Mahadevi Verma – महादेवी वर्मा का जीवन परिचय

छायावादी युग के चारों स्तंभों में से महादेवी वर्मा भी है जयशंकर प्रसाद सूर्यकांत त्रिपाठी निराला सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा यह छायावादी युग के चार स्‍तंभ माने जाते हैं

Mahadevi verma ka jeevan parichay in hindi महादेवी वर्मा आधुनिक युग की मीरा भी कही गई है महादेवी वर्मा एक बहुत ही अच्छे कवियित्री समाज सेविका थी उनका व्यक्तित्व बहुत ही अच्छा था

हम लोग इस लेख में  महादेवी वर्मा के जीवन के बारे में जानेंगे हम आशा करते हैं कि आप लोगों को यह लेख अच्छा लगेगा तो आइए जानते हैं महादेवी वर्मा के बारे में।

Mahadevi verma ka jeevan parichay in hindi

महादेवी वर्मा छायावाद युग के चार स्तंभों में से एक नाम था महादेवी वर्मा को आधुनिक युग की मीरा भी कहा गया है महादेवी वर्मा को संगीत और साहित्‍य पसंद था वह साहित्य और संगीत में भली भांति निपुण थी और महादेवी वर्मा सुभद्रा कुमारी चौहान यह दोनों ही बहुत अच्छी  दोस्त थी

महादेवी वर्मा बहुत ही प्रतिभाशाली कवियित्री थी कविताएं बहुत अच्छे होते थे आधुनिक गीत काव्य में उनका स्थान सबसे पहले आता है महादेवी वर्मा की कविताओं में प्रेम और पीर दोनों पाया जाता था उनकी भाषा शैली अलग थी महादेवी वर्मा भाषा साहित्य संगीत चित्रकला और दर्शनशास्त्र में अधिक थी।

Mahadevi verma ka jeevan parichay in hindi

Mahadevi Verma ka janm kab hua tha

महादेवी वर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ था उनका जन्म संपन्न परिवार में हुआ था महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को हुआ था इनके पिता जी का नाम श्री गोविंद प्रसाद वर्मा था और माता का नाम श्रीमती हेम रानी वर्मा था

Mahadevi Verma का परिवार उनके माता-पिता दोनों ही शिक्षा प्रेमी थे महादेवी वर्मा के घर सात पीढ़ियों तक किसी को भी पुत्री पैदा नहीं हुई थी इसीलिए जब महादेवी वर्मा का जन्म हुआ तो उनके घर में सात पीढ़ियों के बाद बेटी का जन्म होने पर बहुत ही खुशी का माहौल था

हर्ष उल्लास का माहौल था सभी लोग झूम रहे थे नाच रहे थे उन्हें घर का देवी मानते हुए उनके बाबा बाबू बांके बिहारी जी ने उनका नाम महादेवी रखा। महादेवी वर्मा के पिताजी एक कालेज में प्राध्यापक थे और उनकी माताजी बहुत बड़ी धार्मिक स्त्री थी

वह हमेशा भगवान की पूजा पाठ में रहती थी और वह शुद्ध शाकाहारी महिला थी महादेवी वर्मा की माता जी का जब विवाह हुआ था तो वह भगवान की मूर्ति अपने मायके से लेकर आई थी और हमेशा भगवान का पूजा पाठ करती रामायण गीता विनय पत्रिका आदि धार्मिक किताबें पढ़ा करती थी उनकी माता जी का संगीत में भी बहुत रूचि था

लेकिन उनके माता के एकदम विपरीत महादेवी वर्मा के पिताजी थे उनके पिताजी पूजा पाठ नहीं करते थे एकदम नास्तिक थे शिकार करना घूमना मांसाहारी खाना बहुत पसंद था उनके पिताजी भी बहुत विद्वान थे और संगीत उन्हें भी प्रिय था

महादेवी वर्मा बचपन से ही सुमित्रानंदन पंत और निराला जी को राखी बांधती थी। इनके नाना जी ब्रज भाषा के कवि थे और वह ब्रज भाषा में अपनी काव्य रचना करते थे बचपन से इस तरह का माहौल में रहने के कारण महादेवी वर्मा का शुरू से काव्य रचना में विशेष रूचि थी।

नाम महादेवी वर्मा
जन्‍म 26 मार्च 1907
पिता का नाम श्री गोविंद प्रसाद वर्मा
माता का नाम श्रीमती हेम रानी वर्मा
पति का नाम श्री स्वरूप नारायण वर्मा
रचनाएं कविता संग्रह,गद्य संग्रह
कविता संग्रह निहार,रश्मि,नीरजा,सांधे गीत,

दीपशिखा,सप्तपर्णा अनूदित

प्रथम आयाम,अग्नि रेखा

आधुनिक कवि तथा संधिनी

गद्य संग्रह अतीत के चलचित्र,स्मृति की रेखाएं,श्रृंखला की कड़ियां,

महादेवी का विवेचनात्मक गद्य

पथ के साथी

सम्‍मान एवं पुरस्‍कार द्विवेदी पदक, मंगला प्रसाद पारितोषिक, साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्म विभूषण,
मृत्‍यु 11 सितंबर 1987

Mahadevi verma biography in hindi

महादेवी वर्मा की माता बहुत ज्ञानी और शिक्षित थी उन्हें संस्कृत और हिंदी भाषा का अच्छा ज्ञान था धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थी शुरू से ही वह महादेवी वर्मा को तुलसीदास सूरदास और मीरा के बारे में पढ़ाया करती थी महादेवी वर्मा ने 7 वर्ष की  उम्र से ही कविता लिखना शुरू कर दिया था।

महादेवी वर्मा के शिक्षा 

Mahadevi Verma की शादी सिर्फ 9 वर्ष की उम्र में ही हो गया था उनका विवाह बाल विवाह था जिस कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई शादी के के बाद उनके ससुर लड़कियों के शिक्षा के विरुद्ध थे

इसलिए उनकी पढ़ाई नहीं हुई लेकिन कुछ समय बाद उनके ससुर के मृत्यु के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर दिया।

महादेवी वर्मा ने मिशन स्कूल से शुरुआती पढ़ाई किया था उन्हें अंग्रेजी संस्कृत चित्र कला संगीत आदि विषयों का ज्ञान था यह सारी पढ़ाई उन्हें घर पर ही शिक्षक आकर के पढ़ाया करते थे

छोटी सी उम्र में ही उनकी शादी हो जाने से उनकी पढ़ाई बीच में ही रुक गई लेकिन विवाह होने के बाद 1921 उन्होंने आठवीं कक्षा में फर्स्ट डिवीजन से पास किया 1925 में उन्होंने मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की।

अपनी पढ़ाई के साथ साथ वह कई पत्र-पत्रिकाओं में अपनी कविताएं लिखकर के प्रकाशन के लिए देती थी कॉलेज की पढ़ाई के समय ही सुभद्रा कुमारी चौहान के साथ महादेवी वर्मा का बहुत ही मित्रता हो गया था महादेवी वर्मा का सबसे ज्यादा साथ सुभद्रा कुमारी चौहान ने हीं दिया

उन्होंने महादेवी वर्मा को अपने सखियों के पास ले जाकर के कविताएं सुनाने को कहती थी और उनकी कविताएं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन करवाने के लिए बहुत कोशिश करती थी।1935 में महादेवी वर्मा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत से m.a. किया।

प्रयागराज से महादेवी वर्मा ने अपनी पढ़ाई पूरी की महादेवी वर्मा ने संस्कृत से M.A. की पढ़ाई पूरी की उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा विभाग से ही जोड़ कर रखा है m.a. के परीक्षा के बाद महादेवी वर्मा ने प्रयाग महिला विद्यापीठ मैं प्रधानाचार्य के पद पर नौकरी किया और बहुत ही मन लगाकर अपना कार्य करती थीं

महादेवी वर्मा का वैवाहिक जीवन

Mahadevi Verma का जब शादी हुई तो उनकी उम्र 9 वर्ष की थी महादेवी वर्मा का विवाह नवाबगंज के रहने वाले श्री स्वरूप नारायण वर्मा से हुआ था।उस समय वह शादी का मतलब ही नहीं समझते थे

ऐसा कहा जाता है कि जब बारात आई तो सभी लोगों के साथ वह भी बाहर दरवाजे पर खड़ी हो गई थी बारात देखने के लिए व्रत रखने के लिए कहा गया तो वह खूब मिठाई खाने लगी फिर कुछ समय के बाद वह सो गई थी तो नाइन गोद में लेकर उनके फेेरेे दिलवाई थी।

जब अपने ससुराल गई तो रो रो के सबका बुरा हाल कर दिया था इस वजह  से उनके ससुर ने उन्हें उनके मायके पहुंचा दिया था महादेवी वर्मा को शादीशुदा जिंदगी से  नफरत हो गया था

कुछ दिनों बाद महादेवी वर्मा जब पढ़ने के लिए गई तब उनके पति उनसे कभी कभी मिलने जाया करते थे लेकिन वह सन्यासी की तरह अपना जीवन व्यतीत करती थी।

महादेवी वर्मा तो अपना जीवन एक सन्यासी की तरह व्यतीत करती थी लेकिन अपने पति को हमेशा दूसरा विवाह करने के लिए कहती रहती थी लेकिन उनके पति ने कभी भी दूसरा विवाह नहीं किया महादेवी वर्मा हमेशा सफेद कपड़ा पहनती थी

तख्त पर सोती थी और कभी भी आईना नहीं देखती थी। 1966 में उनके पति की मृत्यु हो गई जिसके बाद महादेवी वर्मा पूर्ण रूप से एक सन्यासी बनकर इलाहाबाद में ही हमेशा के लिए रहने लगी।

महादेवी वर्मा का साहित्यिक जीवन  

Mahadevi Verma का भाषा शुद्ध साहित्य खड़ी बोली होती थी महादेवी वर्मा को हिंदी संस्कृत अंग्रेजी चित्रकला का ज्ञान बहुत अच्छे थे महादेवी वर्मा को आधुनिक युग का मीरा भी कहा गया है

महादेवी वर्मा एक बहुत ही अच्छी कवियित्री थी उनकी सबसे पहले रचना चांद नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई थी महादेवी वर्मा ने गध और पद दोनों में रचनाएं की थी उन्होंने अपना पूरा जीवन इलाहाबाद में रहकर ही बिताई  थी।

उन्होंने अपना जीवन साहित्य और साधना में गुजार दिया था हमारे हिंदी साहित्य जगत में उनका योगदान बहुत ही अविस्मरणीय रहा है उनकी रचनाओं में विरह वेदना और भावात्मकता रहती थी

शायद इसी वजह से लोगों ने आधुनिक युग की मीरा का करते थे Mahadevi Verma एक कुशल कवियित्री थी और उसके साथ ही गद्यकार भी थी।

महादेवी वर्मा का व्यक्तित्व

बचपन से ही काव्‍यों में रुचि बचपन से ही कविताएं लिखना महादेवी वर्मा का बहुत बड़ा शौक था महादेवी वर्मा बहुत ही गंभीर स्वभाव की और शांत स्वभाव की थी वह बचपन से ही किसी के प्रति दया भावना रखती थी

चित्रकारी करने का शौक बचपन से ही उन्हें था कहा जाता है कि किसी भी तरह का ईट पत्थर लेकर या कोयला लेकर जमीन पर किसी न किसी तरह का वह चित्र बनाया करती थी

बचपन में ही उनका विवाह हो जाने से उनकी पढ़ाई रुक जाने की वजह से उनके अंदर बहुत ही पीड़ा वेदना और करुणा था अपनी चित्रकारी के माध्यम से वह अपने अंदर के वेदना पीड़ा करुणा को व्यक्त करती थी महादेवी वर्मा ने कई पत्रिकाओं का संपादन भी किया

उन्होंने अखिल भारतीय कवि सम्मेलन 15 अप्रैल 1933 में कराया महादेवी वर्मा को भारतीय हिंदी साहित्य में रहस्यवाद की प्रवर्त्तिका भी कहा जाता है।महादेवी वर्मा ने राजनिती में भी कुछ अपना सहयोग दिया था 1952 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा की सदस्या भी बनी थी।

महादेवी वर्मा के समाज सुधरक कार्य

1936 में नैनीताल में रामगढ़ के उमा गढ़ नाम के गांव में महादेवी वर्मा ने एक अपना बंगला बनवाया जिसका नाम उन्होंने मीरा मंदिर रखा था उस मीरा मंदिर में वह अपने आसपास के छोटे-छोटे गांव में शिक्षा और शिक्षा के विकास के लिए कार्य करती थी

महिलाओं की शिक्षा और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए उन्‍होंने बहुत कार्य किए महादेवी वर्मा ने महिलाओं के लिए उनकी विकास के लिए शिक्षा के लिए मुक्ति के लिए बहुत ही दृढ़ता से आवाज उठाई

समाज में फैली सामाजिक बुराइयों को दूर करने का उन्होंने बहुत प्रयास किया महिलाओं के लिए शिक्षा और विकास के लिए आवाज उठाने के लिए उसका विरोध करने के लिए उन्होंने महिलाओं को बहुत प्रोत्साहित किया

इसीलिए महादेवी वर्मा एक समाज सुधारक के रूप में भी जानी जाती है। इलाहाबाद प्रयाग महिला विद्यापीठ के विकास के लिए योगदान दिए थे साथ में महिलाओं के शिक्षा के लिए आंदोलन किए और प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्य और कुलपति भी कुछ दिनों तक महादेवी वर्मा रही थी।

महादेवी वर्मा को मिले सम्मान और पुरस्कार 

एक कवियित्री एक लेखिका होने के साथ-साथ Mahadevi verma ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी महात्मा गांधी के साथ कई आंदोलन में भाग लिया था उन्होंने समाज सुधारक कार्य भी किए महिलाओं की शिक्षा के लिए उनके विकास के लिए आवाज उठाई।

छायावाद के चारों स्तंभों में से एक स्तंभ महादेवी वर्मा को माना जाता है भारतीय हिंदी साहित्य में रहस्यवाद और प्रकृतिवाद पर आधारित जितने भी रचना हुए हैं उनमें महादेवी वर्मा का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है

उनकी महान रचनाओं के लिए कई सम्मान और पुरस्कार भी प्राप्त हुए थे Mahadevi verma की रचना नीरजा के लिए सेकसरिया पुरस्कार मिला था।महादेवी वर्मा को पद्म विभूषण सम्मान प्राप्त किए गए थे लेकिन उन्होंने भारत सरकार को उपाधि लौटा दिया था

क्योंकि वह चाहती थी कि भारत सरकार हिंदी के प्रचार प्रसार करें लेकिन सरकार के तरफ से हिंदी के प्रचार नहीं करने से वह बहुत उपेक्षित थी इसीलिए उन्होंने पद्म विभूषण वापस कर दिया था।

  • 1942 में द्विवेदी पदक प्राप्त हुए
  • ज्ञानपीठ पुरस्कार।
  • 1943 में मंगला प्रसाद पारितोषिक पुरस्कार और भारत भारती पुरस्कार मिला था।
  • 1956 में पद्म विभूषण
  • 1971 में साहित्य अकादमी पुरस्कार।
  • मरणोपरांत 1988 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही उन्हें और भी कई पुरस्कार और सम्मान मिले थे।इसके साथ ही महादेवी वर्मा को कुमाऊं विश्वविद्यालय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय और विक्रम विश्वविद्यालय से उन्हें डी लिट की उपाधि से भी सम्मानित किया गया था।

  • 1969 में विक्रम विश्वविद्यालय से डी लिट की उपाधि
  • 1980 में दिल्ली विश्वविद्यालय से डी लिट की उपाधि से सम्मानित किया गया।
  • 1984 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से डी लिट की उपाधि प्राप्त हुआ।

महादेवी वर्मा का स्वतंत्रता आंदोलन में सहयोग

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कई लेखक और कवियों ने सहयोग किया था किसी लेखक और कवि ने अपने महान कविताओं से लेखों से लोगों के दिलों में स्वतंत्रता आंदोलन के लिए ज्वाला भड़काई थी

उसी तरह Mahadevi verma ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में अपना सहयोग दिया था महात्मा गांधी के बातों से उनके आंदोलन से प्रभावित होकर के महादेवी वर्मा ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था

स्वतंत्रता संग्राम से जुड़कर के कई समाज सुधारक कार्य भी उन्होंने किया महादेवी वर्मा ने महिलाओं के लिए आंदोलन किया महिलाओं को सशक्तिकरण नारी बनाना शिक्षा के लिए उनके विकास के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया उनके जीवन में महात्मा गांधी और रविंद्र नाथ टैगोर का बहुत ही प्रभाव था।

Mahadevi verma ki rachnaye

महादेवी वर्मा को चित्र कला और संगीत में भी बहुत रूचि था उनकी सबसे पहली रचना चांद नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई थी और चांद पत्रिका का संपादन भी खुद महादेवी वर्मा ही करती थी Mahadevi verma की रचनाओं के लिए उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान भी प्राप्त हुए थे

आधुनिक युग में काव्य में जो साज और श्रृंगार वर्णित रहते हैं उसका श्रेय महादेवी वर्मा को ही दिया जाता है उन्होंने अपनी रचनाओं में सबसे पहले साज और श्रृंगार का शुरुआत किया था

उनकी रचनाओं में विरह वेदना बखूबी दिखाई देता था Mahadevi verma की रचनाओं में गद और पद दोनों ही शामिल है उनकी काव्य संग्रह में आत्मा और परमात्मा दोनों की संबंध पर बहुत ही मधुर वर्णन किया गया है अपनी कमियों में करुण और भावुकता के साथ-साथ विरह वेदना का इतना वर्णन उन्होंने किया है

इसीलिए उन्हें आधुनिक युग की मीरा भी कहा जाता है। Mahadevi verma ने साहित्यकार संसद नाम की संस्था का स्थापना किया था इस संस्था के माध्यम से वह साहित्य का प्रचार प्रसार किया करती थी उन्होंने बहुत ही प्रसिद्ध संस्मरण निबंध रेखाचित्र कविता आलोचना आदि लिखे हैं।

कविता संग्रह

  • निहार
  • रश्मि
  • नीरजा
  • सांधे गीत
  • दीपशिखा
  • सप्तपर्णा अनूदित
  • प्रथम आयाम
  • अग्नि रेखा
  • आधुनिक कवि तथा संधिनी

महादेवी वर्मा की गद्य संग्रह

  • अतीत के चलचित्र
  • स्मृति की रेखाएं
  • श्रृंखला की कड़ियां
  • महादेवी का विवेचनात्मक गद्य
  • पथ के साथी
  • यह सभी महादेवी वर्मा के प्रसिद्ध रचनाएं थे

महादेवी वर्मा की भाषा शैली

अपनी रचनाओं में महादेवी वर्मा महिलाओं के हृदय की कोमलता और सरलता का बहुत ही अच्छे से वर्णन किया करती थी उनकी रचनाओं में संगीत की मधुरता रहती थी

Mahadevi verma की रचनाओं की भाषा शैली खड़ी बोली सरल और स्निग्ध होती थी उन्होंने रूपक उपमा श्लेष अलंकार आदि का वर्णन किया है महादेवी वर्मा के काव्य का भाषा शैली भावात्मक सांकेतिक होता था।

जिस तरह उनके जीवन में अकेलापन हमेशा रहा उसी तरह उनकी कविताओं में उनके काव्य में भी गंभीरता और एकाकीपन का वर्णन मिलता है। महादेवी वर्मा ने जो भी रचनाएं की है जो भी काव्‍य लिखे हैं उसमें महिलाओं की वेदना करुणा का वर्णन उन्होंने किया है।

महादेवी वर्मा की मृत्यु  

Mahadevi Verma हिंदी भाषा साहित्य एक प्रख्यात कवियित्री थी वह एक स्वतंत्रता सेनानी महिला थी और महिलाओं के अधिकार के लिए लड़ने वाली एक महान सेनानी महिला थी छायावादी युग की प्रसिद्ध कवियित्री थे

महादेवी वर्मा की मृत्यु 11 सितंबर 1987 को हुआ था उनका मृत्यु प्रयागराज में हुआ था महादेवी वर्मा की मृत्यु से एक सेनानी महिला का भी अंत हो गया उनकी रचनाओं में छायावाद की विशेषताएं दिखती थी।

साराशं 

इस लेख में भारतीय हिंदी साहित्य के एक महान लेखिका महान कवित्री एक समाज सुधारक स्वतंत्रता सेनानी महादेवी वर्मा के बारे में पूरी जानकारी दी गई है।महादेवी वर्मा के बारे में दी गई जानकारी कैसा लगा

मुझे आशा है कि Mahadevi verma  के बारे में आप लोगों को यह लेख पसंद आया होगा अगर पसंद आया है तो आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं और जितना हो सके शेयर भी जरूर करें।

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