सोमवार, *20 जुलाई 2026* को बिहार विधानसभा में *बिहार भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक* एवं *जमीन रजिस्ट्री संशोधन विधेयक* की प्रतियां सदस्यों के बीच वितरित की गईं।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, अब बिहार में *दाखिल-खारिज (Mutation)* कराने के लिए सभी आवेदकों को *₹200 का शुल्क* देना होगा। वर्तमान में दाखिल-खारिज के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। हालांकि, यह व्यवस्था विधेयक पारित होने और सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ही लागू होगी।
वहीं, जमीन रजिस्ट्री से संबंधित प्रस्तावित संशोधन के अनुसार अब किसी भी जमीन की रजिस्ट्री *मार्केट वैल्यू (बाजार मूल्य)* के आधार पर की जाएगी। यदि किसी जमीन की रजिस्ट्री बाजार मूल्य से कम मूल्य दर्शाकर कराई जाती है, तो जमीन बेचने वाले और खरीदने वाले, दोनों पर *कम दर्शाई गई राशि के बराबर (100 प्रतिशत) जुर्माना* लगाया जा सकेगा। साथ ही, यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित *निबंधन पदाधिकारी* के विरुद्ध भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, मकान, फ्लैट अथवा अन्य संपत्तियों की रजिस्ट्री से पहले निबंधन कार्यालय के संबंधित पदाधिकारी संपत्ति के बाजार मूल्य सहित अन्य आवश्यक तथ्यों की जांच करेंगे। जांच के बाद ही रजिस्ट्री की स्वीकृति दी जाएगी। यदि किसी संपत्ति की रजिस्ट्री में बाजार मूल्य से कम मूल्य दर्शाए जाने की आशंका होती है, तो निबंधन कार्यालय के अधिकारी इसकी सूचना *समाहर्ता (जिलाधिकारी)* तथा निबंधन विभाग के संबंधित उच्च अधिकारियों को देंगे।
इसी प्रकार, सोमवार को बिहार विधानसभा में *बिहार दुकान एवं प्रतिष्ठान (शॉप एक्ट) संशोधन प्रस्ताव* भी प्रस्तुत किया गया। प्रस्ताव के अनुसार, गांव या शहर में स्थित ऐसे प्रतिष्ठान, जहां *10 से कम कर्मचारी कार्यरत होंगे, उन्हें निबंधन (पंजीकरण) कराने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं, जिन दुकानों, प्रतिष्ठानों या मॉल में **10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत होंगे*, उनके लिए निबंधन कराना अनिवार्य होगा।
बिहार सरकार का उद्देश्य जमीन रजिस्ट्री से होने वाले *स्टांप शुल्क एवं राजस्व संग्रह* को अधिक प्रभावी बनाना है। इसके साथ ही, राज्य में व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का भी प्रस्ताव रखा गया है। प्रस्ताव के अनुसार, इस समिति के अध्यक्ष *बिहार के मुख्य सचिव* होंगे। समिति में *अपर मुख्य सचिव, सचिव तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी* भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य बिहार में निवेश से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाना तथा सभी आवश्यक औपचारिकताओं का समयबद्ध और प्रभावी निष्पादन सुनिश्चित करना है।

रवि शंकर तिवारी एक आईटी प्रोफेशनल हैं। जिन्होंने अपनी शिक्षा इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी स्ट्रीम से प्राप्त किए हैं। रवि शंकर तिवारी ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी लखनऊ से एमबीए की डिग्री प्राप्त किया हैं।