Tulsidas – गोस्वामी तुलसीदासजी का जीवन परिचय

हिंदू धर्म में सबसे बड़ा काव्य रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के एक बहुत ही प्रसिद्ध महान संत कवि थे उन्होंने भगवान राम की ऐसी भक्ति की उनके बारे में महाकाव्य लिखा जो कि युगो युगो तक अमर रहेगा।

जब भी हमलोग रामचरितमानस पढ़ते हैं तो सोचते हैं गोस्वामी तुलसीदास कौन थे

Tulsidas ka jivan parichay in hindi language, tulsidas biography in hindi कहां के रहने वाले थे उनका जन्म कब हुआ इन सारे सवालों को हम ढूंढते हैं  ने .कैसे रामचरितमानस की रचना किया और कितने दिनों में किया इन सारे सवालों का जवाब आइए हम जानते हैं  हम नीचे जानते हैं ।

Tulsidas ka jivan parichay in hindi language

गोस्वामी Tulsidas जी राम भक्ति शाखा के प्रधान कवि थे और भारतीय संस्कृति के उन्नायक एवं लोकमान्य कवि के रूप में उनका विवरण मिलता है अगर वे अपनी रचनाओं के सहारे भारतीय जनता को अपनी संस्कृति की याद नहीं दिलाते तो पता नहीं हिंदू जनता कहां पहुंच गई होती।

उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के चरित्र रामचरितमानस में जनता के सामने लाकर हिन्‍दु जनता में प्राण फूंक दिए रामचरितमानस हिंदू धर्म का एक बहुत ही बड़ा महाकाव्य है जोकि सबसे श्रेष्ठ सबसे प्रसिद्ध विश्व में 100 लोकप्रिय काव्यों में रामचरितमानस का स्थान 46 वें नंबर पर आता है गोस्वामी तुलसीदास के बारे में कहा जाता है कि वह रामायण के रचयिता महर्षि बाल्मीकि की अवतार थे।

Tulsidas ka jivan parichay in hindi language

माना जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास को भगवान राम के दर्शन भी हुए थे और उन्होंने भगवान राम के अनन्य भक्त पवनसुत हनुमान जी का आशीर्वाद भी लिया था और उसके बाद ही उन्होंने रामचरितमानस जैसे महाकाव्य की रचना की थी।

गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म

गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म संवत् 1554 में हुआ था गोस्वामी Tulsidas जी के गांव का नाम राजापुर था जो कि उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में पड़ता है उनके बचपन का नाम तुला राम या राम बोला था तुलसीदास की के जन्म के संबंध में निम्नलिखित एक दोहा बहुत ही प्रसिद्ध हैंं।

  • संवत सोलह सौ असी असी गंगा के तीर
  • श्रावण शुक्ला सप्तमी तुलसी धरयो शरीर

तुलसीदास जी के पिता का नाम आत्माराम दुबे और माता का नाम हुलसी था महाकवि Tulsidas जी को गोस्वामी Tulsidas जी के नाम से जानते हैं।

गोस्वामी तुलसीदास जी का बचपन

तुलसीदास जी एक हिंदू कवि संत संशोधक और जगतगुरु थे Tulsidas जी राम के अनन्य भक्त थे वे संस्कृत भाषा के प्रकांड पंडित थे अरबी फारसी के भी कुछ शब्द उनकी रचनाओं में मिलते हैं जिससे उनके अरबी फारसी ज्ञान के बारे में भी हम लोगों को जानकारी मिलता है

गोस्वामी Tulsidas जी श्री राम जी के अद्भुत छवि को अपने मन में ऐसे बैठा लिया था कि अपनी सारी सुध बुध भूल गए थे Tulsidas के जन्म के समय मुंह में 32 दांत लिए उत्पन्न हुए थे। परिवार ने उनको अशुभ मान कर  उनको त्याग दिया था गोस्वामी तुलसीदास जी का लालन-पालन चुनिया नाम की दासी ने किया था।

तुलसीदास का शिक्षा

तुलसीदास जब छोटे थे तभी से ही बहुत ही तीव्र बुद्धि के बालक थे जो भी चीजें वह देखते थे पढ़ते थे वह बहुत जल्दी उन्हें याद हो जाता था तुलसीदास के बचपन में ही माता पिता की मृत्यु हो गई थी

जिसके बाद उनका अपना कोई नहीं था और वह भीख मांग कर के अपना गुजारा करते थे ऐसे ही घूमते घूमते एक दिन वह साधु संतों से जा मिले और वहीं पर उन्हें ज्ञान प्राप्त करने का शिक्षा लेने का एक अवसर प्राप्त हुआ तुलसीदास के गुरु नरहरी दास थे

उन्होंने ही तुलसीदास का नाम तुलसीदास रखा था क्योंकि इससे पहले तुलसीदास को रामबोला नाम से सभी पुकारते थे नरहरिदास ने हीं तुलसीदास का यगोपवित संस्कार किया और तुलसीदास को गायत्री मंत्र का उच्चारण करना सिखाया जाता है नरहरिदास ने हीं तुलसीदास को वैष्णव के पास संस्कार किए थे और राम भक्ति की शिक्षा-दीक्षा उन्होंने दिया था

उसके बाद अयोध्या लेकर गए वहीं पर उनका विद्या अध्ययन कराया तुलसीदास तो बचपन से ही बहुत ही तेज बुद्धि के थे और एक योग्य गुरु मिल जाने के कारण अपने गुरु से जो भी सुनते थे उसे याद कर लेते थे

नरहरी दास ने तुलसीदास को भगवान राम के बारे में पूरी कथा सुनाई थी लेकिन उस समय उन्हें रामकथा समझ में नहीं आया था कुछ दिनों बाद वह अपने गांव आए तो उनके गांव के लोग उनके मुख से राम भक्ति भगवान राम के बारे में सुनकर के चकित हो गए थे

गोस्वामी तुलसीदास जी के व्यक्तित्व   

तुलसीदास को संत नरहरी दास ने काशी में ज्ञान भक्ति की शिक्षा दी थी तुलसीदास का जन्म हुआ उसी समय उनके मुख से राम नाम निकला। इसलिए लोग उन्हें रामबोला कहने लगे। इसिलिए उनके बचपन का नाम तुला राम या राम बोला था।

तुलसीदास जी राम जी की पूजा और भक्ति में हमेशा लीन रहते थे इसीलिए अंत में भगवान ने स्वयं अपने हाथ में चंदन लेकर Tulsidas जी के माथे पर लगाया और अंतर्धान हो गए इस विषय में के बारे में तुलसीदास जी की एक दोहा हैं।

  • चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर
  • तुलसीदास चंदन घिसे तिलक देत रघुवीर

जब उन्होंने भगवान श्रीराम को देखा तू वह अपना सारा सुख दुख या अपने आप को ही भूल गए। महाकवि गोस्वामी तुलसीदास भक्ति काल के एक बहुत बड़े हैं राम भक्त कवि थे वह एक समाज सुधारक भी थे

गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के साथ-साथ कई रचनाएं की और उन्होंने समाज में कई प्रकार की फैली हुई कुप्रथा और कुरीतियों के खिलाफ भी आवाज उठाया था गोस्वामी तुलसीदास ने इन कुरीतियों और कुप्रथाओं के खिलाफ अपनी रचनाओं के द्वारा विरोध करने का प्रयास किया था

रामचरितमानस हिंदू धर्म का एक बहुत ही बड़ा महाकाव्य है जिसमें भगवान राम के जीवन के बारे में शुरू से अंत तक लिखा हुआ है स्वामी तुलसीदास भगवान श्री राम के बहुत बड़े भक्त थे और वह भगवान श्री राम के भक्ति भाव में ही अपने आप को समाहित कर लिया था हमेशा भगवान श्रीराम में ही लीन रहते थे उनकी रचनाएं ज्यादातर अवधी भाषा में लिखी गई है

नाम गोस्‍वामी तुलसी दास
पिता का नाम आत्‍माराम दूबे
माता का नाम हुलसी
गुरू का नाम नरहरिदास
जन्‍म संवत् 1554
पत्नि का नाम रत्‍नावली
मृत्‍यु संवत 1680
प्रमुख रचनाएं रामचरितमानस,विनयपत्रिका,कवितावलीविनयपत्रिका,कवितावली,कृष्‍ण गितावली

गोस्वामी तुलसीदास जी का वैवाहिक जीवन

तुलसीदास जी के विवाह दीनबंधु पाठक के पुत्री से हुआ था तुलसीदास जी अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते थे वह अपनी पत्नी के प्रेम में लिप्त रहते थे एक बार उनकी पत्नी अपने मायके गई थी

तभी गोस्वामी Tulsidas जी अपनी पत्नी के प्रेम में इतना पागल हो गए थे कि तुलसीदास जी आधी रात में आंधी और तूफान आया था इसका बिना परवाह किए ही अपनी पत्नी के पास ससुराल पहुंच गए जब उनकी पत्नी ने आधी रात को तुलसीदास जी को देखा तो आश्चर्य चकित हो गई।

रत्नावली के मुंह से अचानक यह बात निकल गई की जितना प्रेम आप हमें कर रहे हैं उतना ही आप भगवान से करेंगे तो अच्छा होगा ऐसे कटु शब्द सुनकर अपनी पत्नी के मुंह से तुलसीदास जी के हृदय में बहुत पीड़ा हुआ

जिससे उनका रास्ता ही बदल गया और उन्हें संसार का महा कवि बना दिया पत्नी का उपदेश गोस्वामी तुलसीदास जी को वैराग्य बना दिया ऐसा कहा जाता है कि रत्नावली के प्रेरणा से ही घर को छोड़कर तीर्थाटन के लिए निकल पड़े और तन मन से भगवान राम की भक्ति में लीन हो गये।

गोस्वामी तुलसीदास के व्यक्तित्व 

Tulsidas जी के गुरु आचार्य रामानंद चार्य थे स्वामी Tulsidas जी रामानंदी संप्रदाय के दर्शनार्थी और भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त थे भाषा भाव और कला की दृष्टि से तुलसीदास जी का बराबरी करने वाला कोई  आज तक नहीं हुआ गोस्वामी तुलसीदास जी को ईश्वर का दर्शन 1607 ईस्वी को मौनी अमावस्या के दिन बुधवार को हुआ था

भगवान श्री राम जी ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्री राम जी बालक रूप में आकर तुलसीदास जी से कहा कि बाबा हमें चंदन चाहिए क्या आप हमें चंदन लगा सकते हैं

महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान के इस रूप को देखकर अपने सारे शुद्ध बुद्धि खो दिये थे उसके बाद भगवान ने स्वयं अपने हाथ में चंदन लेकर अपने तथा तुलसीदास जी के माथे पर भी लगाया और फिर अंतर्ध्यान हो गए।

तुलसीदास जी की सबसे प्रमुख और प्रधान रचनाएं 

गोस्‍वामी तुलसीदास जी रचनाएं की बहुत सारी रचनाएं है उनकी सबसे प्रमुख और प्रधान रचनाएं हैं

  • महाकाव्य रामचरितमानस
  • विनय पत्रिका
  • कवितावली
  • कृष्ण गीतावली
  • भैरवी रामायण
  • दोहावली
  • जानकी मंगल
  • रामलला नहछू
  • रामाज्ञा
  • पार्वती मंगल इत्यादि

Tulsidas जी ने बहुत सारी रचनाएं की महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने वर्ष 1631 में चैत्र मास की रामनवमी पर अयोध्या में ही महाकाव्य रामचरितमानस लिखना शुरू किया था

स्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना 2 साल 7 महीने और 26 दिन में पूरा किया था। गोस्वामी तुलसीदास जी ने महाकाव्य रामचरितमानस की रचना पंचमी तिथि को राम सीता विवाह के पर्व पर ही अयोध्या में पूरा किया था।

उसके बाद महाकवि तुलसीदास जी वाराणसी चले गए महाकवि गोस्वामी Tulsidas जी के अधिकतर रचनाएं अवधी ब्रज भाषा में है रामचरितमानस रामलाला नहछू बरवै रामायण पार्वती मंगल जानकी मंगल और रामाज्ञा यह सारी रचनाएं अवधी भाषा में है

कृष्ण गीतावली गीतावली साहित्य रत्न दोहावली वैराग्य संदीपनी और विनय पत्रिका यह सारी रचनाएं ब्रजभाषा में है तुलसीदास जी की और भी रचनाएं हैं जैसे कि

  • hnuman चालीसा
  • हनुमान अष्टक
  • हनुमान बाहुक
  • तुलसी सतसई

महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी की मृत्यु 

महान कवि गोस्वामी Tulsidas जी की मृत्यु संवत 1680 (1632 ईस्वी) में श्रावण शुक्ला सप्तमी के दिन राम-राम जापते हुए हो गया काशी में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया इसी के बारे में एक दोहा भी लिखा गया है।

  • संवत सोलाह सौ असी असी गंगा के तीर
  • श्रावण शुक्ला सप्तमी तुलसी तज्‍यो शरीर

सारांश 

इस लेख में रामचरितमानस जैसे महाकाव्य के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी के बारे में पूरी जानकारी दी गई है जिसमें गोस्वामी तुलसीदास का जन्म कब हुआ था उनके माता पिता कौन थे

गोस्वामी तुलसीदास के गुरु कौन थे उनका विवाह किससे हुआ था तुलसीदास को वैराग्य कैसे हुआ वह कैसे भगवान श्री राम के भक्त हुए भगवान श्री राम का दर्शन कब और किस स्थान पर हुआ उनकी मृत्यु के बारे में उनकी रचनाओं के बारे में पूरी जानकारी दी गई है।

आपको यह लेख गोस्वामी तुलसीदास  जी के बारे में पढ़कर कैसा लगा यह जानकारी आपको पसंद आया हो तो आप हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा।  अपने मित्र दोस्तों रिश्तेदारों को भी शेयर जरूर करें।

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