जन्माष्टमी तिथि से नहीं बल्कि नक्षत्र से मनाना चाहिए : श्री जीयर स्वामी जी महाराज

जन्माष्टमी तिथि से नहीं बल्कि नक्षत्र से मनाना चाहिए : श्री जीयर स्वामी जी महाराज – परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्‍न जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि जन्माष्टमी तिथि से नहीं बल्कि नक्षत्र से मनाना चाहिए। भगवान श्री कृष्ण का जब जन्म हुआ, उस समय जो नक्षत्र था, वही नक्षत्र जब आता है, उसी समय जन्मोत्सव मानना चाहिए। वैसे भगवान श्री कृष्ण का जन्म जन्माष्टमी के दिन हुआ था।

लेकिन उस दिन किसी को जानकारी नहीं हुआ। वहां पहरा देने वाले पहरेदार को भी इसकी जानकारी नहीं हुई। क्योंकि उस समय भगवान श्री कृष्ण के कृपा से सारे लोग निंद्रा में सो गए थे। जब भगवान श्री कृष्णा मथुरा से गोकुल में पहुंचे, तब लोगों को जानकारी हुई। उस समय पूरे दुनिया में धूमधाम से भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव महामहोत्सव मनाया गया। वहीं महामहोत्सव हम सभी लोग भी मनाते हैं।

जन्माष्टमी तिथि से नहीं बल्कि नक्षत्र से मनाना चाहिए

कुछ संत महात्मा विद्वान लोग अष्टमी तिथि को ही जन्माष्टमी महोत्सव मनाते हैं। लेकिन जन्म महोत्सव तिथि से नहीं बल्कि नक्षत्र से मनाना चाहिए। तिथि से किसी का पुण्यतिथि मनाया जाता है। जैसे किसी का मृत्यु जिस तिथि को होता है उस तिथि को उसका पुण्यतिथि मनाया जाता है। चाहे कोई भी जन्म किसी भी तिथि को ले, लेकिन उसका जन्म महोत्सव नक्षत्र के अनुसार ही मनाना चाहिए। जिस नक्षत्र में जन्म हुआ हो वह नक्षत्र जब आता है तभी उसका जन्म महामहोत्‍सव मनाना चाहिए।

janmashtami tithi se nahi nakshatra se manana chahiye

अष्टमी के दिन नक्षत्र आता हो तो ठीक है नहीं तो नवमी, दशमी किसी भी दिन जब नक्षत्र आता है। उसी दिन जन्माष्टमी भी मानना चाहिए। इसीलिए आज 17 अगस्त को रात्रि में 11:00 बजे से 12:00 बजे तक धूमधाम से भगवान श्री कृष्ण का जन्म महामहोत्सव मनाया जाएगा।

कृष्ण का जन्म कराना प्राणियों के लिए संभव नहीं

एक चीज और ध्यान रखना चाहिए कि जिस दिन जिस तिथि में सूर्योदय होता है। उसी दिन जन्माष्टमी मानना चाहिए। मतलब सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि 1 मिनट के लिए भी आता हो तो उसी दिन जन्माष्टमी मानना चाहिए। वही कल सूर्योदय अष्टमी तिथि में नहीं हुआ था। कल रात में अष्टमी तिथि आया था, जबकि आज सूर्योदय अष्टमी तिथि में हुआ है। इसीलिए आज जन्माष्टमी मानना चाहिए। जब भी जन्माष्टमी मनाया जाए उसे समय इन सभी बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए।

वैसे भगवान श्री कृष्ण का जन्म कराना प्राणियों के लिए संभव नहीं है। वैसे कहीं-कहीं कुछ फल इत्यादि में भगवान के स्वरूप को रख दिया जाता है। जब रात के 12:00 बजता है तब वही फल से भगवान को निकाला जाता है। लेकिन हमें सोचना चाहिए कि उन परम ब्रह्म परमेश्वर भगवान श्री कृष्ण का जन्म हम मानव के लिए संभव नहीं है। इसलिए उन परमात्मा भगवान श्री कृष्णा के माध्यम से पूरे संसार का सृष्टि हुआ है। उन श्री कृष्णा के जन्म के उपरांत भगवान के लीला गुण का महोत्सव धूमधाम से मनाना चाहिए।

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