बांकीपुर विधानसभा उप चुनाव अहंकार जनता को स्वीकार नहीं

बांकीपुर, बिहार से एक नई शुरुआत का बिगुल बज चुका है। लोकतंत्र में झूठ और फरेब अधिक समय तक नहीं चलता। समय सबसे बड़ा बलवान होता है और अंततः वही हर चीज़ का न्याय करता है। झूठ की बुनियाद पर खड़ा किया गया महल एक दिन अवश्य ढहता है, चाहे वह किसी का भी क्यों न हो।

अब समय बदल रहा है। भारत की युवा पीढ़ी दिखावे, झूठे वादों और खोखले भाषणों से आगे बढ़कर विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुशासन चाहती है। लोकतंत्र में जनता का संदेश स्पष्ट है—जो काम करेगा, वही सरकार में रहेगा। जो जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरेगा, उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं होगा। इसलिए वोट किसी पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि उसके कार्यों, नीतियों और जनहित के आधार पर दिया जाना चाहिए।

आज जिस प्रकार लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल उठ रहे हैं और चुनावी माहौल में मतदाताओं को प्रभावित या डराने की बातें सामने आती हैं, वह चिंताजनक है। जनता सब कुछ देखती और समझती है। केवल धनबल, बाहुबल, पद या प्रतिष्ठा के बल पर लोकतंत्र नहीं जीता जा सकता। अंतिम निर्णय जनता जनार्दन के हाथ में होता है।

सत्ता स्थायी नहीं होती। कुर्सी किसी की निजी जागीर नहीं है। समय बदलता है, लोग बदलते हैं, परिस्थितियाँ बदलती हैं और सत्ता भी बदलती है। इतिहास गवाह है कि जिस नेता या दल में अहंकार आता है, वहीं से उसकी चुनौती शुरू हो जाती है। परिवर्तन एक दिन में नहीं आता, लेकिन छोटी-छोटी घटनाएँ बड़े बदलावों की भूमिका तैयार करती हैं।

यदि बांकीपुर से परिवर्तन की कोई सकारात्मक शुरुआत हुई है, तो उसकी गूंज आने वाले समय में पूरे बिहार और देश में सुनाई दे सकती है। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है, और वही अंततः भविष्य तय करती है।बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर का जितना तय और बीजेपी की करारी हार तय है।

रविशंकर तिवारी

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