Raskhan – रसखान कौन थे जीवन परिचय

रसखान कौन थे Raskhan ka jivan parichay in hindi रसखान के जीवन परिचय के बारे में हम लोग इस लेख में जानने वाले हैं। हम लोग जानेंगे कि बारे में रसखान का जन्म कब हुआ और कहां हुआ था

रसखान के शिक्षा के बारे में Raskhan के साहित्यिक जीवन के बारे में रसखान के रचनाएं कौन-कौन सी हैं सारी जानकारी हम लोगों को इस लेख में मिलेगा

उनकी रचनाओं में और काव्य में भगवान श्री कृष्ण के सगुण और निर्गुण दोनों रूपों का पूरा विवरण रहता था Raskhan भगवान श्री कृष्ण के सगुण और निर्गुण दोनों रूप के भक्त उपासक थे तो इस जानकारी को पूरा जानने के लिए आप यह लेख पूरा जरूर पढ़ें आइए नीचे विस्‍तार से जानते हैं

Raskhan ka jivan parichay in hindi

Raskhan कृष्ण भक्त कवि थे रसखान रीतिकाल के कवियों में सबसे प्रसिद्ध कृष्ण भक्त कवि थे उन्हें रस का खान कहा जाता था Raskhan का पूरा नाम सैयद इब्राहिम रसखान था उनकी अधिकतर रचनाएं कृष्ण के श्रृंगार और भक्ति में होती थी उनकी रचनाओं में भक्ति और श्रृंगार रस दोनों कूट-कूट कर भरी रहती थी। रसखान भारतीय हिंदी साहित्य के एक सुप्रसिद्ध कृष्ण भक्त कवि थे

उनका स्थान कृष्ण भक्त कवियों में सबसे ऊपर और सर्वश्रेष्ठ हैं वह मुसलमान थे लेकिन वह कृष्ण के भक्ति में हमेशा डूबे रहते थे उनका पूरा नाम सैयद इब्राहिम रसखान था उन्हें रस का खान भी कहा जाता था।कवि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने उनके बारे में कहा था की रसखान भक्ति कालीन मुसलमान कवियों में सबसे ऊपर कृष्ण भक्त कवि है।

Raskhan ka jivan parichay in hindi

रसखान का जन्म

रिति काल के भक्ति कावियों में कृष्ण भक्त कवि Raskhan के जन्म के बारे में बहुत मतभेद हैं हर विद्वानों का अपना अपना एक अलग मत है किसी को भी रसखान के जन्म के बारे में सही जानकारी नहीं है कुछ विद्वानों के मत के अनुसार रसखान का जन्म 1533 से 1558 के समकालीन हुआ था

कुछ लोगों का कहना है कि रसखान का जन्म अकबर के शासन के लगभग हुआ था लेकिन उनके एक कविता से ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि उनका जन्म 1590 ईसवी के लगभग हुआ था।

उन्होंने अपने एक कविता में लिखा है की गदर के कारण दिल्ली जब शमशान हो गया था तब उन्होंने दिल्ली छोड़ दिया और मथुरा के ब्रज में जाकर बस गए तो इन बातों से ऐसा अनुमान लगाया जाता है की गदर सन 1613 में दिल्ली में हुआ था तो उस समय कवि Raskhan बड़े हो गए होंगे इसी से अनुमान लगाया जाता है कि उनका जन्म 1590 के लगभग हुआ होगा।

रसखान का जन्म स्थान 

उनका  जन्म के तरह ही उनके जन्म स्थान के बारे में भी विद्वानों में अपना अलग-अलग मत है कुछ लोगों का कहना है कि उनका जन्म दिल्ली शहर के नजदीक पिहानी में हुआ था

क्योंकि उन्होंने अपने एक दोहा में लिखा है कि गदर के समय वह जब दिल्ली शमशान हो गया था तब वह मथुरा के ब्रज में चले गए थे इसी से अनुमान लगाया गया कि उनका जन्म दिल्ली में या दिल्ली के नजदीकी हुआ था उसके बाद वह मथुरा चले गए थे।

रसखान का शिक्षा 

Raskhan एक कृष्ण भक्त कवि थे उन्होंने गोकुल में ही अपना जीवन कृष्ण के भक्ति में बिताया था वह कृष्ण का भजन करते हुए मथुरा में अपना सारा जीवन व्यतीत कर लिया था विद्वानों का कहना है कि Raskhan के पिता जागीरदार थे ऐसा कहा जाता है कि वह एक अच्छे परिवार में जन्म लिए थे इसलिए उनका शिक्षा भी अच्छा से हुआ था।

रसखान अरबी, हिंदी, संस्कृत और फारसी भाषा के अच्छे विद्वान थे ऐसा कहा जाता है कि वह बहुत ही अच्छे कृष्ण भक्त थे एक बार गोस्वामी विट्ठल दास जी उनके इस कृष्ण भक्ति को देखकर बहुत प्रभावित हुए

और उन्हें अपना शिष्य बनने के लिए उनसे कहा और उन्हें अपना शिष्य बना लिया गोस्वामी विट्ठल दास जी ने रसखान को वल्लभ संप्रदाय से शिक्षा प्रदान किया रसखान ने जब वैष्णव धर्म से शिक्षा प्राप्त कर ली लिया तो वह कृष्ण के अनन्य भक्त बन गए उसके बाद रसखान ने अपना जीवन कृष्ण के भक्ति में ही बिता दिया।

रसखान का साहित्यिक जीवन 

Raskhan बहुत ही अच्छे और सच्चे कृष्ण भक्त और कवि थे रसखान भक्ति काल के एक प्रसिद्ध कवि थे उन्होंने कृष्णा का वर्णन अपने कविताओं में श्रृंगार रस और भक्ति रस दोनों तरह से किया है उन्होंने भगवान श्री कृष्ण का सगुण रूप और निर्गुण रूप दोनों का बहुत ही अच्छे से वर्णन किया है।

वे एक अच्छे भक्त ही नहीं थे वह एक अच्छे व्यक्ति भी थे ऐसे कहा जाता है कि उन्होंने एक बनीये के लड़के से इतने आकर्षित हो गए थे कि उन्होंने उसका जूठन भी खा लिया था Raskhan पहले एक मुसलमान थे।लेकिन बाद में उन्होंने वैष्णव संप्रदाय से शिक्षा प्राप्त प्राप्त करके वैष्णो हो गए थे।

वह अरबी फारसी हिंदी संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान थे और उनकी रचनाएं अधिकतर अरबी और फारसी में ही मिलती है उन्होंने श्रीमद् भागवत का अनुवाद फारसी में किया है रसखान के भक्ति युग को भारतीय हिंदी साहित्य में स्वर्ण युग भी कहा जाता है ।

उस समय बहुत कृष्ण भक्त कवि हुए जैसे कि विद्यापति कबीरदास मलिक मोहम्मद जायसी सूरदास नंदलाल तुलसीदास केशवदास लेकिन सारे कवियों में रसखान ने अपना स्थान एक अलग बना लिया था

रसखान एक ऐसे कवि थे कि उन्हें किसी भी तरह के संप्रदाय से कोई मतलब नहीं था वह जहां भी जाते तीर्थ स्थान मंदिर मठ अखाड़े कहीं भी वह बस कृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे रसखान एक स्वच्छंद कृष्ण भक्त कवि थे।

रसखान की रचनाएं 

Raskhan ने कृष्ण भक्ति में बहुत सारी रचनाएं की हैं उनकी रचनाएं ज्यादातर ब्रजभाषा में ही है Raskhan के रचनाओं की भाषा ब्रज भाषा थी उनकी रचनाओं में कृष्ण की लीलाओं का बहुत अच्छे से वर्णन है

उन्होंने कृष्णा का सगुण और निर्गुण दोनों रूपों का वर्णन किया था और वह कृष्ण के दोनों रूपों का उपासक भी थे उनकी रचनाएं श्रृंगार रस और भक्ति रस दोनों में रहते थे

उनकी रचनाएं कुछ इस प्रकार है रसखान के कविताओं का संग्रह है जिसे सुजान रसखान और प्रेम वाटिका कहा जाता है उनके सुजान Raskhan में 139 शवैया और कवित है और प्रेम वाटिका में 52 दोहे हैं जिसमें सिर्फ कृष्ण का लीला वर्णन है उन्होंने कृष्ण के प्रेम भक्ति में यह सारी रचनाएं की हैं उनकी रचनाएं कुछ इस प्रकार है। 

  • खेलत फाग सुहाग भरी -रसखान
  • शंकर से सुर जाहिं जपे -रसखान
  • कान्हा भाई बस बांसुरी के- रसखान
  • आवत हैं वन ते मनमोहन-रसखान
  • मानुष हौं तो वही-रसखान
  • मोरपखा मुरली बनमाल- रसखान
  • आदि इनके बहुत सारी कविताएं हैं

रसखान का मृत्यु

Raskhan का मृत्यु 1628 ईस्वी में हुआ था इनका मृत्यु मथुरा के ब्रज में ही हुआ था और वहीं पर रसखान की समाधि भी बनाई गई है Raskhan ने अपना पूरा जीवन मथुरा के ब्रज में वृंदावन में ही गुजार दिया था ।

साराशं 

इस लेख में हमने भक्ति कालीन कृष्ण भक्त  कवि रसखान के जीवन के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की है आप लोगों को यह जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं और शेयर भी जरूर करें।

 

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