Language kya hai भाषा क्‍या होता हैं भाषा शब्द की उत्पत्ति कैसे हुआ

विश्व में जितने भी देश है देश में जितने भी राज्य हैं हर जगह का अपना एक अलग भाषा होता है भाषा को इंग्लिश में लैंग्वेज कहा जाता हैं Language kya hai पूरी दुनिया में कई प्रकार की भाषा है बल्कि हमारे भारत देश में कई भाषाएं बोली जाती है जितने भी राज्य हैं उन राज्यों में एक राज्य में कई तरह के भाषा बोले जाते हैं.

लेकिन भारत में सबसे ज्यादा प्रचलित हिंदी भाषा है कुछ ऐसे राज्य हैं जहां पर हिंदी ज्यादा बोली जाती है कहीं पर इंग्लिश ज्यादा बोला जाता है या कहीं पर और भी कई भाषाएं बोली जाती है तो भाषा क्या होता है भाषा की उत्पत्ति किस शब्द से हुई है लैंग्वेज कितने प्रकार के होते हैं लैंग्वेज का अर्थ क्या होता है भाषा का परिभाषा क्या है के बारे में जानने के लिए इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें.

कोई भी भाषा किसी एक व्यक्ति का नहीं होता है बल्कि हर राज्य का अपना एक अलग अलग भाषा होता है उसी लैंग्वेज में हर कोई बोलता है एक दूसरे को अपनी बातें समझाता है कई लोग ऐसे होते हैं कि उन्हें अपनी भाषा छोड़कर दूसरी भाषा समझ में नहीं आती है तो भाषा क्या है भाषा कितने प्रकार के होती है के बारे में आइए नीचे विस्तार से जानते हैं.

लैंग्वेज क्या है

भाषा का इंग्लिश लैंग्वेज होता है भाषा अपनी वाणी के द्वारा अपने मन की बात दूसरे व्यक्ति को पूर्ण रूप से समझाने का एक साधन है पहले के लोग अपने मन का भाव अपने मन का विचार एक दूसरे को इशारे के द्वारा समझाते थे क्योंकि उनके पास किसी भी तरह का भाषा नहीं था.

जिससे कि बहुत परेशानी होती थी लेकिन जब हर जगह का भाषा होता है तो उस लैंग्वेज के द्वारा हम अपने मन के भाव को एक दूसरे को बहुत ही आसानी से समझा पाते हैं.

Language kya hai

अपने विचार अपने ध्वनि के द्वारा व्यक्त कर सकते हैं एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को अपने मन के भाव अपने मन के विचार आदान प्रदान करने का एक जरिया है एक माध्यम भाषा होता है अगर भाषा नहीं है तो मनुष्य अपनी बातें एक दूसरे को बताने में असमर्थ रहेगा.

भाषा का अर्थ क्या होता है

अपने मन की भाव विचार आदि किसी दूसरे व्यक्ति से व्यक्त करने का जो वाणी होता है उसे ही भाषा कहा जाता है जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति पढ़कर बोल कर लिख कर सुनकर दूसरे व्यक्ति को अपने विचार आदान-प्रदान करने में समर्थ रहता है कोई भी व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के मन के भाव को या दूसरे व्यक्ति के लिखे हुए चीज को आसानी से समझ सके उसी को भाषा कहा जाता है.

अपने शारीरिक क्रियाओं के माध्यम से जैसे कि कान आंख नाक पर आदि के द्वारा भी अपने भाव दूसरे व्यक्ति को मनुष्य वाणी से बोल करके व्यक्त करता है जिस तरह मनुष्य का अपना भाषा होता है उसी तरह पशु पक्षियों का भी अपना एक संकेत होता है एक बोली होता है कोई भाषा होता है.

भाषा शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई

दुनिया में सबसे पहले देवी देवताओं और ऋषि मुनियों का जो सबसे प्रमुख प्राचीन भाषा है वह है संस्कृत. संस्कृत शब्द के भाष धातु से भाषा शब्द की उत्पत्ति हुई है भाष शब्द का अर्थ बोलना होता है जिस तरह स्कूल में अगर कोई टीचर अपने स्टूडेंट को पढ़ा रहे हैं तो छात्रों को किसी भी तरह की बात समझाने के लिए उन्हें पढ़ाने के लिए टीचर लिखकर बोलकर उन्हें समझाते हैं.

और छात्र उसी भाषा को समझ कर पढ़ते हैं लिखते हैं तो किसी भी मनुष्य के मन के भावों को दूसरे के सामने प्रकट करने का जो वाणी होता है माध्यम होता है उसे ही भाषा शब्द कहा गया है.

भाषा का परिभाषा क्‍या हैं 

पूरे विश्व में लगभग 7000 भाषा बोली जाती है भाषा एक ऐसा साधन होता है जिससे कि लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया जाता है संगठित किया जाता है समूह के रूप में जोड़ा जाता है भाषा के द्वारा ही कोई भी व्यक्ति अपना सामाजिक संस्कृति अर्थिक राजनीति आदि का विकास भी कर सकता है विश्व की क्रियाशीलता का सबसे जरूरी माध्यम भाषा है.

अगर किसी को किसी का भाषा समझ में नहीं आएगा तो व्यक्ति एक दूसरे के मनोभाव को नहीं समझ पाएगा भारत के कुछ वैज्ञानिकों ने भाषा शब्द को परिभाषित किया है उनके अनुसार विचारों की अभिव्यक्ति के द्वारा समाज को ध्वनि संकेत से स्वीकृति मिलती है. भारत में सबसे ज्यादा प्रचलित हिंदी और अंग्रेजी भाषा है यह दो भाषा ऐसा है जो कि हर जगह लगभग बोला जाता है.

रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने अपने रामचरितमानस में एक दोहा लिखा है कि समुझई खग खग ही के भाषा इसका मतलब यह है कि जिस तरह एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति का भाषा समझता है उसी तरह पशु-पक्षी भी एक दूसरे का भाषा समझते हैं किसी भी पशु पक्षी या जानवर की भाषा व्यक्ति नहीं समझ सकता है.

भाषा कितने प्रकार का होता है

विश्व में हर देश का हर राज्य का राज्य में भी हर क्षेत्र का लगभग अपना अपना एक अलग भाषा होता है कुछ राज्य का भाषा होते कुछ क्षेत्रीय भाषा होता है तो भाषा को भी कई वर्गों में बांटा गया है भाषा का कई प्रकार होता है जैसे कि मातृभाषा, राजभाषा, राष्ट्रभाषा,प्रादेशिक भाषा, अंतर्राष्ट्रीय भाषा आदि.

राजभाषा

भारत में जब संविधान बना तो भारत के जितने भी राज्य हैं और केंद्र शासित प्रदेश हैं उनमें हिंदी के अलावा और भी कई भाषाओं को राजभाषा चुना गया तो राजभाषा उसे कहते हैं जिसके द्वारा राज कार्यों को किया जाता है हिंदी को पहले से ही राजभाषा के रूप में चुना गया है हिंदी के अलावा भारत की अंग्रेजी भाषा भी राजभाषा है.

मातृभाषा

कोई भी बच्चा जब बड़ा होता है बोलने लायक होता है जो भाषा अपने घर में अपने समाज में सुनता है उसी को आगे चलकर वह भी प्रयोग करता है तो ऐसी भाषा को मातृभाषा कहा जाता है.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भाषा के संबंध में कहा है कि हर व्यक्ति के विकास के लिए मातृभाषा आवश्यक है जिस तरह मां का दूध एक बच्चे के लिए बहुत ही जरूरी होता है बच्चे के शारीरिक विकास मानसिक विकास के लिए मां के दूध से बेहतर कोई दूसरा दूध नहीं होता है उसी तरह हर व्यक्ति के विकास के लिए मातृभाषा होना आवश्यक है.

प्रादेशिक भाषा

जिस तरह हर देश का अपना एक भाषा होता है उसी तरह हर राज्य का भी अपना भाषा होता है भारत देश में जितने भी राज्य हैं उनमें हर जगह के अलग-अलग भाषा है तो एक राज्य में प्रदेश में जिस भाषा को ज्यादा बोला जाता है वहां के व्यक्ति उसी भाषा में हर बात समझ सकते हैं उस भाषा को प्रादेशिक भाषा कहा जाता है.

राष्ट्रभाषा

भारत में जिस तरह इंग्लिश और हिंदी भाषा है जिसे भारत देश में कहीं भी अगर हम जाते हैं तो इस भाषा को अधिकतर व्यक्ति समझ सकते हैं तो राष्ट्रभाषा उसी भाषा को कहते हैं जो कि पूरे देश में आधा से अधिक लोग समझ सके उस भाषा को समझने का शक्ति ज्यादातर व्यक्तियों में हो और वही भाषा अधिकतर लोग बोलते हैं.

उसको राष्‍ट्रभाषा कहते हैं भारत देश की एकमात्र मातृभाषा हिंदी है जो कि भारत में किसी भी राज्य में किसी भी क्षेत्र में जाते हैं तो वहां ज्यादा से ज्यादा लोग हिंदी बोलने वाले मिल जाते हैं.

अंतर्राष्ट्रीय भाषा

विश्व में जब कोई भाषा दो देशों में या उससे भी कहीं ज्यादा देशों में बोली जाती है समझी जाती है उस भाषा का प्रयोग किया जाता है तो उस भाषा को अंतर्राष्ट्रीय भाषा कहा जाता है जैसे कि अंग्रेजी एक ऐसा अंतर्राष्ट्रीय भाषा है जो कि विश्व में कई देशों में बोला जाता है.

भाषा का महत्व

कोई भी भाषा बिना सीखे बिना समझे किसी को नहीं आता है भारत में कई तरह के भाषाएं बोली जाती है जैसे कि हिंदी अंग्रेजी, अवधी, ब्रज भाषा, खड़ी बोली, बुंदेलखंडी, संस्कृत, मराठी, उर्दू, तेलुगु, पंजाबी, गुजराती, भोजपुरी आदि तो किसी भी भाषा का महत्व यह है कि किसी भी व्यक्ति के विकास के लिए भाषा जरूरी है पहले के लोग संस्कृत भाषा समझते थे बोलते थे.

लेकिन इसमें विकास करके आधुनिक भारत का विकास हुआ तो कई भाषाओं का उत्पत्ति हुआ लैंग्वेज के द्वारा ही कोई भी व्यक्ति अपनी बात दूसरे व्यक्ति को समझा सकता है जिससे उस व्यक्ति का विकास हो सकता है उन्नति हो सकता है.

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सारांश

समाज में एक दूसरे को बांधे रखने के लिए संगठित करने के लिए भाषा एक माध्यम है समाज का एक शक्ति भाषा है जो व्यक्ति अपने माता-पिता से अपने पूर्वज से सीखता है और इसमें विकास करता है.

इस लेख में भाषा यानी की लैंग्वेज क्या होता है लैंग्वेज कितने प्रकार का होता है भाषा का महत्व क्या है भाषा का उत्पत्ति कैसे हुआ के बारे में पूरी जानकारी दी गई है.

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