पांच दुर्गुण है व्यक्ति के विनाश का कारण : जीयर स्वामी जी महाराज 

सूर्यपूरा प्रखंड के अगरेड़ गांव में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्‍न श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि पांच दुर्गुण मानवीय जीवन के विपत्ति और विनाश का सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि नशा एक ऐसी बीमारी है जिससे व्यक्ति का जीवन बर्बाद हो जाता है। नशा केवल शराब या अन्य प्रकार के चीजों का सेवन करना ही नहीं होता बल्कि किसी भी प्रकार की नशा मानवीय जीवन के लिए हानिकारक है।  जैसे धन का लगातार उपभोग करने का नशा भी एक बहुत बड़ी नशा है। 

वही आगे दूसरा दुर्गुण हिंसा के बारे में बताते हुए कहा कि हिंसा एक बहुत बड़ा दुर्गुण है। जिससे पूरा जीवन व्यक्ति का तनाव मानसिक चेतन में अस्थिरता से जीवन को बर्बाद कर देती है। जुआ खेलना एक ऐसा दुर्गुण है जिससे लोग अपना पूरा धन संपत्ति को जुआ में बर्बाद कर देते हैं। जुआ भी एक प्रकार का नशा ही है। जिससे व्यक्ति अपने जीवन को बर्बाद कर लेता है। कुछ लोग कहते हैं कि खाली समय में टाइम पास करने के लिए खेलते हैं। लेकिन जुआ कलयुग में व्यक्ति के सर पर सवार होने वाला एक सबसे बड़ा निवास स्थान है। जिससे बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। 

चौथा दुर्गुण वेश्यावृत्ति है। विवाह शादी के बाद भी बहुत लोग अपने पत्नी को छोड़कर के और अमर्यादित तरीके से अपने जीवन को जीने लगते हैं। वेश्यावृत्ति भी व्यक्ति के विनाश का एक बड़ा कारण है। जिससे केवल एक पीढ़ी ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ी भी बर्बाद होती है। पांचवा दुर्गुण कोर्ट कचहरी के झंझट में पड़ना है। बहुत ऐसे लोग हैं जो जानबूझकर के कोर्ट कचहरी में दूसरों को परेशान करने के लिए भी चले जाते हैं। आप यदि अपने सही कामों के लिए कोर्ट कचहरी जाते हैं तब तो ठीक है लेकिन जोर जबरदस्ती दूसरे का जमीन, मकान, धन, संपत्ति कब्जा करके और कोर्ट कचहरी में जाकर के दूसरों को परेशान करते हैं यह भी एक व्यक्ति के विनाश का पांचवा बड़ा कारण है।

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