देवताओं के नाराजगी के कारण जीवन में होती है परेशानियां : श्री जीयर स्वामी जी महाराज

देवताओं के नाराजगी के कारण जीवन में होती है परेशानियां : श्री जीयर स्वामी जी महाराज – परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्‍न जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि कभी-कभी देवताओं के अधिक पूजा करने के कारण बहुत प्रतिष्ठा, मान, सम्मान, धन बढ़ जाता है। तब देवता नाराज भी हो जाते हैं। क्योंकि कभी भी साधारण मानव को देवता से ज्यादा बड़ा या सुखी संपन्न देवता लोग नहीं देखना चाहते हैं। इसीलिए जब लगता है कि कोई भी व्यक्ति धन, जन, पूजा, पाठ में अधिक बढ़ रहा है, तब देवता लोग उसका पैर भी खींचने लगते हैं। जिसके कारण उसके जीवन में परेशानियां आने लगती है।

देवताओं के नाराजगी के कारण जीवन में होती है परेशानियां

जब पूजा पाठ में देवताओं को निमंत्रण दिया जाता है, तब कलयुग में देवता लोग आते हैं, लेकिन सूक्ष्म रूप से शामिल होते हैं। जबकि सतयुग, त्रेता और द्वापर में देवता लोग सशरीर उपस्थित होते थे। जैसे हम लोग कहीं पर किसी के यहां निमंत्रण मिलने पर जाकर उपस्थित होते हैं, उसी प्रकार से उस समय देवता लोग भी आते थे। लेकिन कलयुग में देवताओं ने अपना नियम बदल दिया है। क्योंकि आज यदि साक्षात देवता कहीं पर भी पूजा में शामिल होने के लिए आ जाएं तो लोग उनको छोड़ेंगे ही नहीं।

क्योंकि कलयुग में लोग चाहते हैं कि हम देवी देवता को इतना ज्यादा प्रसन्न कर लें कि हमारे पास किसी भी चीज की कमी न हो। इसीलिए देवताओं ने फैसला किया कि कलयुग में हम लोग सूक्ष्म रूप से कहीं भी पूजा पाठ में शामिल होंगे। देवताओं की कुल संख्या 33 करोड़ बताई गई है। देवता लोगों की जनसंख्या बढ़ना बंद हो गया है। क्योंकि देवता लोगों को एक श्राप के कारण उनकी जनसंख्या 33 करोड़ पर ही रुक गया है।

dewtao ke narajgi ke karan jivan me hoti hai pareshaniya

देवता लोग किसी दूसरे को अधिक बढ़ते हुए देखना नहीं चाहते

जितने भी देवी देवता हैं, इनके भोजन आहार की व्यवस्था तभी होती है, जब मानव लोग उनकी पूजा करते हैं। जिससे वह प्रसन्न भी होते हैं। लेकिन देवता लोग बहुत जल्द नाराज भी हो जाते हैं। थोड़ी सी गलती होने के बाद वह उसका दंड भी निर्धारित कर देते हैं। क्योंकि देवता लोगों का यह व्यवहार है। एक बार एक व्यक्ति बहुत पूजा पाठ कर रहे थे। जिसके कारण उनका यश, कृति लगातार देवताओं के समान बढ़ने लगा।

इतना ज्यादा वे पूजा पाठ करते थे कि उनका शक्ति यश देवताओं से भी अधिक बढ़ने लगा। कभी भी देवता लोग किसी दूसरे को अधिक बढ़ते हुए देखना नहीं चाहते हैं। आप उनसे नीचे बढ़ रहे हैं, तब तक तो ठीक है। लेकिन जैसे ही आप उनसे अधिक बढ़ने लगे तो वह आपको गिराने का प्रयास करते हैं।

जैसे कोई बड़े-बड़े ऋषि, महर्षि, तपस्वी साधना करने लगते हैं। उनकी सिद्धि जो है देवताओं से अधिक बढ़ जाती है। तब देवता लोग उनसे नाराज होते हैं। लेकिन जब आप किसी देवता की पूजा करते हैं, तब वह अपना शक्ति जो है आपके ऊपर दिखा सकते हैं। लेकिन देवता लोग भी जिनकी पूजा करते हैं, आराधना करते हैं और स्तुति करते हैं। जिनके सामने अपने आप को समर्पित करते हैं। यदि आप उन ईश्वर की पूजा करते हैं, आराधना करते हैं, तब आपको देवता लोग से भी डरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि उन परम ब्रह्म परमेश्वर साक्षात श्रीमन नारायण की आराधना करने वाले पूजा करने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी भी गलत नहीं होता है।

भगवान श्रीमन नारायण यश, कीर्ति को बढ़ाने वाले हैं

क्योंकि भगवान श्रीमन नारायण यश, कीर्ति को बढ़ाने वाले हैं। जिनका आचरण व्यवहार उनके श्री चरणों में समर्पित रहता है।, उनका यश कीर्ति लगातार भगवान और भी बढ़ाते हैं। इस पूरे दुनिया में एकमात्र भगवान श्रीमन नारायण ही हैं, जो कभी भी किसी भी व्यक्ति देवता या किसी भी जीव प्राणी से बैर भाव नहीं रखते हैं। किसी पर नाराज नहीं होते हैं। थोड़ी बहुत गलती होने के बाद भी भगवान दंड नहीं देते हैं। क्योंकि वह केवल मंगल के कर्ता है तथा अमंगल को हरने वाले हैं। इसीलिए कहा गया है मंगल भवन अमंगल हारी। मंगल को देने वाले हैं अमंगल को हरने वाले हैं।

इसलिए संसार में जितने भी देवी देवता हैं, उनकी भी पूजा पाठ करना चाहिए। लेकिन पूजा करते समय कहना चाहिए कि हे देवता हम आपकी पूजा कर रहे हैं। इसलिए हम आपसे निवेदन करते हैं कि मेरे यह पूजा, समर्पण, यह स्थिति उन भगवान परम ब्रह्म परमेश्वर श्रीमन नारायण के प्रति हैं। हमारी श्रद्धा, भक्ति को बढ़ाइए जिससे हम उन जगतपति की भक्ति निरंतर करते रहे। इस प्रकार से जीवन में जो भी आप करते हैं, चाहे पूजा करते हो, पाठ करते हो, कर्म करते हो, भजन करते हो या किसी भी प्रकार का काम करते हैं, उसको आप उन ईश्वर को समर्पित कीजिए। जिससे यदि कुछ गलती भी हो जाती है तो वह भगवान क्षमा भी कर देते हैं।

ईश्वर क्षमावान है

क्योंकि ईश्वर क्षमावान है। वह भक्त को भटकते हुए देखते हैं तो उसे सही रास्ते पर चलने के लिए सही मार्गदर्शन भी देते हैं। वह ईश्वर भक्त वत्सल हैं। वह ईश्वर सभी देवताओं के भी ईश्वर हैं। मनुष्‍य के भी ईश्वर हैं, हर जीव के ईश्वर हैं। इस दुनिया में जो कुछ भी है, वस्तु हो, व्यवहार हो, आचरण हो, प्रकृति हो, पृथ्वी हो, सब कुछ वहीं से शुरू होता है और वहीं पर समाप्त हो जाता है।

सृष्टि के पहले, सृष्टि के मध्य में और सृष्टि के बाद यदि एकमात्र कोई रहता है, तो वह श्रीमन नारायण है। इसलिए बताया गया है कि पूजा, पाठ, आराधना जो कुछ भी कीजिए, उसको उन भगवान श्रीमन नारायण के चरणों में समर्पित कर दीजिए।

33 करोड़ देवता है। अलग-अलग देवता को पूजा करने से अलग-अलग चीजों की प्राप्ति होती है। किसी को धन चाहिए। उसके लिए कुबेर भगवान की पूजा कीजिए। उम्र बढ़ाने के लिए अश्विनी की पूजा कीजिए। दुख तकलीफ कष्ट निवारण के लिए शिवजी की पूजा कीजिए। भूत प्रेत इत्यादि से निवारण के लिए दुर्गा जी की पूजा कीजिए।

श्रीमन नारायण की पूजा करने से 33 करोड़ देवता भी प्रसन्न हो जाते हैं।

इस प्रकार से 33 करोड़ देवी देवता की पूजा अलग-अलग कामनाओं के लिए किया जाता है। आप सोच सकते हैं कि एक व्यक्ति अब इतने देवी देवता का पूजा अलग-अलग चीजों के लिए करता है तो उसे कितना ज्यादा समय और पूजा पाठ के लिए विधि विधान नियम को पालन करना पड़ता है। इसमें भी एक समस्या है। एक देवता का पूजा करते हैं तो दूसरे देवता नाराज भी हो सकते हैं।

अब 33 करोड़ देवता को प्रसन्न करने में कितनी ज्यादा समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। जबकि एकमात्र श्रीमन नारायण की पूजा करने से 33 करोड़ देवता भी प्रसन्न हो जाते हैं। इसीलिए बताया गया है कि जब आप नारायण के शरण में चले जाते हैं तो फिर आपको किसी भी देवी देवता की पूजा आप कम भी करते हैं तब भी आपको जीवन में किसी भी चीज की प्राप्ति के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

क्योंकि उन नारायण की पूजा करने से सब कुछ जीवन में प्राप्त हो जाता है। जो आप 33 करोड़ देवी देवताओं को अलग-अलग पूजा करते हैं और उसमें भी कभी-कभी देवता लोग नाराज होकर के आपको कष्ट भी दे देते हैं। इसीलिए एक लाइन में इस पूरे कथा के रहस्य को आप समझेंगे तो भगवान नारायण की पूजा आराधना करना जीव के लिए सबसे उत्तम श्रेष्ठ एवं सब कुछ प्राप्त करने वाला है।

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