सोनपुर का मेला कब लगता हैं

बिहार का सबसे बड़ा का सबसे प्रसिद्ध Sonpur ka mela in hindi के बारे में लगभग सभी लोग सुने हैं क्योंकि यह विश्व प्रसिद्ध मेला होता हैं लेकिन सोनपुर मेला कब लगता हैं सोनपुर का मेला का इतिहास क्या हैं सोनपुर मेला का शुरुआत कब से हुआ.

इस मेला में कौन कौन सा सामान मिलता हैं सोनपुर का मेला किस चीज के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं यह सारी जानकारी अगर आप लोग जानना चाहते हैं तो इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें और सोनपुर मेला के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें.जब भी कार्तिक मास खत्म होने लगता हैं

तो बिहार का सबसे प्रसिद्ध और सबसे पुराना सोनपुर मेला देखने का लोगों में उत्साह बढ़ने लगता हैं हर साल इस मेला का इंतजार बिहार के साथ-साथ पूरे एशिया के लोगों को इंतजार रहता हैं

तो आइए हम लोग इस लेख में Sonpur ka mela कब से शुरू हुआ यह मेला कितने दिनों तक चलता हैं सोनपुर का मेला कब शुरू होता हैं Sonpur ka mela सोनपुर मेला में क्या-क्या बिकता हैं सोनपुर कहां स्थित हैं, इसके बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं. बिहार राज्य के दार्शनिक स्थल

सोनपुर का मेला कब लगता हैं

सोनपुर बिहार एशिया में सबसे प्रसिद्ध और विश्व विख्यात मेला हैं इस मेला में बहुत ही भीड़ उमड़ती हैं सोनपुर मेला का शुरुआत हर साल नवंबर दिसंबर महीने में कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन पूर्णिमा स्नान के साथ शुरू होता हैं और यह मेला 1 महीने तक चलता हैं सोनपुर मेला एशिया का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध पशु मेला हैं

सोनपुर मेला हरिहर क्षेत्र मेला के नाम से प्रसिद्ध हैं और वहां के जो स्थानीय लोग आसपास के लोग हैं उनके बीच छत्तर मेला के नाम से जानते हैं. सोनचुर  मेला में मध्य एशिया से भी लोग पहले हाथी घोड़ा खरीदने के लिए आते थे.

Sonpur ka mela in hindi

सोनपुर मेला का इतिहास

एशिया का बहुत ही बड़ा मेला हैं जिसमें एशिया में जितने भी बड़े बड़े व्यापारी हैं वह सोनपुर मेला में हाथी घोड़ा अन्‍य पशु खरीदने के लिए आते हैं इस मेला का रौनक देखने के लिए बहुत ही दूर दूर से लोग घूमने के लिए यहां जरूर आते हैं सोनपुर मेला से मुगल साम्राज्य का बादशाह सम्राट अकबर ने सोनपुर मेलासे हाथी खरीदा था.

सोनपुर मेला में मौर्य साम्राज्य के मौर्य वंश के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य भी जरूर आया करते थे और यहां से हाथी खरीद कर ले जाते थे इस मेला में गाय भैंस घोड़ा हाथी और पशु मिलते हैं और बहुत ही दूर दूर से लोग खरीद कर ले जाते हैं 1857 में जब अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध छिड़ गया था.

उस समय वीर कुंवर सिंह की जनता ने हाथी सोनपुर मेलासे खरीदा था. सोनपुर मेलामें 1803 में अंग्रेज रॉबर्ट क्लाइव ने अस्तबल बनवाया था. सोनपुर मेला जंगी हाथियों के लिए सबसे बड़ा केंद्र पहले हुआ करता था लेकिन अब पहले के मुकाबले बहुत ही कम हाथी सोनपुर मेलामें दिखाई देते हैं.सरस्वती पूजा

सोनपुर मेला को हरिहर क्षेत्र से क्यों जानते हैं

सोनपुर में भगवान विष्णु का हरि के रूप में और भगवान शिव का हर के रूप में यानी कि हरिहर नाथ का मंदिर हैं इसलिए इस क्षेत्र को हरिहर क्षेत्र भी कहा जाता हैं सोनपुर हरिहर नाथ के मंदिर के लिए भी बहुत ही प्रसिद्ध हैं बहुत ही दूर दूर से लोग हरिहर नाथ भगवान का पूजा करने के लिए आते हैं.

सोनपुर में कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान करने के बाद भगवान हरिहर नाथ का दर्शन करने का बहुत ही महत्व हैं वैसे तो यहां प्रतिदिन बहुत ही भक्त श्रद्धा से पहुंचते हैं लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान के दर्शन का एक अलग ही महत्व हैं लोगों की आस्था यहां से जुड़ी हुई हैं.

सोनपुर के संबंध में पौराणिक कथा

सोनपुर के संबंध में पौराणिक कथाएं भी हैं भगवान विष्णु के दो भक्त थे जय और विजय वह किसी श्राप के कारण धरती पर गज यानी कि हाथी और मगरमच्छ यानी कि ग्राह के रूप में जन्म लिए थे

एक बार हाथी जब नदी में पानी पीने गया तो ग्राह ने उसे पकड़ लिया बहुत मेहनत करने के बाद भी जब हाथी ग्राह से अपने आप को नहीं छुड़ा पाया

तब भगवान विष्णु का आवाहन किया यह संग्राम कोनहारा घाट पर हुआ था. जब हाथी कमजोर पड़ने लगा तब भगवान विष्णु ने अपने भक्त का पुकार सुनकर सुदर्शन चक्र चलाकर उस युद्ध का अंत किया था और यह दिन कार्तिक पूर्णिमा का दिन था.

इसके बाद यहां पर भगवान विष्णु और गज का जय जय कार होने लगा सभी देवता धरती पर आ गए और ब्रह्मा जी ने यहां पर भगवान शिव और भगवान विष्णु की मूर्ति लगाकर हरि और हर नाथ नाम दिया. तभी से यहां हरिहर नाथ भगवान का मंदिर प्रसिद्ध हो गया. बक्‍सर के दर्शनीय स्थल

सोनपुर कहां हैं

सोनपुर बिहार की राजधानी पटना से लगभग 25 किलोमीटर पड़ता हैं वैशाली जिला का मुख्यालय हाजीपुर हैं वहां से 3 किलोमीटर की दूरी पर सोनपुर पड़ता हैं सोनपुर गंडक नदी के तट पर हैं सोनपुर में जो मेला लगता हैं.

वह पहले हाजीपुर में लगता था और सोनपुर में सिर्फ हरिहर नाथ भगवान का दर्शन किया जाता था लेकिन जब मुगल साम्राज्य का बादशाह औरंगजेब बने तो उसने आदेश दिया कि यह मेला सोनपुर में लगेगा तो उसके बाद से ही यह मेला हाजीपुर की जगह सोनपुर में लगने लगा.

सोनपुर मेला में क्या-क्या मिलता हैं

हरिहर क्षेत्र का मेला यानी सोनपुर का मेला का सबसे बड़ा और मुख्य खासियत हैं कि यहां पर सुई से लेकर हाथी तक सारे सामान मिलते हैं सोनपुर मेलामें हाथी घोड़ा गाय भैंस बकरी हर पशु बिकते हैं इस मेला में राजस्व विभाग का स्टाल भी लगता हैं जहां कि कहीं के भी राज्‍य से ग्रामों का डिजिटल मानचित्र अगर किसी को लेना हैं

तो 150 में सरकारी शुल्क के द्वारा किसी को भी कुछ ही मिनट के अंदर मिल जाता हैं.यहां पर मनोरंजन के हर साधन बेचे जाते हैं घरेलू सामान रोजमर्रा का सामान खाने पीने का सामान बेचे जाते हैं.

सोनपुर में थिएटर भी लगता हैं जिसमें कि जो भी क्षेत्र के प्रसिद्ध नौटंकी वाली होती हैं वह थिएटर में अपना जलवा दिखा कर लोगों को आकर्षित करती हैं वैसे तो आजकल थियेटरों में अश्लील डांस भी होने लगे हैं और 500 एक हजार में उसके लिए टिकट बुक करना पड़ता हैं .दुर्गा पूजा का महत्‍व

सोनपुर मेला में प्रतियोगिता आयोजन

सोनपुर का मेला में कई तरह के प्रतियोगिता भी आयोजित किया जाता हैं और यह लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता हैं उस प्रतियोगिता में नौका दौड़ दंगल वाटर सर्फिंग आदि होता हैं कई तरह के दंगल होते कई अखाड़ों के पहलवान आकर इसमें लड़ाई करते हैं.

सोनपुर का मेला में कई तरह के क्षेत्रीय भाषा के संगीत गीत का आयोजन भी होता हैं. जर्मनी अमेरिका फ्रांस रसिया जैसे बड़े-बड़े देशों से पर्यटक सोनपुर मेलामें आते हैं.

यह मेला विदेशी पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र होता हैं विदेशी पर्यटक यहां आते हैं और बिहार के ग्रामीण संस्कृति को देखकर बहुत ही प्रभावित भी होते हैं.

कई सालों से लगने वाला यह मेला 2020 में कोरोना महामारी की वजह से आयोजित नहीं हो पाया. समय के बदलते वक्त के साथ-साथ सोनपुर मेला में अभी कई तरह के बदलाव हो रहे हैं

इस मेला का स्वरूप और रंग ढंग भी बदलते जा रहे हैं. यहां जो भी सामान मिलते हैं अन्य जगहों की तुलना में बहुत ही सस्ते दामों पर मिल जाते हैं.ताजमहल किसने बनवाया था

 

सारांश

सोनपुर का मेला जिसे की हरिहर क्षेत्र या छत्तर मेला कहा जाता हैं हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा को स्नान के बाद शुरू किया जाता हैं और 1 महीने का चलने वाला यह मेला एशिया का विश्व प्रसिद्ध पशु मेला कहा जाता हैं.

इस मेला में सुई से लेकर हाथी तक सारे सामान मिलते हैं और 1 महीने तक आसपास के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होता हैं इसमें बहुत ही लोगों को कमाई भी होता हैं यह मेला पांच से 6 किलोमीटर के क्षेत्र में लगाया जाता हैं.

इस लेख में सोनपुर का मेला कब लगता हैं सोनपुर का मेला का इतिहास क्या हैं सोनपुर का मेला का पौराणिक कथा क्या हैं Sonpur ka mela के बारे में दी गई जानकारी से संबंधित कोई सवाल मन में हैं तो कमेंट के द्वारा पूछ सकते हैं और अपने दोस्त मित्र और रिश्तेदारों को शेयर जरूर करें.

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