MRI ka full form – एमआरआई का फुल फॉर्म क्‍या होता हैं

जब भी हमारे शरीर में अंदरूनी कोई परेशानी होता हैं तो उसके लिए अक्सर सुना जाता हैं कि MRI कराया गया तो Mri full form in hindi क्या होता हैं एम आर आई क्या हैं इसके बारे में जानकारी रखना जरूरी हैं तभी किसी को अगर MRI कराने का जरूरत होगा तो आसानी से करा सकता हैं.

किसी भी व्यक्ति के बॉडी के अंदर कोई आर्गन खराब हो जाता हैं और शरीर के अंदर कोई खतरनाक बीमारी हो जाती हैं तो उसको ऊपर से देख करके नहीं पहचाना जा सकता हैं इसीलिए एमआरआई कराने का डॉक्टर सलाह देता हैं.

कभी भी हम लोग अपने घर वालों या आस पड़ोस रिश्तेदारों से जरूर सुना होगा कि एमआरआई कराया गया . तो आइए इस लेख में एमआरआई का फुल फॉर्म क्या होता हैं MRI का अविष्कार किसने किया MRI क्यों कराया जाता हैं एमआरआई कैसे होता हैं एम आर आई का उपयोग किन किन रोगों में किया जाता हैं,के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं.

MRI full form in hindi

एमआरआई एक तरह का मेडिकल टेस्ट होता हैं जो कि शरीर के अंदर कोई अंदरूनी बीमारी हैं कोई परेशानी हैं तो उसको पता लगाने के लिए किया जाता हैं मेडिकल के क्षेत्र में जितने भी खोज हुए हैं उसमें MRI बहुत ही बड़ा खोज माना जाता हैं.

क्योंकि शरीर के ऊपर जो भी परेशानी होता हैं उसको सामने से देख करके उसका इलाज किया जा सकता हैं लेकिन जो अंदरूनी बीमारी हैं उसके लिए MRI से बेहतर कोई भी टेस्ट नहीं होता हैं एमआरआई का फुल फॉर्म magnetic resonance imaging होता हैं.

Mri full form in hindi

  • M:- Magnetic
  • R:- Resonance
  • I:- Imaging

यह एक दर्द रहित इलाज होता हैं इसमें मरीज को किसी भी तरह का परेशानी नहीं होता हैं. MRI का इस्तेमाल ज्यादातर किसी भी तरह का बीमारी का पता शरीर के अंदर का लगाने के लिए किसी भी तरह का चोट लगने के लिए दिमाग में किसी भी तरह का क्षती पहुंचा हैं.

उसका जांच करने के लिए रीड की हड्डी दिमाग में ट्यूमर और कैंसर का जांच करने के लिए किया जाता हैं. इसमें रोगी के शरीर के अंदर के भाग का स्कैन किया जाता हैंऔर उस स्कैन करने के लिए उसमें रेडिएशन के स्थान मैग्नेटिक फील्ड का उपयोग किया जाता हैं.

MRI full form in hindi

पहले किसी भी व्यक्ति को शरीर के अंदर जैसे कि कैंसर ट्यूमर हो जाता था तो उसका पता जल्दी नहीं लग पाता था लेकिन MRI का खोज जब से हुआ मेडिकल के क्षेत्र में एक बहुत ही बड़ी क्रांति के रूप में साबित हुआ हैं.

इससे शरीर के अंदरूनी बीमारियों का इलाज करने में बहुत ही बड़ा सहायक हुआ हैं आर आई जिसे मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग कहा जाता हैं एमआरआई का फुल फॉर्म में चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंब या चुंबकीय प्रतिध्वनि इमेजिंग कहा जाता हैं.

MRI kya hai

एमआरआई एक टेस्ट होता हैं जो कि कंप्यूटर के द्वारा शरीर के अंदर के जो भी परेशानी होते हैं उसका इलाज करने के लिए किया जाता हैं पहले जैसे एक्स-रे और सीटी स्कैन से किसी रोग का पता लगाया जाता था तो उससे भी ज्यादा बेहतर और जल्दी टेस्ट से किसी भी रोग का पता लगाया जाता हैं. MRI टेस्ट में चुंबक और रेडियो तरंगों का इस्तेमाल करके शरीर के अंदर का तस्वीर बन जाता हैं.

जिसमें की कंप्यूटर पर आसानी से डॉक्टर पता लगा सकता हैं की कौन सा परेशानी हैं. पहले एक्सरे टेस्ट होता था जिसमें की रेडिएशन का प्रयोग किया जाता था जो कि शरीर के लिए हानिकारक होता था.

लेकिन MRI में किसी भी तरह का रेडिएशन का प्रयोग नहीं होता हैं इसमें मैग्नेटिक फील्ड का प्रयोग किया जाता हैं इसका प्रयोग शरीर के अंदरूनी भागों का परीक्षण करने के लिए किया जाता हैं जो कि कंप्यूटर पर आसानी से देख पाते हैं.

एमआरआई क्यों किया जाता हैं

जब भी किसी व्यक्ति को किसी भी तरह का शरीर के अंदर कोई बीमारी होता हैं तो ज्यादातर एमआरआई का उपयोग देखा जाता हैं आजकल बहुत ही ज्यादा MRI का उपयोग मस्तिष्क के अनियंत्रण दिमाग में ट्यूमर रीढ की हड्डी में सूजन का पता लगाने के लिए हृदय और रक्त वाहिकाओं की जांच की जाती हैं.

हड्डियों और जोड़ों की जांच करने के लिए लीवर गर्भाशय और पौरुष ग्रंथि आदि का जांच करने के लिए MRI का उपयोग किया जाता हैं इससे शरीर के किसी भी हिस्से का जांच किया जा सकता हैं. MRI करने से शरीर के अंदर हर भाग का अंदरूनी स्थिति बहुत ही साफ तस्वीर की तरह कंप्यूटर पर देखा जा सकता हैं.

और इससे किसी भी मरीज को किसी भी तरह की कोई परेशानी भी नहीं होती हैं. सबसे पहली बार एमआरआई का प्रयोग 1977 में कैंसर की बीमारी का जांच करने के लिए किया गया था MRI मशीन से बॉडी के अंदर का भाग का स्कैन करके उसमें कहां किस तरह का दिक्कत हैं विस्तार से एक इमेज तैयार करता हैं.

एमआरआई कैसे होता हैं

एम आर आई एक टेस्ट हैं एक ऐसा जांच हैं जिससे कि रोगी को किसी भी तरह का दर्द या किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होता हैं MRI करने के समय कुछ आवाज जरूर होता हैं लेकिन उससे किसी भी तरह का परेशान होने की जरूरत नहीं रहता हैं. एमआरआई करवाते समय शरीर पर किसी भी तरह का धातु का कोई भी वस्तु नहीं रखना चाहिए.

इसीलिए जब भी कोई रोगी MRI टेस्ट करवाने जाता हैं तो डॉक्टर उसे हॉस्पिटल का गाउन पहना करके ही करता हैं क्योंकि MRI  स्कैन में मजबूत चुंबकीय क्षेत्र का उत्पादन किया जाता हैं इसलिए अगर कोई धातु का सामान शरीर पर रहेगा तो उससे परेशानी हो सकता हैं जैसे की घड़ी किसी भी तरह के आभूषण इयररिंग्स नकली बाल क्योंकि नकली बाल में कुछ धातु के कण भी होते हैं.

किसी व्यक्ति के शरीर के अंदर गोलि या क्षारा या कोई धातु लगा हुआ रहता हैं तो वह एमआरआई टेस्ट के समय परेशानी हो सकता हैं इसलिए एम आर आई टेस्ट करवाने से पहले इन सारी बातों का ध्यान रखना जरूरी हैं.

एमआरआई का खोज किसने किया

एम आर आई के बारे में तो हमेशा हम लोग सुनते हैं किसी को अगर दिमाग में कोई दिक्कत हो जाता हैं कहीं हड्डी में चोट लग जाता हैं हड्डी में दर्द रहता हैं किसी को दिमाग में ट्यूमर या कैंसर होने का शक रहता हैं तो MRI जरूर कराया जाता हैं.

लेकिन MRI का खोज किसने किया इसके बारे में कम ही लोगों को जानकारी होगा तो एमआरआई का खोज किसी एक व्यक्ति ने नहीं किया था इसे कई लोगों ने मिलकर किया था जैसे कि Paul Lauterbur, Peter mansfield, Raymond Damadian पॉल लौटरबर 1973 में सबसे पहले मैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल किया और इमेज बनाया.

उन्होंने इस तकनीक को जिउगमाटोग्राफी नाम दिया था. लेकिन इंसान के शरीर के अंदर होने वाली भयंकर बीमारियां जैसे के कैंसर को पहचानने के लिए पूरा बॉडी का स्कैन करने के लिए सबसे पहले Raymond Damadian ने एम आर आई का अविष्कार किए.

इस तरह MRI को किसी एक व्यक्ति ने नहीं बल्कि कई व्यक्तियों ने मिलकर अविष्कार किया और आज के युग में शरीर के अंदर किसी भी तरह की बीमारी का पता लगाने के लिए बहुत ही कारगर और बहुत ही बेहतर टेस्ट एमआरआई होता हैं.

एमआरआई से फायदा 

एमआरआई करते समय उस MRI मशीन में मैग्नेट रेडियोवेव्स ग्रेडिएंट और एक कंप्यूटर का के इस्तेमाल से टेस्ट किया जाता हैं MRI करवाने का बहुत ही फायदा होता हैं क्योंकि पहले अगर किसी व्यक्ति को कैंसर हो जाता था ट्यूमर हो जाता था तो कोई ऐसा टेस्ट नहीं था जिससे कि पता लगा करके उसका इलाज किया जा सकता था

और उस व्यक्ति का लास्ट में कैंसर की वजह से मौत भी हो जाता था लेकिन आजकल एमआरआई टेस्ट करवाने से कई तरह की बीमारियों का पता लगाया जा सकता हैं जैसे कि हड्डियों और जोड़ों में दर्द का पता लग सकता हैं.

दिमाग में किसी भी तरह की बीमारी का पता लगाया जाता हैं शरीर में कैंसर और ट्यूमर का पता लगाया जा सकता हैं इसके साथ ही कई तरह के शरीर के अंदर के रोगों का जानकारी एमआरआई टेस्ट से लग सकता हैं.

इसीलिए MRI का खोज विश्व में मेडिकल के क्षेत्र में सबसे बड़े खोजों में एक माना जाता हैं. यह टेस्ट करवाने के लिए 4000 से 5000 में फिस लगता हैं लेकिन अगर कोई सरकारी हॉस्पिटल में करवाता हैं तो यह टेस्ट कम दामों में हो जाता हैं.

एमआरआई से नुकसान

वैसे तो MRI करवाने से किसी भी तरह के किसी रोगी को परेशानी नहीं होता हैं लेकिन उस में थोड़े आवाज होता हैं तो उसके लिए वह डॉक्टर से बोल कर के ईयर प्लग लगवा सकते हैं जिससे कि उन्हें आवाज सुनाई नहीं दे इससे ज्यादातर लाभ ही हैं क्योंकि कई रोगों का पता लगाया जा सकता हैं लेकिन किसी भी मशीन से कभी कभी कोई नुकसान भी हो जाता हैं.

वैसे तो MRI करने से पहले डॉक्टर पेशेंट से शरीर पर किसी भी तरह का धातु का कोई चीज नहीं रखने के लिए बोलते हैं लेकिन कभी गलती से कोई धातु का सामान पेशेंट के शरीर पर रह जाता हैं तो वह बहुत ही खतरनाक साबित हो जाता हैं.

क्‍योंकि MRI मशीन में शक्तिशाली चुंबक और रेडियो तरंगों का प्रयोग करके शरीर का अंदरूनी भागों का इलाज होता हैं इसलिए अगर किसी भी तरह का धातु का सामान शरीर पर आएगा तो वह अपनी ओर तीव्र गति से आकर्षित करने लगता हैं और पेशेंट के शरीर को चोट भी लग सकता हैं.

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सारांश

आजकल एमआरआई का उपयोग शरीर के अंदरूनी परेशानियों का पता लगाने के लिए बहुत ही तेजी से बढ़ रहा हैं. जिसमें शरीर के अंदर के भागों का स्कैन किया जाता हैं. इस लेख में एमआरआई  का फुल फॉर्म क्या होता हैं MRI को हिंदी में क्या कहते हैं.

एमआरआई क्या हैं कैसे किया जाता हैं एमआरआई MRI क्यों जरूरी हैं एमआरआई का खोज सबसे पहले किसने किया इससे क्या नुकसान हैं क्या लाभ हैं इसके बारे में पूरी जानकारी दी गए हैं फिर भी अगर एमआरआई का फुल फॉर्म से संबंधित कोई सवाल आपके मन में हैं तो कृपया कमेंट करके जरूर पूछें और इस जानकारी को दोस्त मित्रों को शेयर जरूर करें.

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