परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर धूमधाम से मना जन्माष्टमी 

परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर धूमधाम से मना जन्माष्टमी – भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्‍न जीयर स्वामी जी महाराज के मंगला अनुशासन में भगवान श्री कृष्ण का जन्म महा महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर भारत के अलग-अलग क्षेत्र से आए संत, महात्मा, विद्वान, आचार्य के द्वारा पूरे विधि विधान से पूजा की शुरुआत रात्रि 10:00 बजे की गई। मंच पर उपस्थित सैकड़ों की संख्या में विद्वान जनों के द्वारा मंत्रोच्‍चार किया गया। विद्वान जनों के द्वारा उच्चरित मंत्रो से पूरा वातावरण प्रफुल्लित हो गया था।

चातुर्मास्य व्रत स्थल परमानपुर सहित आसपास के क्षेत्र मंत्रों से गुंजायमान हो गया था। लगभग 2 से 3 किलोमीटर में फैले चातुर्मास्य व्रत स्थल पर हजारों हजार की संख्या में भक्त मौजूद रहे। इस अवसर पर वाहनों का लंबी कतार देखा गया।प्रवचन मंच स्थल एवं प्रवचन पंडाल में महिलाएं पुरुष सहित छोटे-छोटे बच्चे भी भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव में काफी ज्यादा हर्षो उत्‍साहित थे। महिलाएं बच्चे अपने हाथों में लड्डू गोपाल को लेकर पंडाल में पहुंची थी।

परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर धूमधाम से मनाया गया जन्माष्टमी 

सभी लोग भगवान श्री कृष्ण के जन्म महा महोत्सव वैदिक मंत्रों का ध्यान स्मरण करते हुए लगभग तीन घंटे तक प्रवचन पंडाल में मौजूद रहे। रात्रि के 10:00 से 12:00 बजे तक मंत्रोंच्‍चार के द्वारा भगवान श्री कृष्णा का जन्म महा महोत्सव को पूरी विधि विधान के साथ आचार्य एवं यजमान के द्वारा पूजन किया गया। भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव के उपलक्ष में भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्‍मी प्रपन्‍न जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण को सांवला कहा जाता है। सावला का मतलब संसार में जो अंधकार है, उसे खत्म करके पूरे संसार, प्रकृति, जीव को प्रकाशित करने का काम करता है, वही श्री कृष्ण है।

parmanpur chaturmas vrat sthal par dhumdham se manaya gaya janmashtami

मंत्रों से गुंजा क्षेत्र

सांवले का मतलब सामान्य भाषा में काला भी कहा जाता है। काला का मतलब अंधकार अंधेरा होता है। मतलब वैसा भगवान सृष्टि के संचालन कर्ता श्री कृष्ण जो देखने में सांवले हैं, लेकिन उनका प्रकाश, तेज, गुण, शक्ति, ज्ञान, मार्गदर्शन के माध्यम से पूरा जगत प्रकाशित होता है। वैसे सांवले भगवान श्री कृष्ण है।

भगवान श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। रात्रि के समय में जब कृष्ण जी जन्म लिए उस समय बंदीगृह में देवकी और वासुदेव जी दोनों लोग कारागार में बंद थे। वहां पर बड़ी संख्या में पहरेदार मौजूद थे। लेकिन जन्म के बाद जितने भी पहरेदार थे, वह लोग अचेत अवस्था में हो गए। वहीं रात्रि में भगवान श्री कृष्ण को लेकर वासुदेव जी गोकुल में पहुंचे। जिसके बाद भगवान श्री कृष्ण का पहला नाम नीलकमल रखा गया। श्री कृष्ण को नीलकमल के नाम से भी जाना जाता है।

जन्म महा महोत्सव में नक्षत्र का सबसे महत्वपूर्ण

स्वामी जी ने कहा जन्माष्टमी को लेकर विद्वान जनों में मतभेद होता है। क्योंकि जन्माष्टमी एक ऐसा त्यौहार है, जिसमें भगवान का जन्म रात्रि के समय होता है। इसीलिए तिथि और नक्षत्र में अंतर हो जाता है। जबकि रामनवमी में ऐसा नहीं होता है। क्योंकि भगवान श्री राम का जन्म दिन में हुआ था। इसीलिए उस पर बहुत ज्यादा विवाद नहीं होता है। क्योंकि रामनवमी में नवमी तिथि और नक्षत्र सामान्य तौर पर मिल जाते हैं। इसीलिए रामनवमी में कोई मतभेद नहीं होता है। लेकिन कृष्ण जी का जन्म रात्रि के 12:00 बजे होने के कारण ही तिथि, नक्षत्र में अंतर हो जाता है। क्योंकि रात्रि 12:00 बजे के बाद दिन, तिथि, नक्षत्र इत्यादि बदलते हैं। इसलिए इसमें मतभेद हो जाता है। 

लेकिन विद्वान जनों को श्री कृष्ण जन्म महोत्सव पर विचार करना चाहिए। क्योंकि जन्म महा महोत्सव में नक्षत्र का सबसे महत्वपूर्ण महत्व होता है। इसीलिए जब नक्षत्र आता हो उस समय कृष्ण जन्माष्टमी मानना चाहिए। आज ही के दिन वृंदावन में भी धूमधाम से भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। वहीं पूरे दुनिया में भी आज कृष्ण का जन्म महोत्सव भव्य तरीके से मनाया जा रहा है।

भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष में यज्ञ समिति के द्वारा प्रसाद वितरण एवं भोज भंडारा की भी व्यवस्था की गई थी। जिसमें बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित परमानपुर एवं आसपास के गांव से आए हुए सभी श्रद्धालु, भक्त प्रसाद एवं भोज भंडारा में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किये।

कार्यक्रम के अंत में भजन गायकों के द्वारा भगवान श्री कृष्ण का मधुर एवं प्यारा भजन सुनाया गया। जिससे पूरा पंडाल भगवान के भजन के साथ तालियों से गूंज उठा।

Leave a Comment