Saraswati Puja – सरस्वती पूजा

Saraswati Puja के बारें  में पूरी जानकारी पाएं Saraswati puja essay in hindi बसंत पंचमी कब मनाया जाता है बसंत पंचमी का इतिहास बसंत पंचमी का क्या महत्व है बसंत पंचमी के दिन कैसे पूजा किया जाता है मां सरस्वती को किन किन नामों से पुकारा जाता है

वसंत पंचमी के दिन किसका किसका पूजा करना चाहिए यह सारी जानकारी हम लोग इस लेख में जानेंगे। भारत देश को त्योहारों का देश कहा जाता है भारत देश में हर 1 दिन कोई न कोई त्यौहार जरूर रहता है और हर त्यौहार को हम लोग मिलजुलकर मनाते हैं

होली दिवाली छठ दशहरा Saraswati Puja आदि बहुत सारे त्यौहार है जो कि भारत देश में लोग हर्षोल्लास से मनाते हैं इन्ही त्योहारों में एक त्यौहार है Saraswati Puja जो कि हम लोग बहुत ही धूमधाम से हर्षोल्लास से मनाते हैं आइए जानते हैं

Saraswati puja essay in hindi

सरस्वती पूजा हिंदुओं का एक महान पूजा और त्‍योहार है Saraswati Puja  विद्यार्थी और कलाकारों का एक सर्वश्रेष्ठ पूजा है पुराणों की मान्यता के अनुसार जब सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना किए तब उन्हें चारों तरफ उदासी और मायूसी दिखाई दे रहा था उन्होंने सारी सृष्टि की रचना कर दिया था।

सब चीजों की रचना हो गई थी तब भी खाली खाली लग रहा था किसी भी चीजों से कोई आवाज नहीं आ रहा था इस वजह से भगवान ब्रह्मा जी बहुत उदास हो गये।

Saraswati puja essay in hindi

तब ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु के अनुमति से अपने कमंडल में से कुछ जल की बूंदें निकालकर जमीन पर छिड़क दिया तब धरती में बहुत जोर का कंपन हुआ और पृथ्वी से एक चार भुजाओं वाली बहुत सुंदर शांत स्वभाव की स्त्री प्रकट हुई।

वह चतुर्भुजी स्त्री के हाथ में एक हाथ में वीणा एक हाथ में पुस्तक और एक हाथ में माला और एक हाथ वर मुद्रा में करके खड़ी थी ब्रह्मा जी ने उनसे अपना वीणा बजाने का अनुरोध किया।

जब उन्होंने वीणा बजाया तो सारी पृथ्वी पर ब्रह्मा जी के बनाए सारे चीजों में जीव जंतु हर चीज में स्वर आ गया इस वजह से इन्हें Saraswati देवी नाम दिया गया और इस दिन को सरस्वती देवी के जन्मदिन दिन के रूप में मनाया जाने लगा और उनकी पूजा किया जाने लगा।  

सरस्वती पूजा क्यों मनाया जाता है 

मां सरस्वती को विद्या का देवी कहा जाता है इन्हें विद्यार्थी और कलाकार खास रूप से ज्यादा पूजा करते हैं मां सरस्वती बुद्धि की देवी मानी जाती है सरस्वती पूजा को बसंत पंचमी के दिन मनाया जाता है

शास्त्र और मान्यता के अनुसार पौराणिक कथा है कहा जाता है की जब सरस्वती देवी का उद्भव हुआ ब्रह्मा जी और श्री कृष्ण जी ने उनका पूजा किया उसके बाद मां Saraswati ने जब कृष्ण जी को देखा तब भगवान श्री कृष्ण को अपने पति के रूप में पाने की सोचने लगी।

जब भगवान श्री कृष्ण को इस बारे में पता लगा तब उन्होंने मां Saraswati से कहा कि वह अपने आपको राधा जी को समर्पित कर दिए हैं

लेकिन सरस्वती माता को खुश प्रसन्न करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने यह वरदान दिया कि जो भी मनुष्य विद्या का इच्छा रखने वाला होगा वह माघ महीना में बसंत पंचमी की दिन Saraswati Puja करेगा इस वजह से मां सरस्वती को विद्या का देवी भी कहा जाता है और बसंत पंचमी के दिन पूजा भी किया जाता है।

बसंत पंचमी कब मनाया जाता है 

Basant Panchami माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है इस दिन माता Saraswati का पूजा होता है और ऐसा कहा जाता है कि इस दिन कामदेव का भी पूजा होता है लेकिन इस दिन पर मां सरस्वती का खासकर विशेष रुप से पूजा होता है बसंत ऋतु को रितु का राजा कहा जाता है

एक वर्ष को छह ऋतु में बांटा गया है जैसे कि वसंत ऋतु ग्रीष्म ऋतु वर्षा ऋतु शरद ऋतु हेमंत ऋतु और शिशिर ऋतु। वसंत ऋतु के पांचवें दीन पंचमी के दिन बसंत पंचमी मनाया जाता है इस दिन विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की पूजा होता है। 

बसंत पंचमी क्यों कहा जाता है 

बसंत ऋतु में चारों ओर हरियाली ही हरियाली हो जाता हैं पेड़ पौधों पर नए-नए पत्ते निकल आते हैं और इस ऋतु में एकदम शांत माहौल हो जाता है बसंत ऋतु से पहले वातावरण एक एकदम निर्जन लगता है लेकिन बसंत ऋतु में चारों तरफ हरियाली हरियाली हो जाती है खेतों में फसलें लहलहाने लगती है पौधों में नए-नए फूल निकल आते हैं।

चारों तरफ खुशहाली ही खुशहाली नजर आने लगता है ऐसा लगता है कि धरती पर फसल के रूप में सोना उग गया है इसीलिए बसंत रितु को रितु का राजा भी कहा जाता है और हिंदू परंपरा में बसंत पंचमी के दिन पहला होली का दिन कहा जाता है बसंत पंचमी को श्री पंचमी भी कहा जाता है।

बसंत पंचमी के दिन कैसे पूजा किया जाता है

Basant Panchami के दिन मां सरस्वती का पूजा विधिवत रूप से किया जाता है इस दिन बहुत लोग मां Saraswati का मूर्ति रखते धूमधाम से पूजा करते हैं फल आदि का प्रसाद बना करके लोगों को भी दिया जाता है

इस दिन पीला वस्त्र पहनना चाहिए और घर में पीले पकवान बनाना चाहिए। स्कूल कॉलेज या कहीं भी जहां पढ़ाई का माहौल हो वहां पर सरस्वती माता का विशेष रूप से विधिवत पूजा होता है।

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मां सरस्वती संगीत कला और विद्या की देवी मानी जाती है और यह ब्रह्मा जी की मानस पुत्री भी कही जाती हैं मां सरस्वती का पूजा हर साल बसंत पंचमी के दिन हर कोई करता है

क्योंकि बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का जन्म हुआ था तो मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए उनका भक्ति प्राप्त करने के लिए सरस्वती वंदना करके पूजा किया जाता है

ऐसा माना जाता है कि सरस्वती वंदना करके पूजा करने से मां सरस्वती खुश हो जाती है प्रसन्न हो जाती है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा प्राचीन काल से ही किया जाता है

सरस्वती माता का पूजा ज्यादातर छात्र लोग ही करते हैं वैसे तो सरस्वती पूजा यानी के बसंत पंचमी के दिन पूरे भारत में हर जगह मूर्ति स्थापित करके पूजा किया जाता है और उनका पूजा श्लोक वंदना आरती गा करके उन्हें खुश किया जाता है।

(1)या कुंदेंदु तुषार हार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता

या वीणा वर दंड मंडित करा या श्वेत पद्मासना।।

या ब्रह्मा क्षेत्र शंकर प्रभृतिभिर्देवैं: सदा वंदिता।

सा माम् पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा।।

(2)शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमांद्यां जगद्वयापिनीम्।

वीणा पुस्तक धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।।

हस्ते स्फटिकमालिकाम् पद्मासने संस्थिताम्।

वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्।।

यह सरस्वती माता का संस्कृत में वंदना है जिसमें कि उनके रूप और सौंदर्य का प्रशंसा किया जाता है जिसमें कहा गया है कि

सरस्वती माता विद्या की देवी है भगवती हैं कान में कुंद के फूल है आपके गले में चंद्रमा हीमराशि और मोती की हार की तरह धवल है श्वेत वस्त्र धारण करती हैं सरस्वती माता के हाथों में वीणा दंड शोभायमान रहता है

और वह श्वेत कमलों का आसन ग्रहण करती है सरस्वती माता को ब्रह्मा विष्णु एवं शंकर के साथ अन्य देवता भी पूजा करते हैं क्योंकि सरस्वती माता जड़ता और अज्ञानता को दूर करने वाली देवी है।

दूसरे श्लोक में मां सरस्वती के रूप का वर्णन किया गया है कि वह शुक्लवर्ण की है उनका रूप बहुत सुंदर हैं संपूर्ण चराचर जगत में आदिशक्ति परम ब्रह्म के बारे में विचार चिंतन केसर रूपम उत्कर्ष को धारण करती है मां सरस्वती भयों को दूर करके भयदान देती है

अज्ञानता को दूर करने वाली देवी है मां सरस्वती के एक हाथ में  वीणा है एक हाथ में पुस्तक है और स्‍फटिक का माला एक हाथों में धारण करती है पद्मासन पर विराजमान रहती है मां सरस्वती बुद्धि प्रदान करने वाली देवी है इसलिए सरस्वती माता सर्वोच्च है ईश्वर से अलंकृत है मां भगवती शारदा है और उनकी वंदना हर कोई करता है।

वैसे तो मां सरस्वती का कई वंदना और गीत लोग गाते हैं लेकिन जो सबसे ज्यादा प्रचलित और हर जगह गया जाने वाला सबसे पहला श्लोक या वंदना यही होता है ज्यादा स्कूलों में भी जब सरस्वती माता का प्रार्थना होता है तो यही वंदना गाया जाता है।

मां सरस्वती को किन किन नामों से पुकारा जाता है 

माघ महीने के शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है इस दिन माता Saraswati का विशेष रूप से पूजा किया जाता है और इस दिन पीले वस्त्र पहनना चाहिए और घरों में पीला पकवान भी बनाया जाना चाहिए

बच्चों के पढ़ाई के शुरुआत इस दिन करने से ऐसा माना जाता है कि बच्चे बहुत विद्वान होते हैं। मां सरस्वती को कई नामों से पुकारा जाता है जैसे कि बागेश्वरी भगवती शारदा वीणा वादिनी वाग्य देवी आदि।

वसंत पंचमी के दिन किसका किसका पूजा करना चाहिए 

Basant Panchami के दिन मां सरस्वती का और कामदेव का पूजा किया जाता है और लेकिन मां सरस्वती का विशेष रूप से पूजा किया जाता है इस दिन विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के शुरुआत करते हैं

इस दिन कामदेव का भी पूजा किया जाता है ऐसा माना जाता है कामदेव और रति धरती पर उतर कर चारों तरफ प्रकृति में प्रेम का रस भर देते हैं इस वजह से चारों तरफ हरियाली हरियाली हो जाती है।

साराशं 

हमने इस लेख में बसंत पंचमी पूजा  मां सरस्वती जीके बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की है Saraswati Puja essay in hindi आप लोग जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं और शेयर भी जरूर करें।

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