शिवपूजन सहाय बायोग्राफी इन हिन्‍दी शिवपूजन सहाय की प्रमुख रचनाएं

शिवपूजन सहाय बायोग्राफी इन हिन्‍दी पद्म विभूषण से सम्मानित होने वाले कवि लेखक उपन्यासकार, कहानीकार, Shivpujan Sahay Biography in hindi के बारे में हम लोग इस लेख में जानने वाले हैं.

शिवपूजन सहाय को भाषा का जादूगर कहा जाता था क्योंकि उनकी रचनाओं में उनके उपन्यास उनके लेख में कई भाषाओं का प्रयोग होता था. सारी उपाधियां उनके आगे छोटी पड़ जाती थी Shivpujan Sahay साहित्य का  आंचलिक उपन्यासकार कथाकार लेखक कवि थे यह एक यथार्थवादी लेखक थे इसके साथ ही कुशल संपादक भी थे

शिवपूजन सहाय अपने समय के प्रमुख लेखक कवि  और सम्मानित व्यक्तियों में से एक थे तो आइए जानते हैं. शिवपूजन सहाय की जीवनी के बारे में शिवपूजन सहाय का जन्‍म उनका विवाह किससे हुआ उनके साहित्यिक जीवन कैसा था उनका व्‍यक्तित्‍व कैसा था उन्‍होंने कौन कौन सी रचनाएं की हैं उनका मृत्‍यु कब हुआ आदि. 

Shivpujan Sahay Biography in hindi 

शिवपूजन सहाय हिंदी साहित्य में आजादी से पहले के एक यशस्वी साहित्यकार माने जाते हैं शिवपूजन सहाय पद्म विभूषण की उपाधि पाने वाले एक लेखक साहित्यकार उपन्यासकार आदि थे.आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जीवन परिचय

Shivpujan Sahay को बहुत लोगों ने अपने तरफ से सम्मान में बहुत सारी उपाधियों  से पुकारा है जैसे कि किसी ने उन्हें साहित्य भूषण की उपाधि दी थी तो किसी ने साहित्य संत  कहकर पुकारा था ताेे किसी ने संपादक आचार्य का तो किसी ने उनको आत्मीयता के अवतार से संबोधित किया था.

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सहाय जी गांधी जी के विचारों से प्रभावित होकर के असहयोग आंदोलन में भी सहयोग किये थे कहा जाता है कि शिवपूजन सहाय ने अपनी पूरी जिंदगी हिंदी साहित्य को आगे बढ़ाने हिंदी साहित्य का विकास करने उसके उन्नति करने में ही व्यतीत कर दिया था.

Shivpujan Sahay का सबसे शुरू में लिखा गया लेख पाटलिपुत्र लक्ष्मी मनोरंजन आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ था उसके बाद उन्होंने बालक मासिक पत्र का संपादन किया वह एक मुख्य रूप से गध लेखक थे शिवपूजन सहाय साहित्यकारों का बहुत सम्मान करते थे उनकी भाषा खड़ी बोली थीं .

नाम शिवपूजन सहाय
जन्‍म 9 अगस्त 1893
पिता का नाम श्री बालेश्वर सहाय
माता का नाम राजकुमारी देवी
बचपन का नाम भोलेनाथ
रचनाएं वे दिन वे लोग,बिंब प्रतिबिंब,मेरा जीवन,स्मृति शेष,हिंदी भाषा और साहित्य,ग्राम सुधार,देहाती  दुनिया,विभूति, शिवपूजन सहाय,साहित्य समग्र 10 खंड,शिवपूजन सहाय रचनावली चार खंड
संपादन जयंती स्मारक ग्रंथ, दिवेदी अभिनंदन ग्रंथ, अनुग्रह अभिनंदन  ग्रंथ,  हिंदी साहित्य और बिहार, अयोध्या प्रसाद खत्री स्मारक ग्रंथ,  बिहार की महिलाएं,

रंगभूमि

पत्र पत्रिकाएं मारवाड़ी सुधार, मतवाला ,जागरण, गंगा,हिमालय, साहित्य,
सम्‍मान पद्म विभूषण
मृत्‍यु 1963

हजारी प्रसाद द्विवेदी कौन थे

शिवपूजन सहाय का जन्म 

Shivpujan Sahay का जन्म बिहार के बक्सर जिला के उनवांंस गांव में हुआ था इनका जन्म 9 अगस्त 1893 को हुआ था शिवपूजन सहाय के पिताजी का नाम श्री बालेश्वर सहाय और माता का नाम राजकुमारी देवी था

जो की बहुत ही धार्मिक स्वभाव के आदमी थे शिवपूजन सहाय के बचपन का नाम यानी कि उनके पिताजी के द्वारा दिया गया नाम भोलानाथ था और उनका असली नाम तारकेश्वर नाथ था शिवपूजन सहाय को साहित्य शिल्पी भी कहा जाता था.

शिवपूजन सहाय की शिक्षा

सहाय की शुरुआती पढ़ाई गांव के पाठशाला से ही हुई थी उसके बाद उन्होंने  आरा से मैट्रिक परीक्षा पास की थी उनके पिता जी का मृत्यु शिवपूजन सहाय के बचपन में ही हो गया था Shivpujan Sahay के 14 वर्ष की अवस्था में विवाह हुआ.

लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनकी पत्नी का मृत्यु हो गया फिर उन्होंने दूसरी शादी की. कुछ दिनों बाद  उन्होंने आरा के केजी एकेडमी स्कूल में शिक्षक पद पर नौकरी की. लेकिन कुछ दिनों बाद उन्होंने नौकरी छोड़ कर गांधीजी के असहयोग आंदोलन में कूद पड़े और उनके जीवन के नई दिशा शुरू हो गई.

शिवपूजन सहाय का साहित्यिक जीवन 

Shivpujan Sahay ने 1920 – 21 में गांधी जी का असहयोग आंदोलन में भाग लिया उसके बाद उन्हें आरा के नगर प्रचारिणी सभा में सहकारी मंत्री बनाया गया कुछ दिनों बाद उन्होंने अपना संपादन कार्य शुरू किया उन्होंने अभिनंदन ग्रंथ राजेंद्र अभिनंदन ग्रंथ में संपादन किया.

असहयोग आंदोलन से जुड़ने के बाद ही उन्होंने  संपादन कार्य शुरू कर दिया. उस समय के साप्ताहिक पत्रिका  मतवाला में उन्होंने अपना संपादक कार्य शुरू किया मतवाला एक बहुत ही लोकप्रिय पत्रिका बन गया वह भी शिवपूजन सहाय के लिखने के कारण ही हुआ.

उसके बाद उन्होंने अपने जगह लेखकों में अच्छी बना ली थी इसी के बाद वह लखनऊ जाकर वहां माधुरी संपादकीय परिवार में शामिल हो गए थे.

उसी समय उन्होंने प्रेमचंद के चर्चित उपन्यास रंगभूमि का भी संपादन किया लखनऊ में दंगा होने लगा तो वहां से कोलकाता चले गये Shivpujan Sahay की रचनाओं में उर्दू भाषा का बहुत प्रयोग हुआ हैं.

इसके बाद उनहोंने बहुत सारी रचनाएं की उपन्यास कहानी कविता आदि उन्‍होंनेे बहुत सारी पत्र-पत्रिकाओं में संपादन किया शिवपूजन सहाय ने अपना समस्त जीवन हिंदी सेवा में समर्पित कर दिया उन्होंने अपने ज्यादातर जीवन हिंदी भाषा की उन्नति और प्रचार प्रसार में बिता दिया.

शिवपूजन सहाय का लेखन कार्य

बिहार के रहने वाले शिवपूजनजी अपने समय के बहुत ही महान प्रसिद्ध लेखक थे उनकी रचनाएं कई भिन्न-भिन्न प्रकार के हैं उन्होंने कई विषयों से संबंधित पुस्तकें भी लिखी है Shivpujan Sahay ने बिहार से संबंधित कई रचनाएं की है.

बिहार के ग्रामीण जीवन से संबंधित रचनाएं उन्होंने की है जैसे कि बिहार का बिहार, विभूति, देहाती दुनिया, बिहार के ऐतिहासिक स्थल भौगोलिक स्थिति बिहार के हर क्षेत्र उपरांत के बारे में उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से बताया है.

देहाती दुनिया नाम की रचना जब उन्होंने लिखा था तो उस रचना का एक पांडुलिपि नष्ट हो गया था उसी समय लखनऊ में हिंदू मुस्लिम दंगे भड़क गए गए थे उसी में उनका यह रचना कहीं नष्ट हो गया था.

इस बात का उन्हें बहुत कष्ट हुआ लेकिन उन्होंने फिर से उसको दोबारा लिखा और दुबारा से उस पुस्तक को उन्होंने प्रकाशित कराया लेकिन फिर भी वह खुश नहीं थे

क्योंकि उनका कहना था कि जो पहले लिखा जाता है उसमें कुछ अलग वर्णन होता है उसमें अपना भावना सोच अलग होता है वही चीज जब दोबारा लिखा जाता है तो उसमें कुछ दूसरा चीज लिखा होता है.

महाभारत से संबंधित या महाभारत में जो पात्र थे उनके जीवनी के ऊपर भी शिवपूजन सहाय ने लिखा है उनकी कई रचनाएं है जो कि 4 खंडों में शिवपूजन रचनावली के नाम से प्रकाशित हुआ है.महादेवी वर्मा का जीवन परिचय

हिंदी के गद्य साहित्य में स्थान

उनका स्थान हिंदी के गद्य साहित्य में बहुत ही विशिष्ट है उन्होंने अपनी रचनाओं में उर्दू शब्द का बहुत प्रयोग किया है मुहावरों का उपयोग किया है सहाय जी के रचनाओं में अलंकार अनुप्रास की भाषा भी इस्‍तेमाल की गई है शिवपूजन सहाय प्रसिद्ध लेखक प्रेमचंद के साथ भी कार्य किया था.

उनका स्थान गद्य साहित्य में क्या था इसी से सोचा जा सकता है की छायावाद के चार स्तंभों में से एक स्तंभ माने जाने वाले हजारी प्रसाद द्विवेदी जी ने Shivpujan Sahay के बारे में कहा था वह एक संपादक के रूप में माली थे.

क्योंकि जब किसी फूल को किसी पौधे को रोपा जाता है तो माली ही उस पौधे को काटकर छांटकर के उसमें पानी रोज-रोज डाल कर के सुंदर बनाता है उसी तरह शिवपूजन जी भी अगर किसी पत्र-पत्रिका या किसी भी तरह के साहित्य की जब रचना करते हैं तो बहुत ही महत्वपूर्ण और बहुत ही सुंदर हो जाता है.

शिवपूजन सहाय का व्यक्तित्व

अपनी रचनाओं में Shivpujan Sahay गांव यानी कि आंचल की सभ्यता संस्कृति रहन-सहन बोलचाल भाषा आदि का बहुत ही प्रयोग करते थे उनकी सबसे पहला उपन्यास देहाती दुनिया था जो कि एक आंचलिक उपन्यास था.

वह एक ऐसे व्यक्ति थे एक ऐसे लेखक उपन्यासकार थे जो अपने आप को गांव का देहात का बोलते थे उनका कहना था की मैं ऐसे जगह से रहने वाला हूं जहां की देहात है वहां नई सभ्यता और नए युग का ज्यादा शुभारंभ नहीं हुआ है.

उनका कहना था कि देहात में दरिद्रता का तांडव है नृत्य है अज्ञानता का घोर अंधकार है इसीलिए मैंने अपनी रचनाओं में एकदम उसी तरह से वर्णन किया है जैसे कि गांव में देहात में लोगों का रहन सहन सभ्यता संस्कृति होता है.

मैंने अपने रचनाओं में किसी भी तरह की मौलिकता या कल्पना करके कोई भी चीज नहीं लिखा है.Shivpujan Sahay एक बहुत ही प्रसिद्ध श्रेष्ठ साहित्यकार थे एक पत्रकार एक संपादक थे उन्होंने कई विषयों पर अपनी रचना की है जैसे कि साहित्य, इतिहास, नैतिकता, राजनीति, भाषा आदि.

शिवपूजन सहाय की प्रमुख रचनाएं

सहायजी ने पत्र-पत्रिकाओं में संपादन भी किया. उनकी रचनाओं में भाषा बहुत ही सहज होती थी. उनके रचनाओं में उर्दू शब्द का बहुत प्रयोग हुआ हैंं. कहीं-कहीं उन्होंने अपनी रचनाओं में अलंकार अनुप्रास भाषा का भी प्रयोग किया है.

उनकी प्रमुख रचनाएं हैं. Shivpujan Sahay ने माता का आंचल पाठ में अपने बचपन के बारे में अपने बचपन के कई बातें उन्होंने लिखा है

उनका कहना था कि उनके पिताजी सुबह ही जग करके नहा कर के पूजा करने लगते थे और वह छोटे से थे लंबी लंबी जटाएं निकली हुई थी और भभूत लगाल करके भोलेनाथ की तरह बन जाते थे.

इसीलिए उनके पिताजी भोलेनाथ कहते थे Sahay ऐसी लेख ऐसी रचना करते थे की लोग पढ़ करके दंग रह जाते थे इसीलिए उन्हें भाषा का जादूगर भी कहा जाता था है

गांव में देहात में जिस तरह ग्रामीण जीवन होता है लोगों का रहन सहन बोलचाल खाने पीने का ढंग बात करने का तरीका होता है उसी तरह से उन्‍होंने अपनी रचनाओं में दर्शाया है ग्रामीण जीवन का उन्होंने बहुत ही सुंदर वर्णन अपनी रचनाओं के माध्यम से किया है.रामवृक्ष बेनीपुरी का जीवनी

कथा एवं उपन्यास

  • वे दिन वे लोग
  • बिंब प्रतिबिंब
  • मेरा जीवन
  • स्मृति शेष
  • हिंदी भाषा और साहित्य
  • ग्राम सुधार
  • देहाती  दुनिया
  • विभूति शिवपूजन सहाय
  • साहित्य समग्र 10 खंड
  • शिवपूजन सहाय रचनावली चार खंड

उन्होंने बहुत सारे पत्र-पत्रिकाओं में संपादन भी किया है प्रमुख संपादन कार्य जयंती स्मारक ग्रंथ, दिवेदी अभिनंदन ग्रंथ, अनुग्रह अभिनंदन  ग्रंथ,  हिंदी साहित्य और बिहार, अयोध्या प्रसाद खत्री स्मारक ग्रंथ,  बिहार की महिलाएं रंगभूमि संपादित पत्रिका है पत्र पत्रिकाएं मारवाड़ी सुधार मतवाला जागरण गंगा हिमालय साहित्य इत्यादि.

Shivpujan sahay death

ग्रामीण जीवन में जिस तरह के भाषाओं का उपयोग होता है लोगों का रहन सहन होता है उसी तरह से उन्होंने अपने लेख उपन्यास आदि में चित्रित किया है.

हिंदी भाषा को विकसित करने के लिए हिंदी भाषा को विश्व में प्रचारित प्रसारित करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी पूरा जीवन वो यही चाहते थे कि हिंदी देश विदेश में जानी जाए.

सहायजी उस समय के प्रमुख लेखक थे.  वह एक सम्मानित व्यक्ति भी थे. उन्होंने कई प्रतिष्ठित पत्रिका में संपादन भी किया हैं.वह हिंदी के प्रतिष्ठित पत्रिका मतवाला के संपादन मंडल भी थे .

वह एक बहुत उच्च कोटि के लेखक साहित्यकार थे. खासकर एक गध लेखक थे उनका मृत्यु 1963 में पटना में हुआ था. हमारी हिंदी साहित्य में एक साहित्यिक संत का अंत हो गया.

सारांश

शिवपूजन सहाय बायोग्राफी इन हिन्‍दी इस लेख में एक आंचलिक उपन्यासकार आंचलिक लेखक हिंदी साहित्य में भाषा के जादूगर के नाम से पहचाने जाने वाले Shivpujan Sahay के बारे में पूरी जानकारी दी गई है फिर भी अगर इस लेख से संबंधित कोई सवाल आपके मन में है

तो कृपया कमेंट करके जरूर पूछें.इस लेख में शिवपूजन सहाय के बारे में दी  गई जानकारी आप लोगों को कैसा लगाा. आप लोग  कमेंट करके जरूर बताएं और शेयर भी करें.

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