स्थान और मिट्टी से व्यक्ति के विचार में बदलाव संभव: जीयर स्वामी जी महाराज 

सूर्यपुरा प्रखंड के अगरेड़ गांव में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्‍न जीयर स्वामी जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि स्थान और मिट्टी का भी बहुत विशेष प्रभाव होता है। भगवान श्री राम जब अयोध्या से वनवास के लिए निकले थे उस समय उनके साथ लक्ष्मण जी भी 14 वर्षों की वनवास की यात्रा पर थे। अयोध्या से निकालने के बाद श्री राम जी, लक्ष्मण जी और सीता जी ने जहां पर रात्रि विश्राम किया उस स्थान पर शयन करने के बाद लक्ष्मण जी के मन में पूरे रात श्री राम के प्रति गलत भावनाएं आ रही थी। लक्ष्मण जी के मन में विचार चल रहा था भैया श्री राम को वनवास हुआ है उनकी पत्नी उनके साथ है, लेकिन मुझे तो वनवास नहीं दिया गया है फिर हम क्यों इस वन की यात्रा में हैं मेरी पत्नी मेरे साथ नहीं है। इस प्रकार के तरह-तरह के भावनाएं लक्ष्मण जी के मन को व्यथित कर रही थी। 

सुबह में श्री राम ने कहा लक्ष्मण आगे की यात्रा शुरू किया जाए। वहीं राम जी ने लक्ष्मण जी से कहा कि यहां का मिट्टी थोड़ा सा अपने पास साथ में लेकर चलो। लक्ष्मण जी रास्ते में भी चल रहे थे तब भी उनके मन में गलत भावनाएं ही आ रही थी। लक्ष्मण जी को अब रहा नहीं गया और उन्होंने इस बात को श्री राम से कहा भैया मेरा मन बहुत विचलित हो रहा है। गलत प्रकार के चीजें हमारे दिमाग पर हावी हो रहा है। वहीं श्री राम जी ने कहा लक्ष्मण जो तुम मिट्टी अपने साथ में लेकर चल रहे हो उसको फेंक दो। जैसे ही लक्ष्मण जी ने मिट्टी को अपने पास से वहीं पर फेंक दिया उसके बाद से ही लक्ष्मण जी के विचार और मन पूरी तरीके से पवित्र हो गए। 

जो उनके अंदर दुर्भावनाएं उत्पन्न हो रही थी वह सभी समाप्त हो गया। तब श्री राम ने लक्ष्मण जी से कहा लक्ष्मण जहां पर हम लोग रात्रि विश्राम किए थे वह स्थान अच्छा नहीं था। वहां पर एक समय सूंड और उपसूंड नाम के राक्षस रहते थे। जिनके द्वारा बहुत उपद्रव किया गया था। जिसके कारण वहां का स्थान पवित्र नहीं था। इसीलिए तुम्हारे मन के अंदर इस प्रकार की गलत भावनाएं आ रही थी। इसलिए हम सभी के जीवन में भी कभी-कभी ऐसी भावनाएं आने लगती है तब हमें अपने स्थान जगह और मिट्टी पर भी विचार करना चाहिए। 

जहां पर हम लोग घर बनाते हैं जहां हमारा निवास स्थान होता है वह पूरी तरीके से पवित्र होना चाहिए। जिससे हमारे मन बुद्धि में सकारात्मक विचार भरे रहते हैं। वहीं हम वैसे स्थान या मिट्टी पर रहते हैं जहां पर पहले कुछ वहां पर गलत प्रकार की घटनाएं घटी हो या वहां पर कोई वैसा गलत काम हुआ हो वह स्थान अपवित्र होता है जहां पर विश्राम करने से सोने से भी मन में गलत धारणाएं उत्पन्न होती है। वही स्वामी जी ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भगवान श्री राम राजतंत्र में रहते थे। जहां पर राजा का ही आज्ञा सर्वोपरि होता था। फिर भी भगवान श्री राम ने प्रजातंत्र को प्रभावी बनाया। 

दो बार श्री राम ने प्रजातंत्र की बातों को स्वीकार किया था। एक बार जब कैकई और मंथरा ने वनवास जाने के लिए कहा उस समय भी अयोध्या के राजा दशरथ की आज्ञा नहीं थी पूरी प्रजा भगवान श्री राम के वनवास के विरोध कर रही थी फिर भी केवल दो लोगों के कहने से ही भगवान श्री राम ने 14 वर्षों का बनवास जाने का फैसला किया था। आज तो लोकतंत्र में अगर कोई एक व्यक्ति वार्ड से भी जीत जाता है तो वह चाहता है कि आने वाली मेरी 10 पीढ़ी अब मेरे ही घर के परिवार के लोग राज करें। आज लोकतंत्र में भी राजतंत्र जैसा सोच रखा जा रहा है। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। लोकतंत्र में प्रजातंत्र में देश की जनता मालिक होती है। इसीलिए सबका बराबर अधिकार होता है। 

हमें भगवान श्री राम से शिक्षा लेनी चाहिए जो राजतंत्र में जन्म लिए थे। लेकिन उन्होंने प्रजातंत्र की बातों को सुनकर उनकी बातों को स्वीकार कर राजतंत्र में भी प्रजातंत्र जैसी व्यवस्था स्वीकार किया था। यह हम सभी के लिए एक मार्गदर्शन है। जिससे हमें समाज लोकतंत्र संस्कृति की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का आदर्श स्थापित करता है।

Leave a Comment