Maharana Pratap – महाराणा प्रताप का जीवन परिचय

राजपूत राजाओं में सबसे प्रसिद्ध  Maharana Pratap biography in hindi language के बारे में हम लोग इस लेख में पूरी जानकारी पाने वाले हैं भारत के इतिहास में कई राजा महाराजा हुए जो कि वीरता और शौर्य पराक्रम त्याग से इतिहास में उनका नाम अमर हो गया भारत देश पर कई साल मुगलों का शासन रहा

मुगल से लड़ने के लिए मुगल को भारत से निकालने के लिए भारत के कई राजा महाराजाओं ने युद्ध किया उन्हें हराया और भारत को मुस्लिमों से स्वतंत्र कराना चाहा उन्हीं में से एक बहुत ही वीरता और त्याग पराक्रम के प्रतिमूर्ति माने जाने वाले महाराणा प्रताप राजा थे

जो कि अपने तलवार अपने हाथी घोड़ा भाला आदि के लिए जाने जाते हैं तो आइए हम लोग इस लेख में सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा महाराणा प्रताप के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं।

Maharana Pratap biography in hindi language

Maharana Pratap राजस्थान के मेवाड़ के सिसोदिया वंश के राजा थे। महाराणा प्रताप सिसोदिया वंश के 13वें हिंदू शासक थे महाराणा प्रताप ऐसे राजा थे जिन्होंने मुगल वंश के महान शासक अकबर को भी परेशान कर दिया था। जब मुगल वंश अकबर का पूरे देश में अधिपत्य हो गया था और भारत के बहुत सारे राजा मुगल वंश का अधीनता स्वीकार कर लिया था

उस समय महाराणा प्रताप के एक ऐसे शासक हुए जिन्होंने मुगल सम्राट अकबर की अधीनता कभी भी स्वीकार नहीं की थी। Maharana Pratap एक सच्चे देशभक्त साहसी शक्तिशाली वीर राजा थे उन्होंने मुगलों को भी इतना परेशान कर दिया था कि महाराणा प्रताप के मृत्यु के बाद अकबर के भी आंख से आंसू आ गया था और वह Maharana Pratap के साहस का और वीरता का गुणगान करता था

Maharana Pratap biography in hindi language

Maharana Pratap एक ऐसे शासक थे जिन्हें हराने के लिए  जब तक महाराणा प्रताप जीवित रहे अकबर उन्हें हराने का कोशिश करता रहा लेकिन यह कोशिश उसका नाकाम ही रहा वह महाराणा प्रताप को कभी भी हरा नहीं सका अपनी अधीनता स्वीकार नहीं करा सका।

महाराणा प्रताप का जन्म 

Maharana Pratap का जन्म 9 मई 1540 इसवी में हुआ था। और हिंदी संवत के अनुसार उनका जन्म जेष्ठ महीना के शुक्ल पक्ष में तृतीया तिथि को मनाया जाता हैं महाराणा प्रताप के दादाजी महान शक्तिशाली और साहसी राजा महाराज राणा सांगा थे।

Maharana Pratap के पिता जी का नाम उदय सिंह था और उनकी माता का नाम महारानी जयवंती था। महाराणा प्रताप का जन्म कुंभलगढ़ के दुर्ग में हुआ था। महाराणा प्रताप के बचपन का नाम कीका था महाराज महाराणा प्रताप बचपन से ही बहुत साहसी शक्तिशाली और देशभक्त इंसान थे वह अपने मातृभूमि के लिए जान देने वाले एक देशभक्त राजा थे।

नाम महाराणा प्रताप
जन्‍म 9 मई 1540 ईसवी
जन्‍म स्‍थान कुंभलगढ़ के दुर्ग
पिता का नाम उदय सिंह
माता का नाम महारानी जयवंती
वंश सिसोदिया वंश
पत्नि रानी अजब्दे
घोडे का नाम चेतक
हाथी का नाम रामप्रसाद
युद्ध 18 जून 1576 को हल्दीघाटी का युद्ध
हल्दी घाटी का युद्ध महराण प्रताप औरऔर मुगल बादशाह अकबर
मृत्‍यु 19 जनवरी 1597

महाराणा प्रताप की शिक्षा

Maharana Pratap बचपन से ही युद्ध नीति में बहुत विश्वास रखते थे। उन्हें युद्ध नीति देखना और सीखना बहुत अच्छा लगता था महाराणा प्रताप जब छोटे थे तभी से वह ढाल चलाना तलवार चलाना सारी शिक्षाएं ली थी

उन्हें अपने पिताजी की तरह एक कुशल शक्तिशाली राजा और कुशल योद्धा बनना था इसीलिए उन्हें ढाल तलवार और युद्ध की सारी नीतियों का प्रशिक्षण दिया गया था Maharana Pratap को अस्त्र शास्त्र की विद्या बहुत निपुणता से मिली थी। उन्हें घुड़सवारी भी बहुत अच्छे से आती थी ।

महाराणा प्रताप का विवाह 

जब Maharana Pratap बड़े हुए उनके पिता की मृत्यु हो गई उसके बाद उनका 1676 में राज्याभिषेक हुआ और वह मेवाड़ के राजगद्दी के उत्तराधिकारी बने महाराणा प्रताप ने 11 विवाह किए थे उनकी पहली पत्नी का नाम अजब्दे था जिनका पुत्र अमर सिंह थे

जो कि Maharana Pratap के उत्तराधिकारी हुए महाराणा प्रताप के 11 शादी हुए और वह सारे शादी अपना राज्य विस्तार करने के लिए राजनीति के कारण हुआ था उनके 11 शादियों से 17 बेटे थे और 5 बेटियां थी।

महाराणा प्रताप का व्यक्तित्व 

Maharana Pratap बहुत ही शक्तिशाली और अपने देश के लिए समर्पित होने वाले एक बहादुर राजा थे Maharana Pratap इतने शक्तिशाली थे कहा जाता है कि उनका खुद का वजन 110 किलो का था और उनका लंबाई 7 फीट 5 इंच था महाराणा प्रताप अस्त्र शास्त्र के रूप में दो तलवार कवच ढाल और भाला रखते थे

उनके भाले का वजन 81 किलो रहता था और उनकी कवच का वजन 72 किलो रहता था ऐसा कहा जाता हैं कि सारी चीजें मिलाकर 208 किलो हो जाता था।फिर भी महाराणा प्रताप इतनी फुर्तीले थे इसके बावजूद वह पूरे पराक्रम और साहस से लड़ाई करते थे वह भी अपने घोड़े चेतक के ऊपर बैठकर ।

जब वह चेतक पर बैठकर युद्ध के लिए जाते थे तो उनका घोड़ा हवा से बातें करने लगता था और उनकी गति को कोई देख नहीं सकता था महाराणा प्रताप और अकबर के बीच महान युद्ध हल्दीघाटी का युद्ध हुआ था जिसमें महाराणा प्रताप ने बहुत ही साहस पुर्ण तरीके से युद्ध किया था और अकबर की अधीनता कभी भी स्वीकार नहीं की थी।

महाराणा प्रताप की देशभक्ति 

महाराणा प्रताप को एक बहादुर धर्म निष्ठा त्याग पराक्रम चरित्र आदि के लिए बहुत ही प्रसिद्ध सर्वश्रेष्ठ राजपूत राजा के रूप में पहचाना जाता है मुगलों के साथ कई बार युद्ध होने की वजह से उन्हें हिंदू शिरोमणि माना गया है। वह ऐसे देशभक्त वीर रणबांकुरे साहसी राजा थे

जिन्होंने अपने देश को बचाने के लिए मुगलों को भारत देश से भगाने के लिए कितने दिनों तक जंगल में भटक कर घास की रोटी खाई थी लेकिन किसी भी कीमत पर उनके अधीन रहना उन्हें मंजूर नहीं था महाराणा प्रताप का शारीरिक क्षमता अद्वितीय था

उनकी लंबाई 7 फीट थी वजन 110 किलोग्राम था और वह हमेशा अपने साथ 72 किलो की छाती पर कवच लगाते थे उनका भाला 81 किलो का था और हमेशा अपने साथ दो तलवार रखते थे जिसका वजन 208 किलो रहता था और इतना सारा वजन वह अपने चेतक नाम के घोड़े पर रखकर हमेशा चलते थे।

महाराणा प्रताप जब राजा बने और अपने आसपास के सभी राज्यों को जीत लिया तब उस समय के सबसे महान मुगल शासक अकबर को डर लगने लगा था कि कहीं महाराणा प्रताप उसके राज्य पर कब्जा ना कर ले इसीलिए उसने Maharana Pratap के राज्य मेवाड़ पर आक्रमण किया

मुगल शासक अकबर ने पहले तो बहुत कोशिश किया अपने कई दूत भेजें की महाराणा प्रताप को भी अन्य राजाओं की तरह अपनी अधीनता स्वीकार करा लें लेकिन महाराणा प्रताप ने उसकी अधीनता स्वीकार नहीं की जिस वजह से महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर के बीच हल्दीघाटी का युद्ध हुआ।

हल्दीघाटी का युद्ध

18 जून 1576 को हल्दीघाटी का युद्ध हुआ इस युद्ध में अकबर का बहुत ही विशाल सेना था जिसने उसके 85000 सैनिक थे लेकिन Maharana Pratap के पास सिर्फ 20000 सैनिक थे फिर भी महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी और मुगल सम्राट अकबर के साथ युद्ध का शुरुआत कर दिया

इस युद्ध में महाराणा प्रताप के बहुत सारे योद्धा मारे गए फिर भी महाराणा प्रताप ने मुगलों से हार नहीं मानी और वहां से अपने घोड़ा चेतक पर बैठकर भाग निकले कहा जाता हैं कि बहुत दिनों तक महाराणा प्रताप जंगल में रहते थे और वहीं पर अपना सैन्य बल बढ़ाते थे।

जंगल में रहकर Maharana Pratap ने घास की रोटी बनाकर खाकर अपना जीवन यापन करते थे ऐसी विकट परिस्थिति में भी वह कभी भी दुखी या निराश नहीं होते थे और अपने सैनिक बल को तैयार करते रहते थे

कहा जाता हैं कि जब हल्दीघाटी का युद्ध हुआ था तब Maharana Pratap अपने घोड़ा चेतक पर बैठकर इतने तेजी से भागे थे कि उनका पीछा कोई नहीं कर सका था एक बहुत ही लंबा नाला था।

जिसको पार करना नामुमकिन था उसको भी चेतक ने पार कर लिया पार तो कर लिया लेकिन वह लंगड़ा हो गया उसके पैर में चोट आ गई और उसकी मृत्यु हो गई। हल्दीघाटी के युद्ध में ना तो Maharana Pratap की हार हुई और ना ही मुगल बादशाह अकबर की हार हुई

हल्दीघाटी युद्ध के बाद Maharana Pratap जंगल में रहकर जब अपनी सेना बल बड़ा लिए तब 1577 में फिर से मुगल बादशाह अकबर से युद्ध हुआ और इसमें अकबर को हारना पड़ा इस युद्ध को कुछ इतिहासकारों ने बैटल ऑफ दिवेर कहा हैं।

महाराणा प्रताप का घोड़ा 

जिस तरह Maharana Pratap एक बहुत ही शक्तिशाली और वीर राजा थे उसी तरह उनका घोड़ा चेतक भी बहुत ही वीर स्वामी भक्त और साहसी घोड़ा था चेतक नीले रंग का एक अरबी नस्ल का घोड़ा था।

चेतक इतना शक्तिशाली था कि महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो उनके भाले का वजन 81 किलो और उनके कवच का वजन 72 किलो सब मिलाकर उनका वजन 208 किलो रहता था

फिर भी चेतक महाराणा प्रताप को बैठाकर जब दौड़ता था तो हवा से बातें करने लगता था रणभूमि में किसी की भी साहस नहीं थी जो चेतक को हरा सके कहा जाता हैं कि चेतक के मुंह पर हाथी का सूंड जैसा लगाया जाता था जिससे के सैनिक भ्रम में पड़ जाते थे।

महाराणा प्रताप का हाथी 

Maharana Pratap का घोड़ा तो प्रसिद्ध हैं ही लेकिन उनके पास एक हाथी भी था जिसका नाम रामप्रसाद था रामप्रसाद बहुत ही देशभक्त और स्वामी भक्त हाथी था रामप्रसाद हाथी ने हल्दीघाटी युद्ध में अपने स्वामी महाराणा प्रताप की तरफ से युद्ध करते हुए अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को मार दिया था

उस एक हाथी को पकड़ने के लिए उसने 7 हाथी और उस पर 14 मुहावतों को बैठाकर एक चक्रव्यूह बनाया था जिसे की रामप्रसाद हाथी को पकड़ा जाए और उसे बंदी बना लिया था कहा जाता हैं कि जो मुगल सैनिक रामप्रसाद हाथी को पकड़कर अकबर के दरबार में ले गए

तब उसे खाना पानी भी दिया जा रहा था तो वहां नहीं खाता था 18 दिन वह वहां पर जीवित रहा लेकिन कभी भी उसने मुगलों का एक दाना भी मुंह में नहीं डाला था और वहीं पर उसकी मृत्यु हो गया।

महाराणा प्रताप की मृत्यु 

हल्दीघाटी युद्ध के बाद अकबर ने भी यह मान लिया था कि वह Maharana Pratap से कभी नहीं जीत सकता हैं क्योंकि महाराणा प्रताप ने भले ही अपना राज्य धन दौलत सारा से त्याग दिया था। लेकिन कभी भी मुगलों के आगे अपनी हार नहीं मानी

इस युद्ध के बाद अकबर भी अपने राज्य काज में लग गया वह मेवाड़ से अपना ध्यान हटा लिया और महाराणा प्रताप भी अपने राज्य काज में लग गए कई बरसों बाद महाराणा प्रताप ने  अपनी राजधानी चावंड में बनाया वहीं पर 19 जनवरी 1597 में उनकी मृत्यु हो गई।

कुछ लोगों का कहना हैं कि शिकार करते समय धनुष की डोर खींचने के समय उनके हाथ में लग गई जिस वजह से उन्हें बहुत गहरी चोटें आई इलाज हुआ लेकिन फिर भी वह नहीं बच पाए उनकी मृत्यु हो गई

Maharana Pratap इतने शक्तिशाली और पराक्रमी राजा थे कि जब उनकी मृत्यु हुई तब मुगल शासक अकबर के भी आंखों से आंसू आ गए। महाराणा प्रताप बहुत ही स्वाभिमानी सच्चे देशभक्त और पराक्रमी शूरवीर राजा थे जिन्होंने अपने मातृभूमि को बचाने के लिए अपने जी जान लगा दी और हजार कष्ट और परेशानी से रहते हुए भी कभी भी हार नहीं मानी।

सारांश 

हमारा देश भारत कई रण बांकुरा बलशाली शक्तिशाली महान राजाओं का जन्म भूमि है जिन्होंने अपने देश की रक्षा के लिए अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए भारत को स्वाधीनता दिलाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने में भी नहीं सोचते थे

भारत का इतिहास राजपूत राजाओं जन्‍म स्थान माना जाता है जिसमें की मेवाड़ के राजा महाराणा थे जिन्हें बलिदान त्याग धर्म निष्ठा मुगलों से कई बार लोहा लेने के रूप में और पराक्रम की वजह से सर्वश्रेष्ठ माना गया है महाराणा प्रताप जितने प्रसिद्ध और बलशाली थे

उतना ही उनका घोड़ा चेतक भी था इस लेख में मेवाड़ के सिसोदिया वंश के महान राजा महाराणा प्रताप सिंह के बारे में पूरी जानकारी दी गई है अगर इस लेख से संबंधित कोई सवाल आपके मन में है तो कृपया कमेंट करके जरूर पूछें

मेवाड़ के सिसोदिया वंश के महान पराक्रमी राजा महाराणा प्रताप उनके जीवन परिचय, साहस बारे में वीरता के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की हैं आप लोगों को यह जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं और शेयर भी जरूर करे

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