जप करने से मिलता है मानसिक शक्ति : श्री जीयर स्‍वामी जी महाराज

जप करने से मिलता है मानसिक शक्ति : श्री जीयर स्‍वामी जी – परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्‍न जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि भगवान के नाम का जप करने से मानसिक शक्ति प्राप्त होता है। मन पवित्र होता है। मन में जो अलग-अलग प्रकार के हलचल होते हैं, उसको खत्म करने के लिए जप करना चाहिए। जप तीन प्रकार के होते हैं। मानसिक जप, अनुवांशिक जाप एवं वाचिक जप। मानसिक जप में केवल भगवान के नाम मन में ही स्मरण किया जाता है। 

आसन पर बैठकर मन में ही बिना बोले उच्चारण किया जाता हैं। भगवान के मंत्रों, नाम का जप किया जाता है, जिसे मानसिक जप कहते हैं। दूसरा अनुवांशिक जप होता है। जिसमें केवल हमारे ओंठ हिलते हैं। जिसमें भगवान के नाम का उच्चारण मधुर ध्वनि में केवल ओंठ हिलते हो वैसे जप को अनुवांशिक जप कहा जाता है। तीसरा वाचिक जप होता है। जिसमें भगवान के नाम और मंत्र का उच्चारण उच्च ध्वनि में किया जाता है। मतलब बोल करके मंत्रों का उच्चारण करके जप करने को वाचिक जप कहते हैं।

जप करने से मिलता है मानसिक शक्ति 

शास्त्रों में बताया गया है कि हर व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद गुरु मंत्रों का जप करना चाहिए। जिसमें सामान्य तौर पर कम से कम एक माला का जाप करना चाहिए। एक माला का मतलब भगवान के नाम, मंत्र या गुरु के द्वारा दिए गए मंत्रों का 108 बार जप करना चाहिए।

mantra hi man ko kabu karne ka bada madhyam

जप करने से विशेष लाभ

एक माला जप जरूर नियमित रूप से करना चाहिए। लेकिन समय हो हो तब कम से कम दो माला का भी जप जरूर करना चाहिए। वैसे जप करने का तो अधिक से अधिक विधान है। लेकिन दो माला जप नियमित रूप से अगर किया जाता है, तो उसका विशेष महत्व बताया गया है। दो माला जप करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। यदि गुरु मंत्र को नियमित रूप से प्रतिदिन पांच माला जप किया जाता है, तो विशेष फल प्राप्त होता है। 

जैसे किसी भी प्रकार के मन में कोई कामना है, तो संकल्प के साथ नियमित रूप से प्रतिदिन पांच माला का जप करना चाहिए। जप करने वाले व्यक्ति को कभी भी बीच में अपना जप बंद नहीं करना चाहिए। यदि आप किसी भी प्रकार का पूजा पाठ संकल्प लेकर के कर रहे हैं, तो बीच में यदि सूतक या किसी भी प्रकार का व्यवधान भी आता है, तब भी अपने संकल्प, पूजा, पाठ को बंद नहीं करना चाहिए। 

पूजा अनुष्ठान में सूतक लगने पर क्‍या करें

जैसे कोई यज्ञ किया जा रहा हो बीच में घर में या पड़ोस में कोई व्यक्ति गुजर जाता हैं, तब भी जिस व्यक्ति ने पूजा के लिए संकल्प किया है, वह अपना पूजा जारी रखेंगे। जब उनका पूजा अनुष्ठान पूरा हो जाएगा, तब वह उस सूतक में शामिल होंगे। जो व्यक्ति पूजा कर रहे हैं, उन्हें नियम के अनुसार जैसे वह पहले पूजा करते आ रहे थे, उसी प्रकार से सूतक लगने के बाद भी वह करेंगे।

लेकिन जो व्यक्ति अनुष्ठान में रहेंगे, वह सूतक के कामों में शामिल नहीं होंगे। उन्हें अपना दिनचर्या अलग रखना होगा। जब उनका अनुष्ठान पूरा हो जाएगा, तब वह सूतक के कार्यों में शामिल होंगे। श्रीमद् भागवत कथा अंतर्गत स्वामी जी ने कहा कि राजा परीक्षित गंगा के पावन तट पर शुकदेव जी से पूछते हैं कि महर्षि जिनका मृत्यु निश्चित हो गया हो, उन्हें योग साधना किस प्रकार से करना चाहिए। वहीं शुकदेव जी कहते हैं, कि योग करने के लिए सात चीजों पर विजय प्राप्त करना पड़ता है। जिसमें आसन, मन, आहार, व्यवहार, संगत इत्यादि को बताया गया हैं। जिसकी चर्चा विस्तार से आगे की जाएगी।

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