Makhanlal Chaturvedi – माखनलाल चतुर्वेदी कौन थें

हम अपने पाठ्यपुस्तक में पुष्प की अभिलाषा कविता अक्सर पढ़ते हैं जिसमें की एक फूल के बारे में वर्णन किया गया है जो कि फूल का भी यही इच्छा है कि जो भी अपने देश की रक्षा करने के लिए जा रहे हैं उनकी उनकी राह में डाल दिया जाए

तो ऐसे देश भक्ति कविता देश भक्ति राष्ट्र प्रेम से भरा हुआ रचना करने वाले माखनलाल चतुर्वेदी जी Makhanlal Chaturvedi ka jivan parichay in hindi के रचनाओं के बारे में उनके जीवन परिचय के बारे में इस लेख में पूरी जानकारी प्राप्त करेंगे।

माखनलाल चतुर्वेदी ने अध्यापन कार्य छोड़ कर अपना जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित कर दिया तो आइए जानते हैं माखनलाल चतुर्वेदी  के जीवनी के बारे में पूरी जानकारी ।

Makhanlal Chaturvedi ka jivan parichay in hindi

माखनलाल चतुर्वेदी भारत के लेखक का भी स्वतंत्रता सेनानी सच्चे देश प्रेमी और पत्रकार थे उनकी रचनाएं बहुत ही लोकप्रिय होती है उन्होंने देशभक्ति कविताएं भी लिखी है माखनलाल चतुर्वेदी स्वतंत्रता आंदोलन में भी अपना योगदान दिया है गांधीजी के असहयोग आंदोलन में अपनी भूमिका सक्रियता से दिया था और जेल भी गए थे

उन्होंने कर्मवीर जैसे प्रसिद्ध पात्र में संपादन भी किया था और उस संपादन से ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विरोध स्वरूप प्रदर्शन और प्रचार भी किया था वह इस संपादन के जरिए उस समय के युवाओं को आजादी से के जंजीरों को तोड़ने के लिए प्रेरित किया था और आजादी के लिए  आंदोलन की ओर आकर्षित किया था।

Makhanlal Chaturvedi ka jivan parichay in hindi

प्रभा और कर्मवीर नाम के प्रचलित पत्र में माखनलाल चतुर्वेदी ने संपादन किया था और अपने इस पत्र के माध्यम से ब्रिटिश शासन का उन्होंने विरोध किया उन्होंने नई पीढ़ी के युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन में जागृत करने के लिए प्रोत्साहित किया उन्हें गुलामी के जंजीर को तोड़ने के शिक्षा दी।

माखनलाल चतुर्वेदी की कविताओं में देश प्रेम  का बखूबी रूप से झलक मिलता है संस्कृत अंग्रेजी गुजराती बांग्ला आदि भाषाओं का माखनलाल चतुर्वेदी को ज्ञान था वह एक बहुत ही ख्याति प्राप्त कवि थे।

माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म

माखनलाल चतुर्वेदी एक कवि लेखक पत्रकार स्वतंत्रता सेनानी आदि थे Makhanlal Chaturvedi मध्य प्रदेश के रहने वाले थे इनका जन्‍म 4 अप्रैल 1889 में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित नंदलाल चतुर्वेदी था और उनकी माता का नाम सुंदरी बाई था उनके पिता एक अध्यापक थे माखनलाल चतुर्वेदी बचपन में बहुत ही बीमार रहते थे इनके माता पिता राधावल्लभ संप्रदाय के अनुयाई थे।

नाम माखनलाल चतुर्वेदी
जन्‍म 4 अप्रैल 1889
जन्‍म स्‍थान मध्य प्रदेश
पिता का नाम पंडित नंदलाल चतुर्वेदी
माता का नाम सुंदरी बाई
शिक्षा संस्कृत बांग्ला गुजराती और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान
उपनाम एक भारतीय आत्मा
कार्य कवि लेखक पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी
रचनाएं कविता,नाटक,स्‍मृतिस्‍मृति और काव्‍य संग्रह
कविता  लड्डू ले लो,दीप से दीप जले,पुष्प की अभिलाषा

मुझे रोने दो,वरदान या अभिशाप,कुंज कुटी रे,

यमुना तीरे,गिरि पर चढ़ते धीरे धीरे,सिपाही

बली पंथी,अमर राष्ट्र

नाटक कृष्णा अर्जुन युद्ध,साहित्य के देवता,समय के पांव,अमीर इरादे गरीब इरादे
काव्‍य संग्रह युग चरण,समर्पण,हिमकिरीटनी,वेणु लो  गूंजे धारा
भाषा शैली विचारात्मक शैली और भावात्मक शैली
मृत्‍यु 30 जनवरी 1968

माखनलाल चतुर्वेदी के शिक्षा

Makhanlal chaturvedi पिता एक अध्यापक थे माखनलाल चतुर्वेदी का प्राथमिक शिक्षा पूरा होने के बाद घर पर ही अध्ययन करने लगे थे उन्होंने संस्कृत बांग्ला गुजराती और अंग्रेजी भाषा का बहुत अच्छे से अध्ययन अपने घर पर ही किया था।

माखनलाल चतुर्वेदी का परिवार राधा वल्लभ संप्रदाय का अनुयाई था इस वजह से उन्होंने वैष्णव पद बहुत अच्छे से याद कर लिया था उसके बाद उन्होंने कर्मवीर नामक साप्ताहिक पत्र में संपादन करना शुरू किया था माखनलाल चतुर्वेदी क्या है 15 वर्ष के हुए तब उनका विवाह हुआ था इनके पत्नी का नाम ग्यारसी बाई था उसके बाद उन्होंने अध्यापन कार्य शुरू किया था।

माखनलाल चतुर्वेदी का व्यक्तित्व

भारतीय हिंदी साहित्य में कई लेखक कई कवि हुए जिन्हें उनकी महान रचनाओं की वजह से उपनाम दिया गया उन्हें सम्मान दिया गया उसी तरह माखनलाल चतुर्वेदी एक ऐसे कवि थे जिन्होंने अपनी रचनाओं से स्वतंत्रता आंदोलन में जान फूंक दिया था

और खुद भी स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भूमिका निभाते थे जिसमें कि महात्मा गांधी के साथ कई आंदोलन में उन्होंने साथ दिया और कई बार जेल भी गए माखनलाल चतुर्वेदी की भाषा बहुत ही सरल और ओजपूर्ण भाषा होती थी

उनकी महान रचना की वजह से एक भारतीय आत्मा उन्हें उपनाम दिया गया था उन्होंने जो भी रचनाएं की उसको अपने राष्ट्र के प्रति समर्पित कर दिया था उनकी जो भी रचनाएं होती थी वह आस्था से जुड़ी हुई और देश प्रेम और भक्ति में होती थी

आधुनिक काल में जितने कवि और लेखक थे जिन्होंने की भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी रचनाओं से लोगों को प्रोत्साहित किया उन प्रमुख कवियों में माखनलाल चतुर्वेदी जी का एक प्रमुख स्थान आता है इसलिए उन्हें राष्ट्रीय भावनाओं के कवि भी कहा जाता है।

चतुर्वेदी का साहित्यिक जीवन

Makhanlal chaturvedi पढ़ाई पूरी करने के बाद कर्मवीर नामक पत्रिका में संपादन शुरू किया था उन्होंने 1986 से 1910 तक इसी स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्य किया लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने अपना लेखन कार्य शुरू कर दिया था और वह देश प्रेमी कविताएं ज्यादा लिखा करते थे वह एक देश प्रेमी कवि थे

उन्होंने प्रभा नामक राष्ट्रीय पत्रिका में भी संपादन कार्य किया था माखनलाल चतुर्वेदी को पंडित जी भी कहा जाता था उनके  भीतर देश प्रेम की भावना बहुत थे।

सबसे पहले माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय आंदोलन और बहिष्कार नाम का निबंध प्रतियोगिता उन्होंने हिंदी केसरी में 1960 में शुरू किया था। महात्मा गांधी के द्वारा चलाए जा रहे हैं स्वतंत्रता आंदोलन में चतुर्वेदी जी ने साथ दिया था 1913 में कालूराम गंगराड़े के मासिक पत्रिका प्रभा का प्रकाशन हुआ और उसमें संपादन का जिम्मेदारी माखनलाल चतुर्वेदी को दिया गया।

तब उन्होंने अपनी अध्यापक की नौकरी छोड़कर राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए पत्रकारिता और साहित्य के तरफ अपना कार्य करने लगे प्रताप का संपादन और प्रकाशन उन्होंने शुरू किया उनके महान काव्यों के लिए कई सम्मान और पुरस्कार भी दिए गए।

माखनलाल चतुर्वेदी के स्वतंत्रता आंदोलन में सहयोग

Makhanlal Chaturvedi एक देश प्रेमी कवि थे उनकी कविताओं में उनके देश प्रेम की भावना बहुत अच्छे से दिखाई देती हैं उन्होंने प्रभा और कम भी जैसे राष्ट्रीय पत्रिका में संपादन कार्य भी किया है

और अपने कविताओं से युवाओं के दिलों में देश प्रेम की भावना जागृत किया था उन्हें आंदोलन की ओर आकर्षित किया था उनके भाषण और उनके लेख में देश प्रेम पूर्ण रूप से प्रदर्शित होता था।

माखनलाल चतुर्वेदी ने 1943 में अखिल भारतीय साहित्य सम्मेलन किया था और उसने उन्होंने अब अध्यक्षता भी किया था जिससे उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन के लिए जागृत किया था

उन्होंने असहयोग आंदोलन और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी बहुत बढ़ चढ़कर और जुलूस जोर शोर से हिस्सा लिया था इस वजह से उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा था और जेल में बहुत तरह की यातनाएं और अत्याचारों को भी उन्होंने कहा था लेकिन वह कभी भी अपने कार्य से विचलित नहीं हुए थे।

माखनलाल चतुर्वेदी की रचनाएं

Makhanlal Chaturvedi अपनी देश प्रेमी कविताओं के लिए प्रसिद्ध है उनकी रचनाओं में वीर रस और श्रृंगार रस दोनों दिखाई देता है उनकी रचनाओं में गेय छंद बखूबी रहता था उपमा रूपक उत्प्रेक्षा आदि अलंकार का भी उन्होंने अपनी रचना में बहुत अच्छे से प्रयोग किया है उनकी रचनाओं में उर्दू फारसी का भी अच्छे से प्रयोग हुआ है

उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन की ओर आकर्षित करने के लिए बहुत रचनाएं की हैं इसी में से एक कविता है जिसे लोगों ने बहुत चाहा और सम्मान भी दिया।

चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं

चाह नहीं प्रेमी माला में बिंद प्यारी को ललचाऊं

चाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊं

चाह नहीं देवों के सिर पर चढ़ूं भाग्य पर इठलाऊं

मुझे तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर देना तुम फेंक

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ पर जानें वीर अनेक

इस कविता से कवि के मन के राष्ट्रप्रेम पूरी तरह से प्रदर्शित होता है माखनलाल चतुर्वेदी की कुछ प्रमुख रचनाएं इस प्रकार हैं। 

माखनलाल चतुर्वेदी के काव्य संग्रह

  • युग चरण
  • समर्पण
  • हिमकिरीटनी
  • वेणु लो  गूंजे धारा

माखनलाल चतुर्वेदी की स्मृतियां

  • संतोष
  • बंधन सुख
  • गणेश शंकर विद्यार्थी की मधुर स्मृतियां हैं

माखनलाल चतुर्वेदी की कहानी

संग्रह कला का अनुवाद या इनकी कहानियों का संग्रह इसमें इन्होंने बहुत सारी कहानियां लिखी है

Makhanlal Chaturvedi की कविताएं 

  • लड्डू ले लो
  • दीप से दीप जले
  • पुष्प की अभिलाषा
  • मुझे रोने दो
  • वरदान या अभिशाप
  • कुंज कुटी रे यमुना तीरे
  • गिरि पर चढ़ते धीरे धीरे
  • सिपाही
  • बली पंथी
  • अमर राष्ट्र

माखनलाल चतुर्वेदी के नाटक

  • कृष्णा अर्जुन युद्ध
  • साहित्य के देवता
  • समय के पांव
  • अमीर इरादे गरीब इरादे

माखनलाल चतुर्वेदी  को मिले सम्मान और पुरस्कार

Makhanlal Chaturvedi को हिंदी साहित्य में प्रसिद्ध रचनाएं करने के लिए बहुत सारे पुरस्कार और सम्मान भी मिला था कुछ इस प्रकार है

  • देव पुरस्कार
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार
  • डी लिट की मानद उपाधि
  • पद्म भूषण पुरस्कार

माखनलाल चतुर्वेदी की भाषा शैली

अपने काव्‍यों में माखनलाल चतुर्वेदी खड़ी बोली भाषा का इस्तेमाल करते थे उसके साथ ही उन्होंने संस्कृत के सरल और तत्सम शब्द का भी प्रयोग किया है कहीं-कहीं चतुर्वेदी जी की रचनाओं में फारसी के कुछ शब्दों का भी प्रयोग हुआ है पुष्प की अभिलाषा इनकी सबसे प्रसिद्ध देश भक्ति कविता है

चतुर्वेदी जी की कविताओं में उनकी रचनाओं में देश के प्रति प्रेम भक्ति आदि बहुत ही स्पष्ट रूप से दिखाई देता है उनकी भाषा में सरलता और मिठास है इसके साथी ही उनके रचनाओं का भाषा शैली विचारात्मक शैली और भावात्मक शैली है

माखनलाल चतुर्वेदी का मृत्यु

माखनलाल चतुर्वेदी 30 जनवरी 1968 में हुआ था जब उनकी मृत्यु हुई तो वह 79 वर्ष के थे माखनलाल चतुर्वेदी एक क्रांतिकारी कभी सच्चे देश प्रेमी का भी थे लेखक कवि साहित्यकार आदि थे।

माखनलाल चतुर्वेदी जी एक राष्ट्र प्रेमी देश भक्ति कवि एक महान साहित्यकार प्रसिद्ध पत्रकार आदि थे जिन्होंने राष्ट्र के हित को ही अपना प्रथम कार्य और लक्ष्य बना लिया था ऐसे राष्ट्रीय प्रेमी कवि को खोकर के भारतवासी ने एक अनमोल रत्न को खो दिया।

साराशं 

पत्रकारिता और साहित्य के और उन्होंने अपने कार्य किए लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के द्वारा स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है जैसा राष्ट्रीय नारा लगाए जाने के समय ही माखनलाल चतुर्वेदी जी स्वतंत्रता आंदोलन में उतर गए थे 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में सबसे पहली गिरफ्तारी माखनलाल चतुर्वेदी का ही हुआ था

इस लेख में माखनलाल चतुर्वेदी जी के जीवनी के बारे में उनका जन्म कहां हुआ उनके माता पिता कौन थे माखनलाल चतुर्वेदी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपना सहयोग कैसे दिया

उन्होंने कौन-कौन से रचना की है उनका प्रसिद्ध रचना कौन है साहित्यिक जीवन कैसा था के बारे में पूरी जानकारी दी गई है इस लेख से संबंधित अगर कोई सवाल आपके मन में है तो कृपया कमेंट करके जरूर पूछें।

इस लेख में हमने माखनलाल चतुर्वेदी के जीवनी के बारे में पूरी जानकारी दी हैं। आप लोगों Makhanlal Chaturvedi ka jivan parichay in hindi की जानकारी कैसा लगा   कृपया कमेंट करके जरूर बताएं और शेयर जरूर करें।

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