Mahatma Gandhi – महात्मा गांधीजी का जीवन परिचय

भारत जब अंग्रेजों के अधीन था ब्रिटिश साम्राज्य का भारत देश पर एकाधिकार था तो भारतीयों को कई तरह की परेशानियों से कई तरह के अत्याचारों को सहना पड़ता था लेकिन इन सारी परेशानियों से भारतीयों को निकालने में अंग्रेजों से भारत देश को अपने भारत माता को आजाद कराने में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम सबसे पहले सबसे ज्यादा लिया जाता है।

Mahatma Gandhi biography in hindi Language महात्मा गांधीजी को कौन नहीं जानता है। स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति थे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में पूरी जानकारी दी गई हैं भारत का बड़े से लेकर बच्चों तक हर कोई महात्मा गांधी का नाम महात्मा गांधी का जन्मदिन महात्मा गांधी के योगदानो के बारे में जानकारी जरूर रखता है

इस लेख में महात्मा गांधी के भारत को स्वतंत्र कराने में दिए गए योगदान के बारे में उनके जन्म के बारे में महात्मा गांधी के माता पिता कौन थे उनका शादी किससे हुआ था महात्मा गांधी ने कौन कौन से आंदोलन अंग्रेजो के खिलाफ किए थे उनकी मृत्यु कब और कैसे हुई के बारे में आइए नीचे पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं।

Mahatma Gandhi biography in hindi Language

भारत आजाद हुआ भारत को स्वतंत्र कराने में सबसे महत्वपूर्ण और सबसे ज्यादा योगदान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सत्य अहिंसा की राह पर हमेशा अपनाकर चलकर अपने कर्तव्यों का पालन करते और लोगों को भी सत्य और अहिंसा पर चलना सिखाते थे महात्मा गांधी एक ऐसा नाम है जिसे भारत के साथ साथ विश्व में हर कोई जानता है पहचानता है

सत्य और अहिंसा के पुजारी के रूप में पहचाने जाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को आज भी हर कोई अपना आदर्श मानता है। हर भारतीय के दिलों में महात्मा गांधी एक आदर्शवादी के रूप में बसे हैं लोगों को सही राह दिखाने वाले लोगों को सत्य और अहिंसा के राह पर चलकर किसी भी तरह की लड़ाई जीतने के लिए एक आदर्शवादी महापुरुष हमेशा रहगें  और युगो युगो तक उन्हें याद किया जाता रहेगा।

Mahatma Gandhi biography in hindi Language

महात्मा गांधी एक संत एक महात्मा की तरह जीवन जीते थे सादगी और सौम्यता से किसी से भी बात करते थे जो भी उनसे मिलता था वह महात्मा गांधी का शिष्य बन जाता था उनके विचारों से प्रभावित हो जाता था

महात्मा गांधी जो भी आंदोलन करते थे जो भी लड़ाई लड़ते थे अंग्रेजो के खिलाफ जो भी विरोध करते थे वह पूरी तरह से सत्य और अहिंसा के पथ पर चलकर करते थे हिंसा का हमेशा विरोध किया करते थे

कई ऐसे स्वतंत्रता सेनानी हुए जो कि भारत माता को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए अंग्रेजों की तरह ही खून खराबा करके उनके साथ लड़ाई करके उनका जवाब देते थे लेकिन महात्मा गांधी शांति और अहिंसा के पथ पर चलना लोगों को सिखाते थे

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अफ्रीका से बैरिस्टर बन कर आए तो दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने भारतीय लोगों पर अंग्रेजों के अत्याचार को देखा उनके मन में अंग्रेजो के खिलाफ एक द्वेष भावना हो गया

भारत आने के बाद और जब तक महात्मा गांधी जीवित रहे तब तक उनका जीवन आंदोलन की तरह ही रहा उन्होंने कई आंदोलन किये उसमें से कई आंदोलन सफल भी हुए

भारत के जन-जन में स्वतंत्रता आंदोलन का लहर फैला दिया लोगों के दिलों में महात्मा गांधी का स्थान राष्ट्र के पिता के रूप में था और आगे भी रहेगा महात्मा गांधी स्वतंत्रता आंदोलन के अध्यात्मिक राजनीतिक और सबसे प्रमुख नेता माने जाते थे

भारत देश को आजाद कराने में महात्मा गांधी का भूमिका सबसे पहले स्थान पर था इसीलिए आज भी उनके जन्मदिन 2 अक्टूबर को बड़े ही धूमधाम से गांधी दिवस के रुप में मनाया जाता हैं।

महात्मा गांधी का जन्म

भारत देश के भारत राष्ट्र के पिता के रूप में महात्मा गांधी को जाना जाता है उनके सिद्धांतों और उनके दिखाए हुए राह पर चलकर ही अंग्रेजों से भारत को आजाद कराया गया भारत के हर व्यक्ति को अपना नागरिक अधिकार मिल पाया।

सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी जी का जन्‍म 2 अक्टूबर 1869 ईसवी में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था उनके पिता का नाम करम चंद्र गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था महात्मा गांधी के पिता अंग्रेजों के रियासत के दीवान थे

और उनकी माता धार्मिक प्रवृत्ति की विचार वाली महिला थी इसिलिए उन पर भी धार्मिकता का प्रभाव था महात्मा गांधी शाकाहारी थे उपवास रखने पर ज्यादा महत्व रखते थे Mahatma Gandhi जी का पूरा नाम  मोहनदास करमचंद गांधी था।

महात्मा गांधी की माता एक बहुत ही धार्मिक स्त्री थी वह हमेशा पूजा-पाठ लोगों के प्रति दया प्रेम श्रद्धा की भावना रखती थी इसीलिए महात्मा गांधी में भी अपने मां का गुण था वह हमेशा अपने माता-पिता के दिखाए रास्ते पर ही चलते रहे लोगो से प्रेम भावना से बातें करना मिलना ईश्वर के प्रति निस्वार्थ भावना से पूजा पाठ करना।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शिक्षा 

महात्मा गांधी की शुरुआती पढ़ाई उनके जन्म स्थान पोरबंदर में मिडिल स्कूल तक की पढ़ाई पूरी हुई थी लेकिन इनके पिता का ट्रांसफर राजकोट में हो गया इसलिए मिडिल स्कूल से आगे की पढ़ाई राजकोट से पूरी हुई 1887 में महात्मा गांधी ने मैट्रिक के परीक्षा पास की और आगे की पढ़ाई करने के लिए भावनगर के सामल दास कॉलेज में दाखिला लिया

उसके बाद वकालत की पढ़ाई पूरी करने के लिए लंदन चलेगा लंदन जाते समय उन्होंने अपने माता को यह वचन दिया था कि वह मांस और शराब से हमेशा दूर रहेंगे जब वह लंदन में अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए गए तो वहां पर खाना ज्यादा मांसाहारी ही मिलता था और महात्मा गांधी शाकाहारी थे

इसलिए उन्होंने वहां पर लंदन वेजीटेरियन सोसायटी की सदस्यता ले ली और उस सोसाइटी के कार्यकारी सदस्य भी बना दिए गए वहीं पर वह एक पत्रिका में लेख भी लिखने लगे लंदन में बैरिस्टर की पढ़ाई 1891 में उन्होंने पूरी की।

जब महात्मा गांधी लंदन में बैरिस्टर की पढ़ाई कर रहे थे उस समय वह कुछ शाकाहारी लोगों से भी मिले थे कुछ व्यक्ति उसमें थियोसोफिकल सोसायटी के सदस्य थे थियोसोफिकल सोसाइटी में बौद्ध धर्म और सनातन धर्म से संबंधित कई लोग थे

उनमें से किसी व्यक्ति ने महात्मा गांधी को श्रीमद्भागवत पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया लेकिन महात्मा गांधी ने किसी भी धर्म के बारे में पढ़ाई करने में यह किसी भी धर्म के बारे में जानने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई थी और वकालत करके वह भारत वापस चले आए।

जब महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में अपनी पढ़ाई कर रहे थे उस समय भारतीयों पर कई तरह के भेदभाव देखा करते थे उस समय उन्होंने अंग्रेजों का भारतीयों पर हो रहे भेदभाव बहुत ही नजदीक से देखा था

शुरू में जब वह वहां गए तो एक ट्रेन में टिकट उनके पास रहने के बावजूद भी दूसरे डब्बे में जाने से इनकार किए तो वहां के लोगों ने उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया

कई जगह तो ऐसी व्यवस्था थी कि दक्षिण अफ्रीका से बाहर के किसी व्यक्ति को अंदर जाने पर कई परेशानियां झेलनी पड़ती थी एक जगह तो किसी अदालत में गए थे वहां के न्यायाधीश ने महात्मा गांधी से अपनी पगड़ी उतारने के लिए भी कहा था

यह सारी बातें महात्मा गांधी के दिमाग में बैठ गई वहां पर भारतीयों पर इस तरह का भेदभाव देखकर अपने देशवासियों का अपमान देकर उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ घृणा हो गया।

वहां पर भारतीयों के साथ अंग्रेज बहुत ही अत्याचार कर रहे थे तभी Mahatma Gandhi ने भारतीयों को अंग्रेजी साम्राज्य से न्याय दिलाने का मन में प्रतिज्ञा ले लिया था

वहां पर कई होटलों में भारतीयों को ठहरने पर पाबंदी था इन सब घटनाओं से महात्मा गांधी के जीवन में अलग ही मोड आ गया था और मन ही मन उन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ने की ठान ली थी।

महात्मा गांधी जी का विवाह

Mahatma Gandhi जी का विवाह बचपन में ही उनके माता-पिता ने कस्तूरबा गांधी से तय कर दिया था लेकिन जब उनकी उम्र13 वर्ष की थी और कस्तूरबा  14 वर्ष की थी  उसी समय उनकी शादी हो गई थी जब वह 15 वर्ष के थे तभी उनकी पाहली संतान की प्राप्ति हुई थी।

जब महात्मा गांधी का विवाह कस्तूरबा गांधी से हुआ तो वह एकदम अनपढ़ थी उन्हें लिखना पढ़ना नहीं आता था तो महात्मा गांधी ने उन्हें पढ़ाई के प्रति जागरूक किया उन्हें लिखना पढ़ना सिखाया जिसके बाद कस्तूरबा गांधी एक आदर्श पत्नी के रूप में महात्मा गांधी के साथ हर काम में कदम से कदम मिलाकर उनका साथ दिया।

कई आंदोलनों में भी कस्‍तुरबा गांधी महात्‍मा गांधी के अपना योगदान दिया था महात्मा गांधी की चार संतान थी जिनका नाम हरीलाल गांधी मणिलाल गांधी रामदास गांधी और देवदास गांधी था।

नाम मोहनदास करमचंद गांधी
जन्‍म 2 अक्टूबर 1869
पिता का नाम करम चंद्र गांधी
माता का नाम पुतलीबाई
पत्नि का नाम कस्‍तुरबा गांधी
पुत्र हरीलाल गांधी,मणिलाल गांधी, रामदास गांधी और देवदास गांधी
उपनाम राष्‍ट्रपिता, महात्‍मा, बापू
प्रमुख आंदोलन असहयोग आंदोलन, स्वदेशी आंदोलन, नमक सत्याग्रह आंदोलन, हरिजन आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन
मृत्‍यु 30 जनवरी 1948

महात्मा गांधी व्यक्तित्व  

Mahatma Gandhi ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर हमारे भारत देश को आजादी दिलाई थी महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का तथा कोई महात्मा कहता था कोई बापू कहता था उन के अनेकों नाम थे

वह एक सन्यासी की तरह अपने जीवन व्यतीत करते थे और हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलते थे  हमारे भारत देश को आजादी दिलाने में Mahatma Gandhi का सबसे महत्वपूर्ण भूमिका था बुरा मत देखो बुरा मत सुनो बुरा मत कहो महात्मा गांधी नहीं कहा था।

महात्मा गांधी अहिंसा के पुजारी थे वह हमेशा ही स्वदेशी सामानों को इस्तेमाल करने के बारे में सब को प्रेरित करते रहते थे हमेशा उनका वेशभूषा साधारण इंसान की तरह ही रहता था महात्मा गांधी का खाना भी बहुत ही सात्विक और शाकाहारी खाते थे उनके घर में शुरू से ही धार्मिक माहौल था

उनकी माताजी एक धार्मिक स्त्री थी हमेशा पूजा पाठ और भगवान की पूजा निस्वार्थ भावना से करती रहती थी स्वदेशी आंदोलन के बाद महात्मा गांधी ने खादी का कपड़ा पहनना शुरू कर दिया था

बाद में तो वह सिर्फ एक चादर ओढ़ कर के ही खादी का बना हुआ धोती और सूत से बना हुआ सॉल हमेशा ओढते थे और खुद से ही चरखे से सूत कात कर हाथ से अपना कपड़ा बनाते थे

आत्म शुद्धि करने के लिए हमेशा कई कई दिनों तक उपवास भी रखते थे महात्मा गांधी ने गरीब महिलाओं धार्मिक एकता के लिए लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई आंदोलन किए

जिसमें उनका साथ भारत के हर देशवासी ने दिया था जितने भी आंदोलन महात्मा गांधी ने किए उनमें उनका अस्त्र-शस्त्र हथियार सिर्फ शांति सत्य अहिंसा था और लोगों का सहयोग रहता था

किसी भी तरह के हिंसा का विरोध हमेशा करते और लोगों को भी अहिंसा से लड़ाई करने के लिए प्रेरित करते रहते थे महात्मा गांधी को प्यार से सम्मान देने के लिए उन्हें बापू भी कहा जाता है।

स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी की भूमिका 

जब महात्मा गांधी बैरिस्टर की पढ़ाई करके 1891 में भारत लौट कर आए तो यहां पर उन्होंने मुंबई में एक अपनी वकालत की शुरुआत किया था लेकिन इस कार्य में उन्हें सफलता नहीं मिली और वहां से वह राजकोट चले गए

वहां पर जिस व्यक्ति को किसी भी तरह की अर्जियां लिखना नहीं आता था तो वह उन लोगों की मदद करने लगे और अर्जियां लिख कर उन्हें देने लगे लेकिन इस काम को भी वो कुछ दिनों के बाद छोड़ दिए

जब वह दक्षिण अफ्रीका से 1914 में भारत लौट कर आए तो वह उस समय के स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस के उदारवादी नेता गोपाल कृष्ण गोखले के कहने पर ही आए थे गोपाल कृष्ण गोखले और महात्मा गांधी का विचार बहुत हद तक मिलता था

कुछ दिनों तक गोपाल कृष्ण गोखले के साथ कई जगहों पर घूम घूम कर सामाजिक मुद्दों आर्थिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों को उन्होंने अच्छे से जांचा और परखा उसके बाद बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की

1915 ईस्वी में  उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन में भाग लिया और वहां पर अपना विचार रखा और वही से उन्होंने भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए अपना योगदान शुरू किया Mahatma Gandhi ने स्वतंत्र भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए बहुत सारे आंदोलन किए जिनमें से कुछ प्रमुख आंदोलन है जैसे कि

खेडा सत्याग्रह आंदोलन –सबसे पहला आंदोलन गुजरात के खेड़ा आंदोलन में उन्होंने भाग लिया खेड़ा में बहुत ही भयंकर बाढ़ और बाद में सुखा होने से लोगों की जिंदगी बहुत ही परेशानियों में गुजर रही थी

वहां के किसान और गरीब की हालत बहुत ही बदतर हो गई थी वहां के किसान और गरीब अंग्रेजों से कर नहीं देने की बात कर रहे थे वहां पर महात्मा गांधी ने सरदार बल्लभ भाई पटेल के साथ मिलकर किसानों और गरीबों का बात रखने के लिए अंग्रेजों के पास गए

जिसके बाद अंग्रेजों ने कर से उन गरीब और किसानों को मुक्ति दिलाया और जितने लोगों को कैदी बनाकर जेल में डाला था उन सभी लोगों को रिहा कर दिया इस चंपारण खेड़ा आंदोलन के बाद महात्मा गांधी की ख्याति पूरे भारत देश में फैलने लगी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख और महत्वपूर्ण नेता महात्मा गांधी बन गए।

चंपारण  सत्याग्रह – 1918 ईस्वी में Mahatma Gandhi ने चंपारण  सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था और उसने उन्हें बहुत बड़ी सफलता भी मिली थी यह आंदोलन किसानों के लिए था जो भी नील की खेती कर रहे किसानों के लिए यह आंदोलन किया गया था यह आंदोलन बिहार के चंपारण जिले में हुआ था।

खिलाफत आंदोलन – खिलाफत आंदोलन महात्मा गांधी ने 1919 से 1924 तक चलाया था महात्मा गांधी का सोच था उनका मानना था कि भारत को आजाद कराने में हर जाति का सहयोग होना जरूरी है

इसीलिए उन्होंने मुसलमानों के द्वारा चलाए गए खिलाफत आंदोलन के नेता के साथ मिलकर हिंदू मुस्लिम एकता को कायम रखने के लिए खिलाफत आंदोलन में साथ दिया।

असहयोग आंदोलन – महात्मा गांधी का मानना था कि अगर भारत देश में सभी देशवासी मिलकर के सहयोग के साथ अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई करें तो भारत देश आजाद होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा अंग्रेजो के साथ असहयोग करेंगे तो अंग्रेज बहुत ही जल्दी भारत देश को छोड़कर चले जाएंगे

उस समय तक महात्मा गांधी की लोकप्रियता कांग्रेस के एक सबसे बड़े नेता के रूप में पूरे देश में फैल गई थी उस समय उन्होंने अहिंसा शांति के साथ अंग्रेजो के खिलाफ असहयोग आंदोलन किया जिसमें कि उन्होंने कोई भी अस्त्र शस्त्र का प्रयोग नहीं किया था लेकिन जब 1919 में जालियांवाला नरसंहार हत्याकांड हुआ

इससे भारत की जनता में अंग्रेजो के खिलाफ क्रोध और बहुत बड़ी हिंसा की ज्वाला भड़क उठी थी असहयोग आंदोलन में गांधी जी ने असहयोग अहिंसा और शांति के विरोध से अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत की थी

इस आंदोलन में अंग्रेजों के नीतियों और उनके दमन के तरीकों को लेकर हुआ था जैसे कि मुस्लिम विरोधी कानून रौलट एक्ट जलियांवाला बाग हत्याकांड आदि Mahatma Gandhi ने असहयोग आंदोलन 1920 ईस्वी में शुरू किया था।

स्वदेशी आंदोलन – जालियांवाला नरसंहार के बाद आम जनता में ज्‍वाला भडक उठी जिसके बाद महात्मा गांधी ने स्वदेशी आंदोलन चलाया जिसमें जितनी भी विदेशी वस्तुएं थी उनका बहिष्कार किया गया और स्वदेशी सामानों का उपयोग किया जाने लगा

इसी के बाद महात्मा गांधी के द्वारा खादी से बनाए गए कपड़े पहने जाने लगे महात्मा गांधी ने हर व्यक्ति को चाहे वही स्त्री हो चाहे वह पुरुष हो उन्हें प्रतिदिन सूत काटकर उसे कपड़े बनाने के लिए प्रोत्साहित किया

भारतीय लोगों को सरकारी नौकरियों अदालतों संस्थाओं में जो भी नौकरी करते थे या अंग्रेजी शासन से जो भी सम्मानीय तमगा लोगों को मिला था उसे लौटाने का अनुरोध करने लगे

इस स्वदेशी आंदोलन से असहयोग आंदोलन में बहुत ही ज्यादा सफलता महात्मा गांधी को मिला इस आंदोलन में भारत के हर धर्म हर वर्ग हर जाति के लोग बढ़-चढ़कर के हिस्सा लिया और पूरे जोश से सभी लोग इसमें भागीदारी बढ़ाने लगे

1922 में चौरा चौरी कांड हुआ इसमें हिंसक घटना होने लगी जिसके बाद महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था इस आंदोलन को वापस लेने के बाद अंग्रेजों ने 10 मार्च1922 महात्मा गांधी को राजद्रोह का मुकदमा लगाकर गिरफ्तार कर लिया

जिसमें अंग्रेजों ने महात्मा गांधी को छ: साल की सजा सुनाई थी महात्मा गांधी की तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें रिहा कर दिया गया।

नमक सत्याग्रह आंदोलन – स्वराज और नमक सत्याग्रह आंदोलन Mahatma Gandhi के द्वारा ही चलाया गया आंदोलन था 1930 में यह आंदोलन हुआ था जोकि अंग्रेजो के खिलाफ साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक पैदल मार्च किया गया था

क्योंकि चाय कपड़ा और नमक भाारतीयोंं से छीन लिया था जिसके लिए महात्‍मा  गांधी ने यह आंदोलन चलाया था और आंदोलन बहुत सफल भी हुआ था।

1924 में जब महात्मा गांधी रिहा होकर आए तो वह कुछ दिनों तक राजनीति से दूर रहे लेकिन शराब अज्ञानता और गरीबी के खिलाफ धीरे-धीरे लड़ते रहे 1930 में अंग्रेजों के खिलाफ नमक पर कर लगाए जाने के विरोध में नमक सत्याग्रह आंदोलन चलाया इस आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ बहुत सारे स्त्री और पुरुष ने साथ दिया अंग्रेजों ने नमक पर कर लगा दिया था

दुकानों पर भी नमक बहुत ही मांगा मिलने लगा था जिसे भारत के लोगों को नमक खरीदने में बहुत परेशानी होने लगी थी इसके विरोध में महात्मा गांधी ने 12 मार्च से 6 अप्रैल तक अहमदाबाद से दांडी गांव तक पैदल 388 किलोमीटर की यात्रा पूरी की थी

इस यात्रा का उद्देश्य Mahatma Gandhi का नमक का उत्पादन करना था इस आंदोलन में Mahatma Gandhi के साथ हजारों की संख्या में भारत के वासियों ने दिया जिसमें 60000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार करके जेल में बंद कर दिया गया।

लेकिन ब्रिटिश सरकार के लॉर्ड इरविन ने Mahatma Gandhi से बातचीत किया और गांधी इरविन की संधि के द्वारा मार्च 1931 में हस्ताक्षर किया गया और जितने भी कैदियों को पकड़ा गया था उन्हें रिहा कर दिया गया।

 हरिजन आंदोलन – भारत में निचली जाति अछूतों के साथ में हो रहे भेदभाव को खत्म करने के लिए उनका जीवन सुधारने के लिए Mahatma Gandhi ने हरिजन आंदोलन चलाया था हरिजन आंदोलन अंग्रेजों द्वारा नए संविधान बनाने के लिए था इस आंदोलन में गांधी जी ने 6 दिन का उपवास किया था

भारत छोड़ो आंदोलन – यह आंदोलन अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए था  इसीलिए इसका नाम Mahatma Gandhi ने अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन दिया था और इस आंदोलन को तेज करके बहुत लोगों को इसमें जोड़ रखा था।

स्वतंत्रता आंदोलन में सबसे शक्तिशाली और सर्वाधिक आंदोलन अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन था इसी आंदोलन के बाद भारत देश आजाद हुआ

9 अगस्त 1942 में अंग्रेजों ने Mahatma Gandhi को गिरफ्तार कर लिया और 2 साल तक उन्हें जेल में बंदी बनाकर रखा इसी दौरान महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा गांधी का मृत्यु हो गया और Mahatma Gandhi को भी मलेरिया बीमारी हो जाने से उनका स्वास्थ्य खराब रहने लगा तब उन्हें 6 मई 1944 में रिहा कर दिया गया इसी समय द्वितीय विश्वयुद्ध का भी अंत हुआ था

और Mahatma Gandhi ने भारत छोड़ो आंदोलन समाप्त कर दिया जिसके बाद अंग्रेजों ने जो कई हजार राजनीतिक कैदियों को जेल में कैद करके रखा था उन्हें रिहा कर दिया। 

देश विभाजन – अंग्रेज तो भारत छोड़कर चले गए लेकिन हिंदू मुस्लिम की एकता को भंग करके देश विभाजन का ज्वाला भड़का कर चले गए अंग्रेजों का एक नारा था कि फूट डालो और राज करो यही नारा जाते-जाते वह सार्थक करके चले गए

भारत के आजादी में मुसलमानों के तरफ से नेता जीन्ना थे जिन्ना के नेतृत्व में भारत के जितने भी मुसलमान थे उन्होंने एक अलग मुसलमान बहुल देश बनाने की मांग करने लगे

जिसका नाम पाकिस्तान रखा गया महात्मा गांधी अपने देश का विभाजन नहीं करना चाहते थे लेकिन हिंदू और मुस्लिम में विरोध होने लगा अपने देश की धार्मिक एकता को बनाए रखने के लिए उन्होंने भारत को दो हिस्सों में बांट दिया एक हिंदू बहुल देश भारत बन गया और एक मुसलमान बहुल देश पाकिस्तान बन गया।

महात्मा गांधी की मृत्यु  

अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन बहुत दिन चला लेकिन इस आंदोलन के खत्म होते होते भारत को आजादी भी मिल गई लेकिन अंग्रेज जाते जाते फूट डालो और राज करो की नीति अपनाकर भारत में विभाजन का बिज डाल दिये ।

15 अगस्त 1947 में भारत देश आजाद हुआ और इसका विभाजन भी हो गया एक भारत और दूसरा पाकिस्तान इसके विभाजन के खिलाफ बहुत लोग थे इसी विरोध के चलते 30 जनवरी 1948  को बिरला हाउस में दिल्ली में Mahatma Gandhi जी को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

नाथूराम गोडसे नाम से एक व्यक्ति ने Mahatma Gandhi पर गोली चलाई थी कहा जाता है कि जब Mahatma Gandhi की हत्या हुई तब उनके मुंह से जो अंतिम शब्द निकला था वह था हे राम महात्मा गांधी एक ऐसे व्यक्ति थे

जिन्हें हम सदियों तक याद रखेंगे और भारत देश को आजाद कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर महात्मा गांधी ने भारत देश को आजादी दिलाई थी वह एक सादा जीवन जीते थे इसलिए उनको  महात्मा कहा जाता था।

Mahatma Gandhi के जीवनी पर कई फिल्म भी बन चुके हैं उनके सिद्धांतों को उनके दिखाए हुए राह पर आज भी लोग चलना चाहते हैं महात्मा गांधी का मृत्यु जिस दिन हुआ उस दिन को हर साल शहीद दिवस के रुप में मनाया जाता है।

भारत के हर व्यक्ति के लिए या विश्व के हर उस मानव जाति के लिए Mahatma Gandhi एक मिसाल है आदर्शवादी व्यक्ति है जिन्होंने परिस्थिति चाहे कोई भी हो सिर्फ और सिर्फ अहिंसा और सत्य का पालन करके आगे बढ़ते रहे। महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक प्रमुख नायक एक महान और एक अमर नायक के रूप में जाने जाते हैं।

साराशं 

भारत को स्वतंत्र कराने में कई लोगों ने अपनी जान गवा दी भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई तरह के स्वतंत्रता सेनानी थे एक स्वतंत्रता सेनानी खून खराबा करके अंग्रेजों के अत्याचार का जवाब उन्हीं के तरह लाठी-डंडों से बंदूक से गोली से देते थे

लेकिन Mahatma Gandhi एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे जो कि शांति सत्य और अहिंसा के साथ अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई लड़ते थे और भारत को आजाद कराने के लिए कहीं आंदोलन भी किए

इस लेख में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में Mahatma Gandhi biography in hindi Language उनकी जीवनी उन्होंने कौन कौन से आंदोलन चलाए महात्मा गांधी का व्यक्तित्व कैसा था उनकी मृत्यु कब और कैसे हुई के बारे में पूरी जानकारी दी गई है

फिर भी अगर इस लेख से जुड़े सवाल आपके मन में है तो कृपया करके जरूर पूछें। महात्मा गांधी जी के बारे में आप लोगों को यह जानकारी कैसी लगी आप लोग कमेंट करके हमें जरूर बताएं ज्यादा से ज्यादा शेयर भी करें।

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