Suryakant Tripathi Nirala – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवनी

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला छायावादी युग के चार स्तंभ में से एक स्तंभ माने जाते हैं

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के बारे में पूरी जानकारी के लिए इस लेख को पूूूरा पढें।

 Suryakant Tripathi Nirala ka jivan parichay in hindi सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को महाप्राण के नाम से  भी जानते थे सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी बहुत ही प्रखर कवि थे आइए जानते हैं त्रिपाठी निराला जी के जीवनी के बारे में

Suryakant Tripathi Nirala ka jivan parichay in hindi

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हिंदी साहित्य जगत के छायावाद के चार स्तंभ में से एक स्तंभ है  जयशंकर प्रसाद सुमित्रानंदन पंत महादेवी वर्मा के साथ छायावादी युग के प्रमुख स्तंभ में से एक स्तंभ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी  माने जाते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने बहुत सारी कहानियां उपन्यास और निबंध लिखे हैं लेकिन उनकी सबसे ज्यादा प्रचलित और ख्याति विशेष रूप से कविता के कारण ही मिले हैं

उन्होंने कई कहानियां उपन्यास निबंध आदि लिखे हैं जिससे कि उन्हें बहुत ख्याति मिली उन्होंने सबसे पहली रचना में अपने जन्म भूमि के बारे में लिखा था सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के रचनाओं में क्रांतिकारी विचार प्रदर्शित होते थे विद्रोही और क्रांतिकारी विचार के थे इसीलिए उन्हें एक विद्रोही कवि के रूप में भी जाना जाता है

Suryakant Tripathi Nirala ka jivan parichay in hindi

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी के जन्म

Suryakant Tripathi Nirala जी के जन्म के संबंध में अनेकों मत है लेकिन कुछ लोगों के मत के अनुसार सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का जन्म बंगाल की महिषादल रियासत में जिला मेदिनीपुर में हुआ था निराला जी का जन्म 21 फरवरी 1896 में हुआ था लेकिन सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी के  कहानी संग्रह  लिली में उनके जन्म तिथि 21 फरवरी 1899 दी गई है।

Suryakant Tripathi Nirala biography in hindi

उनके पिता का नाम पंडित राम सहाय त्रिपाठी था माता का नाम रुक्मिणी थी उनके निराला जी का जन्म बसंत पंचमी के दिन हुआ था और दिन मंगलवार था निराला जी के जन्म कुंडली बनाने वाला जो पंडित थे

उन्होंने उनका नाम सूरज कुमार रखा था निराला जी के पिता का वास्तविक निवास बांसवाड़ा उन्नाव जिले के गड़ा कोला गांव के निवासी थे Suryakant Tripathi Nirala जी बंगाल में रहने के वजह से उनकी मातृभाषा बांग्ला हो गई थी

नाम सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
जन्‍म 21 फरवरी 1899
पिता का नाम पंडित राम सहाय त्रिपाठी
माता का नाम रुक्मिणी देवी
पत्नि का नाम मनोहरा देवी
मृत्‍यु 15 अक्टूबर 1961
रचनाएं अनामिका, परिमल,गीतिका,

तुलसीदास

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की शिक्षा

Suryakant Tripathi Nirala जी के शिक्षा बंगाली माध्यम से हुई थी क्योंकि वह बंगाल में ही रहते थे उसके बाद उन्होंने हाई स्कूल की शिक्षा प्राप्त की उसके बाद उन घर पर ही रह कर संस्कृत अंग्रेजी साहित्य का अध्ययन किया था

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी को शुरुआत से ही रामचरितमानस बहुत ही प्रिय था वह हिंदी बांग्ला अंग्रेजी और संस्कृत भाषा के बहुत बड़े जानकार थे।

निराला जी श्री रामकृष्ण परमहंस स्वामी विवेकानंद और श्री रविंद्र नाथ टैगोर जी से विशेष रूप से प्रभावित रहते थे औ निराला जी एक बहुत ही स्वतंत्र रूप के आदमी थे

स्कूल में पढ़ने से ज्यादा उन्हें बाहरी चीजों में रूचि थी जैसे कि खेलकूद कहीं घूमने फिरने में और कुश्ती लड़ने में इत्यादि निराला जी की संगीत में ज्यादा रुचि थी ऐसी बताई जाती हैं पढ़ाई में उनका मन बहुत कम ही लगता था।

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला  का वैवाहिक जीवन

उनका विवाह 15 वर्ष की आयु में ही मनोहरा देवी नाम की कन्या से हुआ था मनोहरा देवी बहुत ही सुंदर और शिक्षित स्त्री थी और उनका संगीत का बारे में भी ज्ञान था पत्नी के ही कहने से निराला जी ने हिंदी के बारे में भी अभ्यास किया।

और उसके बाद ही उन्होंने हिंदी में कविता लिखना शुरू कर दिया था निराला जी जब 3 वर्ष के थे तो उनके माता जी का मृत्यु हो गया था।

जब वह 20 वर्ष की आयु के हुए तो उनके पिता का भी मृत्यु हो गया निराला जी का जीवन शादी के बाद बहुत ही सुख में बीत रहा था क्योंकि उनकी पत्नी बहुत ही समझदार और शिक्षित भी थी उनकी एक पुत्री भी थी लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही किसी  महामारी के फैलने कारण उनकी पत्नी का देहांत हो गया था फिर आर्थिक तंगी से गुजरने लगे थे

Suryakant Tripathi Nirala जी पर एक के बाद एक विपत्तियों का पहाड़ गिरने के बाद भी उन्होंने बहुत ही दृढ़ता से अपने साहित्यिक जीवन में आगे बढ़ते गए और एक से बढ़कर एक युग परिवर्तनकारी कृतियों रचनाओं को प्रकाशित करते रहे।

1916 ईस्वी में उनकी पहली कविता जूही की कली हिंदी साहित्य जगत में बहुत ही प्रचलित हुए और लोगों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने लगे Suryakant Tripathi Nirala जी गद्य और पद्य दोनों के जानकार थे

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला  का साहित्यिक जीवन  

Suryakant Tripathi Niralaजी के 1920 ईस्वी में जन्मभूमि प्रभात नाम का एक मासिक पत्रिका प्रकाशित हुआ था फिर उनका एक कविता संग्रह अनामिका नाम से 1923 ईस्वी में प्रकाशित हुआ इस तरह उनके बहुत सारी रचनाएं और कृतियां है जो एक से बढ़कर एक थे।

उन्होंने 1822 ईसवी तक नौकरी किया और उसके बाद अपना लेखन शुरू किया और उसके बाद संपादन भी करने लगे Suryakant Tripathi Nirala जी हिन्‍दी साहित्‍य का शिखर कवि के रूप में भी जाने जाते हैं

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का व्यक्तित्व

निराला जी एक विद्रोही व्यक्तित्व के व्यक्ति थे संत भी थे और कवि भी थे वह बहुत ही स्वाभिमानी थे अपनी कविताओं में उन्होंने भारतीयों के दिलों में अंग्रेजों के प्रति विद्रोह भरने के का कार्य किया।

उन्होंने कई रचनाएं की लेकिन सबसे ज्यादा उन्हें प्रसिद्धि उनकी कविताओं से मिला था हिंदी संस्कृत और बांग्ला का सूर्यकांत त्रिपाठी जी को जानकारी था वैसे तो उनका जीवन बहुत ही संघर्षों से भरा हुआ था

किसी भी कठिन से कठिन परिस्थिति में रहते हुए भी अपने कार्य में संघर्ष से हमेशा लगे हुए रहते थे एक महामारी में उनकी पत्नी चाचा भाई भाभी बेटी लगभग सभी परिवार का मृत्यु हो गया।

उनकी रचनाओं से उनके स्वभाव का पता चलता है कि उनका स्वभाव एक अक्खड़ता से भरा हुआ विचारों वाला था।उनका व्यक्तित्व एक ऐसा था कि कोई भी उन्हें देखकर के आकर्षित हो जाता था पृष्ठ पुष्ट शरीर के थे और वह हमेशा साफ-सुथरे कपड़े पहनते थे

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की मृत्‍यु

उनकी कविताओं में उपन्यास और कहानियों में Suryakant Tripathi Nirala जी के मृत्यु 15 अक्टूबर 1961 को इलाहाबाद में हो गया।सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की रचनाएं एक से बढ़कर एक है जिनमें प्रमुख रूप से कुछ उपन्यास काव्य संग्रह और बहुत सारी कविताएं हैं

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला  के काव्य संग्रह  

  • अनामिका
  • परिमल
  • गीतिका
  • तुलसीदास
  • अनामिका द्वितीय
  • कुकुरमुत्ता
  • अणिमा
  • बेला
  • नये पत्ते
  • अर्चना
  • आराधना
  • गीतकुंज
  • संध्‍या काकली
  • अपरा

suryakant tripathi nirala ki rachnaye

  • अप्सरा
  • अलका
  • प्रभावती
  • निरुपमा
  • कुल्ली भाट
  • बिलेश्वर बकरीहा
  • चोटी की पकड़
  • काले कारनामे
  • चमेली
  • इंदुलेखा
  • कहानी संग्रह
  • लिली
  • सखी
  • सुकुल की बीवी
  • चतुरी चमार
  • देवी इत्यादि

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का निबंध आलोचना 

  • रविंद्र कविता कानन
  • प्रबंध पद्य
  • प्रबंध प्रतिमा
  • संग्रह
  • चाबुक
  • चयन
  • महाभारत और
  • रामायण के अंतर्कथाएं

साराशं 

इस लेख में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जीके जीवन से संबंधित सारी जानकारी दी गई हैं सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का जन्‍म कब और कहां हुआ था।

उनके व्‍यक्तित्‍व कैसा था उनकी रचनाएं कौन कौन थी र्यकांत त्रिपाठी निराला जी के बारे में यह लेख आप लोगों को कैसा लगा आप लोग  कमेंट करके जरूर बताएं और दोस्त मित्रों को शेयर भी करें

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