बिहार रोहतास दावथ में जमाबंदी सुधार का गजब खेल : कर्मचारी और सीओ का रिपोर्ट

दावथ अंचल से एक अजीब मामला सामने आया हैं पूरी रिपोर्ट ध्‍यान से पढि़ए किस तरह से लोगों को परेशान किया जा रहा हैं। बिहार रोहतास : दावथ अंचल में 22 जनवरी 2026 को परिमार्जन के लिए एक आवेदन दिया जिसमें रमन कुमार तिवारी उर्फ रवि शंकर तिवारी नाम दर्ज है जिसमें सुधार करके रवि शंकर तिवारी करने के लिए आवेदन दिया। 22 जनवरी को आवेदन किया गया जिसके बाद 23 जनवरी को कर्मचारी का रिपोर्ट अपडेट हुआ जिसमें लिखा गया कि मूल पंजी 2 एवं संलग्न दस्तावेज के अनुसार उक्त जमाबंदी में रैयत का नाम सुधार किया जा सकता है। जिसके बाद आवेदन कई दिनों तक लंबित रहा।

12 मई 2026 को अंचलाधिकारी का रिपोर्ट अपडेट होता है जिसमें उनके द्वारा लिखी गई बातें इस प्रकार है :- मूल पंजी के अनुसार आवेदन नहीं किया गया है आवेदक द्वारा जमाबंदी रैयत के नाम को “RAVI SHANKAR TIWARI” करने हेतु आवेदन किया गया है जो मूल पंजी के अनुसार नहीं है। ससमय निष्पादन हेतु पर्याप्त साक्ष्य सलंग्नित करते हुए/ आवेदन में वांछित सुधार करने हेतु पुन: आवेदित करें। जिसके बाद आवेदन वापस कर दिया गया। फिर हमने अंचलाधिकारी को फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

अब जबकि आवेदन वापस करने के बाद स्पष्ट कारण नहीं बताया गया था कि कौन सा डॉक्यूमेंट लगाना है, कैसे सुधार किया जाएगा, क्या प्रक्रिया होगी। जिसके कारण फिर से हमने इस आवेदन को फॉरवर्ड कर दिया।  जिसके बाद फिर से 15 मई 2026 को कर्मचारी के द्वारा वही रिपोर्ट दी गई जिसमें उन्होंने लिखा की मूल पंजी दो एवं संलग्‍न दस्तावेज के अनुसार उक्‍त जमाबंदी में रैयत का नाम सुधार किया जा सकता है। जिसके बाद 18 मई 2026 को फिर से अंचलाधिकारी ने अपनी सूचना को अपडेट किया जिसमें उन्होंने लिखा मूल पंजी के अनुसार आवेदन नहीं किया गया है। आवेदक द्वारा जमाबंदी रैयत के नाम को “RAVI SHANKAR TIWARI” करने हेतु आवेदन किया गया है जो मूल पंजी के अनुसार नहीं है।

मूल पंजी में RAMAN KUMAR TIWARI उर्फ RAVI SHANKAR TIWARI हैं। ससमय निष्पादन हेतु पर्याप्त साक्ष्‍य संलग्नित करते हुए पुन: आवेदित करें। फिर से साक्ष्‍य लगाकर के आवेदन करने की बात उन्होंने कही है मुझे समझ में नहीं आया कि कौन सा साक्ष्य लगाना है कैसे क्या होगा फिर से हमने अंचलाधिकारी महोदय को फोन किया उनसे पूछा कि साहब कौन सा डॉक्यूमेंट लगाना है कैसे सुधार किया जाएगा तब उन्होंने साफ-साफ कहा कि आपका सुधार अंचल कार्यालय से नहीं होगा आपको एडीएम कार्यालय जाना होगा वहां से अप्रूवल लेना होगा। तभी आपका जमाबंदी में नाम का सुधार होगा।

यह बातें उन्होंने फोन पर कहा लेकिन जमाबंदी सुधार के लिए जो आवेदन उन्होंने डिस्पोज्ड किया है उसमें उन्होंने यह बातें नहीं लिखी है। अब दोनों जगह कंफ्यूजन क्रिएट होता है। आखिर जब आपने साफ-साफ आवेदन डिस्पोज्ड करते हुए बातें लिखा कि साक्ष्‍य संलग्‍न करते हुए फिर से आवेदन करें तो अब किस आधार पर कहा आवेदन करने के लिए जब आप फोन पर कह रहे हैं कि नहीं आवेदन आपको एडीएम कार्यालय में करना हाेगा वहीं दूसरा सबसे बड़ा सवाल यहां पर एक और खड़ा होता है कि जब कर्मचारी रिपोर्ट पॉजिटिव देते हैं दो बार उन्होंने सही रिपोर्ट दिया है उसके बाद अंचलाधिकारी का रिस्पांस नेगेटिव क्यों आता है। अब या तो यहां पर कर्मचारी सही तरीके से प्रशिक्षित नहीं किए गए हैं जिसके कारण उन्होंने पॉजिटिव रिपोर्ट दे दिया या फिर अंचलाधिकारी जानबूझकर आवेदन को अस्वीकृत कर रहे हैं।

साथ ही वे ऑनलाइन रिपोर्ट में अपना सुझाव दोबारा आवेदन पर्याप्त साक्ष्य के अनुसार करने की सलाह देते हैं। फोन पर एडीएम कार्यालय जाने की सलाह देते हैं अब ऐसी स्थिति में मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि आगे मुझे अपने जमाबंदी में सुधार करने के लिए क्या करना चाहिए। हम बिहार भूमि राजस्व विभाग से भी निवेदन करेंगे कि ऐसे मामले में लोगों को उचित मार्गदर्शन दिया जाए। बिहार में ऐसे लाखों लोग हैं जो इस प्रकार की परेशानी झेल रहे हैं उन्हें स्पष्ट नहीं बताया जा रहा है कि आखिर उन्हें करना क्या है कैसे जमाबंदी में सुधार किया जाए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। बिहार में हर दिन जमाबंदी परिमार्जन सुधार के लिए सरकार महा अभियान चलाने को लेकर के लोगों को जागरुक कर रही है वहीं अंचल कार्यालय में जमाबंदी और परिमार्जन जैसे मामले को अस्वीकृत किया जा रहा हैं ऐसी स्थिति में बिहार के एक कम पढ़े-लिखे लोग, गरीब जनता, गांव के बुजुर्ग, गांव की वह महिलाएं जिनके घर में कोई पुरुष नहीं है वह अपने जमीन की त्रुटियों का सुधार कैसे करा पाएंगे।

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