मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय व रचनाएं

मैथिलीशरण गुप्त  बहुत ही बड़े कवि थे उन्हें राष्ट्रकवि का गौरव प्रदान  था भारतीय काव्य जगत के राष्ट्रपति दद्दा के नाम से पहचाने जाने वाले भारतीय संस्कृति के एक प्रतिनिधि कवि मैथिलीशरण गुप्त के बारे में इस लेख में पूरी जानकारी मिलेगी.

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय Maithili Sharan Gupt ka jeevan parichay in hindi की रचनाएं राष्‍ट्रीय संकीर्णता पर व्यापक दृष्टिकोण पर आधारित हैंं. तो आइये नीचे जानते हैं मैथिलीशरण गुप्त के कौन थे वह कहां के रहने वाले थे उनका जन्म कहां हुआ और उनका साहित्यिक जीवन कैसा था शिवपूजन सहाय का जीवन परिचय

Maithili Sharan Gupt ka jeevan parichay

भारतीय हिंदी साहित्य के एक महान और प्रसिद्ध कवि थे उनकी सबसे ज्यादा प्रचलित भारत भारती रचना थी भारत भारती से उन्हें प्रसिद्धि मिली और यह रचना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बहुत ही प्रभावशाली था उनकी महान कृतियों के वजह से ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने राष्ट्रकवि का उपाधि दिया था

मैथिलीशरण गुप्त को दद्दा नाम से बहुत लोग बोलते थे गुप्त जी के जन्मदिन को आज भी कवि दिवस के रूप में मनाया जाता है उन्होंने कई प्रसिद्ध रचनाएं की है इसके साथ ही भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी अपना योगदान बहुत ही बखूबी निभाया था.

Maithili Sharan Gupt ka jeevan parichay in hindi

महात्मा गांधी के साथ कई स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका में रहे और समाज सुधार राजनीति धर्म देश प्रेम के लिए बहुत ही प्रसिद्ध थे उनकी रचनाओं में भी देश प्रेम बहुत झलकता है ज्यादातर रचनाएं मैथिलीशरण गुप्त ने राष्ट्रप्रेम में ही लिखा है मैथिलीशरण गुप्त को अपने देश से अपनी मातृभूमि से बहुत स्नेह था

और वह अपना कर्तव्य भारत देश के प्रति सेवा करने में बहुत ही गर्व महसूस करते थे भारत को स्वतंत्र कराने के लिए भारतीयों के दिल में स्वतंत्रता आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए भारत भारती जैसा काव्‍य भी उन्होंने लिखा था इसीलिए उन्हें राष्ट्रकवि भी कहा जाता था भारत स्वतंत्र होने के बाद राजनीति में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई राज्यसभा के सांसद के रूप में अपने देश का राष्ट्र का सेवा किया

वह दो बार राज्यसभा के सदस्य बने थे गुप्त को काव्‍य जगत से बचपन से ही बहुत ही ज्यादा लगाव था क्योंकि उनके पिता भी एक बहुत ही अच्छे कवि थे इसलिए बचपन से ही अपने घर में इसी तरह का माहौल उन्होंने देखा था और बचपन में ही एक कविता उन्होंने लिखा था जिससे प्रसन्न होकर उनके पिताजी ने इस महान कवि बनने का आशीर्वाद दिया था.

गुप्त अपने घर में रह करके ही कई भाषाओं का अध्ययन किया था हिंदी बांग्ला और संस्कृत साहित्य का ज्ञान उन्हें अपने पिता से अपने परिवार से ही मिला था जब महावीर प्रसाद द्विवेदी जी से उनका मुलाकात हुआ तो उन्होंने काव्य रचना करने में काफी मदद मिली थी और सबसे पहले पत्रिका सरस्वती का प्रकाशन हुआ था.जनकवि नागार्जुन के जीवन परिचय

मैथिलीशरण गुप्त का जन्‍म

मैथिलीशरण गुप्त जी एक बहुत बड़े  कवि थे उन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि मिली थी.गुप्त जी को काव्य क्षेत्र का शिरोमणि कहा जाता है. उनके सबसे ज्यादा प्रसिद्ध  काव्य हैं भारत भारती.

राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के संबंध में कुछ-कुछ हैंं. मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886  को झांसी में हुआ था, उत्तर प्रदेश के एक चिरगांव गांव में उनका जन्म हुआ था मैथिलीशरण गुप्त जी के पिताजी का नाम सेठ रामचरण कंकण और माता का नाम काशीबाई था.

यह अपने माता पिता के तीसरी संतान थे मैथिलीशरण गुप्त जी के माता-पिता दोनों ही वैष्णव थे गुप्तजी विद्यालय में खेलकूद में ज्यादा रुचि रखने के कारण उनकी पढ़ाई पूरी नहीं हो पाई यह पढ़ाई अधूरी रह गई.गुप्त जी की प्रथम बोली खड़ी बोली थी और वह इस बोली को बहुत ही महत्वपूर्ण मानते थे. मैथिलीशरण गुप्त कबीरदास के बहुत बड़े भक्त थे.

Maithili Sharan Gupt in hindi

 पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी जी को अपना प्रेरणास्रोत मानकर अपनी खड़ी बोली को अपनी रचनाओं का माध्यम बनाया मैथिलीशरण गुप्त को साहित्य जगत में दद्दा नाम से संबोधित किया जाता था.

उनका व्यक्तित्व एवं उनका कृति आधुनिक हिंदी कविता का स्वर्णिम युग माना जाता है खड़ी बोली को उन्होंने बाल्यावस्था में काव्य भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने वाले महा कवि थे मैथिलीशरण गुप्त का प्रबंध काव्य साकेत तुलसीदास के राम कथा रामचरितमानस के बाद सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ है

मैथिलीशरण गुप्त जी सबसे चर्चित रचना था भारत भारती और इसी काव्‍य की वजह से मैथिलीशरण गुप्त जी को राष्ट्रकवि का गौरव प्रदान हुआ गुप्त जी की कृतियों में उपेक्षित प्रताड़ित नारी जाति की वेदना के बारे में उल्लेख मिलता है.

नाम मैथिलीशरण गुप्त
जन्‍म 3 अगस्त 1886
पिता का नाम सेठ रामचरण कंकण
माता का नाम काशीबाई
मैथिलीशरण गुप्त  को उपाधि राष्ट्रकवि नाम से
मृत्‍यु 12 दिसंबर 1964
रचनाएं भारत भारती,साकेत,यशोधरा, जय भारत, विष्णु प्रिया

शिक्षा 

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी की ज्यादातर कविताएं नारी के बारे में ही था उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति है भारत भारती जिसमें मैथिलीशरण गुप्त जी के द्वारा लिखा हुआ स्वदेश प्रेम को बहुत ज्यादा दर्शाता है मैथिलीशरण गुप्त जी बाल्‍यकाल में स्कूल जाना पसंद नहीं करते थे इसलिए उनके पिताजी ने घर में ही पढ़ने का सारा इंतजाम कर दिया था.

बचपन में ही उन्हें संस्कृत इंग्लिश और बंगाली का अभ्यास कराया गया था उसे  मैथिलीशरण गुप्त जी ने पहले पत्रिकाओं में अपनी हिंदी कविताएं लिखकर हिंदी साहित्य में प्रवेश किया था उन कविताओं में सबसे प्रसिद्ध सरस्वती है 1910  में उनका पहला मुख्य कार्य रंग में भंग था.

मैथिलीशरण गुप्त  के व्यक्तित्व 

भारत भारती की रचना के बाद ही गुप्त जी को राष्ट्रकवि की उपाधि मिली और भारत की जनता के बीच काफी प्रसिद्ध हुए और उस समय जो हमारा भारत देश अंग्रेजों का गुलाम था तो जो उसी समय में आजादी के लिए लड़ाई और संघर्ष कर रहे थे उनके लिए यह भारत भारती रचना बहुत ही प्रेरणादायक हुई

उन की ज्यादातर कविताएं हमें रामायण महाभारत और बुध के समय के लोगों पर आधारित मिलता है उस समय के जो प्रसिद्ध आदमी थे मनुष्य थे उन पर ही चित्रण किया हुआ कविताएं हमें मिलती हैंं.

उनकी रचनाओं में सबसे प्रसिद्ध रचना है साकेत जिसमें हमें रामायण के जो पात्र है लक्ष्मण जी उनकी पत्नी उर्मिला के बारे में वर्णन मिलेगा और उनकी दूसरी रचना है

यशोधरा उसमें हमें हम लोग गौतम बुद्ध जी की पत्नी यशोधरा के बारे में वर्णन होते हुए पढ़ेंगे मैथिलीशरण गुप्त जी को कार्यक्षेत्र का शिरोमणि कहा जाता है मैथिलीशरण गुप्त जी की सर्वश्रेष्ठ काव्य भारत भारती हैं और यही काव्य उनकी प्रसिद्धि का कारण माना जाता हैं.

साकेत और जय भारत Maithili Sharan Gupt के प्रसिद्धि का कारण हैं भारत भारतीय साकेत और जय भारत यह दोनों महाकाव्य साकेत काव्य जो है वह राम कथा  पर आधारित है

किंतु इसमें सिर्फ और सिर्फ लक्ष्मण जी की पत्नी उर्मिला जी के बारे में वर्णन है साकेत में कवि ने उर्मिला और लक्ष्मण जी के दांपत्य जीवन के का प्रसंग का उल्लेख किया है तथा उर्मिला के वीरह दशा का बहुत ही मार्मिक चित्रण दर्शाया हैंं

उसके चरित्र को बहुत ही अच्छे से प्रदर्शित किया है यशोधरा में उन्होंने गौतम बुद्ध की पत्नी यशोधरा के बारे में वर्णन किया है यशोधरा के स्थिति का बारे में दर्शाया है उनकी विष्णुप्रिया में चैतन्य महाप्रभु की पत्नी के बारे में वर्णित किया है

उनकी रचनाएं नारियों पर ही आधारित है मैथिलीशरण गुप्त जी के दृष्टि में नारी सिर्फ एक विलास का साधन नहीं है बल्कि जीवन संघर्ष में बराबर की भागीदार  है गुप्त जी ने अपनी बहुत रचनाओं में पौराणिक कथाओं को आगे रखा उनकी बहुत सारी नाटक भी हैंं.

मैथिलीशरण गुप्त का स्वतंत्रता आंदोलन में सहयोग

भारत की संस्कृति को बहुत मानते थे और उसी के भक्त थे उन्हें अंधविश्वास में विश्वास नहीं था उनके अंदर राष्ट्र भावना रग रग में भरा हुआ था इसीलिए वह महान स्वतंत्रता सेनानीयों जैसे लाला लाजपत राय मदन मोहन मालवीय बिपिन चंद्र पाल बाल गंगाधर तिलक के आदर्शों पर चलते थे जब उन्होंने साकेत और पंचवटी जैसा ग्रंथ लिखा

उसके बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से उनकी मुलाकात हुई और वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित हुए जिसके बाद 6 अप्रैल 1941 में गांधी जी के साथ व्यक्तिगत सत्याग्रह में उन्होंने भाग लिया और गिरफ्तार कर लिए गए 7 महीने जेल में रहने के बाद उन पर किसी भी तरह का कोई कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ

तब उन्‍हें छोड़ दिया गया उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका अपनी रचनाएं लिख कर निभाई थी अपनी कविताओं से आम जनता के दिलों में राष्ट्रप्रेम जगाया चेतना जगाया.

रचनाएं

मैथिलीशरण गुप्त बचपन से ही काव्य जगत से कुछ ज्यादा लगाव था लेकिन जब हजारी प्रसाद द्विवेदी से उनकी मुलाकात हुई तो उनसे बहुत ही प्रभावित हुए और उनके आज्ञा अनुसार काव्य लिखना शुरू किया और उन्होंने भारत भारती जैसे काव्य ग्रंथ की रचना के लिए Maithili Sharan Gupt हजारी प्रसाद द्विवेदी को अपना काव्य गुरु मानते थे

क्योंकि वह अपने गुरु से ही प्रभावित होकर के ऐसी महान रचना की थी महात्मा गांधी के साथ कई स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई में भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई थी

समाज में सुधार करने के लिए समाज में फैली कुप्रथा कुरीतियों अंधविश्वास आदि को दूर करने के लिए देश प्रेम के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में भारतीयों को आकर्षित करने के लिए धर्म से संबंधित कई रचनाएं उन्होंने की थी.मैथिलीशरण गुप्त ने जितनी भी रचनाएं की थी उनमें काव्य और कुछ नाटक थे कुछ राष्ट्रप्रेम देश भक्ति में थे और कुछ काव्य रचना उन्हें धर्म से संबंधित था

जिसे कि उन्होंने साकेत काव्य की रचना की जिसमें रामायण के प्रभु श्री राम के छोटे भाई श्री लक्ष्मण जी की पत्नी उर्मिला के और लक्ष्मण जी के जीवन से संबंधित रचना की है साकेत में उन्होंने उर्मिला के बारे में उनकी वेदना के बारे में लिखा है कि जब लक्ष्मण जी जंगल चले गए थे

तब उर्मिला की वेदना कोई नहीं समझ पा रहा था.साकेत उनकी एक ऐसी रचना है जो कि श्री रामचरितमानस के बाद प्रमुख काव्य माना जाता है इसी तरह नारी के संबंध में यशोधरा जैसी रचना उन्होंने की है जिसमें गौतम बुद्ध की पत्नी यशोधरा के जीवन के बारे में उन्होंने लिखा है. मैथिलीशरण गुप्त एक धार्मिक व्यक्ति थे

वह अपने परिवार के साथ पूजा-पाठ भजन कीर्तन प्रतिदिन किया करते थे उनका परिवार और वो वैष्णव भक्त थे उनकी काव्य रचना के लिए साहित्य सेवा के लिए कई पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था पद्म विभूषण जैसे सम्मान उन्हें मिले थे.

Maithili Sharan Gupt ki rachna

  • भारत भारती
  • साकेत
  • यशोधरा
  • जय भारत
  • विष्णु प्रिया

मैथिलीशरण गुप्त जी की  नाटक भी हैं जिनका नाम

  • अनघ
  • चंद्रहास
  • तिलोत्तमा
  • निष्क्रिय प्रतिरोध
  • विसर्जन

मैथिलीशरण गुप्त के 4 नाटक

  • स्वप्नवासवदत्ता
  • प्रतिमा
  • अभिषेक
  • अवि मारक

मृत्‍यु

इन नाटकों में जातक कथा पर आधारित लिखा गया नाटक है चंद्रहास इतिहास का आभास करने वाला एक नाटक कहा जा सकता है तिलोत्तमा एक पौराणिक नाटक है राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी के भारत भारती किसी भी रूप में कम नहीं आंकी  जा सकती है मैथिलीशरण गुप्त जी को साहित्य जगत में दद्दा नाम से संबोधित किया जाता था और उनका साहित्यिक जीवन बहुत ही अच्छा रहा

उनके दिलों में नारी के प्रति बहुत आदर सम्मान था उनका मानना था कि समाज में सबसे महत्वपूर्ण स्थान नारी जाति का होता है वह समाज की एक महत्वपूर्ण अंग होती है

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी उन्होंने सहयोग किया कई महान रचनाएं की भारत आजाद होने के बाद और दो बार राज्यसभा के सांसद भी बने ऐसे महापुरुष महान लेखक और कवि का अंत हिंदी साहित्य जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति थी. मैथिलीशरण गुप्त जी का निधन 12 दिसंबर 1964 को झांसी में हुआ था.

सारां

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