कल बिहार कैबिनेट द्वारा बिहार में 30 बड़े प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई, जिसमें बिहार में होने वाले पंचायत चुनाव से पहले नए तरीके से परिसीमन करने की भी अनुमति दी गई है। बिहार में पंचायत चुनाव वर्ष 2026 में होने वाला है। उससे पहले कैबिनेट की ओर से बड़ी जानकारी सामने आई है, जिसके अनुसार अब बिहार की लगभग 8,053 पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन किया जाएगा तथा पंचायतों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
वर्ष 1991 में बिहार पंचायतों का पिछला परिसीमन हुआ था, जिसे वर्ष 1994 में लागू किया गया था। वर्ष 2011 में भारत सरकार द्वारा पूरे देश में जनगणना कराई गई थी। अब बिहार पंचायत चुनाव से पहले वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों का परिसीमन किया जाएगा। जनगणना 2011 के अनुसार बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों की कुल आबादी लगभग 8 करोड़ 80 लाख है।
वर्तमान में बिहार में 8,053 पंचायतें हैं, जिनमें लगभग डेढ़ गुना बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके बाद लगभग 12,500 पंचायतों की संख्या हो सकती है। वहीं बिहार में जिला परिषद की वर्तमान कुल सीटों की संख्या 1,160 है, जो नए परिसीमन (डिलिमिटेशन) के बाद 1,760 होने की संभावना है।
पंचायत परिसीमन में एक पंचायत के लिए लगभग 7,000 की आबादी होनी चाहिए। इसी आधार पर एक पंचायत का गठन होगा। वहीं बिहार में वर्तमान में वार्डों की संख्या लगभग 1,19,000 है, जो परिसीमन के बाद डेढ़ गुना बढ़ जाएगी। इसके बाद बिहार में वार्डों की संख्या लगभग 1,75,000 हो जाएगी। एक वार्ड के गठन के लिए लगभग 500 की आबादी होनी चाहिए। वहीं जिला परिषद क्षेत्र के गठन के लिए लगभग 50,000 की आबादी निर्धारित होनी चाहिए।
इस बार के पंचायत चुनाव में आरक्षण का चक्र भी बदल जाएगा। जिन सीटों पर पहले से आरक्षण लागू था, वे सीटें सामान्य हो सकती हैं। वहीं बिहार में पंचायत चुनाव में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू है। आने वाले पंचायत चुनाव में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की अधिक भागीदारी भी देखने को मिलेगी। बिहार पंचायत चुनाव में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। वहीं अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए भी 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू है। इस बार के चुनाव में पहले आरक्षित रही कई सीटें सामान्य होने से सभी वर्गों के लोगों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलने की संभावना है।
बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के अनुसार, बिहार में पंचायत चुनाव तय समय पर कराने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, चुनाव आयोग द्वारा परिसीमन की प्रक्रिया भी पूरी की जानी है। इसलिए संभावना जताई जा रही है कि यदि परिसीमन में अधिक समय लगता है, तो चुनाव तय समय पर न होकर आगे भी बढ़ सकता है। पहले पंचायत चुनाव सितंबर, अक्टूबर या नवंबर के आसपास होने की संभावना थी, लेकिन यदि परिसीमन में अधिक समय लगता है, तो इस बार पंचायत चुनाव वर्ष 2027 में भी हो सकता है।

रवि शंकर तिवारी एक आईटी प्रोफेशनल हैं। जिन्होंने अपनी शिक्षा इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी स्ट्रीम से प्राप्त किए हैं। रवि शंकर तिवारी ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी लखनऊ से एमबीए की डिग्री प्राप्त किया हैं।