अनोखी नैतिक कहानियां – प्रेरणदायक और हिंदी लघुकथा 2024

प्रेरणादायक मोरल शॉर्ट स्‍टोरीज इन हिंदी. अक्सर जब छोटे बच्चे रात में सोने के समय अपनी दादी, नानी और मां से कहानियां सुनने के लिए कहते हैं। कहानी हमारी जीवन में कई समस्याओं के प्रति सहानुभूति रखने में, समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होता है। कई कहानी हमारे जीवन में अलग-अलग परिस्थितियों से संबंधित होता है।

जिससे हम कुछ सीख प्राप्त करते हैं। जो कि आगे चलकर वह सिख हमारे जीवन में हमें नए पथ पर जाने के लिए प्रेरित करता है। प्रेरणादायक शॉर्ट स्‍टोरीज सुनने से हमारी सोचने समझने की शक्ति बढ़ती है। बच्चों में नए-नए क्रिएटिव, सभ्यता, संस्कृति की बढ़ोतरी होती है।

शॉर्ट स्‍टोरीज इन हिंदी

आजकल बच्चे जो मोबाइल गेम्स में लगे रहते हैं। उन्हें अपने सभ्यता संस्कृति की बेहतर सीख नहीं हो पाती है। इसलिए उन्हें प्रेरणादायक, नैतिक कहानियां सुनने से उनके अंदर एक नई ऊर्जा उतपन्‍न होती हैं। लोगों के साथ व्यवहार करना और अपने जीवन में समस्याओं का हल करने का मार्ग मिलता है। इस लेख में कई शॉर्ट स्‍टोरीज की जानकारी दी गई है। जिससे बच्चों और बड़ों के लिए ज्ञान संस्कार संस्कृति और नई सीख की अनुभूति होगी।

Short Stories In Hindi - शॉर्ट स्‍टोरीज

1. लालची लोमड़ी

एक जंगल में लोमड़ी रहती थी। जो की बहुत ही चालाक और अपने आप को समझदार समझती थी। एक दिन लोमड़ी खाना की तलाश में इधर-उधर भटक रही थी। जंगल में भटकते भटकते उसे एक जानवर का हड्डी दिखाई दिया। लोमड़ी अक्सर मांस खाना पसंद करती है।

जब उसे हड्डी दिखाई दिया, तो लपक कर उसको जल्दी से लेकर भाग गई। हड्डी लेकर वह एक नदी के बीचो-बीच पुल से गुजर रही थी। तभी उसे नदी के पानी में अपनी परछाई दिखाई दी। पानी में अपनी परछाई देखकर लोमड़ी को लगा कि कोई दूसरी लोमड़ी हड्डी लेकर नीचे खड़ी है। 

अब उसके मन में लालच पैदा हो गया। उसने सोचा कि उसका भी हड्डी जब मैं ले लूंगी, तो मुझे ज्यादा खाना प्राप्त हो जाएगा। यह सोचकर पानी में लपक पड़ी। लेकिन वह तो उसकी परछाई थी। इसलिए जैसे ही उसने मुंह खोला। उसके मुंह से हड्डी पानी में गिर गया।

Short Stories In Hindi - लालची लोमड़ी

इस तरह उस लोमड़ी को जो हड्डी मिला था। वह भी पानी में चला गया। इस शॉर्ट स्‍टोरीज से यही सीख मिलती है कि हमें लालच नहीं करनी चाहिए। हमारे पास जितनी चीज हैं। उसी में खुशी और संतोष से रहना चाहिए। नहीं तो ज्यादा लालच की वजह से जो चीज हमारे पास है, वह भी एक दिन चला जाएगा।

2. एकता का बाल

किसी गांव में एक बूढ़े व्यक्ति रहते थे। उनके चार बेटे थे। सभी बेटे में एक दूसरे से मतभेद रहता था। वह चारों आपस में लड़ते झगड़ते रहते थे। सभी एक दूसरे के विरोधी भी थे। यह देखकर उनके पिताजी को हमेशा चिंता सताती थी, कि उनके जाने के बाद सभी बच्चे आपस में कैसे रहेंगे। इसी चिंता में एक दिन उन्‍हें एक उपाय सूझी।

उन्होंने अपने सभी बेटों को अपने पास बुलाया। सभी को एक-एक लकड़ी हाथ में तोड़ने के लिए दिया। सभी ने वह लकड़ी बारी-बारी से तोड़कर अपने पिताजी को दे दिया। फिर वह बूढ़े व्यक्ति ने सबको बारी-बारी से उस लकड़ी का गठ्ठर बना कर दिया। 

लेकिन जब लकड़ी इकट्ठा करके बांधकर अपने लड़कों को दिया, तो किसी से नहीं टूट रहा था। सभी बच्चे परेशान थे। तब उनके पिताजी ने उन्हें शिक्षा दिया, उन्होंने कहा कि एकता में बाल होता है। जब मैंनें एक-एक लकड़ी तुमको दिया तुम सभी ने तोड़ दिया। लेकिन उसी को जब इकट्ठा करके एक साथ बांध दिया, तो वह कोई तोड़ नहीं पाया।

इसलिए जब तुम सभी एक साथ मिलकर रहोगे, तो कोई तुम्हें तोड़ नहीं पाएगा। इससे उन सभी को अपनी गलती का एहसास हुआ और एकता की ताकत उन्हें समझ आ गई। जिसके बाद चारों भाई एक दूसरे के साथ मिलजुल कर रहने लगे। इस कहानी से सीख मिलती है एकता में बाल होता है। जब एक साथ मिलजुल कर रहते हैं, तो कोई भी दूसरा व्यक्ति उन्हें बर्बाद नहीं कर सकता।

3. बकरी और हाथी

बहुत समय पहले जंगल में एक बकरी और हाथी रहते थे। दोनों बहुत ही अच्छे मित्र थे। हर रोज बकरी और हाथी जंगल में एक साथ घूमते, खेलते रहते थे। जहां भी फल या खाने वाली चीज मिलती थी, तो एक साथ जाकर खाते। एक दिन उन्‍हें एक बेर का पेड़ दिखाई दिया। उस पेड़ पर बहुत ही ज्यादा बेर लटके हुए थे। वह दोनों उस पेड़ के पास गए। हाथी ने पेड़ को बहुत जोर-जोर से अपने सूंड से हिलाया। जिससे नीचे बेर इकट्ठा हो गया। 

लेकिन उस पेड़ पर एक चिड़िया का घोंसला भी था। उस घोसले में चिड़िया का छोटा सा बच्चा था। चिड़िया खाना की तलाश में गई थी। हाथी ने पेड़ हिलाया जिससे चिड़िया का बच्चा वही नदी के पानी में गिर गया। वह बच्चा पानी में डूबने लगा। यह देखकर बकरी बच्चे को बचाने के लिए पानी में कूद गई। लेकिन बकरी को तैरना नहीं आता था।

Short Stories In Hindi - बकरी और हाथी

जिससे वह पानी में डूबने लगी। हाथी ने जब बकरी और चिड़िया के बच्चे को पानी में डूबते हुए देखा। फिर वह भी पानी में कूद गया। बकरी और चिड़िया के बच्चे को उसने बचा लिया। तभी चिड़िया खाना लेकर उड़ते हुए वहां आई। उसने देखा कि उसके बच्चे को हाथी और बकरी ने बचा लिया है। यह देखकर वह बहुत खुश हुई। फिर चिड़िया, उसका बच्चा, हाथी, बकरी सभी वही हंसी-खुशी जंगल में रहने लगे।

सीख

चिड़िया का बच्चा भी धीरे-धीरे बड़ा हो गया। हाथी और बकरी के साथ खेलने लगा। चिड़िया भी हर रोज उड़ कर जंगल में जाती और जहां भी खाना दिखाई देता था। बकरी और हाथी को आकर बताती थी। इस तरह सभी मिलजुल कर एक दूसरे के साथ रहने लगे। हमें इस शॉर्ट स्‍टोरीज से प्रेरणा मिलती है कि अगर हमारी गलती है, तो उस गलती को हम अपने आप से सुधारने की कोशिश करें।

4. शेर और चूहा

एक समय की बात है। वन में शेर रहता था। एक दिन शेर किसी पेड़ के नीचे आराम कर रहा था ।उसी समय एक चूहा जाकर उसके शरीर पर कूदने लगा। जिससे शेर का नींद टूट गया। जब वह जगा, तो देखा कि उसके शरीर पर एक छोटा चूहा कूद रहा है। इधर से उधर उछल कूद कर रहा है। तभी उसने उस चूहे को बहुत जोर से पकड़ लिया। जब चूहा को शेर ने पकड़ लिया, तो चूहा रोने लगा। उससे अपने जीवन का गुहार लगने लगा। 

चूहे की रोनी सूरत देखकर शेर कुछ सोचा फिर उसे अपने कैद से मुक्ति दे दी। चूहा ने शेर का आभार प्रकट किया और कहा कि इस एहसान का बदला 1 दिन में जरूर चुकाऊंगा। जब भी आपको मेरी मदद होगी मैं जरुर मदद करूंगा। ऐसे ही जंगल में एक दिन एक शिकारी आया। उस शिकारी ने जाल फैलाया। 

शेर और चूहा

जाल में शेर फंस गया। शेर दहाड़ने लगा, बहुत कोशिश किया। लेकिन जाल से बाहर निकलने में असमर्थ था। तभी उसकी दहाड़ चूहे को सुनाई दी। चूहा अपने बिल में से निकलकर बाहर आया। उसने देखा कि वही शेर एक जाल में फंस गया है। तब चूहे ने जाल को अपने नुकीले दांतों से कटकर शेर को मुक्ति दिला दी। शेर ने भी चूहे का शुक्रिया कहा।

5. खरगोश की छाप

किसी जंगल में चार दोस्त रहते थे। खरगोश, सियार, ऊदबिलाव और बंदर। चारों दोस्तों ने एक दिन कुछ दान करने की सोची। सभी ने एक दूसरे से कहा कि सबसे बड़ा दानी कौन है, चलो आज देखते हैं। इस तरह चारों दोस्त दान करने के लिए सामान लेने अलग-अलग रास्ते पर चले गए। सियार हांडी से भरा दही और मांस लेकर आया। 

बंदर मीठे मीठे फल लेकर आया। ऊदबिलाव नदी से मछलियां निकाल कर लाया। लेकिन खरगोश को कुछ भी नहीं मिला, जिसका वह दान कर सके।  खरगोश तो घास खाता खाता है। इसलिए उसने सोचा कि अगर मैं घास दान करूंगा, तो उसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। यह सोचकर वह बिना कुछ लिए खाली चला है। यह देखकर उसके दोस्तों ने पूछा कि तुम कोई भी चीज दान करने के लिए नहीं लाए हो। अगर कोई चीज आज दान नहीं करोगे, तो उसका लाभ नहीं मिलेगा। 

क्योंकि आज महादान का दिन है। तब उसने अपने दोस्तों को बताया की मुझे कुछ भी दान करने का वस्तु नहीं मिला। इसलिए मैंने यह यह निर्णय लिया हैं, कि अपने आप को दान करूंगा। ये बात सुनकर सभी खरगोश के सभी दोस्त अचंभित हो गए। 

खरगोश की परीक्षा

इस बातों का सूचना इंद्र भगवान को मिला। तब इंद्र भगवान एक साधु के भेष में उन चारों मित्रों का परीक्षा लेने पहूँचे। पहले सियार ने दही और मांस दान किया। फिर बंदर ने मीठे फल दान किया। उसके बाद ऊदबिलाव ने मछलियां इंद्र भगवान को दान में दे दी। फिर खरगोश की बारी आई। तब खरगोश ने कहा कि मैं अपने आप को दान करूंगा। यह सुनते ही इंद्र भगवान ने अपनी शक्ति से वहां पर आग जला दी। फिर खरगोश उस आग में बिना कुछ सोचे समझे हिम्मत के साथ अंदर घुस गया। इंद्र भगवान खरगोश की हिम्मत को देखकर बहुत हैरान हुए। 

भगवान को भी समझ में आ गया कि सचमुच खरगोश बहुत बड़ा दानी है। उसके इस हिम्मत और दान से इंद्र भगवान बहुत खुश हुए। वही खरगोश को उस आग में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई और वह सही सलामत आग से निकल गया। फिर इंद्र भगवान अपने असली रूप में आ गए। उन्होंने कहा कि मैं इंद्र भगवान हूं। मैं तुम्हारी परीक्षा लेना चाहता था। 

यह आग भी नकली है। इसी वजह से तुम्हें किसी भी तरह की हानि नहीं हुई। फिर इंद्र भगवान प्रसन्न होकर खरगोश को आशीर्वाद दिए। उन्होंने कहा कि तुम्हारे इस दान को आज के बाद सभी लोग याद करेंगे। तुम्हारे शरीर का निशान ऊपर चंद्रमा पर हमेशा रहेगा। फिर खरगोश का छाप चंद्रमा पर जाकर बन गया। तभी से कहा जाता है कि चंद्रमा पर जो काला निशान है, वह खरगोश का छाप है।

6. पंडित का झुठ एक शॉर्ट स्‍टोरीज

मोहन पंडित नाम के ब्राह्मण एक गांव में रहते थे। वह कुछ दिनों के लिए शिक्षा प्राप्त करने दूसरे जगह गए हुए थे। जब वह शिक्षा प्राप्त करके अपने गांव लौट रहे थे। रात का समय हो गया था। आते-आते जब वह अपने घर के पास आए। उसी समय उनकी मां घर में खाना बना रही थी। उनकी मां हाथों से मोटी-मोटी रोटी बना रही थी। जिसे मोहन पंडित हाथों की ताली से अनुमान लगा लिए थे, कि उनकी मां ने कितनी रोटी बनाई है। 

घर पर आए उनकी मां ने उन्हें खाना दिया। जब मोहन पंडित खाना खा रहे थे, तो उनकी मां और रोटी लेने के लिए पूछी। इसके बाद मोहन पंडित ने कहा कि मां अब, तो रोटी एक ही बचा है। यह सुनकर उनकी मां आश्चर्यचकित रह गई ।बोली कि बेटा तुम्हें कैसे पता है।

फिर मोहन पंडित ने कहा कि यह मेरे शिक्षा का शक्ति है। अब तो पूरे गांव में हल्ला हो गया कि मोहन पंडित जादू जानते हैं। वह किसी भी बात को बिना कहे जान जाते हैं। एक दिन उसी गांव में एक धोबी का गधा गुम हो गया। उसने मोहन पंडित के पास अपने गधा को ढूंढने के लिए गुहार किया। मोहन पंडित को तो यह सब बातें पता नहीं थी। जिससे वह बहुत परेशान हुए। 

वैसे ही परेशान होकर वह बाहर घूमने के लिए निकल गए। बाहर जब खेत के तरफ हो गए, तो देखिए कि धोबी का गधा घूम रहा है। तत्‍काल वह अपने घर जाकर धोबी को बुलाकर बताया कि तुम्हारा गधा खेत में इस जगह पर है, जाकर ले लो। धोबी को गधा मिल गया। जिसके बाद गांव में और भी उनके नाम की चर्चा होने लगी।

पंडित को पश्चाताप

ऐसे ही वहां के जो राजा थे। उनकी पत्नी का हार गुम हो गया था। राजा ने मोहन पंडित को बुलवाया और बोला कि आप अपनी विद्या से रानी का हार पता लगाइए। लेकिन उन्हें तो कुछ पता था नहीं। इसलिए वह बहुत परेशान हो गए। कई दिन बीत गए फिर राजा ने उन्हें बुलवाकर जेल में डाल दिया।  जब वह जेल में बंद हो गए, तो रात में दुखी होकर गाना गा रहे थे। अपने गाने में बार-बार निंदिया आ जाओ, बोल रहे थे। लेकिन इत्तेफाक से राजमहल में रानी की दासी का नाम निंदिया था।

दासी ने ही रानी का हर चुराया था। जब दासी ने अपना नाम सुना तो वह हैरान परेशान हो गई। जाकर मोहन पंडित को उसने कहा कि हार मैंने लिया है। लेकिन आप राजा को मत बताइए। नहीं तो वह मुझे प्राण दंड दे देंगे। फिर मोहन पंडित ने एक उपाय बताई। बोला कि किसी जगह पर हार को रख दो और मुझे उसकी जानकारी दे दो। इस तरह सुबह जब हुई, तो मोहन पंडित ने राजा को बुलाकर हार के बारे में बताया। 

जब राजा और रानी वहां गए तो उन्हें वह हार मिल गया। जिससे राजा बहुत खुश हुए। निंदिया भी बच गई। राजा ने खुश होकर मोहन पंडित को बहुत सारी सोने के मोहरें इनाम में दिया। फिर मोहन पंडित खुशी-खुशी अपने घर चले गए। इस शॉर्ट स्‍टोरीज से प्रेरणा लेनी चाहिए कि कभी भी तारीफ लेने के लिए गलत बात लोगों को नहीं बताया जाता है। नहीं तो एक दिन हमारी इस गलती से समस्या उत्पन्न हो सकती है।

7. दो भाइयों की शॉर्ट स्‍टोरीज

दीपू और राजू दो भाई थे। दीपू सीधा-साधा और पढ़ाई में बहुत तेज था। वहीं राजू बहुत ही नटखट और बदमाश था। पढ़ाई में भी उसका मन नहीं लगता था। घर में हमेशा दीपू से अपने आप को समझदार बताता था। लेकिन दीपू हमेशा उसकी बातों को नजर अंदाज करके अपनी पढ़ाई में हमेशा मगन रहता था। स्कूल में अगर कोई होमवर्क भी मिलता, तो दीपू सही-सही समय से बनाकर टीचर को दिखा देता था। वहीं राजू चीटिंग और धोखा करके होमवर्क बनाकर टीचर को दिखाता।


दो भाइयों की शॉर्ट स्‍टोरीज

 ऐसे ही दोनों का एग्जाम हुआ। एग्जाम में दीपू अपने क्लास में टॉप आया था। वहीं राजू का नंबर एकदम कम आया था। वह अपने क्लास में फेल हो गया था। जिससे राजू बहुत उदास था। तब दीपू ने उसे बहुत समझाया और बोला कि अपने आप पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए।

अपने से दूसरों को नीचा नहीं दिखना चाहिए। आगे चलकर तुम भी पढ़ाई में मन लगाओ। जिससे अगला एग्जाम होगा तो उसमें तुम भी टॉप करोगे। दीपू के बातों से राजू को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसके बाद वह भी मन लगाकर अपने भाई के साथ पढ़ाई करने लगा 

फिर जब अगला एग्जाम हुआ, तो दोनों भाई पूरे स्कूल में टॉप किए। यह शॉर्ट स्‍टोरीज हमें सिखाती है, कि हमें अपने कर्तव्य के पथ पर हमेशा इमानदारी से चलना चाहिए। कभी भी अपने से दूसरे को नीचा नहीं दिखाते हैं। अपने आप पर घमंड नहीं करना चाहिए। नहीं तो उसका बहुत ही बुरा परिणाम आगे चलकर मिल सकता है।

8. भोली और टोली दो बहने

एक गांव में दो बहनें रहती थी। जिनका नाम भोली और टोली था। भोली अपने नाम के अनुरूप ही बहुत ही सीधी-साधी लड़की थी। वही टोली बहुत ही चलाक और अपने आप को पर घमंड करती थी। अपनी बहन को हमेशा डांटती रहती, उसे बेवकूफ समझती। 

टोली पूजा पाठ बहुत करती थी। अलग-अलग व्रत उपवास करती थी। भोली को इन सब बातों का समझ नहीं था। एक दिन उसने अपनी बहन से भी इसकी जानकारी लेनी चाहिए। भोली ने अपनी बहन से पूछा की कार्तिक मास में कैसे स्नान किया जाता है। तब टोली ने कहा कि सुबह उठकर ठंडे पानी से नहा कर छत पर जाकर बैठ जाओ। 

भोली वैसा ही करने लगी। जब एकादशी का व्रत आया। तब भेली ने अपनी बहन से फिर एकादशी व्रत के बारे में पूछा। टोली ने उसे बताया कि एकादशी का उपवास करो। दूसरे दिन तरह-तरह के व्यंजन बनाकर भगवान को भोग लगाकर खाना खा लो। भोली जो भी करती बहुत ही श्रद्धा भाव और दिल से करती। लेकिन टोली चालक थी, इसलिए वह अपने फायदे सोचकर और भगवान से कई तरह-तरह के चीजों को मांगती रहती। 

भगवान प्रसन्‍न हुए

उसने एकादशी का व्रत किया। दूसरे दिन खाना बना कर भगवान को भोग लगाने के लिए बैठ गई। बैठे-बैठे दिनभर भगवान का इंतजार करती रही। बोलती रही कि भगवान आप जल्‍दी आकर भोग लगाइए। हमको भी भूख लगा है। हम भी खाना खाएंगे। यह देखकर भगवान उससे प्रसन्न हो गए। उसी समय भगवान राम माता सिता और लक्ष्मण जी के साथ वहां प्रकट हो गए।

भोली के बने हुए खान खाना खाए और फिर वहां से चले गए। तभी वहां से टोली गुजरी। उसे भोली के कमरे से किसी का आवाज सुनाई दिया। जब वहां जाकर अपनी बहन से पूछी, तो उसकी बहन ने बताया कि भगवान जी आए थे। खाना खाकर यहां से चले गए। 

यह सुनकर टोली बहुत रोने लगी। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। फिर उसने अपनी बहन से माफी मांगी और कहा कि मैंने तुम्हें गलत चीज बताई है। मैं इतना पुजा और व्रत करती हूँ। फिर भी आज तक मुझे भगवान दिखाई नहीं दिए। हमें यह शॉर्ट स्‍टोरीज यहीं सीखाता हैं कि सच्चे मन, श्रद्धा और दिल से भगवान की भक्ति करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। न कि भगवान को नए-नए व्यंजन सामग्री आदि उपस्थित करो। तभी भगवान खुश होंगे।

सारांश

शॉर्ट स्‍टोरीज सुनने से विभिन्‍न भावनाओं और एहसासों को अनुभव किया जाता हैं। साथ ही दूसरे के भावनाओं कों आसानी से समझते हैं।बच्‍चे जब स्‍टोरी सुनते हैं, तो उनमें एकाग्रता का विकास होता हैं। छोटी कहानियों के माध्‍यम से नई नई और नॉलेजबल बातें बताएं। इस लेख में कई शॉर्ट स्‍टोरीज दी गई हैं। 

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