Ramdhari Singh Dinkar – रामधारी सिंह दिनकर के जीवन परिचय

रामधारी सिंह दिनकर कौन थेे Ramdhari Singh Dinkar ka jivan parichay in hindi उनका जीवन परिचय क्‍या था उनका जन्‍म कहां हुआ के बारे में जानने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें अमर काव्य के रचयिता रामधारी सिंह दिनकर को वर्षों वर्षों तक याद रखेंगे रामधारी सिंह दिनकर की कविताएं स्वतंत्रता संग्राम में भी अहम भूमिका निभाई थी.

Ramdhari Singh Dinkar एक वीर रस के कवि माने जाते थे देशभक्ति पर उन्होंने बहुत सारी कविताएं लिखी हैं इसी वजह से रामधारी सिंह दिनकर को राष्ट्रकवि का भी सम्मान मिला था.

तो आइये इस लेख में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के जीवनी के बारे में उनकी रचनाओं के बारे  में  रामधारी सिंह दिनकर को कौन कौन सम्‍मान मिले के बारे पूरी जानकारी प्राप्‍त करते हैं.

Ramdhari Singh Dinkar ka jivan parichay in hindi

रामधारी सिंह दिनकर एक विद्रोही कवि माने जाते थे उनकी कविताओं ने भारतीय स्वतंत्रता अभियान में जंंग छेड़ने में बहुत मदद की थी रामधारी सिंह दिनकर की बहुत सारी कविताएं देशभक्ति पर थी

उन कविताओं से लोगों के दिलों में देश के प्रति भक्ति उत्पन्न होती थी इन्हीं कविताओं के वजह से रामधारी सिंह दिनकर को राष्ट्रकवि का उपाधि मिला था

Ramdhari Singh Dinkar एक बहुत सुप्रसिद्ध निबंधकार कवि और देश भक्ति इंसान माने जाते थे.उनकी कविताओं में विद्रोह और क्रांति की बातें रहती थी और कुछ कविताओं में श्रृंगार भावना भी मिलती थी

Ramdhari Singh Dinkar ka jivan parichay in hindi

दिनकर जी अमर काव्य के रचयिता माने जाते थे रामधारी सिंह दिनकर खुद एक गांधीवादी नेता थे लेकिन उनके द्वारा रचित कविताओं में क्रांति और विद्रोह दिखता था उनका मानना था की आजादी के लिए कभी-कभी विद्रोह भी सही होता है

Ramdhari Singh Dinkar in hindi

रामधारी सिंह दिनकर का जन्‍म 23 सितंबर 1908 मेें हुआ था वह बिहार के बेगूसराय के सिमरिया गांव के रहने वाले थे उनके पिता बाबू रवि सिंह थे और माता मानरूप देवी थी

रामधारी सिंह दिनकर को हिंदी संस्कृत मैथिली बंगाली उर्दू और इंग्लिश का भी जानकारी था.जब वह 2 वर्ष के थे तभी उनके पिता जी का मृत्यु हो गया था

जिस वजह से उनके और उनके भाई बहनों की सारी जिम्मेदारी उनकी विधवा माता के कंधे पर आ गया दिनकर जी की और उनके भाई बहनों की पालन पोषण उनकी माता ने हीं किया था रामधारी सिंह दिनकर का बचपन बहुत ही परेशानियों से व्यतीत हुआ था.

नाम रामधारी सिंह दिनकर
जन्‍म 23 सितंबर 1908
पिता का नाम बाबू रवि सिंह
माता का नाम मानरूप देवी
पत्नि का नाम श्‍यामावती देवी
रचनाएं काव्‍य संग्रह,प्रबंध काव्‍य,खंड काव्‍य
काव्‍य संग्रह रेणुका,हुंकार और रसवंती
प्रबंध काव्‍य परशुराम की प्रतीक्षा,कुरुक्षेत्र,रश्मिरथी
खंड काव्‍य उर्वर्शी
बाल कविता सपनों का दुआ ,रश्मि माला एवं अमृत मंथन
प्रतिनिधी रचनाएं परंपरा,कृष्ण की चेतावनी ,बालिका से वधू, आशा का दीपक ,चांद एक दिन
सम्‍मान साहित्य अकादमी,पदम विभूषण,साहित्य चूड़ामणि ज्ञानपीठ सम्मान
कार्यक्षेत्र प्रधानाध्यापक, भारत सरकार के हिंदी सलाहकार, निबंधकार,कवि,लेखक
उपाधि राष्‍ट्रकवि
मृत्‍यु 24 अप्रैल 1974

रामधारी सिंह दिनकर के शिक्षा 

उन्होंने शुरुआती पढ़ाई गांव के ही प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त किया था बाद में बोरो नाम के गांव में राष्ट्रीय मिडिल स्कूल से उन्होंने आगे की पढ़ाई Ramdhari Singh ने हाई स्कूल की पढ़ाई मोकामा घाट हाई स्कूल से की थी

और उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से बी. ए. ऑनर्स इतिहास से की थी. प्राप्ति की 1928 में उन्होंने मैट्रिक के पढ़ाई पूरी की और उसके बाद पटना विश्वविद्यालय से इतिहास से बीए ऑनर्स 1932 ईस्वी में उन्होंने पूरा किया

Ramdhari Singh Dinkar को कई भाषाओं का ज्ञान था पढ़ाई के दौरान ही उनकी शादी श्‍यामावती देवी से हो गई थी और उन्हें एक पुत्र भी हुआ था Ramdhari Singh Dinkar ने ऑनर्स करने के बाद एक स्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर नौकरी करने लगे.

संस्कृत हिंदी बांग्ला अंग्रेजी और उर्दू का उन्होंने अच्छे से अध्ययन किया था b.a. की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक विद्यालय में अध्यापक के रूप में कार्य करने लगे. 1934 से 1947 तक Ramdhari Singh Dinkar ने बिहार सरकार में सब रजिस्टार और प्रचार विभाग के उपनिदेशक के पद पर कार्य किया था.

रामधारी सिंह दिनकर का साहित्यिक

Ramdhari Singh दिनकर ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद एक स्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर नौकरी करने लगे थे कुछ दिनों बाद बिहार सरकार के तरफ से उन्होंने सब रजिस्ट्रार का भी पद पर नौकरी किया

कुछ दिन बाद रामधारी सिंह दिनकर भागलपुर के विश्वविद्यालय में उपकुलपति का भी पद मिला बाद में भारत सरकार के हिंदी सलाहकार का भी कार्य उन्होंने बखूबी निभाया

रामधारी सिंह दिनकर को संस्कृत बांग्ला अंग्रेजी और उर्दू अच्छे से आता था.Ramdhari Singh Dinkar स्वतंत्रता के पहले एक विद्रोही कवि के रूप में लोगों के सामने उभरे थे

इसीलिए स्वतंत्रता के बाद उन्हें राष्ट्रकवि के रूप में लोग जानने लगे थे उनकी कविताओं से लोगों के दिलों में देश के प्रति भक्ति उत्पन्न होता था उनकी कविताएं कुछ कुछ शृंगारिक भी हुआ करते थे

रामधारी सिंह दिनकर ने बहुत सारे काव्य की रचना की बहुत सारे निबंध कविताएं और काव्य संग्रह  की रचना किया उनकी रचनाओं में बाल कविताएं प्रतिनिधि रचनाएं भी हुआ करते थे

Ramdhari Singh Dinkar ने काव्य संग्रह  तो लिखा ही था लेकिन उन्होंने एक खंडकाव्य लिखा था जिसका नाम उन्होंने उर्वर्शी दिया था उर्वर्शी खंडकाव्य लगभग 5 अंकों में उन्होंने बांटा था.

रामधारी सिंह दिनकर का राजनितिक जीवन

रामधारी सिंह दिनकर ने 1934 से 1947 तक बिहार सरकार में सब रजिस्ट्रार और प्रचार विभाग के उपनिदेशक पद पर कार्य किया लेकिन इतने दिनों में उनका ट्रांसफर 22 बार हुआ था

जब भारत देश आजाद हुआ तो नहीं 47 के बाद मुजफ्फरपुर में विश्वविद्यालय में हिंदी के प्राध्यापक और विभागाध्यक्ष के पद पर नियुक्त हुए उन्हें 1952 में भारत की पहली संसद का निर्माण किया गया

तो दिनकर जी राज्यसभा के सदस्य का चुनाव लड़े और वह राज्यसभा सदस्य चुने गए जिसके बाद वह दिल्ली चले गए राज्यसभा सदस्य बनने के बाद दिनकर जी 12 साल तक संसद के सदस्य रहे

1964 से 1965 तक भागलपुर के विश्वविद्यालय में कुलपति के रूप में भी कार्य किए और भारत सरकार के तरफ से 1965  से 1971 तक हिंदी सलाहकार नियुक्त किए गए थे.

रामधारी सिंह दिनकर का व्यक्तित्व

भारतीय हिंदी साहित्य के आधुनिक युग के एक बहुत ही बड़े साहित्यकार Ramdhari Singh Dinkar थे जिन्होंने हमेशा साहित्य की सेवा करते रहे एक क्रांतिकारी युग का आरंभ रामधारी सिंह दिनकर ने किया था

उन्हें एक विद्रोही कवि के रूप में जाना जाता है क्योंकि उन्होंने अपने रचनाओं से राष्ट्रप्रेम की भावना लोगों में उत्पन्न किया उनकी कविताओं में विद्रोह भावना आक्रोश लोगों के दिलों में क्रांति की पुकार उत्पन्न करने की भावना रहती थी

लेकिन दूसरी तरफ उनकी कविताओं में श्रृंगारिक भावना और बहुत ही कोमलता की भावना भी दिखाई देती है Ramdhari Singh Dinkar का सबसे ज्यादा प्रसिद्धि कुरुक्षेत्र उर्वशी नाम के रचना से मिला था

इसीलिए उन्हें राष्ट्रीय हिंदी कविता का वैतालिक भी कहा गया है. रामधारी सिंह दिनकर का स्वभाव बहुत ही सौम्या मृदुभाषी था लेकिन जब अपने देश के सही गलत बात आती थी

तब वह कुछ भी बात बोलने से किसी को कुछ भी सुनाने से पीछे नहीं हटते थे उन्होंने एक बार संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ भी एक अपने दोहा के माध्यम से बोल दिया था

उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा इसलिए बनाया गया है कि कोई भी आकर के हिंदी भाषी लोगों को कुछ भी अपशब्द सुना जाए यह बात सुनकर के जवाहरलाल नेहरू ने अपना सिर झुका लिया.

रामधारी सिंह दिनकर के प्रसिद्ध काव्य संग्रह 

कुरुक्षेत्र में महाभारत के लड़ाई के बारे में मिलता है उनका मानना था की महाभारत की लड़ाई बहुत ही विनाशकारी था लेकिन आजादी के लिए कभी-कभी यह सभी जरूरी रहता है

Ramdhari Singh Dinkar ने बहुत सारी बाल कविताएं और प्रतिनिधि रचनाएं भी की थी जिनमें से कुछ नाम है जैसे कि सपनों का दुआ ,रश्मि माला एवं अमृत मंथन कुछ प्रतिनिधि रचनाएं हैं

परंपरा,कृष्ण की चेतावनी ,बालिका से वधू, आशा का दीपक ,चांद एक दिन इत्यादि कविताएं उन्होंने लिखी थी रामधारी सिंह दिनकर को उनके कविताओं के लिए काव्य संग्रह के लिए खंडकाव्य के लिए सारी रचनाओं के लिए कुछ सम्मान भी मिले थे.Ramdhari Singh दिनकर के तीन प्रसिद्ध काव्य संग्रह है जिनका नाम है

  • रेणुका
  • हुंकार और
  • रसवंती

रामधारी सिंह दिनकर ने काव्य संग्रह के अलावा भी बहुत सारे प्रबंध काव्य भी लिखे थे जैसे कि

  • परशुराम की प्रतीक्षा
  • कुरुक्षेत्र
  • रश्मिरथी और
  • उर्वर्शी

रामधारी सिंह की भाषा शैली

राष्ट्र कवि के नाम से उपाधि प्राप्त करने वाले प्रचलित होने वाले Ramdhari Singh Dinkar ने क्रांतिकारी कविताएं लिखी हैं उनकी कविताओं में राष्ट्रीय भावना की प्रधानता रहती थी

उनकी काव्य में रचनाओं में साहित्य खड़ी बोली का प्रयोग दिनकर जी ने किया है दिनकर जी की कविताओं में संस्कृत और तत्सम शब्द का इस्तेमाल किया गया है

उन्होंने अपनी रचनाओं में उर्दू और अंग्रेजी भाषा का भी उपयोग किया है सबसे ज्यादा प्रधानता दिनकर जी की कविता का है कि उसमें वीर रस करुण रस और रौद्र रस का बहुत ही ज्यादा प्रयोग मिलता है

साथ ही उन्होंने अपनी कविताओं में शांत रस का भी इस्तेमाल किया है दिनकर जी के काव्य में कई प्रकार के छंद का प्रयोग किया गया है अलंकार उपमा उत्प्रेक्षा रूपक उन्होंने बहुत ही अच्छे से प्रयोग किया है

समाज में पहले कई तरह के अंधविश्वास शोषण जाति प्रथा आदि के खिलाफ Ramdhari Singh Dinkar ने अपनी रचनाएं की है जिसमें कि रश्मिरथी और परशुराम की प्रतीक्षा सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है

गद्य और पद्य दोनों में ही प्रसिद्धि उन्होंने प्राप्त किया है दिनकर जी के महान रचनाओं के लिए कई सम्मान और पुरस्कार भी दिए गए हैं.

Ramdhari Singh दिनकर को मिले सम्मान

द्वापर युग में जो महाभारत की महा विनाशक लड़ाई हुई थी उस पर रामधारी सिंह दिनकर ने कुरुक्षेत्र नाम का रचना किया है जोकि विश्व भर में जितने सर्वश्रेष्ठ 100 काव्‍य हैं उसमें कुरुक्षेत्र का स्थान 74 वें स्थान पर दिया गया है

उनकी रचनाओं में ज्यादातर वीर रस की प्रधानता होते थे सिर्फ एक उर्वशी ही उनकी वीर रस प्रधानता वाली रचना नहीं है रामधारी सिंह दिनकर कई महान रचनाएं हैं

कुरुक्षेत्र उर्वशी रश्मिरथी परशुराम की प्रतीक्षा आदि जिसके लिए उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार भी मिले हैं हरिवंश राय बच्चन ने कहा था कि रामधारी सिंह दिनकर को गद्य पद्य भाषा और हिंदी सेवा के लिए अलग-अलग ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया जाना चाहिए

इसी तरह कई लेखक और कवियों ने रामधारी सिंह दिनकर का बहुत ही प्रशंसा किया है. दिनकर जी को 1999 में मरणोपरांत भारत सरकार की तरफ से डाक टिकट जारी किया गया.

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने भारतीय हिंदी साहित्य में वीर रस के काव्य को एक अलग महत्व दिया जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति आंदोलन किया था

उस समय रामधारी सिंह दिनकर की कविता बोलकर लोग सरकार के खिलाफ विद्रोह कर रहे थे भारत देश की आजादी की लड़ाई में भी उन्होंने योगदान दिया था अपने कविताओं से लोगों के दिलों में विद्रोह और बदले की भावना उन्होंने उत्पन्न किया था.

  • साहित्य अकादमी
  • पदम विभूषण
  • साहित्य चूड़ामणि
  • ज्ञानपीठ सम्मान

रामधारी सिंह दिनकर की मृत्यु 

दिनकर जी ने अपनी रचनाओं से लोगों के दिलों में आक्रोश और बदले की भावना उत्पन्न कर दी थी भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानियों के साथ कई स्वतंत्रता आंदोलन का उन्होंने समर्थन किया था

लेकिन बाद में महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित हुए और वह एक गांधीवादी बनकर स्वाधीनता संग्राम में सहयोग करने लगे रामधारी सिंह दिनकर की कविताएं वीर रस प्रधान कविताएं है उनकी कविताओं में वीर रस का ही प्रधानता मिलता है.

रामधारी सिंह दिनकर एक क्रांतिकारी कवि माने जाते थे उन्होंने हिंदी साहित्य में वीर रस के काव्य को बहुत ही ऊपर उठाया था रामधारी सिंह दिनकर की मृत्यु 24 अप्रैल 1974 को हुआ था.

सारांश 

हिंदी के एक महान लेखक निबंधकार कवि राष्ट्रकवि के नाम से प्रसिद्ध होने वाले रामधारी सिंह दिनकर आधुनिक युग के वीर रस के बहुत ही प्रसिद्ध कवि थे.रामधारी सिंह दिनकर हिंदी साहित्य के क्रांतिकारी कवि के रूप में जाने जाते थे.

इस लेख में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जीवनी के बारे में उनका जन्म उनकी शिक्षा उनका विवाह उन्होंने कौन-कौन से पदों पर कार्य किया उनकी कौन-कौन सी रचनाएं हैं के बारे में पूरी जानकारी दी गई है.

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