आजकल कुछ लोग अपने को ज्ञानी समझने वाले ब्राह्मण, पंडित और धर्म पर ज्ञान दे रहे हैं धर्म पूजा, पाठ, ब्राह्मण रोजगार बना दिए हैं उन लोगों के लिए बड़ा संदेश है। यह मानव शरीर पांच तत्वों से मिलकर के बना है अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश इन पांच तत्वों को तो मानना ही पड़ेगा क्योंकि यह हर व्यक्ति की आंखों के सामने दिखाई पड़ता है जिस शरीर से इस प्रकार की गलत ज्ञान दिया जा रहा है वही शरीर इस पांच तत्वों के आधार पर खड़ा है। अब इन पांच तत्वों को ही हम ईश्वर मान लें तो इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए। बहुत सारे तार्किक लोग गलत प्रकार के लोगों को ज्ञान बांट करके भ्रमित करते हैं। तुम पृथ्वी को मानते हो, अग्नि को मानते हो, जल को मानते हो, हवा को मानते हो, आकाश को मानते हो इतना मानो बाकी चीज मत मानो।
लेकिन इन सभी चीजों को भी अगर मानते हो तो यही साक्षात तुम्हारे सामने ईश्वर है। अब दूसरा उदाहरण समझ लो दिन और रात, दिन में तुम्हें सूर्य दिखाई पड़ते हैं, रात में चंद्रमा दिखाई पड़ते हैं अब हम एक साधारण इंसान से पूछना चाहते हैं क्या तुम सूर्य को अपने बस में कर सकते हो क्या तुम चंद्रमा को अपने वश में कर सकते हो नहीं कर सकते तो फिर तुम एक साधारण इंसान उस सूर्य और चंद्रमा को चुनौती मत दो अगर ज्ञान नहीं है तो ज्ञान प्राप्त करो यह साक्षात सूर्य और चंद्रमा हमें ज्ञान या शिक्षा देते हैं कि हम मनुष्यों से बड़ा भी इस दुनिया में कोई न कोई शक्ति है।
वह शक्ति पृथ्वी, आकाश, वायु, जल, अग्नि है जिसके आधार पर इस प्रकृति का संचालन होता है और इस प्रकृति को भी चलाने वाला कोई न कोई है जिसको हम लोग सत्य के नाम से जानते हैं जब व्यक्ति के ऊपर किसी भी प्रकार की कोई समस्या आती है उस समय उसे दो ही चीज दिखाई पड़ता है पहले डॉक्टर और दूसरा वैसी कोई चमत्कारी शक्ति जिससे उसकी समस्या को ठीक कर दिया जाए लेकिन हम चमत्कारी शक्ति को थोड़ी देर के लिए अलग करते हैं यह शक्तियां जो होती है कहीं दूसरे जगह पर नहीं इंसानों के अंदर ही होती है
अब तुम फिर यहां पर घूम फिर करके आते हो कि पंडित जी कहते हैं डॉक्टर के पास क्यों जाते हो क्योंकि डॉक्टर इलाज करते हैं दवा लिखते हैं कभी-कभी ऐसा होता है कि दिया हुआ दवा भी रोगी पर असर नहीं करता है और रोगी दुनिया से निकल जाते हैं क्या तुम डॉक्टर के पास जाना छोड़ देते हो कभी तुमको फीवर होता है या शरीर में किसी भी प्रकार की बीमारी हो जाती है तो डॉक्टर के पास जाते हैं नहीं जाना चाहिए क्योंकि कभी-कभी अधिक संख्या में लोगों की मृत्यु भी हो जाती है डॉक्टर के पास जाने के बाद भी दवा देने के बाद भी कई रोग ऐसे होते हैं जो ठीक नहीं होते हैं।
अब दुनिया में यह पांच तत्व और चंद्रमा सूर्य की जो हम बात किए इससे अगर तुम अलग भी जाओगे तो एक दुनिया का संचालन करने का सबसे महत्वपूर्ण शब्द है जिसको सत्य के नाम से जाना जाता है। अब तुम बोलोगे कि यह सत्य क्या होता है तो सत्य शब्द जो सही है उसको सत्य कहा जाता है सही क्या है जन्म और मृत्यु सत्य है इसको झूठलाया नहीं जा सकता है अब एक सवाल थोड़ा कड़वा है लेकिन मुझे पूछना पड़ रहा है इस दुनिया का संचालन किस प्रकार से होता है पृथ्वी पर जितने भी लोग जन्म लेते हैं उनका मृत्यु भी सत्य है अब यह तार्किक लोग जो गलत प्रकार के बातों को तोड़ मरोड़ कर पेश करते हैं उन्हें तो अपने आप पर भी कुछ आशंकाएं हो सकती है क्योंकि दुनिया में जब तक कुछ भी चीज माना नहीं जाए तब तक संभव नहीं है हर चीज में हमें मनाना पड़ता है
एक मैथ के सवाल को भी सॉल्व करने के लिए मान लीजिए शब्द प्रयोग करना पड़ता है क्योंकि हर चीज सामने दिखाई नहीं पड़ता कुछ ऐसी चीज होती हैं जो देखी नहीं जा सकती है लेकिन उसका वास्तविकता से 100% लगाव होता है जिस प्रकार से बच्चे और बच्चियों का जन्म सत्य के आधार पर माना जाता है माता और पिता का संबंध सत्य के आधार पर निश्चित किया जाता है उसी प्रकार से इस दुनिया का संचालन करने वाला ईश्वरीय शक्ति भी हमें समझना पड़ता है उसके लिए अपने ज्ञान को बढ़ाना चाहिए क्योंकि इस दुनिया को चलाने वाला कोई न कोई एक शक्ति है जिससे यह पूरी दुनिया संचालित होती है।
उसे ही हम अपना आराध्य मानते हैं उसे ही हम अपना ईश्वर मानते हैं अगर तुम नहीं मानते हो तो तुम कुछ विचित्र प्राणी हो लेकिन समय-समय से इस दुनिया का कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो कह सकता है कि हम किसी चीज को नहीं मानते हैं आज हो सकता है तुम नहीं मान सकते हो लेकिन तुम्हारा समय तुम्हें हर चीज मानने पर विवश करेगा बस समय को थोड़ा समय दो समय से सब चीज समय पर समझ में आ जाएगा।
अंत में एक बात हम कहना चाहेंगे कुछ ऐसी चीज हैं जो अंधविश्वास है जो कुछ गिने-चुने लोगों ने समाज के सामने गलत तरीके से रखा है उसके पक्षधर कोई नहीं होता जैसे कहा जाता है न कि व्यक्ति बड़ा नहीं होता है उसका व्यक्तित्व बड़ा होता है जाति बड़ा नहीं होता बल्कि उसका कर्म बड़ा होता है इसीलिए अच्छे कर्म की जाती हैं। जिसका कर्म अच्छा है जिसका गुण अच्छा है जिसका ज्ञान अच्छा है जिसका मार्गदर्शन अच्छा है उसकी जाति सबसे ऊंची जाति है चाहे वह ब्राह्मण हो क्षत्रिय या किसी भी जाति से आता हो।
क्योंकि भगवान विष्णु का अवतार इस पृथ्वी पर अनेकों बार हुआ जिसमें उन्होंने जाति देखकर अपना जन्म निश्चित नहीं किया था बल्कि भगवान विष्णु ने कर्म के आधार पर अपने माता-पिता का चयन किया था इसलिए कर्म बड़ा है समाज में नफरत फैलाने और बांटने की जो लत लग गई है यह समाज को गलत रास्ते पर लेकर जाएगी इसीलिए अच्छे विचार, अच्छे आचरण, अच्छे गुण का संदेश देना चाहिए जिससे पूरा समाज सही रास्ते पर चले क्योंकि एक भी व्यक्ति अगर गलत रास्ते पर भटक गया तो समाज गलत रास्ते पर चल सकता है जिसका प्रभाव पूरी सृष्टि पर पड़ता है।

रवि शंकर तिवारी एक आईटी प्रोफेशनल हैं। जिन्होंने अपनी शिक्षा इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी स्ट्रीम से प्राप्त किए हैं। रवि शंकर तिवारी ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी लखनऊ से एमबीए की डिग्री प्राप्त किया हैं।