आज देश में आरक्षण और जाति को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। लेकिन भारत के प्रत्येक व्यक्ति को कभी न कभी इस विषय पर एक बात जरूर सोचनी चाहिए कि जब किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होती है या कोई गंभीर बीमारी सामने आती है, तो वह इलाज के लिए किस डॉक्टर के पास जाना चाहता है?
कोई भी मरीज या उसके परिवार के सदस्य यही चाहते हैं कि गंभीर बीमारी होने पर देश का सबसे अच्छा और योग्य डॉक्टर उसका इलाज करे, ताकि मरीज को बेहतर उपचार मिल सके और वह जल्द स्वस्थ हो सके। इस भावना से देश का कोई भी व्यक्ति अपने आपको अलग नहीं कर सकता।
अब सवाल यह है कि देश का सबसे अच्छा डॉक्टर कौन बनेगा? स्वाभाविक रूप से वही व्यक्ति इस क्षेत्र में आगे बढ़ेगा, जिसके पास बेहतर ज्ञान, लगातार सीखने की क्षमता, मेहनत और अपने विषय की गहरी समझ होगी। इसलिए हमें यह भी विचार करना चाहिए कि किसी भी क्षेत्र में प्रतिभा को पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए और योग्यता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
यह बात केवल डॉक्टर बनने तक सीमित नहीं है। यदि भारत को दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल होना है, तो देश को ऐसे लोगों की जरूरत होगी जिनके पास ज्ञान, क्षमता, दूरदृष्टि और अपने क्षेत्र की गहरी समझ हो।
मान लीजिए किसी व्यक्ति को पूरा देश चलाने की जिम्मेदारी दे दी जाए, लेकिन उसे देश की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, सुरक्षा, विदेश नीति, तकनीक, विज्ञान, अपने पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की पर्याप्त जानकारी ही न हो, तो वह देश को सही दिशा में कैसे आगे ले जाएगा?
देश को चलाने वाले व्यक्ति के पास यह समझ होनी चाहिए कि भारत की सीमाओं की सुरक्षा कैसे मजबूत की जाए, अर्थव्यवस्था को कैसे सशक्त बनाया जाए, शिक्षा व्यवस्था को कैसे बेहतर किया जाए, भारतीय विश्वविद्यालयों को दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में कैसे पहुंचाया जाए और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर कैसे बनाया जाए।
आज दुनिया में अमेरिका, चीन, जर्मनी, फ्रांस और दूसरे विकसित देशों के बीच लगातार प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। ऐसे समय में भारत को आगे बढ़ने के लिए अपनी सबसे बड़ी ताकत—अपने लोगों की प्रतिभा और ज्ञान—का पूरा उपयोग करना होगा।
लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि समाज के पिछड़े या आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को पीछे छोड़ दिया जाए। समाज में अभी भी ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें शिक्षा, आर्थिक सहायता और बेहतर अवसरों की आवश्यकता है। ऐसे लोगों को आगे बढ़ाना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
मेरा मानना है कि इसके लिए ऐसे प्रभावी प्रावधान होने चाहिए जिनसे कमजोर वर्ग के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके, उन्हें आर्थिक सहायता मिले, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पर्याप्त संसाधन मिलें और उन्हें अपनी प्रतिभा विकसित करने का पूरा अवसर मिले।
हमें यह भी समझना होगा कि सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोग केवल एक ही जाति में नहीं होते। गरीबी, शिक्षा की कमी और अवसरों का अभाव अलग-अलग समुदायों और वर्गों में देखने को मिलता है। इसलिए वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए नीतियों पर लगातार विचार और सुधार होना चाहिए।
आरक्षण और सामाजिक न्याय का उद्देश्य यदि वास्तव में लोगों को आगे बढ़ाना है, तो उसके साथ यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशिक्षण और योग्यता के मानकों से किसी भी महत्वपूर्ण क्षेत्र में समझौता न हो। खासकर चिकित्सा, इंजीनियरिंग, न्यायपालिका, प्रशासन और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में ऐसे मजबूत प्रशिक्षण और मूल्यांकन की व्यवस्था होनी चाहिए जिससे हर योग्य व्यक्ति को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिले और देश को सर्वोत्तम प्रतिभाएं प्राप्त हों।
किसी व्यक्ति की जाति देखकर उसकी प्रतिभा का निर्णय नहीं किया जा सकता। प्रतिभा किसी भी परिवार, वर्ग या समुदाय में जन्म ले सकती है। इसलिए हमारा लक्ष्य ऐसा भारत होना चाहिए जहां किसी गरीब या वंचित व्यक्ति की प्रतिभा केवल आर्थिक या सामाजिक कमजोरी के कारण दब न जाए और साथ ही किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति के अवसर भी केवल किसी पहचान के कारण अनावश्यक रूप से सीमित न हों।
जरूरतमंद व्यक्ति को मजबूत बनाना है, उसे बेहतर शिक्षा देनी है, उसकी आर्थिक स्थिति सुधारनी है और उसे आगे बढ़ने का अवसर देना है। लेकिन साथ ही देश की प्रगति के लिए प्रतिभा, मेहनत, ज्ञान और योग्यता को भी पूरा सम्मान देना होगा।
भारत तभी तेजी से आगे बढ़ पाएगा, जब सामाजिक न्याय और योग्यता—दोनों के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए जिसमें कमजोर व्यक्ति को अवसर मिले और प्रतिभाशाली व्यक्ति को अपनी पूरी क्षमता दिखाने का अवसर भी मिले।
आखिरकार देश किसी एक जाति, वर्ग या समुदाय से नहीं बनता। देश हम सभी से बनता है। इसलिए हमें ऐसी व्यवस्था के बारे में सोचना होगा जिसमें हर व्यक्ति को सम्मान मिले, जरूरतमंद को सहयोग मिले और प्रतिभा को आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिले। यही एक मजबूत, शिक्षित, आत्मनिर्भर और विश्व में अग्रणी भारत की नींव बन सकती है।

रवि शंकर तिवारी एक आईटी प्रोफेशनल हैं। जिन्होंने अपनी शिक्षा इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी स्ट्रीम से प्राप्त किए हैं। रवि शंकर तिवारी ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी लखनऊ से एमबीए की डिग्री प्राप्त किया हैं।