बिहार के पूर्णिया से अंतरजातीय विवाह का एक मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ब्राह्मण समाज की एक लड़की रिया ने अपने ही गांव के पासवान समाज के एक लड़के के साथ शादी की है। इसके बाद से बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश में अंतरजातीय विवाह की यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।
बताया जा रहा है कि 18 वर्ष की लड़की और 24 वर्ष के लड़के ने अपनी इच्छा से कोर्ट मैरिज की है। यह विवाह इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि लड़का और लड़की के घर के बीच की दूरी बहुत कम है। बताया जा रहा है कि दोनों के घर लगभग 100 मीटर की दूरी पर हैं।
पूर्णिया जिले के एक गांव की यह घटना समाज में लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं पैदा कर रही है।
भारत में 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुकी महिला वयस्क होती है और कानून के अनुसार उसे अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है। इसी तरह वयस्क पुरुष भी अपने वैधानिक अधिकारों के तहत अपने जीवन का फैसला लेने के लिए स्वतंत्र होता है। विवाह के मामले में जाति और धर्म से अलग, वयस्क व्यक्ति की अपनी पसंद और सहमति का भी कानूनी महत्व है।
लेकिन इस पूरे मामले में एक दूसरा पहलू भी है, जिस पर समाज को विचार करने की जरूरत है।
जिस बच्चे को जन्म देने के बाद माता-पिता वर्षों तक उसकी देखभाल करते हैं, उसके भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की व्यवस्था करते हैं, उसे अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए पूरी जिंदगी मेहनत करते हैं जब वही बेटा या बेटी बड़ा होकर माता-पिता की इच्छा के विपरीत कोई फैसला लेता है, तो उस समय माता-पिता के ऊपर क्या गुजरती है, यह वही माता-पिता महसूस कर सकते हैं।
यहां सवाल केवल जाति या समाज का नहीं है। सवाल माता-पिता और उनकी भावनाओं का भी है।
18 वर्ष की उम्र जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस उम्र में व्यक्ति कानूनी रूप से वयस्क हो जाता है, लेकिन जीवन की सभी परिस्थितियों और भविष्य की जिम्मेदारियों का अनुभव हर व्यक्ति को एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। विवाह केवल प्यार और भावनाओं का विषय नहीं है। इसके साथ जीवन की जिम्मेदारियां, आर्थिक स्थिति, परिवार, आपसी समझ और भविष्य की अनेक परिस्थितियां भी जुड़ी होती हैं।
कहा जाता है कि समय के साथ जीवन की वास्तविक जिम्मेदारियां सामने आती हैं। इसलिए किसी भी बड़े फैसले को लेने से पहले उसके भविष्य के प्रभावों पर विचार करना जरूरी है।
इस घटना में एक और बात सामने आ रही है कि लड़की के परिवार वालों ने कथित रूप से उसका अंतिम संस्कार करके उसे मृत घोषित कर दिया है, जबकि लड़की सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। अगर यह जानकारी सही है, तो यह स्थिति अपने आप में बेहद गंभीर और भावनात्मक है।
एक माता-पिता ने जिस बच्चे को जन्म दिया, वर्षों तक उसकी परवरिश की और उसके भविष्य के लिए सपने देखे, उसके साथ ऐसा भावनात्मक टकराव हो जाए तो माता-पिता के मन में कितनी पीड़ा और आक्रोश पैदा हो सकता है, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं है।
लेकिन आज इस घटना को केवल लड़का बनाम लड़की, या एक जाति बनाम दूसरी जाति के रूप में देखने की जरूरत नहीं है।
समाज में अलग-अलग जातियों, समुदायों और धर्मों के लोग रहते हैं। हर परिवार की अपनी भावनाएं और अपनी सामाजिक परिस्थितियां होती हैं। आज किसी दूसरे परिवार में जो घटना हुई है, कल वैसी परिस्थिति किसी भी परिवार के सामने आ सकती है।
इसलिए इस पूरे मामले को इंसानियत और परिवार की भावनाओं के नजरिए से देखने की जरूरत है।
हर किसी के घर में बेटी होती है। हर किसी के घर में बेटा होता है। एक बेटी की शादी दूसरे घर में होती है और एक बेटे की शादी दूसरे परिवार की बेटी से होती है। इसलिए ऐसे मामलों में केवल अपने पक्ष को सही और दूसरे पक्ष को गलत मानकर देखने के बजाय, दोनों परिवारों की भावनाओं और परिस्थितियों को समझना जरूरी है।
विवाह दो व्यक्तियों का फैसला जरूर है, लेकिन उसका प्रभाव दो परिवारों और कई बार पूरे सामाजिक संबंधों पर पड़ता है।
वयस्क लड़के और लड़की को अपने जीवन के फैसले लेने का कानूनी अधिकार है, लेकिन माता-पिता की भावनाओं और उनके वर्षों के त्याग का सम्मान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
जाति और धर्म से ऊपर इंसानियत होनी चाहिए। लड़का किसी भी जाति का हो या लड़की किसी भी समाज की हो—हर व्यक्ति के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। साथ ही माता-पिता के सम्मान और भावनाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
आज जरूरत किसी एक पक्ष को दोषी ठहराने की नहीं, बल्कि समाज में इस बात पर विचार करने की है कि आधुनिक समय में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, विवाह की पसंद, माता-पिता की भावनाएं और सामाजिक जिम्मेदारी इन सभी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
क्योंकि यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं है। यह सवाल किसी भी परिवार के सामने कभी भी खड़ा हो सकता है।
इसलिए जाति और धर्म को किनारे रखकर, हमें इस पूरे मामले को इंसानियत, परिवार और आपसी सम्मान के नजरिए से देखने की जरूरत है।

रवि शंकर तिवारी एक आईटी प्रोफेशनल हैं। जिन्होंने अपनी शिक्षा इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी स्ट्रीम से प्राप्त किए हैं। रवि शंकर तिवारी ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी लखनऊ से एमबीए की डिग्री प्राप्त किया हैं।