीत किए

लेकिन लाल बहादुर शास्त्री वहां थोड़ी देर बाद में पहुंचे तब तीनों सेना के प्रमुख से विचार विमर्श करने के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने अपने देश की रक्षा करने के लिए जय जवान जय किसान का नारा लगाया है जिससे कि भारत देशवासियों को बहुत ही प्रोत्साहन मिला और उनका मनोबल बढ़ गया भारत के सभी लोग एकजुट होकर पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में साथ दिए

लाल बहादुर शास्त्री के बारे में रोचक तथ्‍य

  • शास्त्री जी जब जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में परिवहन और पुलिस मंत्री थे उस समय किसी बात के विरोध में उत्तर प्रदेश में किसी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहली बार लाल बहादुर शास्त्री ने लाठीचार्ज करने के बजाय पानी का बौछार करने का आदेश दिया और तभी से भीड पर पानी की बौछार का प्रयोग शुरू किया गया

 

  • 10 जनवरी 1966 में पाकिस्तान के अयूब खान और रूस के प्रधानमंत्री ने लाल बहादुर शास्त्री को ताशकंद घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए बुलाया इसी ताशकंद समझौते के समय रहस्यमय स्थिति में लाल बहादुर शास्त्री का मृत्यु हो गया।
  • शास्त्री जी जब स्वतंत्र भारत के परिवहन मंत्री थे उस समय सार्वजनिक परिवहन में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी ड्राइवर और कंडक्टर के रूप में भर्ती करना शुरू किया
  • लाल बहादुर शास्त्री का जब विवाह हुआ था तो उन्होंने दहेज में सिर्फ एक खादी का कपड़ा और चरखा ही लिया था।
  • लाल बहादुर शास्त्री ने भारत में दूध का उत्पादन और दूध का आपूर्ति बढ़ाने के लिए श्वेत क्रांति जैसा राष्ट्रीय अभियान का शुरुआत किया था फिर उन्होंने किसानों के लिए हरित क्रांति का शुरुआत किया।

Lal Bahadur shastri death in hindi

लाल बहादुर शास्त्री जी का मृत्यु रहस्य पूर्ण ढंग से हुआ था और उनका मृत्यु आज तक रहस्य ही बना हुआ है 11 जनवरी 1966 को जब Lal Bahadur Shastri ताशकंद समझौते पर गए थे उसी दौरान उनकी मृत्यु हो गई

कुछ लोगों का मानना है कि शास्त्री जी को दिल का दौरा पड़ा था लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि उनको जहर दिया गया था इस पर अभी तक रहा सही बना हुआ है।

लाल बहादुर शास्त्री का मौत आज भी एक रहस्य बना हुआ है लेकिन लाल बहादुर शास्त्री भारत के हर व्यक्ति के दिलों में एक महान व्यक्ति योग्य व्यक्ति के रूप में हमेशा जीवित रहेंगे लाल बहादुर शास्त्री बहुत ही सहनशील और विनम्र व्यक्ति थे वह आम आदमी से भी बहुत ही विनम्र पूर्वक बातें करते थे वह महात्मा गांधी से प्रभावित थे।

साराशं 

आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जब बनाए गए तो उन्होंने भारत में विकास के लिए कई आंदोलन कई क्रांति का शुरूआत किया दूध के उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्होंने श्वेत क्रांति शुरू किया उन्होंने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड बनाया भारत में खाद का उत्पादन के बढ़ावा के लिए हरित क्रांति शुरू किया।

दहेज प्रथा जाति प्रथा के खिलाफ आवाज उठाया लाल बहादुर शास्त्री बहुत ही अनुशासित व्यक्ति थे। इस लेख में आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से संबंधित पूरी जानकारी जैसे कि उनका जन्म कब हुआ उनका विवाह किससे हुआ

उनके शिक्षा कहां से कौन सा शिक्षा उन्होंने प्राप्त किया लाल बहादुर शास्त्री का स्वतंत्रता आंदोलन में क्या भूमिका था उनका राजनीतिक जीवन कैसा था उनकी मृत्यु कब और कैसे हुई के बारे में पूरी जानकारी दी गई है

फिर भी अगर इस लेख से संबंधित कोई सवाल आपके मन में है तो कृपया कमेंट करके जरूर पूछें।शास्त्री जी के बारे में आप लोगों को यह जानकारी कैसी लगी कमेंट करके हमें अपना राय बताएं और ज्यादा से ज्यादा शेयर भी करें।

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