Jawaharlal Nehru – जवाहरलाल नेहरू का जीवन परिचय

जब भारत देश ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन था तो भारत को आजाद कराने के लिए अंग्रेजों को हिंदुस्तान से भगाने के लिए कई स्वतंत्रता सेनानियों ने आंदोलन किया कई स्वतंत्रता सेनानी फांसी पर चढ़े कितने लोगों की जान चली गई इन्हीं स्वतंत्रता सेनानियों में महान नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू थे

Pandit Jawaharlal Nehru biography in hindi जिन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर कई स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था और भारत को आजाद कराने के लिए जी जान से लग गए थे।

हम लोग इस लेख में जानेंगे पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के जीवनी के बारे में पंडित जवाहरलाल नेहरू जी को आज भी बच्चे चाचा नेहरू के नाम से जानते हैं जवाहरलाल नेहरू एक बहुत ही अच्छे व्यक्तित्व के आदमी थे एक महान नेता भी थे  भारत की आजादी में जवाहर नेहरू का बहुत बड़ा योगदान था और स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru को चुना गया था तो आइए जानते हैं पंडित जवाहरलाल नेहरू के जीवन के बारे में

Pandit Jawaharlal Nehru biography in hindi

भारत देश को अंग्रेजों से आजाद कराने में महात्मा गांधी का नाम लिया जाता हैं उनके साथ कई नेताओं ने स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना योगदान कई आंदोलनों में दिया था महात्मा गांधी के सबसे प्रिय पंडित जवाहरलाल नेहरू थे

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने महात्मा गांधी के साथ मिलकर देश को आजाद कराने के लिए अंग्रेजो के खिलाफ कई महत्वपूर्ण स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था कई बार उन्हें जेल भी जाना पड़ा था महात्मा गांधी जवाहरलाल नेहरू को अपना शिष्य मानते थे इन्हीं स्वतंत्रता सेनानियों की मेहनत लगन और संघर्ष के फलस्वरुप 15 अगस्त 1947 में भारत देश आजाद हुआ

Pandit Jawaharlal Nehru biography in hindi

अंग्रेजों को यहां से पूर्ण रूप से जाना पड़ा।15 अगस्त 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो भारत को एक गणराज्य देश बनाने के लिए नया संविधान लागू किया गया जिसके बाद देश के लिए एक प्रधानमंत्री एक राष्ट्रपति का चुनाव किया गया।

जिसमें सबसे पहले आजाद भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरू को चुना गया और राष्ट्रपति के रूप में डॉ राजेंद्र प्रसाद का का चुनाव हुआ । प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए अपने देश के विकास के लिए देश की उन्नति के लिए उन्होंने कई कार्य किए इसीलिए जवाहरलाल नेहरू को आधुनिक भारत के रचयिता के रूप में भी जाना जाता हैं 1

4 नवंबर को हर साल जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में बहुत धूमधाम से मनाया जाता हैं पंडित जवाहरलाल नेहरू को आधुनिक भारत का शिल्पकार भी माना जाता हैं

क्‍योंकि आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री होने के नाते उन्होंने अपने देश को विश्व में एक अलग पहचान दिलाने में पूरा सहयोग किया था बच्चों से उन्हें बहुत ही लगाव था इसीलिए उनके जन्मदिन को आज भी बाल दिवस के रूप में हर साल मनाया जाता हैं।

पंडित जवाहरलाल नेहरू बहुत ही महान नेता थे और और एक अच्छे दिल के व्‍यक्ति भी थे स्वतंत्र भारत का प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ही थे। नेहरू जी के जन्म दिवस को 14 नवंबर को हर वर्ष बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है पंडित Jawaharlal Nehru जी का जन्म 14 नवंबर 1889 प्रयागराज इलाहाबाद में हुआ था

उनके पिता का नाम पंडित मोतीलाल नेहरु था और उनके माता का नाम स्वरूप रानी नेहरू था नेहरू के पिताजी एक प्रसिद्ध वकील थे और उनकी माता भी एडवोकेट थी।

पंडित मोतीलाल नेहरू कश्मीरी पंडित थे और वह सारस्वत कौल ब्राम्हण थे कश्‍मीरि पंडित होने की वजह से जवाहर लाला नेहरू को पंडित नेहरू भी कहा जाता था मोतीलाल नेहरू की दो शादियां हुई थी पहली पत्नी का कुछ ही दिनों बाद मृत्‍यु हो गया

दूसरी पत्नी स्वरूपरानी नेहरू थी जिनसे 3 बच्चे हुए जवाहरलाल नेहरू सबसे बड़े थे और उनकी दो छोटी बहन थी एक बड़ी बहन विजयालक्ष्मी और छोटी बहन का नाम कृष्णा हठीसिंह था विजयालक्ष्मी संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष थी

और उनकी छोटी बहन कृष्णा हठीसिंह एक बहुत बड़ी लेखिका थी उन्होंने जो भी किताबें लिखी थी उसमें अपने परिवार के लोगों से संबंधित जानकारियां लिखी थी।

नाम पंडित जवाहरलाल नेहरू
जन्‍म 14 नवंबर 1889
पिता का नाम पंडित मोतीलाल नेहरु
माता का नाम स्वरूप रानी नेहरू
पत्नि का नाम कमला नेहरू
पुत्री इंदिरा गांधी
उपनाम चाचा नेहरू
नेहरू जी द्वारा लिखी गई पुस्‍तकें The discovery of India,Hindustan ki kahani,

Pita ke Patra (letters from a father to his daughter in Hindi),Glimpses of world history

मृत्‍यु 27 मई 1964

जवाहरलाल नेहरू के पढ़ाई  

जवाहरलाल नेहरू के पिता जी ने उनकी प्रारंभिक पढ़ाई का प्रबंध उनके घर पर ही कर दिया था जवाहरलाल नेहरु जी 15 वर्ष के थे तभी इंग्लैंड के स्कूल  कैंब्रिज विश्वविद्यालय में दाखिला कराया।

और उसके बाद उन्होंने अपने पढ़ाई वहीं से  पूरी की जवाहरलाल नेहरू की कुछ दिनों तक घर में ही कई अंग्रेज टीचर आकर के पढ़ाती थी लेकिन बाद में मोतीलाल नेहरू ने उन्हें दुनिया के सबसे बड़े से बड़े और बेहतर स्कूल और विश्वविद्यालय में दाखिला करवाया

जवाहरलाल नेहरू ने हैरो से स्कूल की शिक्षा और कालेज तक की पढ़ाई पूरी की थी उसके बाद ट्रिनिटी कॉलेज से आगे की पढ़ाई पूरी की और वकालत करने के लिए जवाहरलाल नेहरू ने लंदन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया 7 सालों तक इंग्लैंड में पढ़ाई करने के बाद जवाहरलाल नेहरू 1912 में वकालत की पढ़ाई पूरी करके भारत लौट आए।

1912 ईस्वी में Jawaharlal Nehru ने अपनी वकालत की पढ़ाई करके भारत लौटे जवाहरलाल नेहरू इंग्लैंड में अपनी पढ़ाई कर रहे थे उसी दौरान उनके मन में देश प्रेम की भावना जगी थी वहां पर उन्होंने अंग्रेजों को भारतीयों के खिलाफ अत्याचार करते हुए देखा था

उसी समय उनके मन में भारत को स्वतंत्र देखने की इच्छा जगी थी Jawaharlal Nehru ने  वकालत की पढ़ाई करके वापस आने के बाद भारत में अपनी वकालत शुरू किया था। लेकिन उनका मन उसमें नहीं लग रहा था उन्हें तो भारत को आजाद कराने का सपना मन में था

जवाहरलाल नेहरू का विवाह

वकालत की पढ़ाई पूरा करके जब पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत लौटे तो 1916 में उनकी शादी कमला नेहरू से हुई कमला नेहरू से इकलौती संतान इंदिरा गांधी का जन्म हुआ आगे चलकर इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी।

पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान 

जवाहरलाल नेहरु  पढ़ाई के दौरान ही भारत को आजाद कराने का मन में ठान लिया था 1917 में सबसे पहली बार जवाहरलाल नेहरू होम रूल लीग में शामिल हुए और यहीं से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ।

2 सालों तक होम रूल लीग में शामिल होकर भारत को स्वतंत्रता दिलाने में मदद करने के बारे में जानकारियां लेते रहें और 1919 में महात्मा गांधी से मिले उस समय महात्मा गांधी अंग्रेजो के खिलाफ लगाए गए रोलेट एक्ट अधिनियम के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था जो कि सविनय अवज्ञा आंदोलन था

जवाहरलाल नेहरू महात्मा गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन से बहुत ही प्रभावित हुए और यहीं से उन्होंने महात्मा गांधी के द्वारा दिखाए गए राह पर महात्मा गांधी के साथ भारत को आजाद कराने के लिए स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए।

पश्चिमी सभ्यता को मानने वाले मोतीलाल नेहरू थे और जवाहरलाल नेहरू भी उसी तरह रहते थे लेकिन महात्मा गांधी के संपर्क में आने के बाद स्वदेशी आंदोलन का असर उन पर इतना पडा कि उन्होंने खादी का कुर्ता और गांधी टोपी पहनना शुरू कर दिया

अपने देश वापस आने के बाद सन 1919 ईस्वी में अमृतसर का जालियांवाला बाग हत्याकांड को देखा जवाहरलाल नेहरू जी अपने आप को रोक नहीं सके और उसके बाद उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में जुड़ने लगे।

सितंबर 1920 से 1922 के बीच होने वाले असहयोग आंदोलन में उन्होंने महात्मा गांधी जी के साथ  भाग लिया उसके बाद नेहरू जी को जेल भी जाना पड़ा था। 1920 से 22 तक महात्मा गांधी के द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन में जवाहरलाल नेहरू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और इस आंदोलन में अंग्रेजों ने उन्हें दो बार गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था

1924 में इलाहाबाद नगर निगम के अध्यक्ष के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरू को चुना गया लेकिन उन्हें ब्रिटिश अधिकारियों से किसी भी तरह का कोई सहयोग नहीं मिल रहा था इसीलिए उन्होंने इलाहाबाद नगर निगम के अध्यक्ष से त्यागपत्र दे दिया।

पंडित जवाहरलाल नेहरू महात्मा गांधी के नेतृत्व में कई आंदोलन में अपनी भूमिका बहुत ही अच्छे से निभाई थी इसलिए धीरे-धीरे वह एक महान नेता और एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में बहुत ही चर्चित होने लगे थे इसीलिए 1926 से 1928 तक उन्हें कांग्रेस समिति का महासचिव बनाया गया।

इसके बाद 1929 को लाहौर में कांग्रेसी अधिवेशन में पंडित Jawaharlal Nehru जी को कांग्रेस का मुख्य चुना गया 26 जनवरी को उन्होंने रावी नदी किनारे तिरंगा झंडा को लहराते हुए स्वतंत्रता आंदोलन का ऐलान किया था

1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में नेहरू जी ने महात्मा गांधी जी के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी जिसके बाद अंग्रेजों ने उन्हें जेल में भी बंद कर दिया था जिसके बाद आक्रोश फूट पड़ा था।

26 जनवरी 1930 में लाहौर में भारत को स्वतंत्र कराने के लिए भारत को स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के लिए जवाहरलाल नेहरू पूर्ण स्वराज की मांग की गई और लाहौर में स्वतंत्र भारत का झंडा फहराया गया 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन हुआ

जिसमें महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के साथ मिलकर कई स्वतंत्रता सेनानियों ने भाग लिया और यह आंदोलन बहुत ही सफल भी रहा हैं जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने कई राजनीतिक सुधार किए1936 से 1937 तक पंडित जवाहरलाल नेहरू को कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया

जिस समय द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हो रहा था उस समय जवाहरलाल नेहरू चीन के दौरे पर गए थे और अंग्रेजों के खिलाफ उन्होंने एक आंदोलन किया जिसमें की भारत को द्वितीय विश्वयुद्ध में भाग नहीं लेने के विरोध में उन्होंने आंदोलन किया था यह उनका व्यक्तिगत सत्याग्रह था जिसमें 31 अक्टूबर 1940 में उन्हें गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया।

जब 1942 में अंग्रेजों को भारत से हटाने के लिए भारत छोड़ो आंदोलन चलाया गया जिसमें कई नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया महात्मा गांधी के साथ पंडित जवाहरलाल नेहरु भी गिरफ्तार कर लिए गए और उन्हें जेल में डाल दिया गया

जवाहरलाल नेहरू को रिहा कर दिया गया 6 जुलाई 1946 में फिर से उन्हें भारत कांग्रेस का अध्यक्ष चौथी बार चुना गया इसी तरह 15 अगस्त 1947 में भारत देश ब्रिटिश सरकार की गुलामी से पूर्ण रूप से आजाद हो गया।

पंडित जवाहरलाल नेहरु जी का राजनीतिक जीवन 

जवाहरलाल नेहरू के राजनीतिक जीवन बहुत अच्छा रहा भारत को आजाद करवाने में पंडित Jawaharlal Nehru जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ भारत को आजाद कराने में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम में सबसे महत्वपूर्ण नाम पंडित जवाहरलाल नेहरु जी का आता है

हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के कड़े परिश्रम की वजह से और बलिदान के वजह से ही भारत आजाद हुआ था स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरु जी को चुना गया था

1947 में जब भारत आजाद हुआ तो आजाद भारत के प्रधानमंत्री के लिए मतदान किया गया लेकिन प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे ज्यादा मतदान सरदार वल्लभ भाई पटेल को मिला और उसके बाद आचार्य कृपलानी को ज्यादा मतदान मिला था

लेकिन महात्मा गांधी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव रखा जिसके बाद सरदार वल्लभभाई पटेल और अचार्य कृपलानी ने अपना नाम वापस कर लिया

आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जब थे तो उन्हें सबसे बड़ी चुनौती यह थी की अंग्रेजों से आजाद होने के बाद लगभग 500 राजा थे जिन्हें एक करना था एक झंडे के नीचे लाना था जवाहरलाल नेहरू ने भारत को आगे बढ़ाने में भारत का विकास करने में आधुनिक भारत का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी

उन्होंने देश में कृषि और उद्योग को नया रूप देने के लिए कई नीतियों को अपनाया भारत को विश्व में नई पहचान दिलाने के लिए विदेश नीति का भी विकास किया पंडित जवाहरलाल नेहरू को सबसे सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया उन्हें भारत रत्न दिया गया।

जब भारत आजाद हुआ तो हमारे भारत देश की अर्थव्यवस्था कुछ ठीक नहीं था क्योंकि ब्रिटिश शासन में रहते हुए अंग्रेजों ने पूरे भारत के अर्थव्यवस्था को खराब कर दिया था लेकिन पंडित Jawaharlal Nehru ने प्रधानमंत्री के पद पर रह कर अपना कार्यभार बहुत अच्छे से संभाला था।

भारत के आजाद होने के बाद कई मुश्किलें आई थी पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उसका सामना बहुत अच्छी तरीके से किया था कई  प्राकृतिक आपदा भारत में आया जैसे कि बाढ़ आपदा ब्रिटिश सरकार ने भारत को लूट के गरीब बना दिया था

जिसे मजदूर भी हड़ताल पर चले गए थे उसके बाद पंडित Jawaharlal Nehru ने उन लोगों को बहुत ही अच्छे से समझाया और भारत को आगे ले जाने के लिए बहुत अच्छे से अपना कार्य किया उन्होंने भारत के विकास के लिए बहुत सारे कार्य किया जैसे की पंचवर्षीय योजना का निर्माण किया।

पंडित जवाहरलाल नेहरू  का व्यक्तित्व 

जवाहरलाल नेहरु की बहुत ही तेज दिमाग और ओजस्वी पुरुष थे जब वह किसी भी व्यक्ति से एक बार मिल जाते थे तो हमेशा याद करते थे वह एक स्वतंत्रता सेनानी एक अच्छे नेता राजनीतिज्ञ और एक महान लेखक भी थे पंडित जवाहरलाल नेहरू दक्षिणी सभ्यता को ज्यादा अपनाए थे

उनके रहन-सहन में उनके चलने फिरने में ज्यादातर पश्चिमी सभ्यता की झलक मिलती थी जैसे कि हमेशा सिगरेट पीते थे काला चश्मा पहनते थे हमेशा उनके पास एक गुलाब का फूल रहता था यह सारी चीजें उनके पसंदीदा चीजें होती थी। जवाहरलाल नेहरू के सम्मान में कई योजनाएं कई सड़क बनाया गया कई यूनिवर्सिटी बने कई हॉस्पिटल बनाए गए।

जवाहरलाल नेहरु का व्‍यक्तित्‍व बहुत ही अच्छा था उन्हें बच्चों से बहुत ही प्रेम था इसीलिए बच्चे उन्हें चाचा नेहरू के नाम से बुलाया करते थे और आज भी हम लोग उनके जन्मदिन 14 सितंबर को बाल दिवस के रूप में मनाते हैं

Pandit Jawaharlal Nehru जी बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए बारे में बहुत सोचते थे और बहुत सारी योजनाओं को उन्होंने शुरू भी किया था

जिसे बच्चों का भविष्य उज्जवल बने पंडित Jawaharlal Nehru जी का मानना था बच्चों को पौष्टिक आहार और ज्यादा से ज्यादा अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए जिससे कि उनके आने वाले भविष्य उज्जवल हो जवाहरलाल नेहरू को किताबें लिखने का भी बहुत शौक था।

पंडित जवाहरलाल नेहरू लेखन कार्य

एक सफल स्वतंत्रता सेनानी सफल राजनेता सफल प्रधानमंत्री के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरू बन कर आए थे लेकिन इसके साथ ही एक बहुत ही अच्छे उन्होंने कई पुस्तकें लिखी थी

जब वह जेल में थे उन्होंने कई पुस्तक लिखी थी। जेल में रहते हुए अपनी पुत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखने के बहाने पिता के पत्र पुत्री के नाम एक पुस्तक उन्होंने लिखी थी

  • The discovery of India
  • Hindustan ki kahani
  • Pita ke Patra (letters from a father to his daughter in Hindi)
  • Glimpses of world history
  • राजनीति से दूर
  • जवाहरलाल नेहरू वाड्मय
  • इतिहास के महापुरुष
  • मेरी कहानी
  • विश्व इतिहास की झलक
  • राष्ट्रपिता

पंडित जवाहरलाल नेहरू जी का मृत्यु

भारत पाकिस्तान का कश्मीर का मुद्दा शुरू से ही एक बहुत बड़ा मुद्दा हैं जब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे उस समय भी भारत-पाकिस्तान के समझौते कराने के लिए उन्होंने चीन से मित्रता कर ली लेकिन चीन ने उन्हें धोखा दिया

1962 में भारत पर आक्रमण कर दिया चीन के इस धोखे से जवाहरलाल नेहरू को बहुत बड़ा झटका लगा और उन्हें दिल का दौरा पड़ गया शायद उनकी मृत्यु का कारण भी सबसे बड़ा यही था।

1963 में उन्हें पहला दिल का दौरा आया था जिसके बाद उनका स्वास्थ्य बिगड़ता ही चला गया और वह बहुत ही कमजोर हो गए कुछ ही महीनों बाद फिर से उन्हें दिल का दौरा पड़ा और तीसरे दिल का दौरा पड़ने के बाद उनकी मृत्यु हो गई।पंडित जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु 27 मई 1964 ईस्वी में हुआ था

साराशं 

इस लेख में आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जीवन परिचय के बारे में पूरी जानकारी दी गई हैं पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म कहां हुआ उनका विवाह किससे हुआ था जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पढ़ाई कहां से पूरी की थी

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भूमिका कैसे निभाई पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में दी गई जानकारी से संबंधित अगर कोई सवाल आपके मन में हैं तो कृपया कमेंट करके जरूर पूछें।

इस लेख में पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के जीवनी के बारे में पूरी जानकारी दी गई हैं आप लोगों को यह लेख कैसा लगा हमें कमेंट करके आप लोग जरूर बताइएगा और अपने रिश्तेदारों दोस्तों मित्रों को शेयर भी जरूर करें।

Leave a Comment